सुबह जागने से पहले दोनो हात देखने चाहिए  अक्सर लोगों से कहते हुए सुना होगा कि दिन की शुरुआत बेहतर हो जाए तो पूरा दिन बन जाता है, लेकिन दिन की अच्छी शुरुआत के लिए कुछ अच्छे काम भी करने होते हैं। बहुत से लोग अपने दिन को बेहतर बनाने के लिए अपने कमरे में तरह-तरह के पोस्टर…या अपनी मेज पर किसी खास धार्मिक देवता की तस्वीर लगाते हैं जिन्हें वो सबसे पहले देखना चाहते हैं, ताकि उनका दिन बन जाए। वहीं कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो दिन में उठते ही सबसे पहले धरती मां के पैर छूते हैं और फिर बड़े बुजुर्गों का आशीर्वाद लेते हैं। माना जाता है कि ऐसा करने से लोगों पर ईश्वर की कृपा बनी रहती है। आज सन्मार्ग आपको बतायेगा कि आपको सबह उठते ही सबसे पहले क्या देखना चाहिए। सुबह उठकर सबसे पहले क्या देखें- बिस्तर से उठने के बाद सबसे पहले अपने हाथों को देखना चाहिए। ऐसा करना बहुत ही अच्छा माना जता है और यह काम कुछ लोगों की नियमित दिनचर्या का हिस्सा भी होता है। हमें सबसे पहले अपना हाथ देखकर प्रात: स्मरण मंत्र बोलना चाहिए। कराग्रे वसते लक्ष्मी, करमध्ये सरस्वती। करमूले तु गोविन्द:, प्रभाते करदर्शनम्।। क्या है श्लोक का अर्थ- इस श्लोक का अर्थ है कि हमारे हाथ के अग्र भाग में लक्ष्मी और हाल के मूल में सरस्वती का वास है। यानी भगवान ने हमारे हाथों में इतनी ताकत दे रखी है कि हम लक्ष्मी अर्जित कर सकते हैं। इतना ही नहीं सरस्वती और लक्ष्मी जिसे हम अर्जित करते हैं उनमें समन्वय बनाने के लिए प्रभु स्वयं हाथ के मध्य में बैठे हैं। इसलिए हमें दिन की बेहतर शुरुआत के लिए सबसे पहले अपनी दोनों हथेलियों को जोड़कर देखना चाहिए। जय श्री राम जय श्री कृष्ण जय श्री हरी ॐ 🙏 शुभ 🌅 शुभ शुक्रवार जय श्री लक्ष्मी नारायण 🙏 जय श्री गुरुदेव जय श्री गजानन 💐 जय श्री भोलेनाथ ॐ ऐं र्‍हिं ल्किं चामुण्डायै विच्चे जय माता की जय हो 🌹👏🚩🐚🎪🌷👪👬🚩

सुबह जागने से पहले दोनो हात देखने चाहिए 

 अक्सर लोगों से कहते हुए सुना होगा कि दिन की शुरुआत बेहतर हो जाए तो पूरा दिन बन जाता है, लेकिन दिन की अच्छी शुरुआत के लिए कुछ अच्छे काम भी करने होते हैं। बहुत से लोग अपने दिन को बेहतर बनाने के लिए अपने कमरे में तरह-तरह के पोस्टर…या अपनी मेज पर किसी खास धार्मिक देवता की तस्वीर लगाते हैं जिन्हें वो सबसे पहले देखना चाहते हैं, ताकि उनका दिन बन जाए। वहीं कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो दिन में उठते ही सबसे पहले धरती मां के पैर छूते हैं और फिर बड़े बुजुर्गों का आशीर्वाद लेते हैं। माना जाता है कि ऐसा करने से लोगों पर ईश्वर की कृपा बनी रहती है। आज सन्मार्ग आपको बतायेगा कि आपको सबह उठते ही सबसे पहले क्या देखना चाहिए।

सुबह उठकर सबसे पहले क्या देखें-

बिस्तर से उठने के बाद सबसे पहले अपने हाथों को देखना चाहिए। ऐसा करना बहुत ही अच्छा माना जता है और यह काम कुछ लोगों की नियमित दिनचर्या का हिस्सा भी होता है। हमें सबसे पहले अपना हाथ देखकर प्रात: स्मरण मंत्र बोलना चाहिए।

कराग्रे वसते लक्ष्मी, करमध्ये सरस्वती।

करमूले तु गोविन्द:, प्रभाते करदर्शनम्।।

क्या है श्लोक का अर्थ-

इस श्लोक का अर्थ है कि हमारे हाथ के अग्र भाग में लक्ष्मी और हाल के मूल में सरस्वती का वास है। यानी भगवान ने हमारे हाथों में इतनी ताकत दे रखी है कि हम लक्ष्मी अर्जित कर सकते हैं। इतना ही नहीं सरस्वती और लक्ष्मी जिसे हम अर्जित करते हैं उनमें समन्वय बनाने के लिए प्रभु स्वयं हाथ के मध्य में बैठे हैं। इसलिए हमें दिन की बेहतर शुरुआत के लिए सबसे पहले अपनी दोनों हथेलियों को जोड़कर देखना चाहिए।
जय श्री राम जय श्री कृष्ण जय श्री हरी ॐ 🙏 शुभ 🌅 शुभ शुक्रवार जय श्री लक्ष्मी नारायण 🙏 जय श्री गुरुदेव जय श्री गजानन 💐 जय श्री भोलेनाथ ॐ ऐं र्‍हिं ल्किं चामुण्डायै विच्चे जय माता की जय हो 🌹👏🚩🐚🎪🌷👪👬🚩
सुबह जागने से पहले दोनो हात देखने चाहिए 

 अक्सर लोगों से कहते हुए सुना होगा कि दिन की शुरुआत बेहतर हो जाए तो पूरा दिन बन जाता है, लेकिन दिन की अच्छी शुरुआत के लिए कुछ अच्छे काम भी करने होते हैं। बहुत से लोग अपने दिन को बेहतर बनाने के लिए अपने कमरे में तरह-तरह के पोस्टर…या अपनी मेज पर किसी खास धार्मिक देवता की तस्वीर लगाते हैं जिन्हें वो सबसे पहले देखना चाहते हैं, ताकि उनका दिन बन जाए। वहीं कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो दिन में उठते ही सबसे पहले धरती मां के पैर छूते हैं और फिर बड़े बुजुर्गों का आशीर्वाद लेते हैं। माना जाता है कि ऐसा करने से लोगों पर ईश्वर की कृपा बनी रहती है। आज सन्मार्ग आपको बतायेगा कि आपको सबह उठते ही सबसे पहले क्या देखना चाहिए।

सुबह उठकर सबसे पहले क्या देखें-

बिस्तर से उठने के बाद सबसे पहले अपने हाथों को देखना चाहिए। ऐसा करना बहुत ही अच्छा माना जता है और यह काम कुछ लोगों की नियमित दिनचर्या का हिस्सा भी होता है। हमें सबसे पहले अपना हाथ देखकर प्रात: स्मरण मंत्र बोलना चाहिए।

कराग्रे वसते लक्ष्मी, करमध्ये सरस्वती।

करमूले तु गोविन्द:, प्रभाते करदर्शनम्।।

क्या है श्लोक का अर्थ-

इस श्लोक का अर्थ है कि हमारे हाथ के अग्र भाग में लक्ष्मी और हाल के मूल में सरस्वती का वास है। यानी भगवान ने हमारे हाथों में इतनी ताकत दे रखी है कि हम लक्ष्मी अर्जित कर सकते हैं। इतना ही नहीं सरस्वती और लक्ष्मी जिसे हम अर्जित करते हैं उनमें समन्वय बनाने के लिए प्रभु स्वयं हाथ के मध्य में बैठे हैं। इसलिए हमें दिन की बेहतर शुरुआत के लिए सबसे पहले अपनी दोनों हथेलियों को जोड़कर देखना चाहिए।
जय श्री राम जय श्री कृष्ण जय श्री हरी ॐ 🙏 शुभ 🌅 शुभ शुक्रवार जय श्री लक्ष्मी नारायण 🙏 जय श्री गुरुदेव जय श्री गजानन 💐 जय श्री भोलेनाथ ॐ ऐं र्‍हिं ल्किं चामुण्डायै विच्चे जय माता की जय हो 🌹👏🚩🐚🎪🌷👪👬🚩
सुबह जागने से पहले दोनो हात देखने चाहिए 

 अक्सर लोगों से कहते हुए सुना होगा कि दिन की शुरुआत बेहतर हो जाए तो पूरा दिन बन जाता है, लेकिन दिन की अच्छी शुरुआत के लिए कुछ अच्छे काम भी करने होते हैं। बहुत से लोग अपने दिन को बेहतर बनाने के लिए अपने कमरे में तरह-तरह के पोस्टर…या अपनी मेज पर किसी खास धार्मिक देवता की तस्वीर लगाते हैं जिन्हें वो सबसे पहले देखना चाहते हैं, ताकि उनका दिन बन जाए। वहीं कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो दिन में उठते ही सबसे पहले धरती मां के पैर छूते हैं और फिर बड़े बुजुर्गों का आशीर्वाद लेते हैं। माना जाता है कि ऐसा करने से लोगों पर ईश्वर की कृपा बनी रहती है। आज सन्मार्ग आपको बतायेगा कि आपको सबह उठते ही सबसे पहले क्या देखना चाहिए।

सुबह उठकर सबसे पहले क्या देखें-

बिस्तर से उठने के बाद सबसे पहले अपने हाथों को देखना चाहिए। ऐसा करना बहुत ही अच्छा माना जता है और यह काम कुछ लोगों की नियमित दिनचर्या का हिस्सा भी होता है। हमें सबसे पहले अपना हाथ देखकर प्रात: स्मरण मंत्र बोलना चाहिए।

कराग्रे वसते लक्ष्मी, करमध्ये सरस्वती।

करमूले तु गोविन्द:, प्रभाते करदर्शनम्।।

क्या है श्लोक का अर्थ-

इस श्लोक का अर्थ है कि हमारे हाथ के अग्र भाग में लक्ष्मी और हाल के मूल में सरस्वती का वास है। यानी भगवान ने हमारे हाथों में इतनी ताकत दे रखी है कि हम लक्ष्मी अर्जित कर सकते हैं। इतना ही नहीं सरस्वती और लक्ष्मी जिसे हम अर्जित करते हैं उनमें समन्वय बनाने के लिए प्रभु स्वयं हाथ के मध्य में बैठे हैं। इसलिए हमें दिन की बेहतर शुरुआत के लिए सबसे पहले अपनी दोनों हथेलियों को जोड़कर देखना चाहिए।
जय श्री राम जय श्री कृष्ण जय श्री हरी ॐ 🙏 शुभ 🌅 शुभ शुक्रवार जय श्री लक्ष्मी नारायण 🙏 जय श्री गुरुदेव जय श्री गजानन 💐 जय श्री भोलेनाथ ॐ ऐं र्‍हिं ल्किं चामुण्डायै विच्चे जय माता की जय हो 🌹👏🚩🐚🎪🌷👪👬🚩

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शामराव ठोंबरे पाटील Feb 25, 2021
जय श्री गुरुदेव जय श्री गजानन जय श्री महाकाल जी जय माता महाकाली की जय हो लक्ष्मी नारायण 🙏 🐚 नमस्कार शुभ प्रभात वंदन 🌅 👣 👏 शुभ शुक्रवार जय श्री लक्ष्मी माता की जय हो

शामराव ठोंबरे पाटील Feb 26, 2021
@dhruvwadhwani नमस्कार वाधवाणी साहब धन्यवाद आपको 👏 जय श्री लक्ष्मी नारायण 🙏 जय श्री कृष्ण राधे राधे 🙏 शुभ संध्या वंदन 🌹 👏 🚩

Anita Sharma Apr 22, 2021

. दक्षिण में वेंकटाचल ( तिरुपति बालाजी ) के समीप कूर्मग्राम में एक कुम्हार रहता था। उसका नाम था भीम। . वह भगवान का बड़ा भक्त था। साधारण लोगों की उसकी भाव-भक्ति का कुछ भी पता नहीं था। . परन्तु अन्तर्यामी वेंकटनाथ उसकी प्रत्येक सेवा बड़ी प्रसन्नता के साथ स्वीकार करते थे। . कुम्हार और उसकी पत्नी दोनों भगवान् श्री निवास के अनन्य भक्त थे। . इन्हीं दिनों भक्तप्रवर महाराज तोण्डमान प्रतिदिन भगवान् श्रीनिवास की पूजा सुवर्णमय कमल पुष्पों से किया करते थे। . एक दिन उन्होंने देखा, भगवान के ऊपर मिट्टी के बने हुए कमल तथा तुलसी पुष्प चढ़े हुए हैं। . इससे विस्मित होकर राजा ने पूछा -भगवान् ! ये मिट्टी के कमल और तुलसी पुष्प चढ़ाकर कौन आपकी पूजा करता है ? . भगवान ने कहा.. कूर्मग्राम मे एक कुम्हार है, जो मुझ मे बड़ी भक्ति रखता है। वह अपने घर में बैठकर मेरी पूजा करता है और मैं उसकी प्रत्येक सेवा स्वीकार करता हूँ। . राजा तोण्डमान के हदय मे भगवद्भक्तों के प्रति बड़े आदर का भाव था। . वे उस भक्तशिरोमणि कुम्हार का दर्शन करने के लिये स्वयं उसके घर पर गये। . राजाको आया देख कुम्हार उन्हें प्रणाम करके हाथ जोड़कर खड़ा हुआ। . राजा ने कहा -भीम ! तुम अपने कुल में सबसे श्रेष्ठ हो, क्योंकि तुम्हारे हदय मे भगवान् श्रीनिवास के प्रति परम पावन अनन्य भक्ति का उदय हुआ है। . मैं तुम्हारा दर्शन करने आया हूँ। बताओ, तुम भगवान की पूजा किस प्रकार करते हो ? . कुम्हार बोला.. महाराज ! मैं क्या जानूँ के भगवान की पूजा कैसे की जाती है ? . भला, आपसे किसने कह दिया कि कुम्हार पूजा करता है ? . राजा ने कहा.. स्वयं भगवान् श्रीनिवास ने तुम्हारे पूजन की बात बतायी है। . राजाके इतना कहते ही कुम्हार की सोयी हुई स्मृति जाग उठी। . वह बोला.. महाराज ! पूर्वकाल मे भगवान् वेंकटनाथ ने मुझे वरदान दिया था कि जब तुम्हारी की हुई पूजा प्रकाशित हो जायगी.. . और जब राजा तोण्डमान तुम्हारे द्वार पर आ जायँगे तथा उनके साथ तुम्हारा वार्तालय होगा.. . उसी समय तुम्हें परमधामकी प्राप्ति होगी। . उसकी यह बात जैसे ही पूर्ण हुई, उसी समय ही आकाश से एक दिव्य विमान उतर आया। . उसके ऊपर साक्षात् भगवान् विष्णु विराजमान थे। . कुम्हार और उसकी पत्नी ने भगवान को प्रणाम करते हुए प्राण त्याग दिये तथा राजाके देखते-देखते ही वे दोनों दिव्य रुप धारण करके विमान पर जा बैठे। . विमान उन्हें लेकर परम धाम वैकुण्ठ को चला गया।

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Garima Gahlot Rajput Apr 20, 2021

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*🚩॥श्री गणेशाय नम:॥🚩* *🥅 ÷दैनिक~पंचांग÷ 🥅* *🖼️ 23 - 04 - 2021* *🖼️ श्रीमाधोपुर~पंचांग* *🖼️ तिथि एकादशी 21:50:04{कामदा एकादशी की हार्दिक शुभकामनाएं 💐}* 🖼️ नक्षत्र मघा 07:42:51 🖼️ करण : वणिज 10:49:44 विष्टि 21:50:04 🖼️ पक्ष शुक्ल 🖼️ योग वृद्धि 14:39:31 🖼️ वार शुक्रवार 🖼️ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ 🖼️ सूर्योदय 05:56:03 🖼️ चन्द्रोदय 14:56:59 🖼️ चन्द्र राशि सिंह 🖼️ सूर्यास्त 18:56:25 🖼️ चन्द्रास्त 28:04:59 🖼️ ऋतु ग्रीष्म 🖼️ हिन्दू मास एवं वर्ष 🖼️ शक सम्वत 1943 प्लव 🖼️ कलि सम्वत 5123 🖼️ दिन काल 13:00:22 🖼️ विक्रम सम्वत 2078 🖼️ मास अमांत चैत्र 🖼️ मास पूर्णिमांत चैत्र 🖼️ शुभ और अशुभ समय 🖼️ शुभ समय 🖼️ अभिजित 12:00:13 - 12:52:14 🖼️ अशुभ समय 🖼️ दुष्टमुहूर्त : 08:32:07 - 09:24:08 12:52:14 - 13:44:16 🖼️ कंटक 13:44:16 - 14:36:17 🖼️ यमघण्ट 17:12:22 - 18:04:23 🖼️ राहु काल 10:48:41 - 12:26:14 🖼️ कुलिक 08:32:07 - 09:24:08 🖼️ कालवेला या अर्द्धयाम 15:28:19 - 16:20:20 🖼️ यमगण्ड 15:41:19 - 17:18:52 🖼️ गुलिक काल 07:33:35 - 09:11:08 🖼️ दिशा शूल 🖼️ दिशा शूल पश्चिम 🖼️ चन्द्रबल और ताराबल 🖼️ ताराबल 🖼️ अश्विनी, भरणी, कृत्तिका, मृगशिरा, पुनर्वसु, आश्लेषा, मघा, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तरा फाल्गुनी, चित्रा, विशाखा, ज्येष्ठा, मूल, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, धनिष्ठा, पूर्वाभाद्रपद, रेवती 🖼️ चन्द्रबल 🖼️ मिथुन, सिंह, तुला, वृश्चिक, कुम्भ, मीन 2️⃣3️⃣🔲0️⃣4️⃣🔲2️⃣1️⃣ *[🔥🌷जयश्रीकृष्णा🌷🔥]* *ज्योतिषशास्त्री~सुरेन्द्र कुमार चेजारा व्याख्याता राउमावि होल्याकाबास निवास-श्रीमाधोपुर* 🛣️🛣️🛣️🛣️🛣️🛣️🛣️🛣️

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Soni Mishra Apr 22, 2021

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M.S.Chauhan Apr 23, 2021

*शुभ दिन शुक्रवार* *जय हरि विष्णुदेव* *कामदा एकादशी व्रत की आपको सपरिवार हार्दिक शुभकामनाएं जी* 🌷 *कामदा एकादशी* 🌷 ➡ *22 अप्रैल 2021 गुरुवार को रात्रि 11:36 से 23 अप्रैल, शुक्रवार को रात्रि 09:47 तक एकादशी है ।* 💥 *विशेष - 23 अप्रैल, शुक्रवार को एकादशी का व्रत (उपवास) रखे* 🙏🏻 *युधिष्ठिर ने पूछा: वासुदेव ! आपको नमस्कार है ! कृपया आप यह बताइये कि चैत्र शुक्लपक्ष में किस नाम की एकादशी होती है?* 🙏🏻 *भगवान श्रीकृष्ण बोले : राजन् ! एकाग्रचित्त होकर यह पुरातन कथा सुनो, जिसे वशिष्ठजी ने राजा दिलीप के पूछने पर कहा था ।* 🙏🏻 *वशिष्ठजी बोले : राजन् ! चैत्र शुक्लपक्ष में ‘कामदा’ नाम की एकादशी होती है । वह परम पुण्यमयी है । पापरुपी ईँधन के लिए तो वह दावानल ही है ।* 🙏🏻 *प्राचीन काल की बात है: नागपुर नाम का एक सुन्दर नगर था, जहाँ सोने के महल बने हुए थे । उस नगर में पुण्डरीक आदि महा भयंकर नाग निवास करते थे । पुण्डरीक नाम का नाग उन दिनों वहाँ राज्य करता था । गन्धर्व, किन्नर और अप्सराएँ भी उस नगरी का सेवन करती थीं । वहाँ एक श्रेष्ठ अप्सरा थी, जिसका नाम ललिता था । उसके साथ ललित नामवाला गन्धर्व भी था । वे दोनों पति पत्नी के रुप में रहते थे । दोनों ही परस्पर काम से पीड़ित रहा करते थे । ललिता के हृदय में सदा पति की ही मूर्ति बसी रहती थी और ललित के हृदय में सुन्दरी ललिता का नित्य निवास था ।* 🙏🏻 *एक दिन की बात है । नागराज पुण्डरीक राजसभा में बैठकर मनोंरंजन कर रहा था । उस समय ललित का गान हो रहा था किन्तु उसके साथ उसकी प्यारी ललिता नहीं थी । गाते गाते उसे ललिता का स्मरण हो आया । अत: उसके पैरों की गति रुक गयी और जीभ लड़खड़ाने लगी ।* 🙏🏻 *नागों में श्रेष्ठ कर्कोटक को ललित के मन का सन्ताप ज्ञात हो गया, अत: उसने राजा पुण्डरीक को उसके पैरों की गति रुकने और गान में त्रुटि होने की बात बता दी । कर्कोटक की बात सुनकर नागराज पुण्डरीक की आँखे क्रोध से लाल हो गयीं । उसने गाते हुए कामातुर ललित को शाप दिया : ‘दुर्बुद्धे ! तू मेरे सामने गान करते समय भी पत्नी के वशीभूत हो गया, इसलिए राक्षस हो जा ।’* 🙏🏻 *महाराज पुण्डरीक के इतना कहते ही वह गन्धर्व राक्षस हो गया । भयंकर मुख, विकराल आँखें और देखनेमात्र से भय उपजानेवाला रुप - ऐसा राक्षस होकर वह कर्म का फल भोगने लगा ।* 🙏🏻 *ललिता अपने पति की विकराल आकृति देख मन ही मन बहुत चिन्तित हुई । भारी दु:ख से वह कष्ट पाने लगी । सोचने लगी: ‘क्या करुँ? कहाँ जाऊँ? मेरे पति पाप से कष्ट पा रहे हैं…’* 🙏🏻 *वह रोती हुई घने जंगलों में पति के पीछे पीछे घूमने लगी । वन में उसे एक सुन्दर आश्रम दिखायी दिया, जहाँ एक मुनि शान्त बैठे हुए थे । किसी भी प्राणी के साथ उनका वैर विरोध नहीं था । ललिता शीघ्रता के साथ वहाँ गयी और मुनि को प्रणाम करके उनके सामने खड़ी हुई । मुनि बड़े दयालु थे । उस दु:खिनी को देखकर वे इस प्रकार बोले : ‘शुभे ! तुम कौन हो ? कहाँ से यहाँ आयी हो? मेरे सामने सच सच बताओ ।’* 🙏🏻 *ललिता ने कहा : महामुने ! वीरधन्वा नामवाले एक गन्धर्व हैं । मैं उन्हीं महात्मा की पुत्री हूँ । मेरा नाम ललिता है । मेरे स्वामी अपने पाप दोष के कारण राक्षस हो गये हैं । उनकी यह अवस्था देखकर मुझे चैन नहीं है । ब्रह्मन् ! इस समय मेरा जो कर्त्तव्य हो, वह बताइये । विप्रवर! जिस पुण्य के द्वारा मेरे पति राक्षसभाव से छुटकारा पा जायें, उसका उपदेश कीजिये ।* 🙏🏻 *ॠषि बोले : भद्रे ! इस समय चैत्र मास के शुक्लपक्ष की ‘कामदा’ नामक एकादशी तिथि है, जो सब पापों को हरनेवाली और उत्तम है । तुम उसीका विधिपूर्वक व्रत करो और इस व्रत का जो पुण्य हो, उसे अपने स्वामी को दे डालो । पुण्य देने पर क्षणभर में ही उसके शाप का दोष दूर हो जायेगा ।* 🙏🏻 *राजन् ! मुनि का यह वचन सुनकर ललिता को बड़ा हर्ष हुआ । उसने एकादशी को उपवास करके द्वादशी के दिन उन ब्रह्मर्षि के समीप ही भगवान वासुदेव के (श्रीविग्रह के) समक्ष अपने पति के उद्धार के लिए यह वचन कहा: ‘मैंने जो यह ‘कामदा एकादशी’ का उपवास व्रत किया है, उसके पुण्य के प्रभाव से मेरे पति का राक्षसभाव दूर हो जाय ।’* 🙏🏻 *वशिष्ठजी कहते हैं : ललिता के इतना कहते ही उसी क्षण ललित का पाप दूर हो गया । उसने दिव्य देह धारण कर लिया । राक्षसभाव चला गया और पुन: गन्धर्वत्व की प्राप्ति हुई ।* 🙏🏻 *नृपश्रेष्ठ ! वे दोनों पति पत्नी ‘कामदा’ के प्रभाव से पहले की अपेक्षा भी अधिक सुन्दर रुप धारण करके विमान पर आरुढ़ होकर अत्यन्त शोभा पाने लगे । यह जानकर इस एकादशी के व्रत का यत्नपूर्वक पालन करना चाहिए ।* 🙏🏻 *मैंने लोगों के हित के लिए तुम्हारे सामने इस व्रत का वर्णन किया है । ‘कामदा एकादशी’ ब्रह्महत्या आदि पापों तथा पिशाचत्व आदि दोषों का नाश करनेवाली है । राजन् ! इसके पढ़ने और सुनने से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है ।* 🌞 *जय हरि विष्णुदेव* 🌞 🙏🍀🌷🌻🌺🌸🙏

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Anju Mishra Apr 22, 2021

🙏🌺जय श्री राधे कृष्णा🌺🙏 कामदा एकादशी से दो बड़े लाभ :  👉 पहला लाभ यह कि राक्षस आदि की योनि से छुटकारा मिलता है।  👉दूसरा लाभ यह कि यह सर्वकार्य सिद्धि और सभी कामनाओं को पूर्ण करती है। एकादशी व्रत के करने के 26 फायदे हैं- व्यक्ति निरोगी रहता है, राक्षस, भूत-पिशाच आदि योनि से छुटकारा मिलता है, पापों का नाश होता है, संकटों से मुक्ति मिलती है, सर्वकार्य सिद्ध होते हैं, सौभाग्य प्राप्त होता है, मोक्ष मिलता है, विवाह बाधा समाप्त होती है, धन और समृद्धि आती है, शांति मिलती है, मोह-माया और बंधनों से मुक्ति मिलती है, हर प्रकार के मनोरथ पूर्ण होते हैं, खुशियां मिलती हैं, सिद्धि प्राप्त होती है, उपद्रव शांत होते हैं, दरिद्रता दूर होती है, खोया हुआ सबकुछ फिर से प्राप्त हो जाता है, पितरों को अधोगति से मुक्ति मिलती है, भाग्य जाग्रत होता है, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, पुत्र प्राप्ति होती है, शत्रुओं का नाश होता है, सभी रोगों का नाश होता है, कीर्ति और प्रसिद्धि प्राप्त होती है, वाजपेय और अश्‍वमेध यज्ञ का फल मिलता है और हर कार्य में सफलता मिलती है। ।।ओम् नमो भगवते वासुदेवाय नमः।। राधे राधे

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Dheeraj Shukla Apr 22, 2021

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Garima Gahlot Rajput Apr 22, 2021

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ॐ द्यौ: शान्तिरन्तरिक्षँ शान्ति:,  पृथ्वी शान्तिराप: शान्तिरोषधय: शान्ति:।  वनस्पतय: शान्तिर्विश्वे देवा: शान्तिर्ब्रह्म शान्ति:,  सर्वँ शान्ति:, शान्तिरेव शान्ति:, सा मा शान्तिरेधि॥  ॐ शान्ति: शान्ति: शान्ति:॥ भवार्थ—  शान्ति: कीजिये, प्रभु त्रिभुवन में, जल में, थल में और गगन में  अन्तरिक्ष में, अग्नि पवन में, औषधि, वनस्पति, वन, उपवन में  सकल विश्व में अवचेतन में!  शान्ति राष्ट्र-निर्माण सृजन में, नगर, ग्राम में और भवन में  जीवमात्र के तन में, मन में और जगत के हो कण कण में  ॐ शान्ति: शान्ति: शान्ति:॥ विश्व पृथ्वी दिवस कि पावन दिवस पर अंकित आर्य काशी गुप्त कि ओर से कोटि-कोटि शुभकामनाएं। आइए संकल्प कि ...

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