Mamta Nayak
Mamta Nayak Jan 3, 2017

Mamta Nayak ने यह पोस्ट की।

Mamta Nayak ने यह पोस्ट की।
Mamta Nayak ने यह पोस्ट की।
Mamta Nayak ने यह पोस्ट की।
Mamta Nayak ने यह पोस्ट की।

+42 प्रतिक्रिया 8 कॉमेंट्स • 7 शेयर

कामेंट्स

ramkesh sharma Jan 3, 2017
✍ *“परिश्रम सौभाग्य की जननी है ”* *“देने के लिये दान,* _लेने के लिये ज्ञान,_ 🍁 “और”🍁 ✍ *त्यागने के लिए अभिमान* _सर्वश्रेष्ठ है”_ Ramkesh 9802240440

SunitaSharma May 15, 2021

+28 प्रतिक्रिया 5 कॉमेंट्स • 16 शेयर
[email protected] May 15, 2021

+8 प्रतिक्रिया 2 कॉमेंट्स • 5 शेयर
Manohar Suryawanshi May 15, 2021

+1 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 2 शेयर
Shefali Sharma May 15, 2021

+6 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 2 शेयर
Ansouya M 🍁 May 15, 2021

🙏🙏श्री गणेशाय नमः 🌹🙏🌹🙏 🙏🙏🙏🙏🙏जय श्री राधे कृष्ण 🙏🙏🕉 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏शुभ संध्या आप सभी को जी 🙏🙏🙏🙏🌿इंसान बहरा नहीं लेकिन सुनता भी नहीं🌿 किसी सज्जन ने कहा कि सच्चे गुरु एक ही बात को हर बार दोहराते हैं। बार-बार स्वांस और शांति-शांति दोहराते रहते हैं तो बोरिंग होने लगती है। एक बार सुन लिया काफी है। इसका बहुत ही सुंदर उत्तर इस प्रकार है। सच्चे गुरु परलोक और शास्त्र की बातें नहीं करते। वे इतना ही बताते हैं जो करना बहुत जरूरी है। ज्यादा व्यर्थ की विस्तार की बातें बताने से मनुष्य भटक जाता है। इन्हीं विस्तार की बातों से मनुष्य बहुत पहले से ही भटका हुआ है। सच्चे गुरु स्वांसों के सत्य ज्ञान की थोड़ी सी ही क्रिया देते हैं। स्वांस ही जीवन का आधार है। अगर स्वांसों के होते इंसान क्रियाओं का अभ्यास कर ले तो उस क्रिया में इतनी बड़ी आग है जो अंधकार को जला डालती है। क्रिया की आग से मनुष्य के भीतर का शांति रूपी स्वर्ण निखर कर बाहर आ जाता है। सच्चे गुरु सार्थक को ही बार-बार दोहराते हैं ताकि सतत चोट पड़ती रहे। इंसान की तंद्रा ऐसी है कि बार-बार दोहराने पर भी सुन ले तो वह भी आश्चर्य है। सच्चे गुरु जानते हैं कि तुम बहरे नहीं हो लेकिन सुनते भी नहीं हो। तुम सोये हुए भी नहीं हो। इंसान अगर सोया हुआ होता तो जगाना आसान था। लेकिन इंसान जागे हुए सोने का ढोंग करता है और जागते हुए भी उठना नहीं चाहता। इंसान सुनता हुआ मालुम पड़ता है और सुनता भी नहीं है। इसलिए सच्चे गुरु बार-बार स्वांस और शांति-शांति दोहराते हैं। उनकी सारी आकांक्षा मनुष्य केंद्रित है। सबके उपर मनुष्य का सत्य है और जीवन का आधार स्वांस है। जिसने स्वयं के सत्य को साक्षी भाव से जान लिया, उसे कुंजी मिल गई। फिर पूर्ण सत्य और शांति का द्वार उसके लिए खुला है। इसलिए सच्चे गुरु बार-बार दोहराते हैं ताकि तुम इसे सुनकर मन की स्मृति में संगृहीत न कर सको बल्कि हृदय की गहराई में ले जाकर अपने जीवन के आचरण में उतार सको। अगर सच्चे गुरु के वचनों को क्रियाओं के अभ्यास से जीवन की शैली बना लो तो तुम पाओगे कि तुम्हारे भीतर शांति का उभरना शुरू हो गया। तब ऐसी घटना घटती है, जो संसार के नियमों, शब्दों, समय के पार है। गुलाब, चमेली, चंदन की सुगंध वायु की विपरीत दिशा में नहीं जाती। लेकिन जिसके भीतर शांति का फूल खिल गया उसकी सुगंध विपरीत दिशा में भी जाती है और सभी दिशाओं में फैल जाती है। तुम्हारे हृदय के भीतर अनहद नाद की जो वीणा सोई पड़ी है उसके स्वांस रूपी तारों को अभ्यास से छेड़ो और उसे प्रगट हो जाने दो। प्रत्येक व्यक्ति अपने भीतर शांति को लेकर चल रहा है। जब तक उसका फूल न खिले, तब तक बेचैनी रहेगी, अशांति रहेगी, दुख रहेगा। शांति का फूल खिल जाए, वही परम आनंद है, वही मोक्ष है और वही सच्चिदानंद है। 🙏🙏🙏जय सच्चिदानंद जी🙏🙏

+104 प्रतिक्रिया 22 कॉमेंट्स • 46 शेयर
Sweta Saxena May 15, 2021

+12 प्रतिक्रिया 3 कॉमेंट्स • 3 शेयर

भारत का एकमात्र धार्मिक सोशल नेटवर्क

Rate mymandir on the Play Store
5000 से भी ज़्यादा 5 स्टार रेटिंग
डेली-दर्शन, भजन, धार्मिक फ़ोटो और वीडियो * अपने त्योहारों और मंदिरों की फ़ोटो शेयर करें * पसंद के पोस्ट ऑफ़्लाइन सेव करें
सिर्फ़ 4.5MB