Neha Sharma, Haryana
Neha Sharma, Haryana Mar 26, 2020

☘️💨🙏*जय माता दी*🙏💨☘️ *सारा जहां है जिसकी शरण में🌹🙏 *नमन है उस माँ के चरण में 👣🙏 *हम है उस माँ के चरणों की धूल 👣🙏 *आओ मिलकर माँ को चढ़ाएं 👨‍👩‍👧‍👦🙏 *श्रद्धा के फूल।🌹🌹 ☘️🌹🙏*शुभ प्रभात् नमन*🙏🌹☘️ *आप सभी भाई-बहनों का हर पल शुभ व मंगलमय हो* 🍃💨🍃💨🍃💨🍃💨🍃💨🍃 *माता रानी चली आपके द्वार🌹🙏 * जगत जननी के देखो 16 श्रंगार🌹🙏 *जीवन में आपको कभी ना मिले हार🌹🙏 *सुख और समृद्ध रहे आपका परिवार🌹🙏 नवरात्रि के दूसरे दिन मां दुर्गा के ब्रह्मचारिणी स्वरूप की पूजा का दिन होता है। बता दें कि ब्रह्म का अर्थ तपस्या से है। मां का ये रूप अपने भक्तों और सिद्धों को अनंत फल देने वाला है। इनकी उपासना से तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार और संयम की वृद्धि होती है। शास्त्रों में ब्रह्मचारिणी का अर्थ तप की चारिणी यानि तप का आचरण करने वाली बताया गया है। देवी का यह रूप पूर्ण ज्योतिर्मय और अत्यंत भव्य है। इस देवी के दाएं हाथ में जप की माला है और बाएं हाथ में यह कमण्डल धारण किए हैं। चलिए जानते हैं इनका कथा के बारे में- मान्यता है कि पूर्वजन्म में इस देवी ने हिमालय के घर पुत्री रूप में जन्म लिया था और नारदजी के उपदेश से भगवान शंकर को पति रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी। इस कठिन तपस्या के कारण इन्हें तपश्चारिणी अर्थात्‌ ब्रह्मचारिणी नाम से अभिहित किया गया। एक हजार वर्ष तक इन्होंने केवल फल-फूल खाकर बिताए और सौ वर्षों तक केवल जमीन पर रहकर शाक पर निर्वाह किया। कुछ दिनों तक कठिन उपवास रखे और खुले आकाश के नीचे वर्षा और धूप के घोर कष्ट सहे। तीन हजार वर्षों तक टूटे हुए बिल्व पत्र खाए और भगवान शंकर की आराधना करती रहीं। इसके बाद तो उन्होंने सूखे बिल्व पत्र खाना भी छोड़ दिए। कई हजार वर्षों तक निर्जल और निराहार रह कर तपस्या करती रहीं। पत्तों को खाना छोड़ देने के कारण ही इनका नाम अपर्णा नाम पड़ गया। कठिन तपस्या के कारण देवी का शरीर एकदम क्षीण हो गया। देवता, ऋषि, सिद्धगण, मुनि सभी ने ब्रह्मचारिणी की तपस्या को अभूतपूर्व पुण्य कृत्य बताया, सराहना की और कहा- हे देवी आज तक किसी ने इस तरह की कठोर तपस्या नहीं की। यह तुम्हीं से ही संभव थी। तुम्हारी मनोकामना परिपूर्ण होगी और भगवान चंद्रमौलि शिवजी तुम्हें पति रूप में प्राप्त होंगे। अब तपस्या छोड़कर घर लौट जाओ। जल्द ही तुम्हारे पिता तुम्हें बुलाने आ रहे हैं। मां ब्रह्मचारिणी देवी की कृपा से सर्व सिद्धि प्राप्त होती है। दुर्गा पूजा के दूसरे दिन देवी के इसी स्वरूप की उपासना की जाती है। मां भगवती को नवरात्र के दूसरे दिन चीनी का भोग लगाना चाहिए मां को शक्कर का भोग प्रिय है। ब्राह्मण को दान में भी चीनी ही देनी चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से मनुष्य दीर्घायु होता है। इनकी उपासना करने से मनुष्य में तप, त्याग, सदाचार आदि की वृद्धि होती है। ब्रह्मचारिणी देवी की पूजा विधि देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा करते समय सबसे पहले हाथों में एक फूल लेकर उनका ध्यान करें और प्रार्थना करते हुए नीचे लिखा मंत्र बोलें। श्लोक दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलु| देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा || ध्यान मंत् वन्दे वांछित लाभायचन्द्रार्घकृतशेखराम्। जपमालाकमण्डलु धराब्रह्मचारिणी शुभाम्॥ गौरवर्णा स्वाधिष्ठानस्थिता द्वितीय दुर्गा त्रिनेत्राम। धवल परिधाना ब्रह्मरूपा पुष्पालंकार भूषिताम्॥ परम वंदना पल्लवराधरां कांत कपोला पीन। पयोधराम् कमनीया लावणयं स्मेरमुखी निम्ननाभि नितम्बनीम्॥ इसके बाद देवी को पंचामृत स्नान कराएं, फिर अलग-अलग तरह के फूल,अक्षत, कुमकुम, सिन्दुर, अर्पित करें। देवी को सफेद और सुगंधित फूल चढ़ाएं। इसके अलावा कमल का फूल भी देवी मां को चढ़ाएं और इन मंत्रों से प्रार्थना करें। 1. या देवी सर्वभू‍तेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।। 2. दधाना कर पद्माभ्याम अक्षमाला कमण्डलू। देवी प्रसीदतु मई ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।। इसके बाद देवी मां को प्रसाद चढ़ाएं और आचमन करवाएं। प्रसाद के बाद पान सुपारी भेंट करें और प्रदक्षिणा करें यानी 3 बार अपनी ही जगह खड़े होकर घूमें। प्रदक्षिणा के बाद घी व कपूर मिलाकर देवी की आरती करें। इन सबके बाद क्षमा प्रार्थना करें और प्रसाद बांट दें। प्रत्येक सर्वसाधारण के लिए आराधना योग्य यह श्लोक सरल और स्पष्ट है। मां जगदम्बे की भक्ति पाने के लिए इसे कंठस्थ कर नवरात्रि में द्वितीय दिन इसका जाप करना चाहिए। या देवी सर्वभू‍तेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।। अर्थ : हे मां! सर्वत्र विराजमान और ब्रह्मचारिणी के रूप में प्रसिद्ध अम्बे, आपको मेरा बार-बार प्रणाम है। या मैं आपको बारंबार प्रणाम करता हूं। *हर घर में ख़ुशी की फुहार हो, *हर आँगन में सुबह शाम मस्ती की बहार हो! *खुशियों की नदियाँ बहती रहें सब के दिलों में, *ऐसे ही सदा हँसता और मुस्कुराता हर परिवार हो!! 🌹🙏 शुभ प्रभात् नमन🙏🌹 आप सभी भाई-बहनों का दिन शुभ व मंगलमय हो! ☘️💨☘️💨☘️💨☘️💨☘️💨☘️ 🙏🏽🌷माँ दुर्गा का द्वितीय रूप ब्रह्मचारिणी हैं।🙏🏽🌷 नवरात्र पर्व के द्वितीय दिन माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जाती हैं। यहां ब्रह्मचारिणी का तात्पर्य तपश्चारिणी हैं। इन्होंने भगवान शंकर को पति रूप से प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी। अतः ये तपश्चारिणी और ब्रह्मचारिणी के नाम से विख्यात हैं। नवरात्रि के द्वितीय दिन इनकी पूजा और अर्चना की जाती हैं। जो दोनो कर-कमलो मे अक्षमाला एवं कमंडल धारण करती हैं। वे सर्वश्रेष्ठ माँ भगवती ब्रह्मचारिणी मुझसे पर अति प्रसन्न हों। माँ ब्रह्मचारिणी सदैव अपने भक्तो पर कृपादृष्टि रखती हैं एवं सम्पूर्ण कष्ट दूर करके अभीष्ट कामनाओ की पूर्ति करती हैं। देवी दुर्गा का यह दूसरा रूप भक्तों एवं सिद्धों को अमोघ फल देने वाला हैं। साधक इस दिन अपने मन को माँ के चरणों में लगाते हैं। देवी ब्रह्मचारिणी की उपासना से तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार, संयम की वृद्धि होती हैं। माँ ब्रह्मचारिणी की कृपा से मनुष्य को सर्वत्र सिद्धि और विजय की प्राप्ति होती हैं, तथा जीवन की अनेक समस्याओं एवं परेशानियों का नाश होता हैं। देवी ब्रह्मचारिणी का स्वरूप पूर्ण ज्योर्तिमय हैं। मां दुर्गा की नौ शक्तियों में से द्वितीय शक्ति देवी ब्रह्मचारिणी का हैं। ब्रह्म का अर्थ हैं तपस्या और चारिणी यानी आचरण करने वाली अर्थात तप का आचरण करने वाली मां ब्रह्मचारिणी। यह देवी शांत और निमग्न होकर तप में लीन हैं। मुख पर कठोर तपस्या के कारण अद्भुत तेज और कांति का ऐसा अनूठा संगम हैं जो तीनों लोको को उजागर कर रहा हैं। इस प्रकार ब्रह्मचारिणी का अर्थ हुआ तप का आचरण करने वाली। देवी ब्रह्मचारिणी के दाहिने हाथ में अक्ष माला हैं और बायें हाथ में कमण्डल होता हैं। देवी ब्रह्मचारिणी साक्षात ब्रह्म का स्वरूप हैं अर्थात तपस्या का मूर्तिमान रूप हैं। इस देवी के कई अन्य नाम हैं जैसे तपश्चारिणी, अपर्णा और उमा। इस दिन साधक का मन ‘स्वाधिष्ठान ’चक्र में स्थित होता हैं। इस चक्र में अवस्थित साधक मां ब्रह्मचारिणी जी की कृपा और भक्ति को प्राप्त करता हैं। माँ ब्रहम चारिणी की पूजा में आप मटमैले रंग के वस्त्रों का प्रयोग कर सकते हैं यह दिन “राहु शांति पूजा के लिए” सर्वोत्तम दिन हैं। द्वितीय नवरात्र के दिन माँ ब्रह्मचारिणी को शक्कर का भोग लगाएँ।इससे आयु वृद्धि होती हैं। माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा : - सर्वप्रथम आपने जिन देवी-देवताओ एवं गणों व योगिनियों को कलश में आमत्रित किया हैं उनकी फूल, अक्षत, रोली, चंदन, से पूजा करें उन्हें दूध, दही, शर्करा, घृत, व मधु से स्नान करायें व देवी को जो कुछ भी प्रसाद अर्पित कर रहे हैं उसमें से एक अंश इन्हें भी अर्पण करें। प्रसाद के पश्चात आचमन और फिर पान, सुपारीभेंट कर इनकी प्रदक्षिणा करें। कलश देवता की पूजा के पश्चात इसी प्रकार नवग्रह, दशदिक्पाल, नगर देवता, ग्राम देवता, की पूजा करें। इनकी पूजा के पश्चात मॉ ब्रह्मचारिणी की पूज माँ ब्रह्मचारिणी मंत्र!!!!!! या देवी सर्वभू‍तेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।। अर्थ : हे माँ! सर्वत्र विराजमान और ब्रह्मचारिणी के रूप में प्रसिद्ध अम्बे, आपको मेरा बार-बार प्रणाम हैं। या मैं आपको बारंबार प्रणाम करता हूँ। माँ ब्रह्मचारिणी श्लोक!!!!! दधाना कर पद्माभ्याम अक्षमाला कमण्डलू। देवी प्रसीदतु मई ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।। माँ ब्रह्मचारिणी ध्यान,,,, वन्दे वांछित लाभायचन्द्रार्घकृतशेखराम्। जपमालाकमण्डलु धराब्रह्मचारिणी शुभाम्॥ गौरवर्णा स्वाधिष्ठानस्थिता द्वितीय दुर्गा त्रिनेत्राम। धवल परिधाना ब्रह्मरूपा पुष्पालंकार भूषिताम्॥ परम वंदना पल्लवराधरां कांत कपोला पीन। पयोधराम् कमनीया लावणयं स्मेरमुखी निम्ननाभि नितम्बनीम्॥ ब्रह्मचारिणी स्तोत्र पाठ,,,, तपश्चारिणी त्वंहि तापत्रय निवारणीम्। ब्रह्मरूपधरा ब्रह्मचारिणी प्रणमाम्यहम्॥ शंकरप्रिया त्वंहि भुक्ति-मुक्ति दायिनी। शान्तिदा ज्ञानदा ब्रह्मचारिणीप्रणमाम्यहम्॥ मां ब्रह्मचारिणी कवच,,,,,,, त्रिपुरा में हृदयं पातु ललाटे पातु शंकरभामिनी। अर्पण सदापातु नेत्रो, अर्धरी च कपोलो॥ पंचदशी कण्ठे पातुमध्यदेशे पातुमहेश्वरी॥ षोडशी सदापातु नाभो गृहो च पादयो। अंग प्रत्यंग सतत पातु ब्रह्मचारिणी। नवरात्री में दुर्गा सप्तशती पाठ किया जाता हैं माँ ब्रह्मचारिणी कथा!!!!!!! माता ब्रह्मचारिणी हिमालय और मैना की पुत्री हैं। इन्होंने देवर्षि नारद जी के कहने पर भगवान शंकर की ऐसी कठोर तपस्या की जिससे प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने इन्हें मनोवांछित वरदान दिया। जिसके फलस्वरूप यह देवी भगवान भोले नाथ की वामिनी अर्थात पत्नी बनी। जो व्यक्ति अध्यात्म और आत्मिक आनंद की कामना रखते हैं उन्हें इस देवी की पूजा से सहज यह सब प्राप्त होता हैं। देवी का दूसरा स्वरूप योग साधक को साधना के केन्द्र के उस सूक्ष्मतम अंश से साक्षात्कार करा देता हैं जिसके पश्चात व्यक्ति की ऐन्द्रियां अपने नियंत्रण में रहती हैं और साधक मोक्ष का भागी बनता हैं। माँ ब्रह्मचारिणी की प्रतिमा की पंचोपचार सहित पूजा करके जो साधक स्वाधिष्ठान चक्र में मन को स्थापित करता हैं उसकी साधना सफल हो जाती हैं और व्यक्ति की कुण्डलनी शक्ति जागृत हो जाती हैं। जो व्यक्ति भक्ति भाव एवं श्रद्धादुर्गा पूजा के दूसरे दिन मॉ ब्रह्मचारिणी की पूजा करते हैं उन्हें सुख, आरोग्य की प्राप्ति होती हैं और प्रसन्न रहता हैं, उसे किसी प्रकार का भय नहीं सताता हैं। माँ दुर्गा की आरती!!!!! जय अंबे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी । तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी ॥ ॐ जय अंबे गौरी..... मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को । उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको ॥ ॐ जय अंबे गौरी..... कनक समान कलेवर, रक्तांबर राजै । रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै ॥ ॐ जय अंबे गौरी..... केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी । सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी ॥ ॐ जय अंबे गौरी..... कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती । कोटिक चंद्र दिवाकर, राजत सम ज्योती ॥ ॐ जय अंबे गौरी..... शुंभ-निशुंभ बिदारे, महिषासुर घाती । धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती ॥ ॐ जय अंबे गौरी..... चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे । मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भय दूर करे ॥ ॐ जय अंबे गौरी..... ब्रह्माणी, रूद्राणी, तुम कमला रानी । आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी ॥ ॐ जय अंबे गौरी..... चौंसठ योगिनी गावत, नृत्य करत भैंरू । बाजत ताल मृदंगा, अरू बाजत डमरू ॥ ॐ जय अंबे गौरी..... तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता । भक्तन की दुख हरता, सुख संपति करता ॥ ॐ जय अंबे गौरी..... भुजा चार अति शोभित, वरमुद्रा धारी । मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी ॥ ॐ जय अंबे गौरी..... कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती । श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योती ॥ ॐ जय अंबे गौरी..... श्री अंबेजी की आरति, जो कोइ नर गावे । कहत शिवानंद स्वामी, सुख-संपति पावे ॥ ॐ जय अंबे गौरी,,,

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*सारा जहां है जिसकी शरण में🌹🙏
*नमन है उस माँ के चरण में 👣🙏
*हम है उस माँ के चरणों की धूल 👣🙏
*आओ मिलकर माँ को चढ़ाएं 👨‍👩‍👧‍👦🙏
*श्रद्धा के फूल।🌹🌹

☘️🌹🙏*शुभ प्रभात् नमन*🙏🌹☘️
*आप सभी भाई-बहनों का हर पल शुभ व मंगलमय हो*
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*माता रानी चली आपके द्वार🌹🙏
* जगत जननी के देखो 16 श्रंगार🌹🙏
*जीवन में आपको कभी ना मिले हार🌹🙏
 *सुख और समृद्ध रहे आपका परिवार🌹🙏

नवरात्रि के दूसरे दिन मां दुर्गा के ब्रह्मचारिणी स्वरूप की पूजा का दिन होता है। बता दें कि ब्रह्म का अर्थ तपस्या से है। मां का ये रूप अपने भक्तों और सिद्धों को अनंत फल देने वाला है। इनकी उपासना से तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार और संयम की वृद्धि होती है। शास्त्रों में ब्रह्मचारिणी का अर्थ तप की चारिणी यानि तप का आचरण करने वाली बताया गया है। देवी का यह रूप पूर्ण ज्योतिर्मय और अत्यंत भव्य है। इस देवी के दाएं हाथ में जप की माला है और बाएं हाथ में यह कमण्डल धारण किए हैं। चलिए जानते हैं इनका कथा के बारे में- मान्यता है कि पूर्वजन्म में इस देवी ने हिमालय के घर पुत्री रूप में जन्म लिया था और नारदजी के उपदेश से भगवान शंकर को पति रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी। इस कठिन तपस्या के कारण इन्हें तपश्चारिणी अर्थात्‌ ब्रह्मचारिणी नाम से अभिहित किया गया। एक हजार वर्ष तक इन्होंने केवल फल-फूल खाकर बिताए और सौ वर्षों तक केवल जमीन पर रहकर शाक पर निर्वाह किया। कुछ दिनों तक कठिन उपवास रखे और खुले आकाश के नीचे वर्षा और धूप के घोर कष्ट सहे। तीन हजार वर्षों तक टूटे हुए बिल्व पत्र खाए और भगवान शंकर की आराधना करती रहीं। इसके बाद तो उन्होंने सूखे बिल्व पत्र खाना भी छोड़ दिए। कई हजार वर्षों तक निर्जल और निराहार रह कर तपस्या करती रहीं। पत्तों को खाना छोड़ देने के कारण ही इनका नाम अपर्णा नाम पड़ गया। कठिन तपस्या के कारण देवी का शरीर एकदम क्षीण हो गया। देवता, ऋषि, सिद्धगण, मुनि सभी ने ब्रह्मचारिणी की तपस्या को अभूतपूर्व पुण्य कृत्य बताया, सराहना की और कहा- हे देवी आज तक किसी ने इस तरह की कठोर तपस्या नहीं की। यह तुम्हीं से ही संभव थी। तुम्हारी मनोकामना परिपूर्ण होगी और भगवान चंद्रमौलि शिवजी तुम्हें पति रूप में प्राप्त होंगे। अब तपस्या छोड़कर घर लौट जाओ। जल्द ही तुम्हारे पिता तुम्हें बुलाने आ रहे हैं। मां ब्रह्मचारिणी देवी की कृपा से सर्व सिद्धि प्राप्त होती है। दुर्गा पूजा के दूसरे दिन देवी के इसी स्वरूप की उपासना की जाती है। मां भगवती को नवरात्र के दूसरे दिन चीनी का भोग लगाना चाहिए मां को शक्कर का भोग प्रिय है। ब्राह्मण को दान में भी चीनी ही देनी चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से मनुष्य दीर्घायु होता है। इनकी उपासना करने से मनुष्य में तप, त्याग, सदाचार आदि की वृद्धि होती है। ब्रह्मचारिणी देवी की पूजा विधि देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा करते समय सबसे पहले हाथों में एक फूल लेकर उनका ध्यान करें और प्रार्थना करते हुए नीचे लिखा मंत्र बोलें। श्लोक दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलु| देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा || ध्यान मंत् वन्दे वांछित लाभायचन्द्रार्घकृतशेखराम्। जपमालाकमण्डलु धराब्रह्मचारिणी शुभाम्॥ गौरवर्णा स्वाधिष्ठानस्थिता द्वितीय दुर्गा त्रिनेत्राम। धवल परिधाना ब्रह्मरूपा पुष्पालंकार भूषिताम्॥ परम वंदना पल्लवराधरां कांत कपोला पीन। पयोधराम् कमनीया लावणयं स्मेरमुखी निम्ननाभि नितम्बनीम्॥ इसके बाद देवी को पंचामृत स्नान कराएं, फिर अलग-अलग तरह के फूल,अक्षत, कुमकुम, सिन्दुर, अर्पित करें। देवी को सफेद और सुगंधित फूल चढ़ाएं। इसके अलावा कमल का फूल भी देवी मां को चढ़ाएं और इन मंत्रों से प्रार्थना करें। 1. या देवी सर्वभू‍तेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।। 2. दधाना कर पद्माभ्याम अक्षमाला कमण्डलू। देवी प्रसीदतु मई ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।। इसके बाद देवी मां को प्रसाद चढ़ाएं और आचमन करवाएं। प्रसाद के बाद पान सुपारी भेंट करें और प्रदक्षिणा करें यानी 3 बार अपनी ही जगह खड़े होकर घूमें। प्रदक्षिणा के बाद घी व कपूर मिलाकर देवी की आरती करें। इन सबके बाद क्षमा प्रार्थना करें और प्रसाद बांट दें। प्रत्येक सर्वसाधारण के लिए आराधना योग्य यह श्लोक सरल और स्पष्ट है। मां जगदम्बे की भक्ति पाने के लिए इसे कंठस्थ कर नवरात्रि में द्वितीय दिन इसका जाप करना चाहिए। या देवी सर्वभू‍तेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।। अर्थ : हे मां! सर्वत्र विराजमान और ब्रह्मचारिणी के रूप में प्रसिद्ध अम्बे, आपको मेरा बार-बार प्रणाम है। या मैं आपको बारंबार प्रणाम करता हूं।

*हर घर में ख़ुशी की फुहार हो, 

*हर आँगन में सुबह शाम मस्ती की बहार हो! 

*खुशियों की नदियाँ बहती रहें सब के दिलों में,

 *ऐसे ही सदा हँसता और मुस्कुराता हर परिवार हो!!

🌹🙏 शुभ प्रभात् नमन🙏🌹
आप सभी भाई-बहनों का दिन शुभ व मंगलमय हो!
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🙏🏽🌷माँ दुर्गा का द्वितीय रूप ब्रह्मचारिणी हैं।🙏🏽🌷
 नवरात्र पर्व के द्वितीय दिन माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जाती हैं। यहां ब्रह्मचारिणी का तात्पर्य तपश्चारिणी हैं। इन्होंने भगवान शंकर को पति रूप से प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी। अतः ये तपश्चारिणी और ब्रह्मचारिणी के नाम से विख्यात हैं। नवरात्रि के द्वितीय दिन इनकी पूजा और अर्चना की जाती हैं। जो दोनो कर-कमलो मे अक्षमाला एवं कमंडल धारण करती हैं। वे सर्वश्रेष्ठ माँ भगवती ब्रह्मचारिणी मुझसे पर अति प्रसन्न हों। माँ ब्रह्मचारिणी सदैव अपने भक्तो पर कृपादृष्टि रखती हैं एवं सम्पूर्ण कष्ट दूर करके अभीष्ट कामनाओ की पूर्ति करती हैं। देवी दुर्गा का यह दूसरा रूप भक्तों एवं सिद्धों को अमोघ फल देने वाला हैं। साधक इस दिन अपने मन को माँ के चरणों में लगाते हैं। देवी ब्रह्मचारिणी की उपासना से तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार, संयम की वृद्धि होती हैं। माँ ब्रह्मचारिणी की कृपा से मनुष्य को सर्वत्र सिद्धि और विजय की प्राप्ति होती हैं, तथा जीवन की अनेक समस्याओं एवं परेशानियों का नाश होता हैं। देवी ब्रह्मचारिणी का स्वरूप पूर्ण ज्योर्तिमय हैं। मां दुर्गा की नौ शक्तियों में से द्वितीय शक्ति देवी ब्रह्मचारिणी का हैं। ब्रह्म का अर्थ हैं तपस्या और चारिणी यानी आचरण करने वाली अर्थात तप का आचरण करने वाली मां ब्रह्मचारिणी। यह देवी शांत और निमग्न होकर तप में लीन हैं। मुख पर कठोर तपस्या के कारण अद्भुत तेज और कांति का ऐसा अनूठा संगम हैं जो तीनों लोको को उजागर कर रहा हैं। इस प्रकार ब्रह्मचारिणी का अर्थ हुआ तप का आचरण करने वाली। देवी ब्रह्मचारिणी के दाहिने हाथ में अक्ष माला हैं और बायें हाथ में कमण्डल होता हैं। देवी ब्रह्मचारिणी साक्षात ब्रह्म का स्वरूप हैं अर्थात तपस्या का मूर्तिमान रूप हैं। इस देवी के कई अन्य नाम हैं जैसे तपश्चारिणी, अपर्णा और उमा। इस दिन साधक का मन ‘स्वाधिष्ठान ’चक्र में स्थित होता हैं। इस चक्र में अवस्थित साधक मां ब्रह्मचारिणी जी की कृपा और भक्ति को प्राप्त करता हैं। माँ ब्रहम चारिणी की पूजा में आप मटमैले रंग के वस्त्रों का प्रयोग कर सकते हैं यह दिन “राहु शांति पूजा के लिए” सर्वोत्तम दिन हैं। द्वितीय नवरात्र के दिन माँ ब्रह्मचारिणी को शक्कर का भोग लगाएँ।इससे आयु वृद्धि होती हैं। माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा : - सर्वप्रथम आपने जिन देवी-देवताओ एवं गणों व योगिनियों को कलश में आमत्रित किया हैं उनकी फूल, अक्षत, रोली, चंदन, से पूजा करें उन्हें दूध, दही, शर्करा, घृत, व मधु से स्नान करायें व देवी को जो कुछ भी प्रसाद अर्पित कर रहे हैं उसमें से एक अंश इन्हें भी अर्पण करें। प्रसाद के पश्चात आचमन और फिर पान, सुपारीभेंट कर इनकी प्रदक्षिणा करें। कलश देवता की पूजा के पश्चात इसी प्रकार नवग्रह, दशदिक्पाल, नगर देवता, ग्राम देवता, की पूजा करें। इनकी पूजा के पश्चात मॉ ब्रह्मचारिणी की पूज माँ ब्रह्मचारिणी मंत्र!!!!!! या देवी सर्वभू‍तेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।। अर्थ : हे माँ! सर्वत्र विराजमान और ब्रह्मचारिणी के रूप में प्रसिद्ध अम्बे, आपको मेरा बार-बार प्रणाम हैं। या मैं आपको बारंबार प्रणाम करता हूँ। माँ ब्रह्मचारिणी श्लोक!!!!! दधाना कर पद्माभ्याम अक्षमाला कमण्डलू। देवी प्रसीदतु मई ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।। माँ ब्रह्मचारिणी ध्यान,,,, वन्दे वांछित लाभायचन्द्रार्घकृतशेखराम्। जपमालाकमण्डलु धराब्रह्मचारिणी शुभाम्॥ गौरवर्णा स्वाधिष्ठानस्थिता द्वितीय दुर्गा त्रिनेत्राम। धवल परिधाना ब्रह्मरूपा पुष्पालंकार भूषिताम्॥ परम वंदना पल्लवराधरां कांत कपोला पीन। पयोधराम् कमनीया लावणयं स्मेरमुखी निम्ननाभि नितम्बनीम्॥ ब्रह्मचारिणी स्तोत्र पाठ,,,, तपश्चारिणी त्वंहि तापत्रय निवारणीम्। ब्रह्मरूपधरा ब्रह्मचारिणी प्रणमाम्यहम्॥ शंकरप्रिया त्वंहि भुक्ति-मुक्ति दायिनी। शान्तिदा ज्ञानदा ब्रह्मचारिणीप्रणमाम्यहम्॥ मां ब्रह्मचारिणी कवच,,,,,,, त्रिपुरा में हृदयं पातु ललाटे पातु शंकरभामिनी। अर्पण सदापातु नेत्रो, अर्धरी च कपोलो॥ पंचदशी कण्ठे पातुमध्यदेशे पातुमहेश्वरी॥ षोडशी सदापातु नाभो गृहो च पादयो। अंग प्रत्यंग सतत पातु ब्रह्मचारिणी। नवरात्री में दुर्गा सप्तशती पाठ किया जाता हैं माँ ब्रह्मचारिणी कथा!!!!!!! माता ब्रह्मचारिणी हिमालय और मैना की पुत्री हैं। इन्होंने देवर्षि नारद जी के कहने पर भगवान शंकर की ऐसी कठोर तपस्या की जिससे प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने इन्हें मनोवांछित वरदान दिया। जिसके फलस्वरूप यह देवी भगवान भोले नाथ की वामिनी अर्थात पत्नी बनी। जो व्यक्ति अध्यात्म और आत्मिक आनंद की कामना रखते हैं उन्हें इस देवी की पूजा से सहज यह सब प्राप्त होता हैं। देवी का दूसरा स्वरूप योग साधक को साधना के केन्द्र के उस सूक्ष्मतम अंश से साक्षात्कार करा देता हैं जिसके पश्चात व्यक्ति की ऐन्द्रियां अपने नियंत्रण में रहती हैं और साधक मोक्ष का भागी बनता हैं। माँ ब्रह्मचारिणी की प्रतिमा की पंचोपचार सहित पूजा करके जो साधक स्वाधिष्ठान चक्र में मन को स्थापित करता हैं उसकी साधना सफल हो जाती हैं और व्यक्ति की कुण्डलनी शक्ति जागृत हो जाती हैं। जो व्यक्ति भक्ति भाव एवं श्रद्धादुर्गा पूजा के दूसरे दिन मॉ ब्रह्मचारिणी की पूजा करते हैं उन्हें सुख, आरोग्य की प्राप्ति होती हैं और प्रसन्न रहता हैं, उसे किसी प्रकार का भय नहीं सताता हैं। माँ दुर्गा की आरती!!!!! जय अंबे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी । तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी ॥ ॐ जय अंबे गौरी..... मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को । उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको ॥ ॐ जय अंबे गौरी..... कनक समान कलेवर, रक्तांबर राजै । रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै ॥ ॐ जय अंबे गौरी..... केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी । सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी ॥ ॐ जय अंबे गौरी..... कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती । कोटिक चंद्र दिवाकर, राजत सम ज्योती ॥ ॐ जय अंबे गौरी..... शुंभ-निशुंभ बिदारे, महिषासुर घाती । धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती ॥ ॐ जय अंबे गौरी..... चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे । मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भय दूर करे ॥ ॐ जय अंबे गौरी..... ब्रह्माणी, रूद्राणी, तुम कमला रानी । आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी ॥ ॐ जय अंबे गौरी..... चौंसठ योगिनी गावत, नृत्य करत भैंरू । बाजत ताल मृदंगा, अरू बाजत डमरू ॥ ॐ जय अंबे गौरी..... तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता । भक्तन की दुख हरता, सुख संपति करता ॥ ॐ जय अंबे गौरी..... भुजा चार अति शोभित, वरमुद्रा धारी । मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी ॥ ॐ जय अंबे गौरी..... कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती । श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योती ॥ ॐ जय अंबे गौरी..... श्री अंबेजी की आरति, जो कोइ नर गावे । कहत शिवानंद स्वामी, सुख-संपति पावे ॥ ॐ जय अंबे गौरी,,,

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कामेंट्स

ǟռʝʊ ʝօֆɦɨ Mar 26, 2020
🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩 🙏जय माता दी 🙏 🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩 शुभ संध्या का सादर नमन मेरी बहना जी 🌹🌹🙏 माता रानी आपका सदा कल्याण करे।

ghanshyam sharma Mar 26, 2020
🙏🕉️🚩जय श्री लक्ष्मी नारायण जी की जय हो 🙏 शुभ संध्या वंदन जी 🙏 श्री लक्ष्मी नारायण जी की कृपा दृष्टि सदैव आप और आपके परिवार पर बनीं रहे 🙏🏻 आप हमेशा खुश रहे और स्वस्थ रहें 🙏🕉️🚩

नरेश श्री हरि🙏 Mar 26, 2020
जय श्री राधे कृष्णा श्री हरि विष्णु की कृपा दृष्टि आप पर हमेशा बनी रहे शुभ संध्या वंदन 🙏

राजेश अग्रवाल Mar 26, 2020
*बड़े दौर गुजरे हैं जिंदगी के 🚦* *यह दौर भी गुजर जायेगा..!!* *थाम लो अपने पांव को घरों में 👣* *कोरोना भी थम जाएगा..!!* *माँ से प्रार्थना है हमारी🙏🙏 माँ की मेहर हम सभी पर बनी रहे मातारानी सभी का कल्याण करो, 🙏🌹जय माता दी🌹🙏

Ragni Dhiwar Mar 26, 2020
🌷*सुख, शांति, सफलता, यश कीर्ति, सम्पन्नता एवं स्वास्थ्य की असीमित मंगलकामनाओं व शुभकामनाओं के साथ मधुर* शुभ दिवस*बहन 🙏🌷जय माता दी 🌷

Pawan Saini Mar 26, 2020
जय माता दी बहन जी 🙏🌳🌸 मां ब्रह्मचारिणी देवी की कृपा दृष्टि से आप और आपके घर परिवार में सुख शांति समृद्धि बनी रहें बहन जी 🙏 मां ब्रह्मचारिणी देवी आप और आपके परिवार की सभी मनोकामनाएं पूरी करे आप का हर एक पल मंगलमय हो शुभ संध्या स्नेह वंदन बहन जी 🙏

R S Kanaujia Mar 26, 2020
आप पर माता रानी की कृपा बनी रहे, नेहाजी 🌹🌹

Brajesh Sharma Mar 26, 2020
जय माता दी... जय माता दी🙏 जय जय श्री राधे कृष्णा जी....🙏

Mohanmira.nigam Mar 26, 2020
Jay.shri ganesh ji Bholay.baba.ki.jay Jay vishnu.hari.ji om sai Ram ji hanuman ji Bholay.baba.ki.jay very nice

Mohanmira.nigam Mar 26, 2020
Jay.shri Bramhcharini mata Rani kali.mata ji Santosi mata Rani Sarasvati mata Rani ji hanuman ji Bholay.baba.ki.jay very nice

विलास पटारे पाटील Mar 26, 2020
शुभ रात्री वंदन राम राम जी 🙏🙏 जय भोलेनाथ. 🌿🕉️🙏🌿🕉️🙏 भगवान भोलेनाथ व आदिमाया आदिशक्ती तुमच्या सर्व मनोकामना पूर्ण करो हीच भोलेनाथ व आदिमाया आदिशक्ती चरणी प्रार्थना.🌿🕉️🙏🌿🕉️🙏 राम राम जी 🙏🙏 कोरोना सारख्या महामारीने सर्व जगात आपले वर्चस्व प्रस्थापित केले आहे.सर्व देशांनी या महामरी समोर हात टेकले आहेत.तेव्हा आपणच आपली व कुटुंबाची काळजी घ्या.प्रधानमंत्री यांनी दिलेल्या आदेशाचे पालन करा घरात थांबुनच ही महामारी आपण आटोक्यात आनू शकतो. घरात थांबुन आपणच आपली रक्षा करू या व या महामारीला रोकू या . 🌿🕉️🙏🌿🕉️🙏🌿🕉️🙏🌿🕉️🙏 *

🚩SHREYA RAJPUT🚩 Mar 26, 2020
Radhe Radhe Jai Shree krishna Ji aap or apki family pr krishna Ji Di kripa Bna rhe Good Night Meri pyari Bahena Ji 🙏🙏🌹🌹

7354543081🌹Sittu Rajput🌹mp Mar 26, 2020
जय मां ब्रह्मचारिणी जय भवानी मां🙏🙏 शुभ रात्रि स्नेह वंदन जी आप और आपके समस्त परिवार को मां का शुभ आशीष और आशीर्वाद मिले आपका हर पल ढेरों खुशियों भरा हो यही प्रार्थना है मां से हमारी जय माता दीdidi🍃🌹🙏🙏🌹🍃

Anilkumar Marathe Mar 26, 2020
🙏जय श्री कृष्ण नमस्कार आदरणीय नेहा जी !! 🌹नदी में गिरने से किसी की जान नहीं जाती, जान तभी जाती है जबकि तैरना नहीं आता परिस्थितियाँ कभी समस्या नहीं बनती, समस्या तभी बनती है, जब हमें परिस्थितियों से निपटना नहीं आता, मा दुर्गा आप व आपके परिवार को कोरोना वायरस एवम सभी आपत्तियों से सलामत रखे , शुभरात्री वंदन जी

Brajendra Kumar Misra Mar 27, 2020
🌷🌷जगदंबिके हे अंबिके शत-शत तुम्हें प्रणाम है 🌷🌷

Brajendra Kumar Misra Mar 27, 2020
🌷🌷बहुत ही धार्मिक एवं ज्ञानवर्धक लेख है 🌷🌷

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