।।। जय श्री राधे कृष्ण ।।। **भक्त और भगवान में प्रेम का अटूट बंधन**

।।। जय श्री राधे कृष्ण ।।। **भक्त और भगवान में प्रेम का अटूट बंधन**

।।। जय श्री राधे कृष्ण ।।।

**भक्त और भगवान में प्रेम का अटूट बंधन

भक्त और भगवान में अटूट प्रेम होता है। दोनों के
प्रेम में अंतर यह है कि भक्त के प्रति भगवान का प्रेम आशीर्वाद के रूप में होता है जबकि भक्त का प्रेम भगवान में श्रद्धा-भक्ति के रूप में होता है। भगवान ने मनुष्य की रचना इसलिए की है कि वह मेरे से प्रेम करे और मैं उससे प्रेम करुँ। अर्थात् भगवान ने मनुष्य को अपना दास नहीं वरन् अपने समान सखा बनाया है।

नररूप अर्जुन और नारायणरूप श्रीकृष्ण के ऐसे ही प्रेम के दर्शन गीता में होते हैं, जहां श्रीकृष्ण अर्जुन से कहते हैं ‘अर्जुन! तू मुझे बहुत अधिक प्रिय है। मैं तुझे गोपनीय-से-गोपनीय बात बता रहा हूँ।

**तेरे हित की बात में तुझसे कहूंगा।’

खाण्डववन का दाह कर चुकने के बाद इन्द्र ने जब अर्जुन से वर मांगने के लिए कहा तब अर्जुन ने उनसे अनेक शस्त्र मांग लिए। इन्द्र ने भगवान श्रीकृष्ण से भी कुछ मांगने के लिए कहा तब भगवान श्रीकृष्ण ने कहा कि

**‘मेरा अर्जुन के साथ निरन्तर प्रेम बना रहे।’

श्रीकृष्ण और अर्जुन : एक ही आत्मा के दो रूप

महाभारत के उद्योगपर्व में पितामह भीष्म कहते हैं—‘श्रीकृष्ण नारायण हैं और अर्जुन नर हैं। एक ही आत्मा दो रूपों में प्रकट हुए हैं।’

पाण्डवों के राजसूययज्ञ में श्रीकृष्ण और अर्जुन की मित्रता के सम्बन्ध में दुर्योधन ने अपने पिता धृतराष्ट्र से कहा—‘श्रीकृष्ण अर्जुन की आत्मा हैं और अर्जुन श्रीकृष्ण की आत्मा हैं। अर्जुन श्रीकृष्ण को जो कुछ करने को कहते हैं, श्रीकृष्ण निस्संदेह वही सब करते हैं। श्रीकृष्ण अर्जुन के लिए दिव्यलोक का त्याग कर सकते हैं और अर्जुन भी श्रीकृष्ण के लिए प्राणत्याग कर सकते हैं।’

भगवान श्रीकृष्ण महाभारतरूपी नाटक के सूत्रधार, पाण्डवों के सखा और पथप्रदर्शक थे। अर्जुन के जीवन में कई बार कठिनाइयां आयीं और श्रीकृष्ण ने हर बार सहायता करके ‘आपत्सु मित्रं जानीयात्’—‘आपत्ति में ही मित्र की पहचान होती है’—इस वाक्य को सही सिद्ध किया। श्रीकृष्ण हर तरह से अर्जुन को बचाने और जिताने के लिए सचेत रहे। श्रीकृष्ण ने अर्जुन के बहाने संसार को यह उपदेश दिया कि मनुष्य परमात्मा को अपने जीवन का सेनापति बनाये और अपने को एक साधारण सिपाही मानकर जो कुछ भी कर्म करे, उसे उसी की आज्ञा पालन समझे। यही परम शान्ति और सुख देने वाला है।

**भक्त की चोट भी सहते हैं भगवान

भगवान को केवल भक्त का प्रेम प्यारा है; महाभारत के द्रोणपर्व की एक सुन्दर कथा है

अर्जुन के बाणों से घायल होकर प्राग्ज्योतिषपुर के राजा भगदत्त ने वैष्णवास्त्र नामक अभेद्य अस्त्र अर्जुन की छाती को लक्ष्य करके छोड़ दिया। भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को ओट करके स्वयं ही वह अस्त्र अपनी छाती पर सह लिया। भगवान श्रीकृष्ण की छाती पर आकर वह अस्त्र वैजयन्तीमाला के रूप में परिवर्तित हो गया।

वैजयन्तीमाला में कमलपुष्प के साथ सभी ऋतुओं के पुष्प गुंथे हुए थे और यह सूर्य और चन्द्रमा के समान ज्योतिष्मान थी। शत्रुओं को भय प्रदान करने वाले पार्थसारथि श्रीकृष्ण उस वैजयन्तीमाला को धारण करके और भी अधिक सुन्दर लगने लगे मानो सूर्यरश्मियों का हार उनके कण्ठ की शोभा बढ़ा रहा हो।

अर्जुन को यह देखकर बहुत दु:ख हुआ कि श्रीकृष्ण ने वैष्णवास्त्र की चोट मेरी जगह अपनी छाती पर सहन कर ली। पार्थ ने श्रीकृष्ण से कहा—‘कमलनयन! आपने तो प्रतिज्ञा की थी कि मैं युद्ध न करके केवल अश्वों को काबू में करुंगा, केवल सारथि का काम करुंगा; किन्तु आप अपनी प्रतिज्ञा का पालन नहीं कर रहे। जब मैं युद्ध कर रहा हूँ तब आपको ऐसा नहीं करना चाहिए।’

**भगवान श्रीकृष्ण के हैं चार स्वरूप

भगवान श्रीकृष्ण ने तब अर्जुन को गोपनीय रहस्य बताते हुए कहा ‘हे अर्जुन ! समस्त सृष्टि का आदिकारण मैं ही हूँ। संसार में ऐसी कोई वस्तु नहीं जो मुझसे रहित हो। जगत में जहां-जहां वैभव, तेज, लक्ष्मी दीखती है, वह सब मेरी विभूति का अंश समझो। समस्त ब्रह्माण्ड को मेरे एक अंश ने घेर रखा है

‘मैं चार स्वरूप धारण करके सदैव समस्त लोकों की रक्षा करता रहता हूँ।

* मेरी एक मूर्ति इस भूमण्डल पर बदरिकाश्रम में नर-नारायणरूप में तपस्या में लीन रहती है।

* दूसरी परमात्मारूप मूर्ति अच्छे-बुरे कर्म करने वाले जगत को साक्षीरूप में देखती रहती है।

* तीसरी मूर्ति मनुष्यलोक में अवतरित होकर नाना प्रकार के कर्म करती है।

* चौथी मूर्ति (विष्णु) सहस्त्रों युगों तक एकार्णव (क्षीरसागर) के जल में शयन करती है। जब मेरा चौथा स्वरूप योगनिद्रा से उठता है, तब भक्तों को अनेक प्रकार के वर प्रदान करता है।
🚩जय श्री राम🚩

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Shraddha Bhardwaj Aug 2, 2020

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Swami Lokeshanand Aug 2, 2020

वासना के जल से भरा यह संसार ही सागर है, इसी में सिंघिका रहती है। ध्यान दें, सागर पार होने ही वाला है, यह सिंघिका अंतिम बाधा है। पर बड़े बड़े महात्मा, जो कंचन से बचे, कीर्ति से बचे, वे कामिनी के फेर में मारे गए। कहीं के न रहे। कलंकित हो गए। मृत्यु की प्रतीक्षा के सिवा उन्हें कोई आशा की किरण नहीं बची। यह इस "रागद्वेषात्मिका देहवासना सिंघिका" का ही कार्य है। यह बड़ी विचित्र है। यह समुद्री जीवों को नहीं खाती, संसार में पहले से ही डूबे हुओं को नहीं खाती। जो वासना में रचे पचे हैं, वे तो पहले से ही मरे हुए हैं, यह मरे हुए को नहीं मारती। गगनचरों को खाती है, आकाश मार्गियों को खाती है। जो देह धरातल से ऊपर उठकर, देहाध्यास का बंधन ढीला कर, हृदयाकाश में रमण करने लगा, उसे खाती है। वह भी पक्षियों को, जो पक्षी हो गया, भगवान के पक्ष में खड़ा हो गया, उसे खाती है। यह कंचन रूपी मैनाक और कीर्ति रूपी सुरसा से बच आने वालों को धोखा देकर खा जाती है। यह उन दोनों की तरह आमने सामने नहीं लड़ती, छिप कर वार करती है। साधक जान भी नहीं पाता, कि यह उन्हें पकड़कर फंसा डालती है। पकड़ती कैसे है? परछाई पकड़ लेती है, बस फिर वह उड़ नहीं पाता। साधन कर नहीं पाता। अतीत की स्मृति ही परछाई है, देह वासना का पुराना अभ्यास लौट आना ही परछाई पकड़ा जाना है। "छोरत ग्रंथि देखि खगराया। विघ्न अनेक करई तब माया॥" परन्तु श्रीहनुमानजी जैसे परम वैराग्यवान संत, इसके कपट को दूर से ही पहचान कर, इसे ज्ञान रूपी गदा से मार डालते हैं। मैनाक की तरह छूते भी नहीं, सुरसा की तरह छोड़ते भी नहीं, जान से मारते हैं, जीवित नहीं छोड़ते, और सागर पार कर जाते हैं। हमें भी इस सिंघिका से सावधान रहना है। अब विडियो देखें- सिंघिका प्रसंग https://youtu.be/XL-Y7tTkLaQ

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Shakti Aug 2, 2020

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शंकर जगत वंधु जगदीशा, सुर नर मुनि सब नावै शीशा,, *भगवान शंकर के 35 आश्चर्यजनक रहस्य* भगवान शिव अर्थात पार्वती के पति शंकर जिन्हें महादेव, भोलेनाथ, आदिनाथ आदि कहा जाता है, उनके बारे में यहां प्रस्तुत हैं 35 रहस्य। 1. आदिनाथ शिव सर्वप्रथम शिव ने ही धरती पर जीवन के प्रचार-प्रसार का प्रयास किया इसलिए उन्हें 'आदिदेव' भी कहा जाता है। 'आदि' का अर्थ प्रारंभ। आदिनाथ होने के कारण उनका एक नाम 'आदिश' भी है। 2. शिव के अस्त्र-शस्त्र शिव का धनुष पिनाक, चक्र भवरेंदु और सुदर्शन, अस्त्र पाशुपतास्त्र और शस्त्र त्रिशूल है। उक्त सभी का उन्होंने ही निर्माण किया था। 3. शिव का नाग शिव के गले में जो नाग लिपटा रहता है उसका नाम वासुकि है। वासुकि के बड़े भाई का नाम शेषनाग है। 4. शिव की अर्द्धांगिनी शिव की पहली पत्नी सती ने ही अगले जन्म में पार्वती के रूप में जन्म लिया और वही उमा, उर्मि, काली कही गई हैं। 5. शिव के पुत्र शिव के प्रमुख 6 पुत्र हैं- गणेश, कार्तिकेय, सुकेश, जलंधर, अयप्पा और भूमा। सभी के जन्म की कथा रोचक है। 6. शिव के शिष्य शिव के 7 शिष्य हैं जिन्हें प्रारंभिक सप्तऋषि माना गया है। इन ऋषियों ने ही शिव के ज्ञान को संपूर्ण धरती पर प्रचारित किया जिसके चलते भिन्न-भिन्न धर्म और संस्कृतियों की उत्पत्ति हुई। शिव ने ही गुरु और शिष्य परंपरा की शुरुआत की थी। शिव के शिष्य हैं- बृहस्पति, विशालाक्ष, शुक्र, सहस्राक्ष, महेन्द्र, प्राचेतस मनु, भरद्वाज इसके अलावा 8वें गौरशिरस मुनि भी थे। 7. शिव के गण शिव के गणों में भैरव, वीरभद्र, मणिभद्र, चंदिस, नंदी, श्रृंगी, भृगिरिटी, शैल, गोकर्ण, घंटाकर्ण, जय और विजय प्रमुख हैं। इसके अलावा, पिशाच, दैत्य और नाग-नागिन, पशुओं को भी शिव का गण माना जाता है। शिवगण नंदी ने ही 'कामशास्त्र' की रचना की थी। 'कामशास्त्र' के आधार पर ही 'कामसूत्र' लिखा गया। 8. शिव पंचायत भगवान सूर्य, गणपति, देवी, रुद्र और विष्णु ये शिव पंचायत कहलाते हैं। 9. शिव के द्वारपाल नंदी, स्कंद, रिटी, वृषभ, भृंगी, गणेश, उमा-महेश्वर और महाकाल। 10. शिव पार्षद जिस तरह जय और विजय विष्णु के पार्षद हैं उसी तरह बाण, रावण, चंड, नंदी, भृंगी आदि शिव के पार्षद हैं। 11. सभी धर्मों का केंद्र शिव शिव की वेशभूषा ऐसी है कि प्रत्येक धर्म के लोग उनमें अपने प्रतीक ढूंढ सकते हैं। मुशरिक, यजीदी, साबिईन, सुबी, इब्राहीमी धर्मों में शिव के होने की छाप स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है। शिव के शिष्यों से एक ऐसी परंपरा की शुरुआत हुई, जो आगे चलकर शैव, सिद्ध, नाथ, दिगंबर और सूफी संप्रदाय में वि‍भक्त हो गई। 12. बौद्ध साहित्य के मर्मज्ञ अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त विद्वान प्रोफेसर उपासक का मानना है कि शंकर ने ही बुद्ध के रूप में जन्म लिया था। उन्होंने पालि ग्रंथों में वर्णित 27 बुद्धों का उल्लेख करते हुए बताया कि इनमें बुद्ध के 3 नाम अतिप्राचीन हैं- तणंकर, शणंकर और मेघंकर। 13. देवता और असुर दोनों के प्रिय शिव भगवान शिव को देवों के साथ असुर, दानव, राक्षस, पिशाच, गंधर्व, यक्ष आदि सभी पूजते हैं। वे रावण को भी वरदान देते हैं और राम को भी। उन्होंने भस्मासुर, शुक्राचार्य आदि कई असुरों को वरदान दिया था। शिव, सभी आदिवासी, वनवासी जाति, वर्ण, धर्म और समाज के सर्वोच्च देवता हैं। 14. शिव चिह्न वनवासी से लेकर सभी साधारण व्‍यक्ति जिस चिह्न की पूजा कर सकें, उस पत्‍थर के ढेले, बटिया को शिव का चिह्न माना जाता है। इसके अलावा रुद्राक्ष और त्रिशूल को भी शिव का चिह्न माना गया है। कुछ लोग डमरू और अर्द्ध चन्द्र को भी शिव का चिह्न मानते हैं, हालांकि ज्यादातर लोग शिवलिंग अर्थात शिव की ज्योति का पूजन करते हैं। 15. शिव की गुफा शिव ने भस्मासुर से बचने के लिए एक पहाड़ी में अपने त्रिशूल से एक गुफा बनाई और वे फिर उसी गुफा में छिप गए। वह गुफा जम्मू से 150 किलोमीटर दूर त्रिकूटा की पहाड़ियों पर है। दूसरी ओर भगवान शिव ने जहां पार्वती को अमृत ज्ञान दिया था वह गुफा 'अमरनाथ गुफा' के नाम से प्रसिद्ध है। 16. शिव के पैरों के निशान श्रीपद- श्रीलंका में रतन द्वीप पहाड़ की चोटी पर स्थित श्रीपद नामक मंदिर में शिव के पैरों के निशान हैं। ये पदचिह्न 5 फुट 7 इंच लंबे और 2 फुट 6 इंच चौड़े हैं। इस स्थान को सिवानोलीपदम कहते हैं। कुछ लोग इसे आदम पीक कहते हैं। रुद्र पद- तमिलनाडु के नागपट्टीनम जिले के थिरुवेंगडू क्षेत्र में श्रीस्वेदारण्येश्‍वर का मंदिर में शिव के पदचिह्न हैं जिसे 'रुद्र पदम' कहा जाता है। इसके अलावा थिरुवन्नामलाई में भी एक स्थान पर शिव के पदचिह्न हैं। तेजपुर- असम के तेजपुर में ब्रह्मपुत्र नदी के पास स्थित रुद्रपद मंदिर में शिव के दाएं पैर का निशान है। जागेश्वर- उत्तराखंड के अल्मोड़ा से 36 किलोमीटर दूर जागेश्वर मंदिर की पहाड़ी से लगभग साढ़े 4 किलोमीटर दूर जंगल में भीम के मंदिर के पास शिव के पदचिह्न हैं। पांडवों को दर्शन देने से बचने के लिए उन्होंने अपना एक पैर यहां और दूसरा कैलाश में रखा था। रांची- झारखंड के रांची रेलवे स्टेशन से 7 किलोमीटर की दूरी पर 'रांची हिल' पर शिवजी के पैरों के निशान हैं। इस स्थान को 'पहाड़ी बाबा मंदिर' कहा जाता है। 17. शिव के अवतार वीरभद्र, पिप्पलाद, नंदी, भैरव, महेश, अश्वत्थामा, शरभावतार, गृहपति, दुर्वासा, हनुमान, वृषभ, यतिनाथ, कृष्णदर्शन, अवधूत, भिक्षुवर्य, सुरेश्वर, किरात, सुनटनर्तक, ब्रह्मचारी, यक्ष, वैश्यानाथ, द्विजेश्वर, हंसरूप, द्विज, नतेश्वर आदि हुए हैं। वेदों में रुद्रों का जिक्र है। रुद्र 11 बताए जाते हैं- कपाली, पिंगल, भीम, विरुपाक्ष, विलोहित, शास्ता, अजपाद, आपिर्बुध्य, शंभू, चण्ड तथा भव। 18. शिव का विरोधाभासिक परिवार शिवपुत्र कार्तिकेय का वाहन मयूर है, जबकि शिव के गले में वासुकि नाग है। स्वभाव से मयूर और नाग आपस में दुश्मन हैं। इधर गणपति का वाहन चूहा है, जबकि सांप मूषकभक्षी जीव है। पार्वती का वाहन शेर है, लेकिन शिवजी का वाहन तो नंदी बैल है। इस विरोधाभास या वैचारिक भिन्नता के बावजूद परिवार में एकता है। 19. ति‍ब्बत स्थित कैलाश पर्वत पर उनका निवास है। जहां पर शिव विराजमान हैं उस पर्वत के ठीक नीचे पाताल लोक है जो भगवान विष्णु का स्थान है। शिव के आसन के ऊपर वायुमंडल के पार क्रमश: स्वर्ग लोक और फिर ब्रह्माजी का स्थान है। 20.शिव भक्त : ब्रह्मा, विष्णु और सभी देवी-देवताओं सहित भगवान राम और कृष्ण भी शिव भक्त है। हरिवंश पुराण के अनुसार, कैलास पर्वत पर कृष्ण ने शिव को प्रसन्न करने के लिए तपस्या की थी। भगवान राम ने रामेश्वरम में शिवलिंग स्थापित कर उनकी पूजा-अर्चना की थी। 21.शिव ध्यान : शिव की भक्ति हेतु शिव का ध्यान-पूजन किया जाता है। शिवलिंग को बिल्वपत्र चढ़ाकर शिवलिंग के समीप मंत्र जाप या ध्यान करने से मोक्ष का मार्ग पुष्ट होता है। 22.शिव मंत्र : दो ही शिव के मंत्र हैं पहला- ॐ नम: शिवाय। दूसरा महामृत्युंजय मंत्र- ॐ ह्रौं जू सः। ॐ भूः भुवः स्वः। ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्‌। स्वः भुवः भूः ॐ। सः जू ह्रौं ॐ ॥ है। 23.शिव व्रत और त्योहार : सोमवार, प्रदोष और श्रावण मास में शिव व्रत रखे जाते हैं। शिवरात्रि और महाशिवरात्रि शिव का प्रमुख पर्व त्योहार है। 24.शिव प्रचारक : भगवान शंकर की परंपरा को उनके शिष्यों बृहस्पति, विशालाक्ष (शिव), शुक्र, सहस्राक्ष, महेन्द्र, प्राचेतस मनु, भरद्वाज, अगस्त्य मुनि, गौरशिरस मुनि, नंदी, कार्तिकेय, भैरवनाथ आदि ने आगे बढ़ाया। इसके अलावा वीरभद्र, मणिभद्र, चंदिस, नंदी, श्रृंगी, भृगिरिटी, शैल, गोकर्ण, घंटाकर्ण, बाण, रावण, जय और विजय ने भी शैवपंथ का प्रचार किया। इस परंपरा में सबसे बड़ा नाम आदिगुरु भगवान दत्तात्रेय का आता है। दत्तात्रेय के बाद आदि शंकराचार्य, मत्स्येन्द्रनाथ और गुरु गुरुगोरखनाथ का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। 25.शिव महिमा : शिव ने कालकूट नामक विष पिया था जो अमृत मंथन के दौरान निकला था। शिव ने भस्मासुर जैसे कई असुरों को वरदान दिया था। शिव ने कामदेव को भस्म कर दिया था। शिव ने गणेश और राजा दक्ष के सिर को जोड़ दिया था। ब्रह्मा द्वारा छल किए जाने पर शिव ने ब्रह्मा का पांचवां सिर काट दिया था। 26.शैव परम्परा : दसनामी, शाक्त, सिद्ध, दिगंबर, नाथ, लिंगायत, तमिल शैव, कालमुख शैव, कश्मीरी शैव, वीरशैव, नाग, लकुलीश, पाशुपत, कापालिक, कालदमन और महेश्वर सभी शैव परंपरा से हैं। चंद्रवंशी, सूर्यवंशी, अग्निवंशी और नागवंशी भी शिव की परंपरा से ही माने जाते हैं। भारत की असुर, रक्ष और आदिवासी जाति के आराध्य देव शिव ही हैं। शैव धर्म भारत के आदिवासियों का धर्म है। 27.शिव के प्रमुख नाम : शिव के वैसे तो अनेक नाम हैं जिनमें 108 नामों का उल्लेख पुराणों में मिलता है लेकिन यहां प्रचलित नाम जानें- महेश, नीलकंठ, महादेव, महाकाल, शंकर, पशुपतिनाथ, गंगाधर, नटराज, त्रिनेत्र, भोलेनाथ, आदिदेव, आदिनाथ, त्रियंबक, त्रिलोकेश, जटाशंकर, जगदीश, प्रलयंकर, विश्वनाथ, विश्वेश्वर, हर, शिवशंभु, भूतनाथ और रुद्र। 28.अमरनाथ के अमृत वचन : शिव ने अपनी अर्धांगिनी पार्वती को मोक्ष हेतु अमरनाथ की गुफा में जो ज्ञान दिया उस ज्ञान की आज अनेकानेक शाखाएं हो चली हैं। वह ज्ञानयोग और तंत्र के मूल सूत्रों में शामिल है। 'विज्ञान भैरव तंत्र' एक ऐसा ग्रंथ है, जिसमें भगवान शिव द्वारा पार्वती को बताए गए 112 ध्यान सूत्रों का संकलन है। 29.शिव ग्रंथ : वेद और उपनिषद सहित विज्ञान भैरव तंत्र, शिव पुराण और शिव संहिता में शिव की संपूर्ण शिक्षा और दीक्षा समाई हुई है। तंत्र के अनेक ग्रंथों में उनकी शिक्षा का विस्तार हुआ है। 30.शिवलिंग : वायु पुराण के अनुसार प्रलयकाल में समस्त सृष्टि जिसमें लीन हो जाती है और पुन: सृष्टिकाल में जिससे प्रकट होती है, उसे लिंग कहते हैं। इस प्रकार विश्व की संपूर्ण ऊर्जा ही लिंग की प्रतीक है। वस्तुत: यह संपूर्ण सृष्टि बिंदु-नाद स्वरूप है। बिंदु शक्ति है और नाद शिव। बिंदु अर्थात ऊर्जा और नाद अर्थात ध्वनि। यही दो संपूर्ण ब्रह्मांड का आधार है। इसी कारण प्रतीक स्वरूप शिवलिंग की पूजा-अर्चना है। 31.बारह ज्योतिर्लिंग : सोमनाथ, मल्लिकार्जुन, महाकालेश्वर, ॐकारेश्वर, वैद्यनाथ, भीमशंकर, रामेश्वर, नागेश्वर, विश्वनाथजी, त्र्यम्बकेश्वर, केदारनाथ, घृष्णेश्वर। ज्योतिर्लिंग उत्पत्ति के संबंध में अनेकों मान्यताएं प्रचलित है। ज्योतिर्लिंग यानी 'व्यापक ब्रह्मात्मलिंग' जिसका अर्थ है 'व्यापक प्रकाश'। जो शिवलिंग के बारह खंड हैं। शिवपुराण के अनुसार ब्रह्म, माया, जीव, मन, बुद्धि, चित्त, अहंकार, आकाश, वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी को ज्योतिर्लिंग या ज्योति पिंड कहा गया है। दूसरी मान्यता अनुसार शिव पुराण के अनुसार प्राचीनकाल में आकाश से ज्‍योति पिंड पृथ्‍वी पर गिरे और उनसे थोड़ी देर के लिए प्रकाश फैल गया। इस तरह के अनेकों उल्का पिंड आकाश से धरती पर गिरे थे। भारत में गिरे अनेकों पिंडों में से प्रमुख बारह पिंड को ही ज्‍योतिर्लिंग में शामिल किया गया। 32.शिव का दर्शन : शिव के जीवन और दर्शन को जो लोग यथार्थ दृष्टि से देखते हैं वे सही बुद्धि वाले और यथार्थ को पकड़ने वाले शिवभक्त हैं, क्योंकि शिव का दर्शन कहता है कि यथार्थ में जियो, वर्तमान में जियो, अपनी चित्तवृत्तियों से लड़ो मत, उन्हें अजनबी बनकर देखो और कल्पना का भी यथार्थ के लिए उपयोग करो। आइंस्टीन से पूर्व शिव ने ही कहा था कि कल्पना ज्ञान से ज्यादा महत्वपूर्ण है। 33.कुछ नहीं पीते थे शंकर शिव पुराण सहित किसी भी ग्रंथ में ऐसा नहीं लिखा है कि भगवान शिव या शंकर भांग, गांजा आदि का सेवन करते थे। बहुत से लोगों ने भगवान शिव के ऐसे भी चित्र बना लिए हैं जिसमें वे चिलम पीते हुए नजर आते हैं। यह दोनों की कृत्य भगवान शंकर का अपमान करने जैसा है। यह भगवान शंकर की छवि खराब किए जाने की साजिश है। 34.शिव और शंकर : शिव का नाम शंकर के साथ जोड़ा जाता है। लोग कहते हैं– शिव, शंकर, भोलेनाथ। इस तरह अनजाने ही कई लोग शिव और शंकर को एक ही सत्ता के दो नाम बताते हैं। असल में, दोनों की प्रतिमाएं अलग-अलग आकृति की हैं। शंकर को हमेशा तपस्वी रूप में दिखाया जाता है। कई जगह तो शंकर को शिवलिंग का ध्यान करते हुए दिखाया गया है। अत: शिव और शंकर दो अलग अलग सत्ताएं है। हालांकि शंकर को भी शिवरूप माना गया है। माना जाता है कि महेष (नंदी) और महाकाल भगवान शंकर के द्वारपाल हैं। रुद्र देवता शंकर की पंचायत के सदस्य हैं। 35.देवों के देव महादेव : देवताओं की दैत्यों से प्रतिस्पर्धा चलती रहती थी। ऐसे में जब भी देवताओं पर घोर संकट आता था तो वे सभी देवाधिदेव महादेव के पास जाते थे। दैत्यों, राक्षसों सहित देवताओं ने भी शिव को कई बार चुनौती दी, लेकिन वे सभी परास्त होकर शिव के समक्ष झुक गए इसीलिए शिव हैं देवों के देव महादेव। वे दैत्यों, दानवों और भूतों के भी प्रिय भगवान हैं। वे राम को भी वरदान देते हैं और रावण को भी। भगवान शिव ने हर काल में लोगों को दर्शन दिए हैं। राम के समय भी शिव थे। महाभारत काल में भी शिव थे और विक्रमादित्य के काल में भी शिव के दर्शन होने का उल्लेख मिलता है। भविष्य पुराण अनुसार राजा हर्षवर्धन को भी भगवान शिव ने दर्शन दिए थे। उपरोक्त छोटी छोटी जानकारी शिवपुराण से संकलित कर आपकी जानकारी के लिए लाया गया है,, हर हर महादेव जय शिव शंकर अज्ञात प्रेषक

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R.G.P.Bhardwaj Aug 2, 2020

🍁🏯🌺👏🕉️👏🌺🏯🍁 🌞~*आज का हिन्दू पंचांग*~🌞 🚩✊जय हिंदुत्व✊🚩 🌈 *दिनांक 02 अगस्त 2020* 🌈 *दिन - रविवार* 🌈 *विक्रम संवत - 2077 (गुजरात - 2076)* 🌈 *शक संवत - 1942* 🌈 *अयन - दक्षिणायन* 🌈 *ऋतु - वर्षा* 🌈 *मास - श्रावण* 🌈 *पक्ष - शुक्ल* 🌈 *तिथि - चतुर्दशी रात्रि 09:28 तक तत्पश्चात पूर्णिमा* 🌈 *नक्षत्र - पूर्वाषाढा सुबह 06:52 तक तत्पश्चात उत्तराषाढा* 🌈 *योग - विष्कम्भ सुबह 07:53 तक तत्पश्चात प्रीति* 🌈 *राहुकाल - शाम 05:26 से शाम 07:04 तक* 🌈 *सूर्योदय - 06:13* 🌈 *सूर्यास्त - 19:15* 🌈 *दिशाशूल - पश्चिम दिशा में* 🌈 *व्रत पर्व विवरण - ✨ *विशेष - रविवार, चतुर्दशी और पूर्णिमा के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)* ✨ *रविवार के दिन मसूर की दाल, अदरक और लाल रंग का साग नहीं खाना चाहिए।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, श्रीकृष्ण खंडः 75.90)* ✨ *रविवार के दिन काँसे के पात्र में भोजन नहीं करना चाहिए।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, श्रीकृष्ण खंडः 75)* ✨ *स्कंद पुराण के अनुसार रविवार के दिन बिल्ववृक्ष का पूजन करना चाहिए। इससे ब्रह्महत्या आदि महापाप भी नष्ट हो जाते हैं।* 🌞~*आज का हिन्दू पंचांग*~🌞 🚩✊जय हिंदुत्व✊🚩 🌻 *रक्षाबंधन के दिन* 🌻 🚩 *यदि आप भी इस रक्षाबंधन पर धन व व्यापार से जुड़ी सभी परेशानियां खत्म करना चाहते हैं तो अपनाएं ये ज्योतिष शास्त्र के आसान उपाय...* ⚛️ *रक्षाबंधन पर करें इन 10 में से कोई 1 काम, हमेशा भरी रहेगी तिजोरी* ⏩ *व्यापार वृद्धि के लिए* *रक्षाबंधन के दिन महालक्ष्मी मंदिर में या घर पर ही देवी लक्ष्मी का पूजन कर दूध, चावल, केला व पंच मेवा से बनी खीर देवी को अर्पण करें व बालकों में प्रसाद बांटे।* ⏩ *शत्रु ज्यादा परेशान कर रहे हों तो* *शत्रु परेशान कर रहे हों तो रक्षाबंधन के दिन हनुमानजी को चोला चढ़ाकर, गुड़ का भोग लगाएं व गुलाब के फूल चढ़ाएं । इस समस्या का समाधान हो जाएगा।* ⏩ *दरिद्रता दूर करने के लिए* *कोई भी ऐसा पौधा जो वटवृक्ष के नीचे उगा हुआ हो, राखी के दिन उसे अपने घर के किसी गमले में लाकर लगा लें। ऐसा करने से दरिद्रता दुर होती है और घर में स्थाई लक्ष्मी का निवास होता है।* ⏩ *पैसा वापस न मिल रहा हो तो* *किसी ने आपसे पैसा उधार लिया हो और वापस न लौटा रहा हो तो रक्षाबंधन के दिन सूखे कपूर का काजल बनाकर एक कागज पर उसका नाम इस काजल से लिखकर एक भारी पत्थर से दबा दें।पैसा बहुत जल्दी वापस मिल जाएगा।* ⏩ *बीमार रहते हों तो* *यदि आप अक्सर बीमार रहते हैं तो रात को एक सिक्का सिरहाने रखें और सुबह उस सिक्के को श्मशान में बाहर से फेंक आएं।ये बीमारी की समस्या जल्द ही खत्म हो जाएगी।* ⏩ *व्यापार में सफलता न मिल रही हो तो* *यदि आप व्यापार में लगातार असफल हो रहे हों तो रक्षाबंधन के दिन दोपहर में पांच कागजी नींबू, एक मुट्ठी काली मिर्च व एक मुट्ठी पीली सरसों के साथ रख दें।अगले दिन सुबह इन सभी चीजों को किसी समसान स्थान पर गाड़ दें।* ⏩ *ऋण मुक्ति के लिए* *रक्षाबंधन के दिन गेहूँ के आटे में गुड़ मिलाकर पुए बनाएं और किसी हनुमान मंदिर में जाकर चढ़ाएं और गरीबों में बाँट दें।कर्ज से मुक्ति मिल जाएगी।* ⏩ *धन-समृद्धि के लिए* *अगर आप अपार धन-समृद्धि चाहते हैं, तो रक्षाबंधन के दिन लाल रंग के मिट्टी के घड़े में नारियल रखकर उस पर लाल कपड़ा ढ़ककर झोली बांधकर बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें।* ⏩ *आर्थिक काम में असफलता मिल रही हो तो* *सरसों के तेल में सिके गेहूँ के आटे व पुराने गुड़ से तैयार सात पुए, सात मदार (आक) के फूल, सिंदूर, आटे से तैयार सरसों के तेल का दीपक, पत्तल या अरंडी के पत्ते पर रखकर रक्षाबंधन की रात में किसी चौराहे पर रख कर कहें - हे मेरे दुर्भाग्य तुझे यही छोड़े जा रहा हूं कृपा करके मेरा पीछा ना करना।* ⏩ *कार्य सिद्धि के लिए* *रक्षाबंधन के दिन गणेशजी के चित्र के सामने लौंग व सुपारी रखें।जब भी कहीं काम पर जाना हो, तो इस लौंग और सुपारी को साथ ले कर जाएं, तो काम सिद्ध होगा।* 🌞~*आज का हिन्दू पंचांग*~🌞 🚩✊जय हिंदुत्व✊🚩 🔯🔯पंचक ⏩4 अगस्त रात्रि 8.47 से 9 अगस्त सायं 7.05 बजे तक ⏩31 अगस्त मध्यरात्रि बाद 3.48 से 5 सितंबर मध्यरात्रि बाद 2.22 बजे तक 🔯🔯एकादशी ⏩गुरुवार, 30 जुलाई श्रावण पुत्रदा ⏩अजा एकादशी- 15 अगस्त- दिन शनिवार ⏩परिवर्तिनी एकादशी- 29 अगस्त दिन शनिवार 🔯🔯प्रदोष ⏩शनिवार, 01 अगस्त शनि प्रदोष व्रत (शुक्ल) ⏩रविवार, 16 अगस्त प्रदोष व्रत (कृष्ण) ⏩रविवार, 30 अगस्त प्रदोष व्रत (शुक्ल) 🔯🔯अमावस्या ⏩19 अगस्त 2020 - बुधवार - भाद्रपद अमावस्या। 🔯🔯पूर्णिमा ⏩सोमवार, 03 अगस्त श्रावण पूर्णिमा व्रत 🌞~*आज का हिन्दू पंचांग*~🌞 🚩✊जय हिंदुत्व✊🚩 01.🚩🚩🚩मेष (Aries) - आज आपकी कोई बहुत पुरानी ख्वाहिश पूरी हो सकती है। आपके लिए आज कार्ड्स का संकेत है कि आप चुनौतियों और परेशानियों को भविष्य के लिए टाल दें। आज आराम करें और अपने रिश्ते को आत्मनिरीक्षण करें। एक इच्छा पूरी होगी। अपनी आंतरिक आवाज और अपनी चेतना पर भरोसा करें। आप इस पर विचार करें कि क्या रिश्तों की मांग के अनुसार आप उसे समय दे पा रहे हैं या नहीं। 02.🚩🚩🚩वृष (Taurus) - आज आप अपने काम के शीर्ष पर हो सकते हैं। लोग आपके तरीकों को अपनी कार्यशैली में ला सकते हैं। आपको आज थोड़ा संभलकर आगे बढ़ना होगा। आज आपको अपने काम की गति धीमी रखनी चाहिए। ज्यादा जल्दबाजी किसी परेशानी का कारण बन सकती है। आप जिम्मेदारियों को फिर से देखना और प्राथमिकता देना चाहेंगे। ध्यान आपको अपना कायाकल्प करने में मदद कर सकता है। 03.🚩🚩🚩मिथुन (Gemini)- आज का दिन आपके लिए विशेष हो सकता है। कुछ ऐसी सफलताएं आपको मिल सकती हैं, जो दूसरों के लिए प्रेरणा का काम करेंगी। आपको अपने कामों पर पूर्ण नियंत्रण रखना होगा। इससे आपको काफी लाभ मिल सकता है। इसके लिए आप कुछ रिसर्च भी करेंगे। अपनी कुशलता से धनार्जन करते रहेंगे। अगर आप करियर में किसी तरह के परिवर्तन पर विचार कर रहे हैं तो ये समय आपके लिए श्रेष्ठ है। 04.🚩🚩🚩कर्क ( Cancer) - आज का दिन आपके लिए कुछ नई चुनौतियों और लक्ष्य वाला हो सकता है। आपको कुछ ऐसे काम करने पड़ सकते हैं, जो दूसरों के लिए प्रेरणा का काम करें। आपको लोगों से सराहना और सहयोग मिलने के संकेत कार्ड्स पर हैं। आपके लिए आज का दिन अपने प्रोफेशनल फ्रंट पर बहुत अच्छे परिणाम देने वाला रहेगा। आपको अपने लोगों से या अपनी टीम से सम्मान मिल सकता है। साथी से संबंध बहुत मधुर रहेंगे, कोई सरप्राइज भी मिल सकता है। 05.🚩🚩🚩सिंह (Leo) - आज का दिन आपके लिए मिलाजुला रह सकता है। बिना गहन सोच विचार के कोई निर्णय न लें। अपने किसी मित्र या पुराने सहायक से सलाह अवश्य लें। किसी पुराने जानकार से मुलाकात हो सकती है को आपको किसी नए अवसर से अवगत करवाएगा। आज किसी बात को लेकर परेशानियों से घिरे रहेंगे। यदि कोई निर्णय लेने में दुविधा हो रही हो तो किसी से सलाह करें। अपनी अंतरात्मा की आवाज़ अवश्य सुनें। आज अपनी भावुकता पर नियंत्रण रखें। 06.🚩🚩🚩कन्या (Virgo) - आज का दिन आपके लिए शुभ है, खासकर उन लोगों के लिए जो किसी के वादों या आश्वासनों के पूरा होने के इंतजार में हैं। आप उन लोगों से अपनी बातें स्पष्ट रूप से कर पाएंगे जो आपके भविष्य और फैसलों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित कर सकते हैं। आप आप कुछ लोगों को उनके पुराने वादे याद दिला सकते हैं। आज आपको पुराने आश्वासनों से लाभ मिल सकता है। आपकी बातों को आज तवज्जो दी जाएगी। 07.🚩🚩🚩तुला (Libra) - आज का दिन उन लोगों के लिए काफी अच्छा हो सकता है, जो अपने लिए किसी योजना पर काम कर रहे हैं। आपके पास कुछ अच्छे आइडिया हो सकते हैं, जो बिजनेस या करियर में आपको एक नई पहचान दिला सकते हैं। कुछ मामलों में आपको पुरस्कार या कोई ऐसा रिवार्ड मिल सकता है जो आपके दिन को यादगार बना देगा। आपका पॉजिटिव एटिट्यूड आपको काफी आगे ले जाएगा। परिणाम सकारात्मक और मनचाहे हो सकते हैं। आज आपका कुछ समय खरीदारी में बीत सकता है। 08.🚩🚩🚩वृश्चिक(Scorpio)- आज आपको कुछ सामाजिक हितों के काम में शामिल होने का मौका मिल सकता है। जो आपको सम्मान दिला सकता है। कुछ ऐसे काम जो आपकी इमेज को एक नया रंग दे सकते हैं, उन्हें करने की कोशिश करें। कुछ नया शुरू करने या नई जिम्मेदारी मिलने का दिन है। आपको अपने कार्यक्षेत्र में विशेष पहचान मिलेगी। आपकी सलाह लोगों के लिए बहुत मददगार हो सकती है। आपको अपने इस स्वभाव के साथ ही आगे बढ़ना है। 09.🚩🚩🚩धनु (Sagittarius) - आज का दिन आपके लिए कुछ अच्छी सूचनाओं वाला हो सकता है। आपको किसी खास व्यक्ति से बातचीत के दौरान कुछ ऐसे तथ्य पता चल सकते हैं जो आपको थोड़ा विचलित कर सकते हैं। आपके लिए दिन फिर भी इन सब बातों से निकलकर आगे बढ़ने का है। आपके लिए जीवन साथी या प्रेमी का व्यवहार बहुत ऊर्जा देने वाला हो सकता है। बिजनेस के लिए चीजें आपके पक्ष में आ सकती हैं। 10.🚩🚩🚩मकर(Capricorn) - आज आपका दिन अपने कामों को तेजी से निपटाने में गुजर सकता है। आज आपकी टू डू लिस्ट में प्रायोरिटी के आधार पर काम पूरे करने का दबाव हो सकता है। अपने आपको पूरी तरह काम पर फोकस रखें। आपकी प्रोडक्टिविटी भी बढ़ेगी। आपके लिए आज का दिन कई मामलों में दिन बहुत अच्छे परिणाम देने वाला रहेगा। रिश्तों की मजबूती और प्रेरणा के लिए भी समय आपके अनुकूल है। 11.🚩🚩🚩कुम्भ (Aquarius) - आज आपके लिए दिन अपनी लंबे समय से पेंडिंग पड़ी यात्रा की योजना को मूर्त रूप देने का हो सकता है। आप आज किसी बिजनेस ट्रीप पर भी जा सकते हैं। इससे आपको कुछ लाभ होता दिख रहा है। कुछ लोगों के लिए ये समय आपको खुद के लिए और परिवार के लिए रिजर्व रखने का है। परिवार के साथ कुछ अच्छी यादें इकट्ठा कर सकते हैं। आपके कार्य की काफी प्रशंसा हो सकती है। वक्त के हिसाब से आपको परिणाम मिलते जाएंगे। 12.🚩🚩🚩मीन (Pieces) - आज आपको उन परिस्थितियों का विरोध करना होगा, जिनमें आपको अतिरिक्त जिम्मेदारियों से लादा जा सकता हो। आप काम के दबाव से परेशान रह सकते हैं। करियर के मामलों में इस बात का विशेष रुप से ध्यान रखें। नकारात्मक लोगों और चीजों से दूर रहें। आप जल्दबाजी में कोई गलत निर्णय ले सकते हैं, इसलिए गुस्से में कोई बात ना कहें, ना ही किसी प्रकार का निर्णय लें। 🌞~*आज का हिन्दू पंचांग*~🌞 🚩✊जय हिंदुत्व✊🚩 ✨💎✨जिनका आज जन्मदिन है उनको हार्दिक शुभकामनाएं ✨✨दिनांक 2 को जन्मे व्यक्ति का मूलांक 2 होगा। इस मूलांक को चंद्र ग्रह संचालित करता है। चंद्र ग्रह मन का कारक होता है। आप अत्यधिक भावुक होते हैं। आप स्वभाव से शंकालु भी होते हैं। दूसरों के दर्द से आप परेशान हो जाना आपकी कमजोरी है। आप मानसिक रूप से तो स्वस्थ हैं लेकिन शारीरिक रूप से कमजोर हैं। चंद्र ग्रह स्त्री ग्रह माना गया है। अत: आप अत्यंत कोमल स्वभाव के हैं। आपमें अभिमान तो जरा भी नहीं होता। चंद्र के समान आपके स्वभाव में भी उतार-चढ़ाव पाया जाता है। आप अगर जल्दबाजी को त्याग दें तो आप जीवन में सफल होते हैं। 🌞~*आज का हिन्दू पंचांग*~🌞 🚩✊जय हिंदुत्व✊🚩 🕉️🕉️शुभ दिनांक : 2, 11, 20, 29 🕉️🕉️शुभ अंक : 2, 11, 20, 29, 56, 65, 92 🕉️🕉️शुभ वर्ष : 2027, 2029, 2036 🕉️🕉️ईष्टदेव : भगवान शिव, बटुक भैरव 🕉️🕉️शुभ रंग : सफेद, हल्का नीला, सिल्वर ग्रे 🕉️🕉️कैसा रहेगा यह वर्ष वर्ष काफी समझदारी से चलने का रहेगा। लेखन से संबंधित मामलों में सावधानी रखना होगी। बगैर देखे किसी कागजात पर हस्ताक्षर ना करें। किसी नवीन कार्य योजनाओं की शुरुआत करने से पहले बड़ों की सलाह लें। व्यापार-व्यवसाय की स्थिति ठीक-ठीक रहेगी। स्वास्थ्य की दृष्टि से संभल कर चलने का वक्त होगा। पारिवारिक विवाद आपसी मेलजोल से ही सुलझाएं। दखलअंदाजी ठीक नहीं रहेगी। 🌞~*आज का हिन्दू पंचांग*~🌞 🚩✊जय हिंदुत्व✊🚩☀!! श्री हरि: शरणम् !! ☀ 🍃🎋🍃🎋🕉️🎋🍃🎋🍃 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

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Vijay Jaiswal Aug 2, 2020

Gayan varsa ☝☝☝☝☝☝☝☝💅💅💅💅💅💅💅🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌺🌺🌺🌺🌺🌺🙏🙏🙏🙏🙏

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Anju Mishra Jul 31, 2020

रक्षा बंधन के दिन मनाई जाती है नारियल पूर्णिमा, जानिए कुछ खास बातें 1. भारत के दक्षिण भारत में पश्चिमी घाट सहित सभी समुद्री क्षेत्रों में हिन्दू कैलेंडर अनुसार भाद्रपद पूर्णिमा को नारियल पूर्णिमा कहा जाता है। 2. नारियल पूर्णिमा खासकर सभी मछुआरों का त्योहार होता है। मछुआरे भी मछली पकड़ने की शुरुआत इसी दिन से भगवान इंद्र और वरुण की पूजा करने से करते हैं।  3. यह इस दिन वर्षा के देवता इंद्र और समुद्र के देवता वरुण देव की पूजा की जाती है। पूजा के दौरान विधिवत रूप में उन्हें केल के पत्तों को समुद्र किनारे नारियल अर्पित किए जाते हैं। मतलब समुद्र में नारियल फेंके जाते हैं ताकि समुद्र देव हमारी हर प्रकार से रक्षा करें। इसीलिए इस राखी पूर्णिमा को वहां नारियल पूर्णिमा भी कहते हैं। 4. समुद्र को अर्पित करने के पूर्व नारियल को पीले वस्त्र और पत्तों से अच्छे से सजाते हैं और फिर उसे जुलूस के रूप में ले जाते हैं। फिर नारियल की शिखा समुद्र की ओर रखकर विधिवत पूजा अर्चुना और मंत्र पढ़ने के बाद अर्पित किया जाता है। इसके उपरांत धूप और दीप किया जाता है। नारियल अर्पण करते समय प्रार्थना करते हैं कि 'हे वरुणदेव आपके रौद्ररूप से हमारी रक्षा हो और आपका आशीर्वाद प्राप्त हो'। 5. दक्षिण भारत में यह त्योहार समाज का हर वर्ग अपने अपने तरीके से मनाता है। इस दिन जनेऊ धारण करने वाले अपनी जनेऊ बदलते हैं। इस कारण इस त्योहार को अबित्तम भी कहा जाता है। इसे श्रावणी या ऋषि तर्पण भी कहते हैं।

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