चिराग
चिराग Nov 12, 2017

केवल ऐसे मनुष्य ही दे सकते है श्राप

केवल ऐसे मनुष्य ही दे सकते है श्राप

केवल ऐसे मनुष्य ही दे सकते है श्राप

प्राचीनकाल में हिन्दू धर्मो के आधार पर श्रापों कि बहुत अधिक मान्यता थी इन श्रापों से बड़े से बड़े देवतागण भी वंचित नहीं रहे तथा यह श्राप जिस किसी को भी लगता है उसे उसके फल स्वरुप परिणाम मिल ही जाता है, प्राचीनकाल में श्राप ही एक ऐसा वचन है जिसे केवल ऋषि मुनि, देवी-देवता, या फिर ऐसे मनुष्य जिन्होंने कभी पाप न किया हो जिन्होंने योग तपस्या से अपनी सात्विक इन्द्रियाँ जाग्रत कि हो, ऐसे लोग श्राप देने के ऑफिसर होते है। आज हम कुछ ऐसे ही श्रापों के बारे में बात करेंगे जिन्हें आज भी याद किया जाता है।

1.महाभारत में युद्ध के बाद गांधारी ने श्रीकृष्ण को श्राप दिया था कि जिस प्रकार पांडव व कौरव आपसी फूट के कारण नष्ट हुए थे अच्छा उसी प्रकार आज से छत्तीसवें साल तुम भी अपने बंधू-बंधवो का वध करोगे।

2.महाभारत में युद्ध के बाद युधिष्ठिर ने शोक में आकर (दुखी होकर) पूरी स्त्री जाती को श्राप दिया था कि वे कोई भी बात हो किसी से छिपा नहीं पाएंगी व यह श्राप आज भी पूरी स्त्री जाती को लगा हुआ है।

3.महाभारत में युद्ध से पहले उर्वशी ने अर्जुन को श्राप दिया था कि वह नपुंशक हो जाएगा व उसेमहिलाओं में नर्तक बनकर रहना पड़ेगा।

4.राजा अनरण्य व रावण के बीच युद्ध हुआ था उस युद्ध में राजा अनरण्य कि मृत्यु हो गयी थी राजा अनरण्य मरने से पहले रावण को श्राप दिया था रघुवंशी ही तेरी मौत का कारण बनेगा।

5.तुलसी ने ईश्वर गणेश को श्राप दिया था कि उनका शादी उनके ख़्वाहिश अनुसार नहीं होगा।

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कामेंट्स

Sunil Ag Nov 12, 2017
jai ho jai jai sri radhey krishna ji

लक्ष्य सिखवाल Nov 12, 2017
जय श्री कृष्ण गणेश जी को तुलसी ने श्राप दिया कि तुम्हारी शादी दो औरतो से होगी ! व गणेश जी ने तुलसी को श्राप दिया कि तुम्हारी शादी राक्षस से होगी!

Deepti Singh Nov 12, 2017
हाँ,गणेश जी की दो पत्नियां थीं।

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