इक्यावन शक्तिपीठों में से एक माँदंतेश्‍वरी मंदिर 〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰 छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र की हसीन वादियों में स्तिथ है, दन्तेवाड़ा का प्रसिद्ध दंतेश्‍वरी मंदिर। देवी पुराण में शक्ति पीठों की संख्या 51 बताई गई है जबकि तन्त्रचूडामणि में 52 शक्तिपीठ बताए गए हैं। जबकि कई अन्य ग्रंथों में यह संख्या 108 तक बताई गई है। दन्तेवाड़ा को हालांकि देवी पुराण के 51 शक्ति पीठों में शामिल नहीं किया गया है लेकिन इसे देवी का 52 वा शक्ति पीठ माना जाता है। मान्यता है की यहाँ पर सती का दांत गिरा था इसलिए इस जगह का नाम दंतेवाड़ा और माता क़ा नाम दंतेश्वरी देवी पड़ा। 51 शक्ति पीठों की जानकारी और शक्ति पीठों के निर्माण कि कहानी आप हमारे पिछले लेख 51 शक्ति पीठ में पढ़ सकते है। दंतेश्‍वरी मंदिर शंखिनी और डंकिनी नदीयों के संगम पर स्तिथ हैं। दंतेश्‍वरी देवी को बस्तर क्षेत्र की कुलदेवी का दर्ज़ा प्राप्त है। इस मंदिर की एक खासियत यह है की माता के दर्शन करने के लिए आपको लुंगी या धोति पहनकर ही मंदीर में जाना होगा। मंदिर में सिले हुए वस्त्र पहन कर जानें की मनाही है। मंदिर के निर्माण की कथा : दन्तेवाड़ा शक्ति पीठ में माँ दन्तेश्वरी के मंदीर का निर्माण कब व कैसे हूआ इसकि क़हानी कुछ इस तरह है। ऐसा माना जाता है कि बस्‍तर के पहले काकातिया राजा अन्‍नम देव वारंगल से यहां आए थे। उन्‍हें दंतेवश्‍वरी मैय्या का वरदान मिला था। कहा जाता है कि अन्‍नम देव को माता ने वर दिया था कि जहां तक वे जाएंगे, उनका राज वहां तक फैलेगा। शर्त ये थी कि राजा को पीछे मुड़कर नहीं देखना था और मैय्या उनके पीछे-पीछे जहां तक जाती, वहां तक की ज़मीन पर उनका राज हो जाता। अन्‍नम देव के रूकते ही मैय्या भी रूक जाने वाली थी। अन्‍नम देव ने चलना शुरू किया और वे कई दिन और रात चलते रहे। वे चलते-चलते शंखिनी और डंकिनी नंदियों के संगम पर पहुंचे। यहां उन्‍होंने नदी पार करने के बाद माता के पीछे आते समय उनकी पायल की आवाज़ महसूस नहीं की। सो वे वहीं रूक गए और माता के रूक जाने की आशंका से उन्‍होंने पीछे पलटकर देखा। माता तब नदी पार कर रही थी। राजा के रूकते ही मैय्या भी रूक गई और उन्‍होंने आगे जाने से इनकार कर दिया। दरअसल नदी के जल में डूबे पैरों में बंधी पायल की आवाज़ पानी के कारण नहीं आ रही थी और राजा इस भ्रम में कि पायल की आवाज़ नहीं आ रही है, शायद मैय्या नहीं आ रही है सोचकर पीछे पलट गए। वचन के अनुसार मैय्या के लिए राजा ने शंखिनी-डंकिनी नदी के संगम पर एक सुंदर घर यानि मंदिर बनवा दिया। तब से मैय्या वहीं स्‍थापित है। दंतेश्वरी मंदिर के पास ही शंखिनी और डंकिन नदी के संगम पर माँ दंतेश्वरी के चरणों के चिन्ह मौजूद है और यहां सच्चे मन से की गई मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण होती है। अदभुत है मंदिर : दंतेवाड़ा में माँ दंतेश्वरी की षट्भुजी वाले काले ग्रेनाइट की मूर्ति अद्वितीय है। छह भुजाओं में दाएं हाथ में शंख, खड्ग, त्रिशुल और बाएं हाथ में घंटी, पद्य और राक्षस के बाल मांई धारण किए हुए है। यह मूर्ति नक्काशीयुक्त है और ऊपरी भाग में नरसिंह अवतार का स्वरुप है। माई के सिर के ऊपर छत्र है, जो चांदी से निर्मित है। वस्त्र आभूषण से अलंकृत है। द्वार पर दो द्वारपाल दाएं-बाएं खड़े हैं जो चार हाथ युक्त हैं। बाएं हाथ सर्प और दाएं हाथ गदा लिए द्वारपाल वरद मुद्रा में है। इक्कीस स्तम्भों से युक्त सिंह द्वार के पूर्व दिशा में दो सिंह विराजमान जो काले पत्थर के हैं। यहां भगवान गणेश, विष्णु, शिव आदि की प्रतिमाएं विभिन्न स्थानों में प्रस्थापित है। मंदिर के गर्भ गृह में सिले हुए वस्त्र पहनकर प्रवेश प्रतिबंधित है। मंदिर के मुख्य द्वार के सामने पर्वतीयकालीन गरुड़ स्तम्भ से अड्ढवस्थित है। बत्तीस काष्ठड्ढ स्तम्भों और खपरैल की छत वाले महामण्डप मंदिर के प्रवेश के सिंह द्वार का यह मंदिर वास्तुकला का अनुपम उदाहरण है। मांई जी का प्रतिदिन श्रृंगार के साथ ही मंगल आरती की जाती है। माँ भुनेश्वरी देवी : माँ दंतेश्वरी मंदिर के पास ही उनकी छोटी बहन माँ भुनेश्वरी का मंदिर है। माँ भुनेश्वरी को मावली माता, माणिकेश्वरी देवी के नाम से भी जाना जाता है। माँ भुनेश्वरी देवी आंध्रप्रदेश में माँ पेदाम्मा के नाम से विख्यात है और लाखो श्रद्धालु उनके भक्त हैं। छोटी माता भुवनेश्वरी देवी और मांई दंतेश्वरी की आरती एक साथ की जाती है और एक ही समय पर भोग लगाया जाता है। लगभग चार फीट ऊंची माँ भुवनेश्वरी की अष्टड्ढभुजी प्रतिमा अद्वितीय है। मंदिर के गर्भगृह में नौ ग्रहों की प्रतिमाएं है। वहीं भगवान विष्णु अवतार नरसिंह, माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमाएं प्रस्थापित हैं। कहा जाता है कि माणिकेश्वरी मंदिर का निर्माण दसवीं शताब्दी में हुआ। फाल्गुन में होता है मड़ई उत्सव क्या आयोज़न : होली से दस दिन पूर्व यहां फाल्गुन मड़ई का आयोजन होता है, जिसमें आदिवासी संस्कृति की विश्वास और परंपरा की झलक दिखाई पड़ती है। नौ दिनों तक चलने वाले फाल्गुन मड़ई में आदिवासी संस्कृति की अलग-अलग रस्मों की अदायगी होती है। मड़ई में ग्राम देवी-देवताओं की ध्वजा, छत्तर और ध्वजा दण्ड पुजारियों के साथ शामिल होते हैं। करीब 250 से भी ज्यादा देवी-देवताओं के साथ मांई की डोली प्रतिदिन नगर भ्रमण कर नारायण मंदिर तक जाती है और लौटकर पुनरू मंदिर आती है। इस दौरान नाच मंडली की रस्म होती है, जिसमें बंजारा समुदाय द्वारा किए जाने वाला लमान नाचा के साथ ही भतरी नाच और फाग गीत गाया जाता है। मांई जी की डोली के साथ ही फाल्गुन नवमीं, दशमी, एकादशी और द्वादशी को लमहा मार, कोड़ही मार, चीतल मार और गौर मार की रस्म होती है। मड़ई के अंतिम दिन सामूहिक नृत्य में सैकड़ों युवक-युवती शामिल होते हैं और रात भर इसका आनंद लेते हैं। फाल्गुन मड़ई में दंतेश्वरी मंदिर में बस्तर अंचल के लाखों लोगों की भागीदारी होती है। 〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰

इक्यावन शक्तिपीठों में से एक माँदंतेश्‍वरी मंदिर
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छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र की हसीन वादियों में स्तिथ है, दन्तेवाड़ा का प्रसिद्ध दंतेश्‍वरी मंदिर।  देवी पुराण में शक्ति पीठों की संख्या 51 बताई गई है जबकि तन्त्रचूडामणि में 52 शक्तिपीठ बताए गए हैं। जबकि कई अन्य ग्रंथों में यह संख्या 108 तक बताई गई है। दन्तेवाड़ा को हालांकि देवी पुराण के 51 शक्ति पीठों में शामिल नहीं किया गया है लेकिन इसे देवी का 52 वा शक्ति पीठ माना जाता है। 

 मान्यता है की यहाँ पर सती का दांत गिरा था इसलिए इस जगह का नाम दंतेवाड़ा और माता क़ा नाम दंतेश्वरी देवी पड़ा। 51 शक्ति पीठों की जानकारी और शक्ति पीठों के निर्माण कि कहानी आप हमारे पिछले लेख 51 शक्ति पीठ में पढ़ सकते है। दंतेश्‍वरी मंदिर शंखिनी और डंकिनी नदीयों के संगम पर स्तिथ हैं।

 दंतेश्‍वरी देवी  को बस्तर क्षेत्र की कुलदेवी का दर्ज़ा प्राप्त है। इस मंदिर की एक खासियत यह है की माता के दर्शन करने के लिए आपको लुंगी या धोति पहनकर ही मंदीर में जाना होगा।  मंदिर में सिले हुए वस्त्र पहन कर जानें की मनाही है।

मंदिर के निर्माण की कथा : दन्तेवाड़ा शक्ति पीठ में माँ दन्तेश्वरी के मंदीर का निर्माण कब व कैसे हूआ इसकि क़हानी कुछ इस तरह है। ऐसा माना जाता है कि बस्‍तर के पहले काकातिया राजा अन्‍नम देव वारंगल से यहां आए थे। उन्‍हें दंतेवश्‍वरी मैय्या का वरदान मिला था।

 कहा जाता है कि अन्‍नम देव को माता ने वर दिया था कि जहां तक वे जाएंगे, उनका राज वहां तक फैलेगा। शर्त ये थी कि राजा को पीछे मुड़कर नहीं देखना था और मैय्या उनके पीछे-पीछे जहां तक जाती, वहां तक की ज़मीन पर उनका राज हो जाता। अन्‍नम देव के रूकते ही मैय्या भी रूक जाने वाली थी।

अन्‍नम देव ने चलना शुरू किया और वे कई दिन और रात चलते रहे। वे चलते-चलते शंखिनी और डंकिनी नंदियों के संगम पर पहुंचे। यहां उन्‍होंने नदी पार करने के बाद माता के पीछे आते समय उनकी पायल की आवाज़ महसूस नहीं की। सो वे वहीं रूक गए और माता के रूक जाने की आशंका से उन्‍होंने पीछे पलटकर देखा। माता तब नदी पार कर रही थी।

 राजा के रूकते ही मैय्या भी रूक गई और उन्‍होंने आगे जाने से इनकार कर दिया। दरअसल नदी के जल में डूबे पैरों में बंधी पायल की आवाज़ पानी के कारण नहीं आ रही थी और राजा इस भ्रम में कि पायल की आवाज़ नहीं आ रही है, शायद मैय्या नहीं आ रही है सोचकर पीछे पलट गए।

वचन के अनुसार मैय्या के लिए राजा ने शंखिनी-डंकिनी नदी के संगम पर एक सुंदर घर यानि मंदिर बनवा दिया। तब से मैय्या वहीं स्‍थापित है। दंतेश्वरी मंदिर के पास ही शंखिनी और डंकिन नदी के संगम पर माँ दंतेश्वरी के चरणों के चिन्ह मौजूद है और यहां सच्चे मन से की गई मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण होती है।

अदभुत है मंदिर :  दंतेवाड़ा में माँ दंतेश्वरी की षट्भुजी वाले काले ग्रेनाइट की मूर्ति अद्वितीय है। छह भुजाओं में दाएं हाथ में शंख, खड्ग, त्रिशुल और बाएं हाथ में घंटी, पद्य और राक्षस के बाल मांई धारण किए हुए है। यह मूर्ति नक्काशीयुक्त है और ऊपरी भाग में नरसिंह अवतार का स्वरुप है।

 माई के सिर के ऊपर छत्र है, जो चांदी से निर्मित है। वस्त्र आभूषण से अलंकृत है। द्वार पर दो द्वारपाल दाएं-बाएं खड़े हैं जो चार हाथ युक्त हैं। बाएं हाथ सर्प और दाएं हाथ गदा लिए द्वारपाल वरद मुद्रा में है।

 इक्कीस स्तम्भों से युक्त सिंह द्वार के पूर्व दिशा में दो सिंह विराजमान जो काले पत्थर के हैं। यहां भगवान गणेश, विष्णु, शिव आदि की प्रतिमाएं विभिन्न स्थानों में प्रस्थापित है। मंदिर के गर्भ गृह में सिले हुए वस्त्र पहनकर प्रवेश प्रतिबंधित है।

 मंदिर के मुख्य द्वार के सामने पर्वतीयकालीन गरुड़ स्तम्भ से अड्ढवस्थित है। बत्तीस काष्ठड्ढ स्तम्भों और खपरैल की छत वाले महामण्डप मंदिर के प्रवेश के सिंह द्वार का यह मंदिर वास्तुकला का अनुपम उदाहरण है। मांई जी का प्रतिदिन श्रृंगार के साथ ही मंगल आरती की जाती है।

माँ भुनेश्वरी देवी :  माँ दंतेश्वरी मंदिर के पास ही उनकी छोटी बहन माँ भुनेश्वरी का मंदिर है। माँ भुनेश्वरी को मावली माता, माणिकेश्वरी देवी के नाम से भी जाना जाता है।

 माँ भुनेश्वरी देवी आंध्रप्रदेश में माँ पेदाम्मा के नाम से विख्यात है और लाखो श्रद्धालु उनके भक्त हैं। छोटी माता भुवनेश्वरी देवी और मांई दंतेश्वरी की आरती एक साथ की जाती है और एक ही समय पर भोग लगाया जाता है। लगभग चार फीट ऊंची माँ भुवनेश्वरी की अष्टड्ढभुजी प्रतिमा अद्वितीय है। 

मंदिर के गर्भगृह में नौ ग्रहों की प्रतिमाएं है। वहीं भगवान विष्णु अवतार नरसिंह, माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमाएं प्रस्थापित हैं। कहा जाता है कि माणिकेश्वरी मंदिर का निर्माण दसवीं शताब्दी में हुआ।

फाल्गुन में होता है मड़ई उत्सव क्या आयोज़न : होली से दस दिन पूर्व यहां फाल्गुन मड़ई का आयोजन होता है, जिसमें आदिवासी संस्कृति की विश्वास और परंपरा की झलक दिखाई पड़ती है। नौ दिनों तक चलने वाले फाल्गुन मड़ई में आदिवासी संस्कृति की अलग-अलग रस्मों की अदायगी होती है। मड़ई में ग्राम देवी-देवताओं की ध्वजा, छत्तर और ध्वजा दण्ड पुजारियों के साथ शामिल होते हैं। 

करीब 250 से भी ज्यादा देवी-देवताओं के साथ मांई की डोली प्रतिदिन नगर भ्रमण कर नारायण मंदिर तक जाती है और लौटकर पुनरू मंदिर आती है। इस दौरान नाच मंडली की रस्म होती है, जिसमें बंजारा समुदाय द्वारा किए जाने वाला लमान नाचा के साथ ही भतरी नाच और फाग गीत गाया जाता है। 

मांई जी की डोली के साथ ही फाल्गुन नवमीं, दशमी, एकादशी और द्वादशी को लमहा मार, कोड़ही मार, चीतल मार और गौर मार की रस्म होती है। मड़ई के अंतिम दिन सामूहिक नृत्य में सैकड़ों युवक-युवती शामिल होते हैं और रात भर इसका आनंद लेते हैं। फाल्गुन मड़ई में दंतेश्वरी मंदिर में बस्तर अंचल के लाखों लोगों की भागीदारी होती है।
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कामेंट्स

जितेन्द्र दुबे Apr 15, 2021
🚩🌹🥀जय श्री मंगलमूर्ति गणेशाय नमः 🌺🌹💐🚩🌹🌺 शुभ प्रभात वंदन🌺🌹 राम राम जी 🌺🚩🌹मंदिर के सभी भाई बहनों को राम राम जी परब्रह्म परमात्मा आप सभी की मनोकामना पूर्ण करें 🙏 🚩🔱🚩प्रभु भक्तो को सादर प्रणाम 🙏 🚩🔱 🕉️ नमो भगवते वासुदेवाय नमः ओम नमो नारायण हरि ऊँ तत्सत परब्रह्म परमात्मा नमः ॐ या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता नमस्तस्ए नमस्तस्ए नमस्तस्ए नमो नमःऊँ माँ ब्रम्हचारिणी नमः🌺🚩 ऊँ उमामहेश्वराभ्यां नमः🌺 ऊँ राम रामाय नमः 🌻🌹ऊँ सीतारामचंद्राय नमः🌹 ॐ राम रामाय नमः🌹🌺🌹 ॐ हं हनुमते नमः 🌻ॐ हं हनुमते नमः🌹🥀🌻🌺🌹ॐ शं शनिश्चराय नमः 🚩🌹🚩ऊँ नमः शिवाय 🚩🌻 जय श्री राधे कृष्णा जी🌹 श्री जगत पिता परम परमात्मा श्री हरि विष्णु जी माता लक्ष्मी माता चंद्रघंटा की कृपा दृष्टि आप सभी पर हमेशा बनी रहे 🌹 आप का हर पल मंगलमय हो 🚩जय श्री राम 🚩🌺हर हर महादेव🚩राम राम जी 🥀शुभ प्रभात स्नेह वंदन💐शुभ गुरुवार🌺 हर हर महादेव 🔱🚩🔱🚩🔱🚩🔱🚩 जय माता दी जय श्री राम 🚩 🚩हर हर नर्मदे हर हर नर्मदे 🌺🙏🌻🙏🌻🥀🌹🚩🚩🚩

Alka bhansali Apr 15, 2021
🙏 जय मां दंतेश्वरी 🙏

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Dilip Pareek May 16, 2021

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Renu Singh May 14, 2021

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Renu Singh May 14, 2021

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🌹🌹.!! ॐ श्री गणेशाय नमः !!.🌹🌹 ******************************** 🌻🌻"पञ्चाङ्ग - 14-05-2021"🌻🌻 ******************************** "अक्षय-तृतिया की हार्दिक शुभकामनाएं" 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 शुभ् विक्रम् संवत् - 2078 राक्षस, (आनन्द), शालिवाहन् शक् संवत् - 1943 प्लव, मास - (अमावस्यांत) वैशाख-माह, पक्ष - शुक्ल, (पूर्णिमांत) वैसाख-माह, तिथि - द्वितीया 05:38:06, बाद-तृतीया, दिन - शुक्रवार, सूर्य प्रविष्टे 1 ज्येष्ठ गते, नक्षत्र - रोहिणी 05:43:52, बाद-मृगशीर्षा, योग - सुकर्मा 25:44:23*, करण - कौलव 05:38:06, बाद-तैतुल, सूर्य - मेष 23:23:35, बाद-वृषभ राशिगत, चन्द्र - वृष 19:12:42, बाद-मिथुन राशिगत, ऋतु - ग्रीष्म, अयन - उत्तरायण, सूर्योदय - 05:32:15, सूर्यास्त - 19:03:00, चंद्रोदय - 07:06:04, चंद्रास्त - 21:27:56, दिन काल - 13:30:44, रात्री काल - 10:28:39, राहू काल - 10:36-12:18 अशुभ, यम घण्टा - 15:40-17:22 अशुभ, अभिजित - 11:51-12:45 शुभ, 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 दिशा शूल - पश्चिम, दक्षिण-पश्चिम अशुभ, दिशा शूल शुभता :- आज शुक्रवार के दिन दही खा कर घर से बाहर निकलें, शुभ रहेगा। ☀️ विशेष :- आज अक्षय-तृतीया तिथि के दिन भगवान श्री परशुराम जी का जन्मोत्सव है। द्वितीया तिथि के दिन बृहती (छोटा बैगन या कटेहरी) एवं तृतीया तिथि के दिन परवल (परमल) खाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त-पुराण : ब्रह्म-खण्ड), 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 ☀️ दिन की शुभ चौघड़ियाँ :~ चर - 05:32 - 07:14, लाभ - 07:14 - 08:55, अमृत - 08:55 - 10:36, शुभ - 12:18 - 13:59, चर - 17:22 - 19:03, ☀️ रात्री की शुभ चौघड़ियाँ :~ लाभ - 21:40 - 22:59, शुभ - 24:17* - 25:36*, अमृत - 25:36* - 26:55*, चर - 26:55* - 28:13*, ☀️ दिन का होरा चक्र ..... शुक्र- 05:32 - 06:40, बुध- 06:40 - 07:47, चन्द्र- 07:47 - 08:55, शनि- 08:55 - 10:03, बृहस्पति- 10:03 - 11:10, मंगल- 11:10 - 12:18, सूर्य- 12:18 - 13:25, शुक्र- 13:25 - 14:33, बुध- 14:33 - 15:40, चन्द्र- 15:40 - 16:48, शनि- 16:48 - 17:55, बृहस्पति- 17:55 - 19:03, ☀️ रात्री का होरा चक्र ..... मंगल- 19:03 - 19:55, सूर्य- 19:55 - 20:48, शुक्र- 20:48 - 21:40, बुध- 21:40 - 22:33, चन्द्र- 22:33 - 23:25, शनि- 23:25 - 24:17*, बृहस्पति- 24:17* - 25:10*, मंगल- 25:10* - 26:02*, सूर्य- 26:02* - 26:55*, शुक्र- 26:55* - 27:47*, बुध- 27:47* - 28:39*, चन्द्र- 28:39* - 29:32*, ******************************** ✡️⚛️श्री शिव दुर्गा दिव्य धाम⚛️✡️ ☸️संस्थापक-पंडित राजेश शर्मा☸️ ☯️करोल बाग,जस्सियां रोड लुधियाना☯️ ⭐सम्पर्क सूत्र- ⭐+91 94171 90476⭐ ⭐+91 99143 90476⭐ ********************************* !!🍒!! राशिफल !!🍒!! ☀️ मेष राशि :- आज आप अपने कार्य के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करके लोगों की सराहना हासिल करेंगे। छात्रों का पढ़ाई में मन लगेगा। धार्मिक कार्यों में हिस्सा लेंगे। पूजा पाठ में रुचि बढ़ेगी। वाहन चलाते समय सावधानी बरतें। आज मंदिर जाकर आराधना करें। कार्यस्थल पर चुनौती मिलेगी। नौकरीपेशा का ट्रांसफर हो सकता है। सेहत का ध्यान रखें। जीवन-साथी से मधुरता रहेगी। शुभ अंक - 1 और शुभ रंग - लाल है। ☀️ वृष राशि :- परिवार की उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए आपको कुछ कर दिखाना होगा। धन की अहमियत को आप अच्छे से जानते हैं, इसलिए आज के दिन आपके द्वारा बचाया गया धन आपके काफी काम आएगा। किसी की सेहत को लेकर चिंतित हो सकते हैं। अनजान लोगों से लेन-देन करने में सावधानी रखें। मित्रों से मुलाकात होगी। दिन ठीक रहेगा। शुभ अंक - 2 और शुभ रंग - सफेद है। ☀️ मिथुन राशि :- कार्य की अधिकता के बावजूद भी आज आप काफी ऊर्जावान रहेंगे।सामाजिक जिम्मेदारियों को पूरा कर पाएंगे। रिश्तेदारों से सुखद सूचना मिलेगी। प्रसन्न रहेंगे। धन लाभ होने की संभावना है। कार्य को तय वक्त से पहले ही पूरा कर सकते हैं। आप अपने पुराने मित्रों से मिलने का प्लान बना सकते हैं। जीवन-साथी को उपहार देंगे। शुभ अंक - 3 और शुभ रंग - पीला है। ☀️ कर्क राशि :- आज आपको पैसों की जरुरत होगी, लेकिन इंतजाम करने में काफी दिक्कत होगी। अपने आफिस से जल्दी निकलने की कोशिश करें और वे काम करें जिन्हें आप वाकई पसंद करते हैं। आपने बीते समय में बहुत पैसा खर्च किया है, जिसका खामियाजा आज आपको भुगतना पड़ सकता है। शुभ अंक - 4 और शुभ रंग - सफेद है। ☀️ सिंह राशि :- यदि घर में किसी लंबे समय से किसी सदस्य की तबियत खराब रही हो तो उसमें सुधार दिखेगा। वाणी की मधुरता आज आपको कार्यक्षेत्र में मान सम्मान दिलाएगी। आप छोटी दूरी की यात्रा पर जा सकते हैं। कर्ज की रकम वापस मिलेगी। नए प्रोजेक्ट पर कार्य शुरू कर सकते हैं। निवेश से फायदा होगा। मित्रों की मदद मिलेगी। शुभ अंक - 5 और शुभ रंग - गोल्डन है। ☀️ कन्या राशि :- आज कारोबार में विस्तार को लेकर निर्णय ले सकते हैं। आपको किस्मत का पूरा सहयोग मिलेगा। युवाओं को कामयाबी मिलेगी। स्वभाव को थोड़ा शांत बना कर रखें। वाणी पर संयम रखना जरूरी होगा। किसी को आपकी बातों से ठेस लग सकती है। संतान पक्ष से खुशखबरी मिलेगी। शासकीय कार्य पूरा कर पाएंगे। धन की स्थिति ठीक रहेगी। शुभ अंक - 1 और शुभ रंग - हरा है। ☀️ तुला राशि :- मन में नकारात्मक विचार की अधिकता रहेगी। किसी मित्र की मदद से अपनी जिम्मेदारी पूरी कर पाएंगे। नया काम लाभ देगा। किसी के साथ मनमुटाव हो सकता है। पास की जगह यात्रा पर जा सकते हैं। मनोरंजन के साधनों पर व्यय होगा। परिवार के साथ अच्छा समय व्यतीत होगा। कुछ तनाव दूर होगा। सेहत का ध्यान रखें। शुभ अंक - 2 और शुभ रंग - सफेद है। ☀️ वृश्चिक राशि :- आज के दिन आलस्य अधिक रहेगा। गुस्से पर नियंत्रण रखने का प्रयास करें। किसी कार्य के पूरा नहीं होने से तनाव में आ सकते हैं। लेकिन धैर्य रखना होगा। दंपत्तियों के बीच मधुरता रहेगी। किसी की बातों के चलते घर का माहौल बिगड़ सकता है। कार्यस्थल पर किसी से मतभेद हो सकते हैं। वाहन सावधानी से चलाएं। कुसंगति से हानि होगी। शुभ अंक - 1 और शुभ रंग - लाल है। ☀️ धनु राशि :- आज आप किसी विषय पर ज्यादा अपनी राय न दें, विपरीत असर पड़ सकता है। शिक्षा के क्षेत्र में कमी का सामना करना पड़ेगा लेकिन ईश्वर की आराधना करने से मन को शांति प्राप्त होगी। अपने कार्य के क्षेत्र पर किसी के साथ गुस्से का प्रयोग न करें। इससे लड़ाई झगड़ा होने की आशंका रहेगी। शुभ अंक - 9 और शुभ रंग - पीला है। ☀️ मकर राशि :- आज सुखद समाचार मिलेगा। सेहत में सुधार दिखेगा। परिवार के लोगों के साथ समय बिता पाएंगे। कार्य क्षेत्र में आपकी सराहना होगी। आप सकारात्मक रहेंगे। यात्रा पर भी जाना पड़ सकता है। कारोबार की स्थिति अच्छी रहेगी। पुरानी रकम की वापसी होगी। धन संबंधी दिक्कत दूर होने से आप काफी प्रसन्न रहेंगे। युवाओं को लाभ होगा। शुभ अंक - 1 और शुभ रंग - नीला है। ☀️ कुम्भ राशि :- आज के दिन छात्रों को काफी मेहनत करनी होगी। कैरियर से जुड़ी समस्या का हल होगा। नौकरी मिल सकती है। धन लाभ होगा। कारोबार के सिलसिले में नए फैसले ले सकते हैं। घर के सदस्यों के साथ मधुरता रहेगी। पारिवारिक कार्यक्रम में शामिल होने जा सकते हैं। अनजान लोगों से सावधान रहें। वाणी पर नियंत्रण रखें। शुभ अंक - 2 और शुभ रंग - नीला है। ☀️ मीन राशि :- आज आपके स्वभाव में क्रोध रहेगा। पूर्व में की गई मेहनत का लाभ पा सकते हैं। अचानक नया खर्च सामने आने से आपका मासिक बजट बिगड़ सकता है। सामाजिक लोगों से मुलाकात होगी। आपको कार्यक्षेत्र में लाभ होगा। अपरिचित व्यक्ति से सतर्क रहना होगा, नुकसान हो सकता है। दफ्तर में किसी से अनबन होने की आशंका है। शुभ अंक - 9 और शुभ रंग - पीला है। ******************************** !!🥀!! सुविचार !!🥀!! "पंच त्वाऽनुगमिष्यन्ति यत्र यत्र गमिष्यसि। मित्राण्यमित्रा मध्यस्था उपजीव्योपजीविनः॥" भावार्थ :- पाँच लोग छाया की तरह सदा आपके पीछे लगे रहते हैं। ये पाँच लोग हैं - मित्र, शत्रु, उदासीन, शरण देने वाले और शरणार्थी। भगवान श्री गणेश जी आप सभी का मङ्गल करें। 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐

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