"सुध महादेव मंदिर का रहस्य"

"सुध महादेव मंदिर का रहस्य"

जम्मू से १२० किलो मीटर दूर तथा समुद्र तल से १२२५ मीटर की ऊंचाई पर, पटनीटॉप के पास सुध महादेव (शुद्ध महादेव) का मंदिर स्तिथ है। यह मंदिर शिवजी के प्रमुख मंदिरो में से एक है। इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है की यहाँ पर एक विशाल त्रिशूल के तीन टुकड़े जमीन में गड़ा हुआ है।

पुराणो की कहानी के अनुसार माता पार्वती नित्य मानतलाई से इस मंदिर में पूजन करने आती थी। एक दिन जब पार्वती वहां पूजा कर रही थी तभी सुधान्त राक्षस, जो की स्वंय भगवान शिव का भक्त था, वहां पूजन करने आया। जब सुधान्त ने माता पार्वती को वहां पूजन करते देखा तो वो पार्वती से बात करने के लिए उनके समीप जाकर खड़े हो गए। जैसे ही मां पार्वती ने पूजन समाप्त होने के बाद अपनी आंखे खोली वो एक राक्षस को अपने सामने खड़ा देखकर घबरा गई। घबराहट में वो जोर जोर से चिल्लाने लगी। उनकी ये चिल्लाने की आवाज़ कैलाश पर समाधि में लीन भगवान शिव तक पहुंची। महादेव ने पार्वती की जान खतरे में जान कर राकक्ष को मारने के लिए अपना त्रिशूल फेका। त्रिशूल आकर सुधांत के सीने में लगा। उधर त्रिशूल फेकने के बाद शिवजी को ज्ञात हुआ की उनसे तो अनजाने में बड़ी गलती हो गई। इसलिए उन्होंने वहां पर आकर सुधांत को पुनः जीवन देने की पेशकश करी पर दानव सुधान्त ने यह कह कर मना कर दिया की वो अपने इष्ट देव के हाथो से मरकर मोक्ष प्राप्त करना चाहता है। भगवान ने उसकी बात मान ली और कहां की यह जगह आज से तुम्हारे नाम पर सुध महादेव के नाम से जानी जायेगी। साथ ही उन्होंने उस त्रिशूल के तीन टुकड़े करकर वहां गाड़ दिए जो की आज भी वही है। (हालांकि कई जगह सुधांत को दुराचारी राक्षस भी बताया गया है और कहा जाता है की वो मंदिर में मां पार्वती पर बुरी नियत से आया था इसलिए भगवान शिव ने उसका वध कर दिया।) मंदिर परिसर में एक ऐसा स्थान भी है जिसके बारे में कहा जाता है की यहां सुधान्त दानव की अस्थियां रखी हुई है।

ये तीनो टुकड़े मंदिर परिसर में खुले में गड़े हुए है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा त्रिशूल के ऊपर वाला हिस्सा है। मध्यम आकर वाला बीच का हिस्सा है तथा सबसे नीचे का हिस्सा सबसे छोटा है जो की पहले थोड़ा सा जमीन के ऊपर दिखाई देता था पर मदिर के अंदर टाईल लगाने के बाद वो फर्श के लेवल के बराबर हो गया है। इन त्रिशूलों के ऊपर किसी अनजान लिपि में कुछ लिखा हुआ है जिसे की आज तक पढ़ा नहीं जा सका है। यह त्रिशूल मंदिर परिसर में खुले में गड़े हुए है और भक्त लोग इनका नित्य जलाभिषेक भी करते है।

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कामेंट्स

Yogesh Kumar Sharma Dec 8, 2017
आप और आपके परिवार पर सदैव माता रानी की कृपा दृष्टि बनी रहे,जय माता की

Jai Parkash Upadhayay Dec 8, 2017
मां कामाख्या जी का भव्य मंदिर गहमर गाजीपुर में है।उसे शामिल करें

Riya Patel Dec 8, 2017
@pawan जरूर try करना और अपने दोस्तो को भी बोलना

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