ओम् श्री विश्वकर्मणे नमः

ओम् श्री विश्वकर्मणे नमः

ओम् नमो नारायणाय। ओम् श्री विश्वकर्मणे नमः
🚩:श्री विश्वकर्मा जयंती महात्म्य:🚩

💥:हिंदू धर्म के अनुसार श्री विश्वकर्मा जी निर्माण एवं सृजन के देवता हैं। भारतीय समाज में हर कर्म और वस्तु का एक देवता माना जाता है,चाहे वृक्ष हो या वस्तु सभी को हम समान महत्व देते हैं।इसी क्रम में भगवान विश्वकर्मा को यंत्रों का देवता माना जाता है।वर्तमान भौतिक युग यंत्र प्रधान है तथा यंत्र के अधिष्ठाता के रूप में भगवान विश्वकर्मा की ही मान्यता रही है तथा अनेक शास्त्रों में इनकी स्तुति की गई है।
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💥:विश्वकर्मा जी ने मानव को सुख-सुविधाएं प्रदान करने के लिए अनेक यंत्रों व शक्ति-संपन्न भौतिक साधनों का प्रादुर्भाव किया। इनके द्वारा मानव समाज भौतिक चरमोत्कर्ष को प्राप्त कर रहा है। प्राचीन शास्त्रों में वैमानकीय विद्या, नवविद्या, यंत्र निर्माण विद्या आदि का भगवान विश्वकर्मा ने उपदेश दिया है। अत: भौतिक जगत में भगवान विश्वकर्मा उपकारक देव माने गए हैं। ऐसी मान्यता है कि विश्वकर्मा जयंती विधि-विधान से मनाने से जटिल मशीनरी कार्यों में सफलता मिलती है।
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💥:मान्यता है कि प्राचीन काल में जितनी भी राजधानियां थीं उनका सृजन भगवान विश्वकर्मा ने ही किया था।अतःविश्वकर्मा पूजा के दिन विशेष रूप से औद्योगिक क्षेत्रों में,फैक्ट्रियों,लोहे की दुकान,वाहन शोरूम,सर्विस सेंटर आदि में पूजा होती है। इस दिन मशीनों को साफ किया जाता है, उनका रंग-रोगन होता है और पूजा की जाती है। इस दिन अधिकतर कारखाने बंद रहते हैं क्यूंकि विश्वकर्मा पूजन के दिन मशीनों पर काम करना वर्जित माना जाता है।
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🚩:श्री विश्वकर्मा जी के जन्म की कथा:🚩
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💥:ऐसी मान्यता है कि प्राचीन काल में सभी मुख्य निर्माण विश्वकर्मा द्वारा ही किए गए थे।इस प्रकार 'स्वर्ग लोक',स्वर्ण नगरी - 'लंका' तथा श्रीकृष्ण की नगरी - 'द्वारका', सभी का निर्माण विश्वकर्माजी के ही हाथों हुआ था।
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💥:एक कथा के अनुसार सृष्टि की रचना के आरंभ में प्रभु श्री विष्णु सागर में प्रकट हुए।विष्णु जी के नाभि-कमल से ब्रह्मा जी दृष्टिगोचर हो रहे थे।ब्रह्मा जी के पुत्र धर्म का विवाह वस्तु से हुआ।धर्म के सात पुत्र हुए।इनके सातवें पुत्र का नाम वास्तु था जो कि शिल्पशास्त्र में विशेष पारंगत थे।वास्तु के ही पुत्र विश्वकर्मा हुए,जो कि शिल्पकला तथा वास्तुशास्त्र में अद्वितीय थे। कुछ कथाओं के अनुसार विश्वकर्माजी का जन्म देवताओं तथा राक्षसों के मध्य हुए समुद्र मंथन से माना जाता है।
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💥:हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार उन्होंने पूरे ब्रह्मांड का निर्माण किया है। पौराणिक युग में प्रयोग किए जाने वाले सभी हथियारों को भी विश्वकर्मा ने ही बनाया था,जिसमें 'वज्र' भी सम्मिलित है,जो कि भगवान इंद्र का हथियार था। वास्तुकार कई युगों से भगवान विश्वकर्मा अपना गुरू मानते हुए उनकी पूजा करते आ रह हैं। देश में शायद ही ऐसी कोई फैक्टरी, कारखाना, कंपनी या कार्यस्थल हो जहां इस दिन विश्वकर्माजी की पूजा नहीं की जाती। वेल्डर, मकैनिक और इस क्षेत्र में काम कर रहे लोग पूरे साल सुचारू कामकाज के लिए भगवान विश्वकर्मा की पूजा करते हैं। बंगाल, ओडिशा और पूर्वी भारत में खास कर इस त्योहार को 17 सितंबर को मनाया जाता है। वहीं कुछ जगहें ऐसी हैं जहां ये दीवाली के बाद गोवर्धन पूजा के दिन मनाया जाता है। देश के कई हिस्सों में इस दिन पतंग उड़ाने का भी चलन है।
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🚩:श्री विश्वकर्मा जयंती पूजन विधान:🚩
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💥:विश्वकर्मा जयंती के दिन साधक को प्रातःकाल स्नानादि करने के उपरांत पूजा-स्थान पर साफ-सफाई कर जल से भरे कलश तथा विश्वकर्मा जी की प्रतिमा या चित्र को स्थापित कर पुष्प,अक्षत,सुपारी,धूप,दीप तथा नैवेद्य अर्पित कर पूर्ण श्रध्दा-भाव तथा विधि-विधान सहित विश्वकर्माजी की पूजा-आराधना करनी चाहिए।तदोपरांत सभी औजारों को तिलक कर उनका भी पूजन करना चाहिए।पूजन के अंत में हवन करके आरती करनी चाहिए तथा सबसे अंत में अपनी प्रार्थना कर प्रभु से पूजन की अवधि में दैनिक जीवन में ज्ञात-अज्ञात रूपेण हुई समसात भूलों के लिए क्षमा-प्रार्थना करनी चाहिए।इसके बाद सभी जनों के मध्य प्रसाद का वितरण करना चाहिए।
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💥:इस दिन सभी कार्यस्थलों पर भगवान विश्वकर्मा के चित्र या मूर्ति की पूजा होती है।पूजन स्थल को पुष्पों से सजाया जाता है। भगवान विश्वकर्मा और उनके वाहन हाथी को पूजा जाता है। पूजा-अर्चना खत्म होने के बाद सभी में प्रसाद बांटा जाता है। कई कंपनियों में लोग अपने औजारों की भी पूजा करते हैं जो उन्हें दो वक्त की रोटी देती है। काम फले-फूले इसके लिए यज्ञ भी कराए जाते हैं।
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🚩:श्री विश्वकर्मा पूजन मंत्र:🚩
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💥: श्री विश्वकर्मा पूजन हेतु निम्न वर्णित मंत्रों का यथासंभव जाप करना चाहिए ---------
1: ओम् आधारशक्तियै नमः
2: ओम् कूर्माय नमः
3: ओम् अनंताय नमः
4: ओम् पृथिव्यै नमः
5: ओम् भूर्भुवः स्वः श्री विश्वकर्मणे नमः।।
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🚩:श्री विश्वकर्मा पूजन की फलश्रुति:🚩
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💥: पूर्ण श्रध्दाभाव सहित विश्वकर्मा जी का पूजन करने से धन,धान्य,सुख,समृध्दि,उन्नति,प्रगति,मान,सम्मान,यश व कीर्ति की शुभ प्राप्ति होती है तथा कार्यक्षेत्र संबंधी विशेष लाभों की भी प्राप्ति होती है।
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