Anuradha Tiwari
Anuradha Tiwari Dec 6, 2018

एक शिक्षाप्रद कथा ,,,,,,,

एक शिक्षाप्रद कथा ,,,,,,,

( ये कथा एक ऐसे सन्यासी की है जिसने गेरुए वस्त्र धारण कर गृहस्थ से सन्यास तो ले लिया परन्तु ईश्वर में अपने ध्यान को नहीं लगा सका और अनेक तीर्थों पर भटकता रहा )

एक सन्यासी घूमते-फिरते एक दुकान पर आये, दुकान मे अनेक छोटे-बड़े डिब्बे थे, सन्यासी के मन में जिज्ञासा उत्पन्न हुई और एक डिब्बे की ओर इशारा करते हुए सन्यासी ने दुकानदार से पूछा, इसमे क्या है ? दुकानदारने कहा - इसमे नमक है ! सन्यासी ने फिर पूछा, इसके पास वाले मे क्या है ? दुकानदार ने कहा, इसमे हल्दी है ! इसी प्रकार सन्यासी पूछ्ते गए और दुकानदार बतलाता रहा, अंत मे पीछे रखे डिब्बे का नंबर आया, सन्यासी ने पूछा उस अंतिम डिब्बे मे क्या है ? दुकानदार बोला, उसमे राम-राम है ! सन्यासी ने हैरान होते हुये पूछा राम राम?? भला यह राम-राम किस वस्तु का नाम है भाई ?? मैंने तो इस नाम के किसी वास्तु के बारे में कभी नहीं सुना। दुकानदार सन्यासी के भोलेपन पर हंस कर बोला - महात्मन ! और डिब्बों मे तो भिन्न-भिन्न वस्तुएं हैं, पर यह डिब्बा खाली है, हम खाली को खाली नही कहकर राम-राम कहते हैं !
संन्यासी की आंखें खुली की खुली रह गई !
जिस बात के लिये मैं दर दर भटक रहा था, वो बात मुझे आज एक व्यपारी से समझ आ रही है। वो सन्यासी उस छोटे से किराने के दुकानदार के चरणों में गिर पड़ा ,,, ओह, तो राम " खाली " मे रहता है ! सत्य है भाई भरे हुए में राम को स्थान कहाँ ? (काम, क्रोध,लोभ,मोह, लालच, अभिमान,ईर्ष्या, द्वेष और भली- बुरी, सुख दुख, की बातों से जब दिल-दिमाग भरा रहेगा तो,,,,,,,,,,,"" उसमें ईश्वर का वास कैसे होगा ! इन सब आसुरी प्रवृतियों से ईश्वर के लिए जगह ही नहीं होगी साथ ही ईश्वर में विशवास भी मात्र औपचारिकता ही होगा ?"" राम यानी ईश्वर तो खाली याने साफ-सुथरे शुद्ध मन मे ही निवास करता है , अशुद्ध मन में तो "असुर " रहते है ! जब आपका चित अथवा दिमाग खाली होगा और उसमे प्रभु श्री राम अथवा ईश्वर का चिंतन मनन एवं महिमा का गान करोगे तो ही ईश्वर में एकाग्रचित होकर मन लगेगा !
हमारे ऋषि जो योग साधना करते थे उसमे वो पहले यम नियम का पालन करके अपनी चित्त की व्रतियों का निरोध करते थे इसीलिए महृषि पातंजलि ने अपनी पुस्तक योग दर्शन में कहा है की "योगस्य चित्तवृत्ति निरोधः " यानि योग चित की व्रतियों के निरोध का नाम है ! एक छोटी सी दुकान वाले ने सन्यासी को बहुत बड़ी बात समझा दी थी! आज सन्यासी प्रभु का ध्यान करके परमानंद को प्राप्त हुआ !
🌹🌹🙏🙏🌹🌹
भवसागर से पार होने के लिये मनुष्य शरीर रूपी सुन्दर नौका मिल गई है।
सतर्क रहो कहीं ऐसा न हो कि वासना की भँवर में पड़कर नौका डूब जाय।
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" जीवन का सत्य आत्मिक कल्याण है ना की भौतिक सुख !"
जिस प्रकार मैले दर्पण में सूर्य देव का प्रकाश नहीं पड़ता है उसी प्रकार मलिन अंतःकरण में ईश्वर के प्रकाश का प्रतिबिम्ब नहीं पड़ता है अर्थात मलिन अंतःकरण में शैतान अथवा असुरों का राज होता है ! अतः ऐसा मनुष्य ईश्वर द्वारा प्रदत्त " दिव्यदृष्टि " या दूरदृष्टि का अधिकारी नहीं बन सकता एवं अनेको दिव्य सिद्धियों एवं निधियों को प्राप्त नहीं कर पाता या खो देता है !
,,,,सच्चे संतो की वाणी से अमृत बरसता है , आवश्यकता है ,,,उसे आचरण में उतारने की ....
जय गौमाता की 🙏👏🌹🌲🌿🌹
शरीर परमात्मा का दिया हुआ उपहार है ! चाहो तो इससे " विभूतिया " (अच्छाइयां / पुण्य इत्यादि ) अर्जित करलो चाहे घोरतम " दुर्गति " ( बुराइया / पाप ) इत्यादि !
परोपकारी बनो एवं प्रभु का सानिध्य प्राप्त करो !
प्रभु हर जीव में चेतना रूप में विद्यमान है अतः प्राणियों से प्रेम करो !
शाकाहार अपनाओ , करुणा को चुनो !

Like Pranam Belpatra +24 प्रतिक्रिया 4 कॉमेंट्स • 37 शेयर

कामेंट्स

Abhay Bablu Baheti Dec 6, 2018
शुभ रात्रि जी 🙏जय राम जी की🙏

Vinod Dec 6, 2018
Jai Jai Siyaram 👏👏👏

Ram pal Sharma Dec 6, 2018
Jai shri Radhe Krishna sister ji very very nice post ji good evening sister ji

neeruguptayadav Dec 9, 2018

🙏🌹भक्ति और संत निष्ठां🌹🙏

पीपा नाम का एक राजा था ,उसने अपने जीवन मे जो कुछ पाना चाहा वो सब कुछ उसे मिला । किन्तु इतना सब कुछ होने पर भी उसके अंदर प्रभु को पाने की एक तड़प थी । इसी के समाधान के लिए राजा इधर उधर अनेक महापुरुषो के यहॉ भटकता फ...

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Sudarshan Parik Dec 9, 2018

ईश्वर अवश्य देगा..!! ( एक #कथा )

एक बार एक राजा था, वह जब भी मंदिर जाता, तो 2 भिखारी उसके दाएं और बाएं बैठा करते..
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दाईं तरफ़ वाला कहता: "हे ईश्वर, तूने राजा को बहुत कुछ दिया है, मुझे भी दे दे.!"
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बाईं तरफ़ वाला कहता: "ऐ राजा.! ईश्वर ने तुझे बहु...

(पूरा पढ़ें)
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Narayan Tiwari Dec 11, 2018

🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹
प्रेरक कथा:---🚩
एक बार एक ग्वालन दूध बेच रही थी और सबको दूध नाप नाप कर दे रही थी । उसी समय एक नौजवान दूध लेने आया तो ग्वालन ने बिना नापे ही उस नौजवान का बरतन दूध से भर दिया।
वही थोड़ी दूर पर एक साधु हाथ में माला ल...

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Jay Shree Krishna Dec 11, 2018

Kahan judh bolna hai or kahan sach

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Rahul Kumar Jha Dec 11, 2018

पौराणिक कथानुसार चंद्र का विवाह दक्ष प्रजापति की 27 नक्षत्र कन्याओं के साथ संपन्न हुआ। चंद्र एवं रोहिणी बहुत खूबसूरत थीं एवं चंद्र का रोहिणी पर अधिक स्नेह देख शेष कन्याओं ने अपने पिता दक्ष से अपना दु:ख प्रकट किया।


दक्ष स्वभाव से ही क्रोधी प्रवृत...

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Sandhvi Divya Dec 10, 2018

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Jay Shree Krishna Dec 10, 2018

Satsang hamare liye kyun jaroori hai

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