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Kamlesh Apr 20, 2021
जय माता दी 🙏🙏

Seema Sharma. Himachal (chd) Apr 20, 2021
*नसीहत वो सत्य है, जिसे* *कोई ग़ौर से नहीं सुनता..* *और* *तारीफ वह धोखा है जिसे* *सब पूरे ध्यान से सुनते हैं।* जय माता दी 🌹🙏🌹 शुभ रात्रि जी 😊🙏😊

Amarnath patel May 12, 2021

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💖💓💗*हरिहर स्वरूप का क्या है रहस्य *💗💓💖 वेद में कहा गया है कि परमात्मा माया के द्वारा अनेक रूप वाला दिखाई देता है और सृष्टि-स्थिति और प्रलय की लीला के लिए ‘ब्रह्मा, विष्णु और शिव’~ इन तीन रूपों में प्रकाशित होता है। भगवान के ‘हरिहर अवतार’ में भगवान विष्णु और शिव का संयुक्त रूप देखने को मिलता है। ‘हरिहर’ शब्द दो शब्दों से मिल कर बना है। भगवान हरि (विष्णु) और हर अर्थात् महादेव। *हरि~हर स्वरूप का रहस्य* एक बार ब्रह्माजी और विष्णुजी ने देवाधिदेव महादेव जी की स्तुति की जो ‘शार्वस्तव’ के नाम से जानी जाती है। देवाधिदेव महादेव ने प्रसन्न होकर ब्रह्माजी और विष्णुजी से वर मांगने को कहा। ब्रह्माजी ने वरदान मांगा कि आप मेरे पुत्र हों। महादेव ने कहा~ ‘मैं आपकी इच्छा तब पूर्ण करुंगा, जब आपको सृष्टि-रचना में सफलता नहीं मिलेगी और आपको क्रोध हो जाएगा; तब मैं उसी क्रोध से उत्पन्न होऊंगा। तब मैं प्राणरूप ग्यारहवां रुद्र कहलाऊंगा ।’ भगवान विष्णु ने अपने लिए वरदान में केवल भक्ति मांगी । इससे देवाधिदेव महादेवजी अत्यन्त प्रसन्न हुए। महादेवजी ने अपना आधा शरीर उन्हें माना। तभी से वे ‘हरिहर’ रूप में पूजे जाते हैं । *शंख पद्म पराहस्तौ, त्रिशूल डमरु स्तथा।* *विश्वेश्वरम् वासुदेवाय हरिहर: नमोऽस्तुते।।* *भगवान हरि~हर का स्वरूप~~~* भगवान हरिहर के दाहिने भाग में रुद्र के चिह्न हैं और वाम भाग में विष्णु के। वह दाहिने हाथ में शूल तथा ऋष्टि धारण करते हैं और बायें हाथ में गदा और चक्र। दाहिनी तरफ गौरी और वाम भाग में लक्ष्मी विराजती हैं। *भगवान हरि~हर की एकता~~~* पुराणों में यह कहा गया है कि महादेव और विष्णु एक-दूसरे की अन्तरात्मा हैं और निरन्तर एक-दूसरे की पूजा, स्तुति व उपासना में संलग्न रहते हैं~ *'शिवस्य हृदये विष्णु: विष्णोश्च हृदये शिव:।'* अर्थात्~ भगवान शंकर के हृदय में विष्णु का और भगवान विष्णु के हृदय में शंकर का बहुत अधिक स्नेह है। जैसे~ महादेव श्रीहरि के अनन्य भक्त परम वैष्णव हैं। अत: उनके लिए कहा जाता है~ *’वैष्णवानां यथा शम्भु:’* अर्थात्~ वैष्णवों में अग्रणी शंकरजी। देवाधिदेव महादेव ने श्रीहरि के चरणों से निकली गंगा को अपने जटाजूट में बांध लिया और ‘गंगाधर’ कहलाए। शिव श्वेत वर्ण के (कर्पूर गौर) और विष्णु श्याम वर्ण के (मेघवर्णं) हो गए। वैष्णवों का तिलक (ऊर्ध्वपुण्ड्र) त्रिशूल का रूप है और शैवों का तिलक (त्रिपुण्ड) धनुष का रूप है। अत: महादेव व विष्णु में भेद नहीं मानना चाहिए। हरि और हर~ दोनों की प्रकृति (वास्तविक तत्त्व) एक ही है। ‘शिव सहस्त्रनाम’ में भगवान शिव के ‘चतुर्बाहु’, ‘हरि’, ‘विष्णु’ आदि नाम मिलते हैं। ’विष्णु सहस्त्रनाम’ का पाठ करने पर भगवान विष्णु के ‘शर्व’, ‘शिव’ व ‘स्थाणु’ आदि नामों का उल्लेख है जो महादेव के नाम हैं। इसीलिए अग्निपुराण में स्वयं भगवान ने कहा है~ ‘हम दोनों में निश्चय ही कोई भेद नहीं है, भेद देखने वाले नरकगामी होते हैं।’ पुराणों में भगवान हरि और हर की एकता दर्शाने वाले अनेक उदाहरण है। यहां पाठकों को समझाने के लिए कुछ ही का वर्णन किया जा रहा है~ हिरण्यकशिपु दैत्य का वध करने के लिए भगवान विष्णु ने नृसिंह रूप धारण किया और जब वे आवेश में अति उग्र हो गए तो उन्हें देवाधिदेव महादेव ने ही ‘शरभावतार’ लेकर शान्त किया। एक बार भक्त नरसीजी को महादेव जी ने दर्शन दिए और उनसे वरदान मांगने को कहा। तब नरसीजी ने कहा कि 'जो चीज आपको सबसे अधिक प्रिय लगती है, वही दीजिए।' देवाधिदेव महादेव ने कहा~ 'मेरे को श्रीकृष्ण सबसे अधिक प्रिय लगते हैं, अत: मैं तुम्हें उनके ही पास ले चलता हूँ।' ऐसा कहकर भगवान शंकर उनको गोलोक ले गए। शिव महिम्न~ स्तोत्र की रचना करने वाले गंधर्व पुष्पदंतजी के अनुसार~ भगवान विष्णु प्रतिदिन ‘शिव सहस्त्रनाम स्तोत्र’ का पाठ करते हुए सहस्त्र कमल-पुष्प से देवाधिदेव महादेव की पूजा करते थे। एक दिन महादेवजी ने परीक्षा करने के लिए एक कमल छिपा दिया। इस पर भगवान विष्णु ने अपना नेत्रकमल ही शंकरजी को अर्पित कर दिया। फिर क्या था ! भक्ति का उत्कृष्ट स्वरूप चक्र के रूप में परिणत हो गया जो भगवान विष्णु के हस्तकमल में रह कर जगत की रक्षा के लिए सदा सावधान है। रामचरितमानस के लंका काण्ड में तो विष्णुरूप भगवान श्रीराम ने शंकरजी से अपनी अभिन्नता बताते हुए स्पष्ट कह दिया है~~~ *सिव द्रोही मम दास कहावा।* *सो नर सपनेहुँ मोहि न पावा।।* *संकर प्रिय मम द्रोही सिव द्रोही मम दास।* *ते नर करहिं कलप भरि घोर नरक महुँ बास।।* ब्रह्मवैवर्तपुराण में भगवान श्रीकृष्ण स्वयं महादेवजी के प्रति अपने श्रद्धा-भाव को व्यक्त करते हुए कहते हैं~ ’देव ! मेरा आपसे बढ़कर कोई प्रिय नहीं है। आप मुझे अपनी आत्मा से भी अधिक प्यारे हैं।’ *भगवान हरि~हर के मिलन की कथा~~~* एक बार वैकुण्ठ में श्रीहरि ने स्वप्न में महादेवरजी को देखा तो निद्रा भंग होने पर वे लक्ष्मी सहित गरुड़ पर सवार होकर कैलाश की ओर चल दिए। इसी प्रकार कैलाश पर महादेवजी ने स्वप्न में श्रीहरि को देखा तो निद्रा भंग होने पर वे भी पार्वती सहित नन्दी पर सवार वैकुण्ठ की तरफ चल दिए। मार्ग में ही श्रीहरि और महादेवजी की भेंट हो गई। दोनों हर्षपूर्वक गले मिले। फिर श्रीहरि महादेवजी से वैकुण्ठ चलने का आग्रह करने लगे और महादेवजी श्रीविष्णुजी से कैलाश चलने का आग्रह करने लगे। बहुत देर तक दोनों एक-दूसरे से यह प्रेमानुरोध करते रहे। इतने में देवर्षि नारद वीणा बजाते, हरिगुण गाते वहां पधारे। तब पार्वतीजी ने नारदजी से इस समस्या का हल निकालने के लिए कहा। नारदजी ने हाथ जोड़कर कहा~ ‘मैं इसका क्या हल निकाल सकता हूँ। मुझे तो हरि और हर एक ही लगते हैं; जो वैकुण्ठ है वही कैलाश है।’ अंत में तय यह हुआ कि पार्वतीजी जो कह दें वही ठीक है। पार्वतीजी ने थोड़ी देर विचार करके कहा~ ‘हे नाथ ! हे नारायण ! आपके अलौकिक प्रेम को देखकर तो मुझे यही लगता है कि जो कैलास है, वही वैकुण्ठ है और जो वैकुण्ठ है वही कैलास है। इनमें केवल नाम में ही भेद है। आपकी भार्याएं भी एक हैं, दो नहीं। जो मैं हूँ वही श्रीलक्ष्मी हैं और जो श्रीलक्ष्मी हैं वहीं मैं हूँ। अब मेरी प्रार्थना है कि आप लोग दोनों ही अपने-अपने लोक को पधारिए। श्रीविष्णु यह समझें कि हम शिवरूप से वैकुण्ठ जा रहे हैं और महेश्वर यह मानें कि हम विष्णुरूप से कैलास गमन कर रहे हैं। पार्वतीजी के वचनों को सुनकर दोनों देव हर्षित होकर अपने-अपने धामों को लौट गए। *माधवोमाधवावीशौ सर्वसिद्धिविधायिनौ।* *वन्दे परस्परात्मानौ परस्परनुतिप्रियौ।।* अर्थात्~ हम सब सिद्धियों को देने वाले, एक-दूसरे की आत्मा रूप, एक दूसरे को नमन करने वाले, सर्वसमर्थ माधव (विष्णु) और उमाधव (शिव) को साष्टांग नमन करते हैं। 💗💖💞𓆩༢࿔ྀુजय माता दी𓊗༢࿔ྀુ𓆪💞💖💓 💖´ *•.¸♥¸.•**कुमार रौनक कश्यप**•.¸♥¸.•*´💖

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X7skr May 12, 2021

🕉️ namah shivay 🙏 @🌞 ~ आज का हिन्दू पंचांग ~ 🌞 ⛅ दिनांक 13 मई 2021 ⛅ दिन - गुरुवार ⛅ विक्रम संवत - 2078 (गुजरात - 2077) ⛅ शक संवत - 1943 ⛅ अयन - उत्तरायण ⛅ ऋतु - ग्रीष्म ⛅ मास - वैशाख ⛅ पक्ष - शुक्ल ⛅ तिथि - द्वितीया 14 मई प्रातः 05:38 तक तत्पश्चात तृतीया ⛅ नक्षत्र - रोहिणी 14 मई प्रातः 05:45 तक तत्पश्चात मॄगशिरा ⛅ योग - अतिगण्ड रात्रि 12:51 तक तत्पश्चात सुकर्मा ⛅ राहुकाल - दोपहर 02:14 से शाम 03:52 तक ⛅ सूर्योदय - 06:02 ⛅ सूर्यास्त - 19:07 ⛅ दिशाशूल - दक्षिण दिशा में ⛅ व्रत पर्व विवरण - 💥 विशेष - द्वितीया को बृहती (छोटा बैंगन या कटेहरी) खाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34) 🌞 ~ हिन्दू पंचांग ~ 🌞 🌷 समस्याओं के समाधान का बढिया उपाय 🌷 👉🏻 कोई भी समस्या आये तो बड़ी ऊँगली (मध्यमा) और अँगूठा मिलाकर भ्रूमध्य के नीचे और तर्जनी ( अँगूठे के पासवाली पहली ऊँगली) ललाट पर लगा के शांत हो जायें | श्वास अंदर जाय तो ‘ॐ’ , बाहर आये तो ‘शांति’ – ऐसा कुछ समय तक करें | आपको समस्याओं का समाधान बढिया मिलेगा | 🙏🏻 ऋषिप्रसाद – मई २०२१ से 🌞 ~ हिन्दू पंचांग ~ 🌞 🌷 ससुराल मे कोई तकलीफ 🌷 👩🏻 किसी सुहागन बहन को ससुराल में कोई तकलीफ हो तो शुक्ल पक्ष की तृतीया को उपवास रखें …उपवास माने एक बार बिना नमक का भोजन कर के उपवास रखें..भोजन में दाल चावल सब्जी रोटी नहीं खाए, दूध रोटी खा लें..शुक्ल पक्ष की तृतीया को..अमावस्या से पूनम तक की शुक्ल पक्ष में जो तृतीया आती है उसको ऐसा उपवास रखें …नमक बिना का भोजन(दूध रोटी) , एक बार खाए बस……अगर किसी बहन से वो भी नहीं हो सकता पूरे साल का तो केवल 🙏🏻 माघ महीने की शुक्ल पक्ष की तृतीया, 🙏🏻 वैशाख शुक्ल तृतीया और 🙏🏻 भाद्रपद मास की शुक्ल तृतीया जरुर ऐसे ३ तृतीया का उपवास जरुर करें …नमक बिना का भोजन करें ….जरुर लाभ होगा… 🙏🏻 ..ऐसा व्रत वशिष्ठ जी की पत्नी अरुंधती ने किया था…. ऐसा आहार नमक बिना का भोजन…. वशिष्ठ और अरुंधती का वैवाहिक जीवन इतना सुंदर था कि आज भी सप्त ऋषियों में से वशिष्ठ जी का तारा होता है , उनके साथ अरुंधती का तारा होता है…आज भी आकाश में रात को हम उन का दर्शन करते हैं … 🙏🏻 .शास्त्रों के अनुसार शादी होती तो उनका दर्शन करते हैं ….. जो जानकार पंडित होता है वो बोलता है…शादी के समय वर-वधु को अरुंधती का तारा दिखाया जाता है और प्रार्थना करते हैं कि , “जैसा वशिष्ठ जी और अरुंधती का साथ रहा ऐसा हम दोनों पति पत्नी का साथ रहेगा..” ऐसा नियम है…. 🙏🏻 चन्द्रमा की पत्नी ने इस व्रत के द्वारा चन्द्रमा की यानी २७ पत्नियों में से प्रधान हुई….चन्द्रमा की पत्नी ने तृतीया के व्रत के द्वारा ही वो स्थान प्राप्त किया था…तो अगर किसी सुहागन बहन को कोई तकलीफ है तो ये व्रत करें ….उस दिन गाय को चंदन से तिलक करें … कुम-कुम का तिलक ख़ुद को भी करें उत्तर दिशा में मुख करके …. उस दिन गाय को भी रोटी गुड़ खिलाये॥ 🙏🏻 सुरेशानंदजी -19th May 08, Haridwar 🌞 ~ हिन्दू पंचांग ~ 🌞 🙏🏻🌷🌻🍀🌹🌼💐🌸🌺🙏🏻 http://T.me/Hindupanchang

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X7skr May 12, 2021

🕉️ namah shivay 🙏 @🔰 स्वास्थ्य से संबंधित कुछ विशेष जानकारियां 1- 90 प्रतिशत रोग केवल पेट से होते हैं। पेट में कब्ज नहीं रहना चाहिए। अन्यथा रोगों की कभी कमी नहीं रहेगी। 2- कुल 13 अधारणीय वेग हैं 3-160 रोग केवल मांसाहार से होते है 4- 103 रोग भोजन के बाद जल पीने से होते हैं। भोजन के 1 घंटे बाद ही जल पीना चाहिये। 5- 80 रोग चाय पीने से होते हैं। 6- 48 रोग ऐलुमिनियम के बर्तन या कुकर के खाने से होते हैं। 7- शराब, कोल्डड्रिंक और चाय के सेवन से हृदय रोग होता है। 8- अण्डा खाने से हृदयरोग, पथरी और गुर्दे खराब होते हैं। 9- ठंडेजल (फ्रिज)और आइसक्रीम से बड़ी आंत सिकुड़ जाती है। 10- मैगी, गुटका, शराब, सूअर का माँस, पिज्जा, बर्गर, बीड़ी, सिगरेट, पेप्सी, कोक से बड़ी आंत सड़ती है। 11- भोजन के पश्चात् स्नान करने से पाचनशक्ति मन्द हो जाती है और शरीर कमजोर हो जाता है। 12- बाल रंगने वाले द्रव्यों(हेयरकलर) से आँखों को हानि (अंधापन भी) होती है। 13- दूध(चाय) के साथ नमक (नमकीन पदार्थ) खाने से चर्म रोग हो जाता है। 14- शैम्पू, कंडीशनर और विभिन्न प्रकार के तेलों से बाल पकने, झड़ने और दोमुहें होने लगते हैं। 15- गर्म जल से स्नान से शरीर की प्रतिरोधक शक्ति कम हो जाती है और शरीर कमजोर हो जाता है। गर्म जल सिर पर डालने से आँखें कमजोर हो जाती हैं। 16- टाई बांधने से आँखों और मस्तिष्क हो हानि पहुँचती है। 17- खड़े होकर जल पीने से घुटनों(जोड़ों) में पीड़ा होती है। 18- खड़े होकर मूत्रत्याग करने से रीढ़ की हड्डी को हानि होती है। 19- भोजन पकाने के बाद उसमें नमक डालने से रक्तचाप (ब्लडप्रेशर) बढ़ता है। 20- जोर लगाकर छींकने से कानों को क्षति पहुँचती है। 21- मुँह से साँस लेने पर आयु कम होती है। 22- पुस्तक पर अधिक झुकने से फेफड़े खराब हो जाते हैं और क्षय(टीबी) होने का डर रहता है। 23- चैत्र माह में नीम के पत्ते खाने से रक्त शुद्ध हो जाता है मलेरिया नहीं होता है। 24- तुलसी के सेवन से मलेरिया नहीं होता है। 25- मूली प्रतिदिन खाने से व्यक्ति अनेक रोगों से मुक्त रहता है। 26- अनार आंव, संग्रहणी, पुरानी खांसी व हृदय रोगों के लिए सर्वश्रेश्ठ है। 27- हृदयरोगी के लिए अर्जुनकी छाल, लौकी का रस, तुलसी, पुदीना, मौसमी, सेंधा नमक, गुड़, चोकरयुक्त आटा, छिलकेयुक्त अनाज औषधियां हैं। 28- भोजन के पश्चात् पान, गुड़ या सौंफ खाने से पाचन अच्छा होता है। अपच नहीं होता है। 29- अपक्व भोजन (जो आग पर न पकाया गया हो) से शरीर स्वस्थ रहता है और आयु दीर्घ होती है। 30- मुलहठी चूसने से कफ बाहर आता है और आवाज मधुर होती है। 31- जल सदैव ताजा(चापाकल, कुएंआदि का) पीना चाहिये, बोतलबंद (फ्रिज) पानी बासी और अनेक रोगों के कारण होते हैं। 32- नीबू गंदे पानी के रोग (यकृत, टाइफाइड, दस्त, पेट के रोग) तथा हैजा से बचाता है। 33- चोकर खाने से शरीर की प्रतिरोधक शक्ति बढ़ती है। इसलिए सदैव गेहूं मोटा ही पिसवाना चाहिए। 34- फल, मीठा और घी या तेल से बने पदार्थ खाकर तुरन्त जल नहीं पीना चाहिए। 35- भोजन पकने के 48 मिनट के अन्दर खा लेना चाहिए। उसके पश्चात् उसकी पोषकता कम होने लगती है। 12 घण्टे के बाद पशुओं के खाने लायक भी नहीं रहता है।। 36- मिट्टी के बर्तन में भोजन पकाने से पोषकता 100%, कांसे के बर्तन में 97%, पीतल के बर्तन में 93%, अल्युमिनियम के बर्तन और प्रेशर कुकर में 7-13% ही बचते हैं। 37- गेहूँ का आटा 15 दिनों पुराना और चना, ज्वार, बाजरा, मक्का का आटा 7 दिनों से अधिक पुराना नहीं प्रयोग करना चाहिए। 38- 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को मैदा (बिस्कुट, ब्रेड , समोसा आदि) कभी भी नहीं खिलाना चाहिए। 39- खाने के लिए सेंधा नमक सर्वश्रेष्ठ होता है उसके बाद काला नमक का स्थान आता है। सफेद नमक जहर के समान होता है। 40- जल जाने पर आलू का रस, हल्दी, शहद, घृतकुमारी में से कुछ भी लगाने पर जलन ठीक हो जाती है और फफोले नहीं पड़ते। 41- सरसों, तिल,मूंगफली , सुरजमुखी या नारियल का कच्ची घानी का तेल और देशी घी ही खाना चाहिए है। रिफाइंड तेल और वनस्पति घी (डालडा) जहर होता है। 42- पैर के अंगूठे के नाखूनों को सरसों तेल से भिगोने से आँखों की खुजली लाली और जलन ठीक हो जाती है। 43- खाने का चूना 70 रोगों को ठीक करता है। 44- चोट, सूजन, दर्द, घाव, फोड़ा होने पर उस पर 5-20 मिनट तक चुम्बक रखने से जल्दी ठीक होता है। हड्डी टूटने पर चुम्बक का प्रयोग करने से आधे से भी कम समय में ठीक होती है। 45- मीठे में मिश्री, गुड़, शहद, देशी(कच्ची) चीनी का प्रयोग करना चाहिए सफेद चीनी जहर होता है। 46- कुत्ता काटने पर हल्दी लगाना चाहिए। 47-बर्तन मिटटी के ही प्रयोग करने चाहिए। 48- टूथपेस्ट और ब्रश के स्थान पर दातून और मंजन करना चाहिए दाँत मजबूत रहेंगे। (आँखों के रोग में दातून नहीं करना चाहिए) 49- यदि सम्भव हो तो सूर्यास्त के पश्चात् न तो पढ़ें और लिखने का काम तो न ही करें तो अच्छा है। 50- निरोग रहने के लिए अच्छी नींद

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X7skr May 12, 2021

🕉️ namah shivay 🙏 @ 1️⃣2️⃣❗0️⃣5️⃣❗2️⃣0️⃣2️⃣1️⃣ *🔹 आज का प्रेरक प्रसंग 🔹* *!! आप हाथी नहीं इंसान हैं !!* ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ एक आदमी कहीं से गुजर रहा था, तभी उसने सड़क के किनारे बंधे हाथियों को देखा, और अचानक रुक गया. उसने देखा कि हाथियों के अगले पैर में एक रस्सी बंधी हुई है, उसे इस बात का बड़ा अचरज हुआ की हाथी जैसे विशालकाय जीव लोहे की जंजीरों की जगह बस एक छोटी सी रस्सी से बंधे हुए हैं! ये स्पष्ठ था कि हाथी जब चाहते तब अपने बंधन तोड़ कर कहीं भी जा सकते थे, पर किसी वजह से वो ऐसा नहीं कर रहे थे। उसने पास खड़े महावत से पूछा कि भला ये हाथी किस प्रकार इतनी शांति से खड़े हैं और भागने का प्रयास नही कर रहे हैं ? तब महावत ने कहा, “इन हाथियों को छोटे पर से ही इन रस्सियों से बाँधा जाता है, उस समय इनके पास इतनी शक्ति नहीं होती की इस बंधन को तोड़ सकें. बार-बार प्रयास करने पर भी रस्सी ना तोड़ पाने के कारण उन्हें धीरे-धीरे यकीन होता जाता है कि वो इन रस्सियों को नहीं तोड़ सकते और बड़े होने पर भी उनका ये यकीन बना रहता है, इसलिए वो कभी इसे तोड़ने का प्रयास ही नहीं करते।” आदमी आश्चर्य में पड़ गया कि ये ताकतवर जानवर सिर्फ इसलिए अपना बंधन नहीं तोड़ सकते क्योंकि वो इस बात में यकीन करते हैं! इन हाथियों की तरह ही हममें से कितने लोग सिर्फ पहले मिली असफलता के कारण ये मान बैठते हैं कि अब हमसे ये काम हो ही नहीं सकता और अपनी ही बनायीं हुई मानसिक जंजीरों में जकड़े-जकड़े पूरा जीवन गुजार देते हैं। *शिक्षा:-* याद रखिये असफलता जीवन का एक हिस्सा है और निरंतर प्रयास करने से ही सफलता मिलती है। यदि आप भी ऐसे किसी बंधन में बंधें हैं जो आपको अपने सपने सच करने से रोक रहा है तो उसे तोड़ डालिए... आप हाथी नहीं इंसान हैं। *सदैव प्रसन्न रहिये।* *जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।* 📝📝📝📝📝📝📝📝📝📝

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Vinod Kamra May 12, 2021

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[email protected] May 11, 2021

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gobinda kr jaiswar May 12, 2021

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