🕉madanpal 🌷
🕉madanpal 🌷 Dec 30, 2018

🌷🕉🚩shubh Ratari jiiii 🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺

🌷🕉🚩shubh Ratari jiiii 
🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺
🌷🕉🚩shubh Ratari jiiii 
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🌷🕉🚩shubh Ratari jiiii 
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🌷🕉🚩shubh Ratari jiiii 
🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺

🌷🕉🌼subh Ratari jiiii
🌹🕉🌼om suerayay namh j
Ⓜ🕉🌼Radhe radhe jiìiiiii
👦🕉🌼jai shree karisana jii
💙💥🔮suryay dev ki karpa aap par hamesha bani rahe jiiii 🕉🌷

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कामेंट्स

Vijay bahadur Pandey Dec 30, 2018
जै श्री राधे कृष्ण भाई 🌷🙏शुभ रात्रि मंगलमय हो 🌷🙏

Bindu singh Dec 30, 2018
Jai shree Krishna ji god bless u thanks ji🙏🙏🙏

R.K.Soni(गणेश मंदिर) Dec 30, 2018
शुभ रात्री वंदन 🙏जय गणेश देवा जी🙏 🙏श्री राधे कृष्णा जी🙏 आप व आपके परिवार को नये वर्ष की शुभकामनाए। जी।।नया वर्ष आपके लिए ढेरो सारी खुशिया लेकर आए जी🌷🙏🌷🙏🌷🙏🌷

R.K.Soni(गणेश मंदिर) Dec 30, 2018
शुभ रात्री वंदन 🙏जय गणेश देवा जी🙏 🙏श्री राधे कृष्णा जी🙏 आप व आपके परिवार को नये वर्ष की शुभकामनाए। जी।।नया वर्ष आपके लिए ढेरो सारी खुशिया लेकर आए जी🌷🙏🌷🙏🌷🙏🌷

Preeti jain Dec 30, 2018
om Surya devaya namah surye dev je ka kirpa aap pe bana rahe god bless you and your family jee🌹🌹🌹👌

ragini Singh Dec 30, 2018
बहुत ही सुन्दर पोस्ट भाई जी 👌🙏 शुभ रात्री जी जय श्री कृष्णा जी 🙏🙏🙏🌹🙏🙏🙏

कैलाश रघुवंशी Dec 30, 2018
जय श्री राधे कृष्णा भाई शुभ रात्रि जी राधे राधे 🌸🌸⚘🙏🙏⚘🌸🌸

Preeti jain Dec 30, 2018
Jai Shri Krishna radhe radhe shubh ratri aapka ratri shubh aur mangalmay Ho j🌹🌹🌹

Malkhan Singh Dec 30, 2018
*💥🌞जय श्री राधेकृष्णा जी🌞💥* *सूर्यदेव आपके जीवन को भक्ति, ज्ञान* *एवं कर्म के प्रकाश से प्रकाशित रखें।* *🍁आपकी रात्रि शुभ हो🍁* *🌹🙏🏼राम राम जी🙏🏼🌹*

Ram kumar yadav Dec 30, 2018
राधे राधे कृष्ण राधे कृष्ण शुभ रात्रि जी

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|| कृष्ण ने कहा....||📚🕉️ भगवान श्री कृष्ण ने गीता में कहा है कि मनुष्य को सांसारिक मोह- माया से दूर रहना चाहिए, जब हम इस मोह- माया में फसते हैं तो हमारा मन हमेशा विचलित रहता है। जिसे भी अपना मानने लगते हैं, उससे न चाहते भी लगाव हो जाता है। धीरे- धीरे वह इस हद तक जा पहुंचता है, कि हम न उसे छोडऩा चाहते हैं और न उसमें से छूटना चाहते हैं। श्रीकृष्ण ने मनुष्य आत्मा को सरल और संतुष्ट जीवन जीने के लिए उत्पन्न किया, किंतु हमने चारों ओर मोह का ऐसा माया जाल निर्मित्त कर दिया, जिससे स्वयं सृष्टि के निर्माता 'परमात्मा' को इस धरा पर अवतरित होकर आंखों पर बंधी मोह की काली पट्टी को खोलने का कार्य करना पड़ा। श्रीकृष्ण ने सभी आत्माओं के साथ नि:स्वार्थ प्रेम करना सिखाया, किंतु हम अज्ञानतावश आत्मा को भूलकर देह व देह से मिलने वाले सुख की ओर अपना ध्यान केंद्रित किया और तभी से हमारी दुर्दशा शुरू हुई। मोह- व्यक्तियों वस्तुओं के प्रति इतनी आसक्ति होना उन्हें पाने के लिए कुछ भी करने पर उतारू हो जाए, ये मोह है। जब हम व्यक्तिगत किसी से आकर्षित होकर उससे जुड़ जाते हैं कि उससे बिछडऩे की बात सोचने से भी कष्ट होने लगता है तो यह भी मोह की स्थिति है। क्योंकि हमारा मोह सदैव यह चाहता है कि हमारी प्रिय व्यक्ति या वस्तु हमसे छूटने न पाये, चाहे इसके लिए अपना या उस व्यक्ति का कितना ही अहित क्यों न हो। इसलिए हमें सभी प्रकार की इच्छा-कामनाओं का त्याग कर परमात्मा की तरह सभी आत्माओ से नि:स्वार्थ प्रेम करना सीखना होगा, अन्यथा हम मोह रूपी दलदल से कभी भी बहार निकल नहीं पाएंगे।

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Ritu Sen May 23, 2019

Good morning ji

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Rajesh Kumar Pareek May 23, 2019

+10 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 3 शेयर
K D Vaishnav May 25, 2019

+9 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 29 शेयर

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