Rakhi Saw ने यह पोस्ट की।

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#सुविचार

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*जय श्री राधे कृष्णा* *शुभरात्रि वंदन* #कम_से_कम_लड़कियां_इस_पोस्ट_को_अवश्य_पढ़ें 👇 #अकबर प्रति वर्ष दिल्ली में नौरोज का मेला आयोजित करवाता था...! इसमें पुरुषों का प्रवेश निषेध था! अकबर इस मेले में महिला की वेशभूषा में जाता था और जो महिला उसे मंत्र मुग्ध कर देतीं उसे दासियां छलकपट से अकबर के सम्मुख ले जाती थी! एक दिन मेले में महाराणा प्रताप सिंह जी की भतीजी छोटे भाई महाराज शक्तिसिंह जी की पुत्री मेले में सजावट देखने के लिए आई! जिनका नाम बाईसा किरण देवी था जिनका विवाह बीकानेर के पृथ्वीराज जी से हुआ था! बाईसा किरण देवी सुंदरता को देख कर अकबर अपने आप पर काबू नहीं रख पाया और उसने धोखा से बिना सोचे समझे दासियों के माध्यम से धोखा से जनाना महल में बुला लिया! जैसे ही अकबर ने बाईसा किरण देवी को स्पर्श करने की कोशिश की किरण देवी ने कमर से कटार निकाली और अकबर को नीचे पटक कर उसकी छाती पर पैर रखकर कटार गर्दन पर लगा दी! और कहा नीच नराधम तुझे पता नहीं कि मैं उस महाराणा प्रताप सिंह जी की भतीजी हुं जिनके नाम से तेरी नींद उड़ जाती हैं! बोल तेरी आखिरी इच्छा क्या है! अकबर का खुन सुख गया! उसने कभी सोचा भी नहीं था कि अकबर आज राजपूत बाईसा के चरणों में होगा! किरण देवी ने कहा आज के बाद कभी दिल्ली में नौरोज़ का मेंला मत लगवाना! और आज के बाद कभी भी किसी औरत को परेशान मत करना और अकबर की जान बख्श दी! इस घटना का वर्णन गिरधर आसिया द्वारा रचित# सगत रासों में 632 #पृष्ठ संख्या में दिया गया है बीकानेर संग्रहालय में लगी एक पेंटिंग में भी इस घटना को दोहे के माध्यम से बताया गया है! #किरण सिंहनी सी चढी उर पर खींच कटार! भीख मांगता प्राण की अकबर हाथ पसार! # आज भी इनका चित्र जयपुर संग्रहालय में सुरक्षित है! #आज की लड़कियों को इन चीजों का अनुसरण करना अति आवश्यक है# जय भवानी,जय मा करनी 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

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JAGDISH BIJARNIA Nov 24, 2020

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Neha Sharma, Haryana Nov 23, 2020

*जिंदगी के मायने दूसरो से मत सीखिए.जिंदगी आपकी है, मायने,भी आप तय करें...*एक ये पीढ़ी है, जो "इकट्ठा करने" के लिये जी रही है।*एक वो पीढ़ी थी, जो "इकट्ठा रहने" के लिये जीती थी।चिंतन करते रहे श्री हरि का।जय जय श्री राधेकृष्णा*🙏🌸*शुभ रात्रि नमन*🙏🌸*आइये जानते हैं कौन सी धातु के बर्तन में भोजन करने से क्या क्या लाभ और हानि होती है* *सोना*.....*सोना एक गर्म धातु है। सोने से बने पात्र में भोजन बनाने और करने से शरीर के आन्तरिक और बाहरी दोनों हिस्से कठोर, बलवान, ताकतवर और मजबूत बनते है और साथ साथ सोना आँखों की रौशनी बढ़ता है। *चाँदी*.....*चाँदी एक ठंडी धातु है, जो शरीर को आंतरिक ठंडक पहुंचाती है। शरीर को शांत रखती है इसके पात्र में भोजन बनाने और करने से दिमाग तेज होता है, आँखों स्वस्थ रहती है, आँखों की रौशनी बढती है और इसके अलावा पित्तदोष, कफ और वायुदोष को नियंत्रित रहता है। *कांसा*......*काँसे के बर्तन में खाना खाने से बुद्धि तेज होती है, रक्त में शुद्धता आती है, रक्तपित शांत रहता है और भूख बढ़ाती है। लेकिन काँसे के बर्तन में खट्टी चीजे नहीं परोसनी चाहिए खट्टी चीजे इस धातु से क्रिया करके विषैली हो जाती है जो नुकसान देती है। कांसे के बर्तन में खाना बनाने से केवल 3 प्रतिशत ही पोषक तत्व नष्ट होते हैं। *ताँबा*......*ताँबे के बर्तन में रखा पानी पीने से व्यक्ति रोग मुक्त बनता है, रक्त शुद्ध होता है, स्मरण-शक्ति अच्छी होती है, लीवर संबंधी समस्या दूर होती है, ताँबे का पानी शरीर के विषैले तत्वों को खत्म कर देता है इसलिए इस पात्र में रखा पानी स्वास्थ्य के लिए उत्तम होता है. ताँबे के बर्तन में दूध नहीं पीना चाहिए इससे शरीर को नुकसान होता है। *पीतल*.......*पीतल के बर्तन में भोजन पकाने और करने से कृमि रोग, कफ और वायुदोष की बीमारी नहीं होती। पीतल के बर्तन में खाना बनाने से केवल 7 प्रतिशत पोषक तत्व नष्ट होते हैं। *लोहा*.…....*लोहे के बर्तन में बने भोजन खाने से शरीर की शक्ति बढती है, लोह्तत्व शरीर में जरूरी पोषक तत्वों को बढ़ता है। लोहा कई रोग को खत्म करता है, पांडू रोग मिटाता है, शरीर में सूजन और पीलापन नहीं आने देता, कामला रोग को खत्म करता है, और पीलिया रोग को दूर रखता है. लेकिन लोहे के बर्तन में खाना नहीं खाना चाहिए क्योंकि इसमें खाना खाने से बुद्धि कम होती है और दिमाग का नाश होता है। लोहे के पात्र में दूध पीना अच्छा होता है। *स्टील*......*स्टील के बर्तन नुक्सान दायक नहीं होते क्योंकि ये ना ही गर्म से क्रिया करते है और ना ही अम्ल से. इसलिए नुक्सान नहीं होता है. *इसमें खाना बनाने और खाने से शरीर को कोई फायदा नहीं पहुँचता तो नुक्सान भी नहीं पहुँचता। *एलुमिनियम*.......*एल्युमिनिय बोक्साईट का बना होता है। इसमें बने खाने से शरीर को सिर्फ नुक्सान होता है। यह आयरन और कैल्शियम को सोखता है इसलिए इससे बने पात्र का उपयोग नहीं करना चाहिए। इससे हड्डियाँ कमजोर होती है. मानसिक बीमारियाँ होती है, लीवर और नर्वस सिस्टम को क्षति पहुँचती है। उसके साथ साथ किडनी फेल होना, टी बी, अस्थमा, दमा, बात रोग, शुगर जैसी गंभीर बीमारियाँ होती है। एलुमिनियम के प्रेशर कूकर से खाना बनाने से 87 प्रतिशत पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं। *मिट्टी*.…...*मिट्टी के बर्तनों में खाना पकाने से ऐसे पोषक तत्व मिलते हैं, जो हर बीमारी को शरीर से दूर रखते थे। इस बात को अब आधुनिक विज्ञान भी साबित कर चुका है कि मिट्टी के बर्तनों में खाना बनाने से शरीर के कई तरह के रोग ठीक होते हैं। आयुर्वेद के अनुसार, अगर भोजन को पौष्टिक और स्वादिष्ट बनाना है तो उसे धीरे-धीरे ही पकना चाहिए। भले ही मिट्टी के बर्तनों में खाना बनने में वक़्त थोड़ा ज्यादा लगता है, लेकिन इससे सेहत को पूरा लाभ मिलता है। दूध और दूध से बने उत्पादों के लिए सबसे उपयुक्त हैं मिट्टी के बर्तन। मिट्टी के बर्तन में खाना बनाने से पूरे 100 प्रतिशत पोषक तत्व मिलते हैं। और, यदि मिट्टी के बर्तन में खाना खाया जाए तो उसका अलग से स्वाद भी आता है। *पानी पीने के पात्र के विषय में 'भावप्रकाश ग्रंथ' में लिखा है* *जलपात्रं तु ताम्रस्य तदभावे मृदो हितम्। *पवित्रं शीतलं पात्रं रचितं स्फटिकेन यत्। *काचेन रचितं तद्वत् वैङूर्यसम्भवम्। *अर्थात् पानी पीने के लिए ताँबा, स्फटिक अथवा काँच-पात्र का उपयोग करना चाहिए। सम्भव हो तो वैङूर्यरत्नजड़ित पात्र का उपयोग करें। इनके अभाव में मिट्टी के जलपात्र पवित्र व शीतल होते हैं। टूटे-फूटे बर्तन से अथवा अंजलि से पानी नहीं पीना चाहिए। *जय श्री राधेकृष्णा*🙏🌸🌸 #ईश्वर_का_गणित__ईश्वर_का_न्याय #कथा *_त्याग !!_* एक बार दो आदमी एक मंदिर के पास बैठे गपशप कर रहे थे । वहां अंधेरा छा रहा था और बादल मंडरा रहे थे । थोड़ी देर में वहां एक आदमी आया और वो भी उन दोनों के साथ बैठकर गपशप करने लगा । कुछ देर बाद वो आदमी बोला उसे बहुत भूख लग रही है, उन दोनों को भी भूख लगने लगी थी । पहला आदमी बोला मेरे पास 3 रोटी हैं, दूसरा बोला मेरे पास 5 रोटी हैं, हम तीनों मिल बांट कर खा लेते हैं। उसके बाद सवाल आया कि 8 (3+5) रोटी तीन आदमियों में कैसे बांट पाएंगे ?? पहले आदमी ने राय दी कि ऐसा करते हैं कि हर रोटी के 3 टुकडे करते हैं, अर्थात 8 रोटी के 24 टुकडे (8 X 3 = 24) हो जाएंगे और हम तीनों में 8 - 8 टुकड़े बराबर बराबर बंट जाएंगे। तीनों को उसकी राय अच्छी लगी और 8 रोटी के 24 टुकडे करके प्रत्येक ने 8 - 8 रोटी के टुकड़े खाकर भूख शांत की और फिर बारिश के कारण मंदिर के प्रांगण में ही सो गए । सुबह उठने पर तीसरे आदमी ने उनके उपकार के लिए दोनों को धन्यवाद दिया और प्रेम से 8 रोटी के टुकड़ों के बदले दोनों को उपहार स्वरूप 8 सोने की गिन्नी देकर अपने घर की ओर चला गया। उसके जाने के बाद दूसरे आदमी ने पहले आदमी से कहा हम दोनों 4 - 4 गिन्नी बांट लेते हैं । पहला आदमी बोला नहीं मेरी 3 रोटी थी और तुम्हारी 5 रोटी थी, अतः मैं 3 गिन्नी लुंगा, तुम्हें 5 गिन्नी रखनी होगी। इस पर दोनों में बहस होने लगी। इसके बाद वे दोनों समाधान के लिये मंदिर के पुजारी के पास गए और उन्हें समस्या बताई तथा समाधान के लिए प्रार्थना की । पुजारी भी असमंजस में पड़ गया, दोनों दूसरे को ज्यादा देने के लिये लड़ रहे है । पुजारी ने कहा तुम लोग ये 8 गिन्नियाँ मेरे पास छोड़ जाओ और मुझे सोचने का समय दो, मैं कल सवेरे जवाब दे पाऊंगा । पुजारी को दिल में वैसे तो दूसरे आदमी की 3-5 की बात ठीक लग रही थी पर फिर भी वह गहराई से सोचते-सोचते गहरी नींद में सो गया। कुछ देर बाद उसके सपने में भगवान प्रगट हुए तो पुजारी ने सब बातें बताई और न्यायिक मार्गदर्शन के लिए प्रार्थना की और बताया कि मेरे ख्याल से 3 - 5 बंटवारा ही उचित लगता है। भगवान मुस्कुरा कर बोले- नहीं, पहले आदमी को 1 गिन्नी मिलनी चाहिए और दूसरे आदमी को 7 गिन्नी मिलनी चाहिए । भगवान की बात सुनकर पुजारी अचंभित हो गया और अचरज से पूछा- *प्रभु, ऐसा कैसे ?* भगवन फिर एक बार मुस्कुराए और बोले : इसमें कोई शंका नहीं कि पहले आदमी ने अपनी 3 रोटी के 9 टुकड़े किये परंतु उन 9 में से उसने सिर्फ 1 बांटा और 8 टुकड़े स्वयं खाया अर्थात उसका *त्याग* सिर्फ 1 रोटी के टुकड़े का था इसलिए वो सिर्फ 1 गिन्नी का ही हकदार है । दूसरे आदमी ने अपनी 5 रोटी के 15 टुकड़े किये जिसमें से 8 टुकड़े उसने स्वयं खाऐ और 7 टुकड़े उसने बांट दिए । इसलिए वो न्यायानुसार 7 गिन्नी का हकदार है .. ये ही मेरा गणित है और ये ही मेरा न्याय है ! ईश्वर की न्याय का सटिक विश्लेषण सुनकर पुजारी नतमस्तक हो गया। *उपरोक्त का सार ये ही है कि हमारी वस्तुस्थिति को देखने की, समझने की दृष्टि और ईश्वर का दृष्टिकोण एकदम भिन्न है । हम ईश्वरीय न्यायलीला को जानने समझने में सर्वथा अज्ञानी हैं।* *हम अपने त्याग का गुणगान करते है, परंतु ईश्वर हमारे त्याग की तुलना हमारे सामर्थ्य एवं भोग तौल कर यथोचित निर्णय करते हैं।* *यह महत्वपूर्ण नहीं है कि हम कितने धन संपन्न है, महत्वपूर्ण यहीं है कि हमारे सेवाभाव कार्य में त्याग कितना है..!! *जय श्री राधेकृष्णा*🙏🌸🌸 👉*सुंदर सुविचार...... कुछ लोग अपनी पढाई 22 साल की उम्र में पूर्ण कर लेते हैं मगर उनको कई सालों तक कोई अच्छी नौकरी नहीं मिलती... कुछ लोग 25 साल की उम्र में किसी कंपनी के सी०ई०ओ० बन जाते हैं और 50 साल की उम्र में हमें पता चलता है वह नहीं रहे... जबकि कुछ लोग 50 साल की उम्र में सी०ई०ओ० बनते हैं और 90 साल तक आनंदित रहते हैं... बेहतरीन रोज़गार होने के बावजूद कुछ लोग अभी तक ग़ैर शादीशुदा हैं और कुछ लोग बग़ैर रोज़गार के भी शादी कर चुके हैं और रोज़गार वालों से ज़्यादा खुश हैं... बराक ओबामा 55 साल की उम्र में रिटायर हो गये; जबकि ट्रंप 70 साल की उम्र में शुरुआत करते है... कुछ लोग परीक्षा में फेल हो जाने पर भी मुस्कुरा देते हैं और कुछ लोग एक नंबर कम आने पर भी रो देते हैं... किसी को बग़ैर कोशिश के भी बहुत कुछ मिल गया और कुछ सारी ज़िंदगी बस एड़ियां ही रगड़ते रहे... इस दुनिया में हर शख़्स अपने टाइम-ज़ोन की बुनियाद पर काम कर रहा है!! ज़ाहिरी तौर पर हमें ऐसा लगता है कुछ लोग हमसे बहुत आगे निकल चुके हैं; और शायद ऐसा भी लगता हो कुछ हमसे अभी तक पीछे हैं... लेकिन हर व्यक्ति अपनी अपनी जगह ठीक है अपने-अपने वक़्त के मुताबिक़....!! #किसी_से_भी_अपनी_तुलना_मत_कीजिए.. अपने टाइम ज़ोन में रहिए इंतज़ार कीजिए और इत्मीनान रखिए... ना ही आपको देर हुई है और ना ही जल्दी! "परमपिता परमेश्वर ने हम सबको अपने हिसाब से डिजा़इन किया है; वह जानता है कौन कितना बोझ उठा सकता है; किस को किस वक़्त क्या देना है!" विश्वास रखिए भगवान की ओर से हमारे लिए जो फैसला किया गया है वह सर्वोत्तम ही है....!! *जय - जय श्री राधेकृष्णा*🙏🌸🌸

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आशुतोष Nov 23, 2020

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Raj Nov 23, 2020

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Sanjay Awasthi Nov 23, 2020

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Mamta Chauhan Nov 23, 2020

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Raj Nov 23, 2020

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