Mamta Chauhan
Mamta Chauhan Mar 26, 2020

Suvichar 🌿Jai Mata Di 🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌷🌿🌿🌿🌷🌿🌿🌿🌿🌿

Suvichar 🌿Jai Mata Di 🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌷🌿🌿🌿🌷🌿🌿🌿🌿🌿

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कामेंट्स

Sumitra Soni Mar 26, 2020
जय माता दी🙏🏻 बहना माता रानी बहना ki बहना के परिवार की रक्षा करें इनको सदा स्वस्थ रखे खुशी खुश रखें आपका आने वाला हर पल खुशियों भरा हो बहना जी🙏🏻🌹

madanpal singh Mar 26, 2020
jai Mata Diiiiiiiiii 🌹 Shubh sandaya Jiiii Mata Rani ki karpa sadev AAP v aapka pariwar par bani rahe jiii 🌷 🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🌹 🕉️🌹

Neeraj Mar 26, 2020
जय माता दी

bhim Mar 26, 2020
j Mata d good evening

Vanita Kale Mar 26, 2020
🙏🌺👣🌺जय माता दी माता रानी की कृपा दृष्टि आप और आपके पुरे परिवार पर सदा ही बनी रहे मेरी प्यारी प्यारी बहना जी आप का आने वाला पल ढेर सारी खुशियाे लेकर आए मेरी प्यारी बहना जी 💞💞🙏

Mavjibhai Patel Mar 26, 2020
@mamtachauhan3 जय भारत माता की जय हिन्द जय माता दी जय महाकाल शुभ संध्या वंदन वेरी गुड

Brajesh Sharma Mar 26, 2020
जय माता दी... जय माता दी🙏 जय जय श्री राधे कृष्णा जी....🙏

Gajanan Mahadev Sonawane. Mar 26, 2020
जय श्री महाकाली नमोस्तुते शुभ रात्री धन्यवाद 🌹

Mohanmira.nigam Mar 26, 2020
Jay.shri mata Bramhcharini mata Rani ji Bholay.baba.ki.jay very nice

संजीव मेहरा Mar 26, 2020
जय मां उच्चाया पहाड़ा वाली तेरी सदा ही जय। घर में रहें स्वस्थ रहें

Kamlesh Mar 27, 2020
जय माँ चन्द्रघंटा 🙏🙏

DAVINDER KUMAR RANA Mar 27, 2020
JAI Mata Di dear sister Ji Shubh Dopher Ji God bless you and your family Always Mata Rani Aap Ji ki Har manokamna Puri Kara Ji Sada Sukhi Raho Bahana Ji May you LIVE long Evermore JEEYO

Neha Sharma, Haryana Mar 27, 2020

☘️🌹🙏*जय श्री राधेकृष्णा"🙏🌹☘️ "एक पल के लिये मान लेते हैं कि, *किस्मत में लिखे फैसले बदला नहीं करते. *लेकिन... *आप फैसले तो लीजिये *क्या पता, *किस्मत ही बदल जाए.! 🍃🌹🎑 *शुभ रात्रि नमन* 🎑🌹🍃 आप सभी भाई-बहनों को रात्रि शुभ व मंगलमय हो! ☘️💨☘️💨☘️💨☘️💨☘️💨☘️ पांच सकारात्मक बदलाव जो कोरोना संकट की वजह से देखने को मिल रहे हैं कोरोना वायरस के चलते कई बड़े संकट हमारे सामने हैं लेकिन इसने हमें कुछ फौरी राहतें भी दी हैं। 1. धर्म और नस्ल का भेद – राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि दुनिया के ग्लोबल विलेज बनने के साथ ही राष्ट्रवाद की भावना ने जोर पकड़ा है. लगभग हर देश के लोग, किसी न किसी समुदाय से खतरा महसूस करते हैं या अपने आप को उनसे श्रेष्ठ समझते हैं. बीते कुछ समय के भारत को देखें तो यहां सांप्रदायिक समीकरणों की वजह से लगातार सामाजिक समीकरणों को बिगड़ते देखा जाता रहा है. अब जब दुनिया भर में कोरोना वायरस का प्रकोप फैल गया है तो इन सब बातों के बारे में सोचने की फुर्सत ज्यादातर लोगों को नहीं है. अभी समाज, देश और दुनिया बंटे हुये तो हैं लेकिन यह बिलकुल अलग तरह और वजह से हुआ है. इस समय अपने परिवार को छोड़कर लोग पड़ोसी से भी बात नहीं कर रहे हैं तो यह मजबूरी की वजह से है. यही बात देशों के एक-दूसरे से कटने के बारे में भी कही जा सकती है. 2. श्रम की पहचान – सवा अरब की जनसंख्या वाले भारत में मानव संसाधन की कोई कमी नहीं है. शायद यही वजह है कि य़हां पर न तो इंसान की मेहनत की उचित कीमत लगाई जाती है और न ही उसे पर्याप्त महत्व दिया जाता है. कथित छोटे काम करने वालों को अक्सर ही यहां हेय दृष्टि से देखा जाता है. फिर चाहे वह घर में काम करने वाली बाई हो या कचरा उठाने वाला कर्मचारी या घर तक सामान पहुंचाने वाला डिलीवरी बॉय. लेकिन कोरोना वायरस के हमले के बाद ज्यादातर लोगों को (सबको नहीं) इनका महत्व समझ में आने लगा है. हममें कई लोगों ने पिछले दिनों इस बारे में जरूर सोचा होगा कि वह व्यक्ति होगा जो सुबह-शाम हमारे नल की सप्लाई शुरू करता करता है अगर वह ऐसा करना बंद कर दें तो क्या होगा? या फिर कूड़े वाला अगले 21 दिन कूड़ा ना उठाये तो? कहीं लॉकडाउन खत्म होने से पहले वॉटर प्यूरीफायर खराब हो गया तो? या फिर डिलीवरी करने वाले ऐसा करना बंद कर दें तो? कोरोना संकट के इस वक्त में बड़े फैसले और ‘महत्वपूर्ण’ काम करने वाले ज्यादातर लोग घरों में बंद हैं और बहुत मूलभूत काम पहले की तरह जमीन पर ही हो रहे हैं. यह अहसास इस वक्त ज्यादातर लोगों को है लेकिन यह कितना स्थायी है यह कुछ समय बाद पता चल पाएगा. 3. प्रदूषण का कम होना – दिल्ली-मुंबई जैसे मेट्रो शहरों समेत लगभग पूरे देश में इस वक्त लॉकडाउनहै. इसके कारण फैक्ट्रियां, ऑपिस यहां तक कि रेल-बस सुविधाएं भी बंद हैं. इन सबके बंद होने से अर्थव्यवस्था को तो खासा नुकसान हो रहा है लेकिन पर्यावरण की हालत थोड़ी सुधरती लग रही है. अगर दिल्ली-एनसीआर की बात करें तो यहां फर्क साफ महसूस किया जा सकता है और आंकड़े भी कुछ ऐसी ही बात करते हैं. 26 मार्च, 2020 को नोएडा का एयर क्वालिटी इंडेक्स 77 का आंकड़ा दिखा रहा था. जबकि इसी तारीख को 2019 में यह आंकड़ा 156 यानी इसके दुगने से भी ज्यादा था. फिलहाल हर बढ़ते दिन के साथ एक्यूआई कम हो रहा है. साफ है कि लॉकडाउन के चलते हवा की गुणवत्ता बढ़ गई है. यह देखना थोड़ा खुशी देता है कि दिल्ली-एनसीआर जैसे इलाकों में भी आजकल चिड़ियों की चहचहाहट सुनाई देने लगी है. 4. परिवार के साथ समय – हाल ही में फिल्म निर्देशक अनुराग कश्यप ने वीडियो कॉल पर दिए अपने इंटरव्यू में बताया कि कोई काम न होने के चलते एक दिन उन्होंने अपनी बेटी के साथ बैठकर करीब छह घंटे तक गप्पें मारीं. उनके मुताबिक बीते 15 सालों में ऐसा पहली बार हुआ था. हालांकि कश्यप एक व्यस्त फिल्मकार हैं और उनकी बेटी भी भारत में नहीं रहती है, इसलिए उनके साथ ऐसा होना स्वाभाविक है. लेकिन जीवन की भागदौड़ में कई बार बेहद आम लोग भी अपने परिवार को पर्याप्त समय नहीं दे पाते हैं. यह लॉकडाउन परिवार के साथ वक्त बिताने का भी मौका बन गया है. इसके अलावा, इस वक्त को पुराने दोस्तों और छूट चुके रिश्तेदारों को याद करने और उनसे फोन या मैसेजिंग के जरिये संपर्क करने के लिए भी इस्तेमाल किया जा रहा है. 5. आर्थिक समीकरण – यह तय है कि कोरोना वायरस के चलते दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं की स्थिति डांवाडोल होने वाली है. हो सकता है कि इसके असर को पूरी तरह खत्म होने में अगले कई सालों का वक्त लगे. लेकिन इसकी वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत आधी से भी कम हो गई है. तेल के दाम कम हैं इसलिए भारत सरकार इसकी बाज़ार कीमत बढ़ाए बगैर, इस पर ज्यादा एक्साइज ड्यूटी वसूल कर रही है. जानकारों का मानना है कि तेल के दाम अब एक लंबे समय तक नहीं बढ़ने वाले. कोरोना की मुसीबत से छुटकारा पाने के बाद भी. ऐसे में इससे न केवल सरकार को ज्यादा राजस्व मिल सकता है बल्कि देश का चालू खाते का घाटा भी थोड़ा कम हो सकता है और महंगाई भी नियंत्रण में रखी जा सकती है. यह और बात है कि कोरोना के चलते अर्थव्यवस्था को जो नुकसान होगा उसके सामने ये चीजें उतनी मायने नहीं रखती हैं. लेकिन यह कोरोना संकट के भुस में फायदे की एक छोटी सुई तो है ही. *जय श्री राधेकृष्णा*🙏🙏 आज भी बरसाना और नंदगांव जैसे गाँव आपको दुनिया में कहीं नहीं मिलेंगे दोनों में सिर्फ पांच छह मील का फर्क है !! ऊंचाई से देखने पर दोनों एक जैसे ही दीखते हैं !! आज तक बरसाना वासी राधा को अपनी बेटी और नंदगांव वाले कान्हा को अपना बेटा मानते हैं !! 5160 बरस बीत गए परन्तु उन लोगों के भावों में फर्क नहीं आया !! आज तक बरसाने की लड़की नंदगांव में ब्याही नहीं जाती सिर्फ इसलिए की नया रिश्ता जोड़ लिया तो पुराना भूल जाएगा !! हमारा राधाकृष्ण से प्रेम कम ना हो इसलिए हम नया रिश्ता नहीं जोड़ेंगे आपस में !! आज भी नंदगांव के कुछ घरों की स्त्रियां घर के बाहर मटकी में माखन रखती हैं कान्हा ब्रज में ही है वेश बदल कर आएगा और माखन खायेगा !! जहां 10 -12 बच्चे खेल रहे हैं उनमे एक कान्हा जरूर है ऐसा उनका भाव है आज भी !! ब्रज भूमि को भाव से देखिये वरना जाना बेकार है लेकिन आज भी बरसाने का वृद्द नंदगांव आएगा तो प्यास चाहे तड़प ले पर एक बूँद पानी नहीं पियेगा नंदगांव का क्योंकि उनके बरसाने की राधा का ससुराल नंदगांव है !! और बेटी के घर का पानी भी नहीं पिया जाता उनका मानना आज भी जारी है !! इतने प्राचीन सम्बन्ध को आज भी निभाया जा रहा है !! धन्य है ब्रज भूमि का कण कण करोड़ों बार प्रणाम मेरे प्रियतम प्रभु की जनम भूमि ,लीलाभूमि व् प्रेमभूमि को😊😊☺☺👣👣 🚩🚩🙏🏻🙏🏻*जय श्री राधेकृष्णा*🙏🏻🙏🏻🚩🚩 [~💐~ ठाकुर जी का प्रसाद ~💐~ . महाराष्ट में केशव स्वामी नाम के एक महात्मा थे। वे जानते थे कि भगवन्नाम जपने से कलियुग के दोष दूर हो जाते हैं। . यदि कोई शुरु में होठों से भगवान का नाम जपे, फिर कंठ में, फिर हृदय से जपे और नाम के अर्थ में लग जाय तो हृदय में भगवान प्रकट भी हो सकते हैं। . एक बार केशव स्वामी बीजापुर (कर्नाटक) गये। उस दिन एकादशी थी। रात को केशव स्वामी ने कहा, "चलो, आज जागरण की रात्रि है, सब भक्त हैं तो प्रसाद ले आओ।" . अब फलाहार में क्या लें? रात्रि को तो फल नहीं खाना चाहिए। . बोले, सौंठ और शक्कर ठीक रहेगी क्योंकि शक्कर शक्ति देगी और सोंठ कफ का नाश करेगी। . अकेली शक्कर उपवास में नहीं खानी चाहिए। सोंठ और शक्कर ले आओ, ठाकुर जी को भोग लगायेंगे। . अब देर हो गयी थी, लगभग अर्द्धरात्रि का समय हो रहा था, दुकानवाले तो सब सो गये थे। किसी दुकानदार को जगाया। . लालटेन का जमाना था। सोंठ के टुकड़े और वचनाग के टुकड़े एक जैसे लगे तो अँधेरे-अँधेरे में दुकानदार ने सोंठ की बोरी के बदले वचनाग की बोरी में से सोंठ समझ के पाँच सेर वचनाग तौल दिया। . अब वचनाग तो हलाहल जहर होता है, फोड़े-फुंसी की औषधि बनाने वाले वैद्य उससे ले जाते थे। . अँधेरे-अँधेरे में शक्कर के साथ वचनाग पीसकर प्रसाद बना दिया गया और ठाकुर जी को भोग लगा दिया। . ठाकुर जी ने देखा कि केशव स्वामी के सभी भक्त सुबह होते-होते मर जायेंगे। उनको तो बेचारों को खबर ही नहीं थी कि सोंठ की जगह यह हलाहल जहर आया है। . ठाकुर जी ने करूणा-कृपा करके प्रसाद में से जहर स्वयं ही खींच लिया। . सुबह व्यापारी ने देखा तो बोला, "अरा.... रा... रा.... यह क्या हो गया? सोंठ का बोरा तो ज्यों का त्यों पड़ा है, मैंने गलती से वचनाग दे दिया। वे सब भक्त मर गये होंगे। मेरा तो सत्यानाश हो जायेगा। . व्यापारी डर गया, दौड़ा-दौड़ा आया और बोला, "कल मैंने गलती से वचनाग तौल के दे दिया था, किसी ने खाया तो नहीं? . केशव स्वामी बोले, "वह तो रात को प्रसाद में बँट गया। . व्यापारी, "कोई मरा तो नहीं?" . नहीं..!! किसी को कुछ नहीं हुआ। . केशव स्वामी और उस व्यापारी ने मंदिर में जाकर देखा तो ठाकुर जी के शरीर में विकृति आ गयी थी। . मूर्ति नीलवर्ण हो गयी, एकदम विचित्र लग रही थी मानो, ठाकुर जी को जहर चढ़ गया हो। . केशव स्वामी सारी बात समझ गये, बोले, "प्रभु ! आपने भाव के बल से यह जहर चूस लिया लेकिन आप तो सर्वसमर्थ हैं। पूतना के स्तनों से हलाहल जहर पी लिया और आप ज्यों-के-त्यों रहे, कालिय नाग के विष का असर भी नहीं हुआ तो यह वचनाग का जहर आपके ऊपर क्या असर कर गया? आप कृपा करके इस जहर के प्रभाव को हटा लीजिए और पूर्ववत् हो जाइये। . इस प्रकार स्तुति की तो देखते ही देखते व्यापारी और भक्तों के सामने भगवान की मूर्ति पहले जैसी प्रकाशमयी, तेजोमयी हो गयी। . 🌷समय कैसा भी हो स्थिति कैसी भी हो यदि भक्त के हृदय में भगवान् विराजमान है तो भक्त का अहित कभी हो ही नही सकता। वह तोजोमय, लीलाधारी भगवान् अपने भक्तों की रक्षा हर प्रकार से करते ही हैं।🌷 . 🙏🙏*जय श्री राधेकृष्णा*🙏🙏 [ *हिटलर को संदेश भेज दो ....* द्वितीय विश्वयुद्ध का समय:- जर्मनी के बमवर्षकों का खौफ लन्दन में दूध की लंबी लाइन वितरण कर रहे व्यक्ति ने घोषणा की, केवल एक बोतल और है, बाकी के लोग कल आयें। आखिरी दूध की बोतल जिस शख्स के हाथ आई उसके ठीक पीछे एक महिला खड़ी थी जिसकी गोद में छोटा बच्चा था। उसके चेहरे पर अचानक चिंता की लकीरें उभर आईं लेकिन अचानक उसने देखा वितरण करने वाला व्यक्ति उसके हाथ में बोतल थमा रहा था। वह चौंकी । उसके आगे खड़ा व्यक्ति बिना दूध लिए लिए लाइन से हट गया था ताकि छोटे बच्चे को गोद में लिए वह महिला दूध हासिल कर सके। अचानक तालियों की आवाज आने लगी। लाइन में खड़े सभी व्यक्ति उस शख्स का करतलध्वनि से अभिनन्दन कर रहे थे। लेकिन उस शख्स ने उस महिला के पास जाकर कहा आपका बच्चा बहुत ही प्यारा है । वह इंग्लैंड का भविष्य है उसकी अच्छी परवरिश करिए। इस घटना की खबर प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल के पास जब पहुंची तो वे जर्मनी के जबरदस्त हमलों की विभीषिका से उत्पन्न चिंता से उबरकर बोल पड़े। हिटलर को संदेश भेज दो, ब्रिटेन की जीत को कोई नहीं रोक सकता क्योंकि यहां के लोग देश पर मंडरा रहे संकट के समय अपना निजी हित भूलकर देश के बारे में सोचते हैं। चर्चिल का विश्वास सच निकला। ब्रिटेन विश्वयुद्ध में विजेता बनकर उभरा । # हमारे देश पर भी संकट मंडरा रहा है। क्या हम अपनी चारित्रिक श्रेष्ठता प्रमाणित करने तैयार हैं?? कृपा इसे आगे भेजने का कष्ट करें। धन्यवाद🙏 *जय श्री राधेकृष्णा*🥀🥀🙏

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Jagruti patel Mar 27, 2020

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Amar jeet mishra Mar 28, 2020

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NEha sharma 💞💞 Mar 27, 2020

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R.G.P.Bhardwaj Mar 27, 2020

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R.G.P.Bhardwaj Mar 27, 2020

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Jagruti patel Mar 27, 2020

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