राजा और महात्मा की कहानी 🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼 ये कहानी एक ऐसे राजा की है, जो की बहुत ही गुस्से वाला था. वो थोड़ी सी बात पर ही बड़ी जल्दी ही नाराज हो जाता था. उसे चापलूसी कतई भी पसंद नहीं थी. तो किस तरह से वो राजा आपने गुनहगारों को सजा देता था, आज हम इस कहानी मैं पढ़ेंगे. एक राजा अशोक को फूलों का शौक था. उसने सुंदर, सुगंधित फूलों के लगभग 100 गमले अपने कमरे के बरामदे मैं रखवा रखे थे. उनकी देखभाल के लिए एक नौकर रखा गया था. जिसका नाम प्रेम था. एक दिन प्रेम से एक गमला टूट गया. राजा को पता चला तो वह आग बबूला हो गया. उसने आदेश दिया कि 3 महीने के बाद नौकर को फांसी दे दी जाए. मंत्री ने राजा को बहुत समझाया, लेकिन राजा ने एक न मानी. फिर राजा ने नगर में घोषणा करवा दी कि जो कोई टूटे हुए गमले की मरम्मत करके उसे ज्यों का त्यों बना देगा, उसे मुंह मांगा पुरस्कार दिया जाएगा. कई लोग अपना भाग्य आजमाने के लिए आए लेकिन असफल रहे. एक दिन एक महात्मा नगर में पधारे. जिनका नाम स्वदेश था. उनके कान तक भी गमले वाली बात पहुंची. वह राज दरबार में गए और बोले, महाराज तेरे टूटे गमले को जोड़ने की जिम्मेदारी मैं लेता हूं. लेकिन मैं तुम्हें समझाना चाहता हूं कि यह देह अमर नहीं तो मिट्टी के गमले कैसे अमर रह सकते हैं. ये तो फूटेंगे, गलेंगे, मिटेंगे. पौधा भी सूखेगा. लेकिन राजा अपनी बात पर अडिग रहा. आखिर राजा उन्हें वहां ले गया, जहां गमले रखे हुए थे. महात्मा ने एक डंडा उठाया और एक एक करके प्रहार करते हुए सभी गमले तोड़ दिए. थोड़ी देर तक तो राजा चकित होकर देखता रहा उसे लगा यह गमले जोड़ने का कोई नया विज्ञान होगा. लेकिन महात्मा को उसी तरह खड़ा देख उसने आश्चर्य से पूछा, ये आपने क्या किया. महात्मा बोले, मैंने 99 आदमियों की जान बचाई है. एक गमला टूटने से एक को फांसी लग रही है. 99 गमले भी किसी न किसी के हाथ से ऐसे ही टूटेंगे तो उन को भी फांसी लगेगी. सो मैंने गमले तोड़कर उन लोगों की जान बचाई है. राजा महात्मा की बात समझ गया. उसने हाथ जोड़कर उनसे क्षमा मांगी और नौकर की फांसी का हुक्म वापस ले लिया. सही बात तो ये है की उस महात्मा ने राजा को ये बात समझायी की उसे कभी भी अपनी चीज़ो का ज्यादा लोभ नहीं करना चाहिए. देह हमेशा समय समय के साथ बदलती ही रहती है. इसका इतना लोभ किस काम का.🌹🌹🌹🌹⛎⛎⛎⛎⛎⛎⛎⛎⛎🌹🌹

राजा और महात्मा की कहानी
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ये कहानी एक ऐसे राजा की है, जो की बहुत ही गुस्से वाला था. वो थोड़ी सी बात पर ही बड़ी जल्दी ही नाराज हो जाता था. उसे चापलूसी कतई भी पसंद नहीं थी. तो किस तरह से वो राजा आपने गुनहगारों को सजा देता था, आज हम इस कहानी मैं पढ़ेंगे. एक राजा अशोक को फूलों का शौक था. उसने सुंदर, सुगंधित फूलों के लगभग 100 गमले अपने कमरे के बरामदे मैं रखवा रखे थे.

उनकी देखभाल के लिए एक नौकर रखा गया था. जिसका नाम प्रेम था. एक दिन प्रेम से एक गमला टूट गया. राजा को पता चला तो वह आग बबूला हो गया. उसने आदेश दिया कि 3 महीने के बाद नौकर को फांसी दे दी जाए. मंत्री ने राजा को बहुत समझाया, लेकिन राजा ने एक न मानी. फिर राजा ने नगर में घोषणा करवा दी कि जो कोई टूटे हुए गमले की मरम्मत करके उसे ज्यों का त्यों बना देगा, उसे मुंह मांगा पुरस्कार दिया जाएगा.


 
कई लोग अपना भाग्य आजमाने के लिए आए लेकिन असफल रहे. एक दिन एक महात्मा नगर में पधारे. जिनका नाम स्वदेश था. उनके कान तक भी गमले वाली बात पहुंची. वह राज दरबार में गए और बोले, महाराज तेरे टूटे गमले को जोड़ने की जिम्मेदारी मैं लेता हूं. लेकिन मैं तुम्हें समझाना चाहता हूं कि यह देह अमर नहीं तो मिट्टी के गमले कैसे अमर रह सकते हैं. ये तो फूटेंगे, गलेंगे, मिटेंगे.

पौधा भी सूखेगा. लेकिन राजा अपनी बात पर अडिग रहा. आखिर राजा उन्हें वहां ले गया, जहां गमले रखे हुए थे. महात्मा ने एक डंडा उठाया और एक एक करके प्रहार करते हुए सभी गमले तोड़ दिए. थोड़ी देर तक तो राजा चकित होकर देखता  रहा

उसे लगा यह गमले जोड़ने का कोई नया विज्ञान होगा. लेकिन महात्मा को उसी तरह खड़ा देख उसने आश्चर्य से पूछा, ये आपने क्या किया. महात्मा बोले, मैंने 99 आदमियों की जान बचाई है. एक गमला टूटने से एक को फांसी लग रही है. 99 गमले भी किसी न किसी के हाथ से ऐसे ही टूटेंगे तो उन को भी फांसी लगेगी. सो मैंने गमले तोड़कर उन लोगों की जान बचाई है.
राजा महात्मा की बात समझ गया. उसने हाथ जोड़कर उनसे क्षमा मांगी और नौकर की फांसी का हुक्म वापस ले लिया. सही बात तो ये है की उस महात्मा ने राजा को ये बात समझायी की उसे कभी भी अपनी चीज़ो का ज्यादा लोभ नहीं करना चाहिए. देह हमेशा समय समय के साथ बदलती ही रहती है. इसका इतना लोभ किस काम का.🌹🌹🌹🌹⛎⛎⛎⛎⛎⛎⛎⛎⛎🌹🌹

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