💫Shuchi Singhal💫
💫Shuchi Singhal💫 Apr 16, 2021

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कामेंट्स

Madhuben patel Apr 17, 2021
जय सियाराम जी स्नेहानुराग प्रभात की स्नेहवंदन प्यारी बहना जी आपका हर दिन शुभ हो

RAJ RATHOD Apr 17, 2021
🚩🚩ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः॥🚩🚩 🌸🌷शुभ शनिवार.. प्रभात वंदन 🌷🌸 सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया। शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥ आज माँ दुर्गा का पंचम स्वरुप स्कंदमाता(भगवान कार्तिकेय की माता ) के पूजन का दिन है माता सभी को संतान सुख, समृद्धि, शांति प्रदान करे इन्ही शुभकामनाओं के साथ आप सभी को सुबह का राम राम 🙏🙏🙏...जय माता दी 🚩🚩

s.r.pareek rajasthan Apr 17, 2021
🥀जय श्री राम जय हनुमानजी जय शनि देव 🥀हर पल खूबसूरत हो जी सदा खुश रहें जी🌿 सुप्रभात सप्रेम स्नेह नमन् वंदन जी प्यारी बहना जी 🙏🙏🥀🌻🍁🍒🌠 बहीना मै ( अहम) साफ होती ही नहीं किसी को सुन्दरता की, किसी को धन की किसी को औलाद की किसी को अपनी ख्याति की , किसी न किसी रूप मे आ ही जाती है तो बताईये ईश्वर कैसे दिखेगा जब तक हरि क्रपा नही होगी अभिमान जाने वाला नही है 🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🍁🍁🥀🥀🌠🌠🌠🌠

Anup Kumar Apr 21, 2021
Jai Mata Di 🙏🙏 Good afternoon my sister

🙏🌱शुभ शनिवार 🌱🙏 *धन की परिभाषा* 🙏🏼जब कोई बेटा या बेटी ये कहे कि मेरे माँ बाप ही मेरे भगवान् है…. *ये “धन” है* 🙏🏼जब कोई माँ बाप अपने बच्चों के लिए ये कहे कि ये हमारे कलेजे की कोर हैं…. *ये “धन” है* 🙏🏼शादी के 20 साल बाद भी अगर पति पत्नी एक दूसरे से कहें.. I Love you… *ये “धन” है* 🙏🏼कोई सास अपनी बहु के लिए कहे कि ये मेरी बहु नहीं बेटी है और कोई बहु अपनी सास के लिए कहे कि ये मेरी सास नहीं मेरी माँ है…… *ये “धन” है* 🙏🏼जिस घर में बड़ों को मान और छोटों को प्यार भरी नज़रो से देखा जाता है…… *ये “धन” है* 🙏🏼जब कोई अतिथि कुछ दिन आपके घर रहने के पशचात् जाते समय दिल से कहे की आपका घर …घर नहीं मंदिर है…. *ये “धन” है* आपको ऐसे *”परम धन”* की प्राप्ति हो। *🙏👏🙏*

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*भोजन सम्बन्धी कुछ नियम* १ पांच अंगो ( दो हाथ , २ पैर , मुख ) को अच्छी तरह से धो कर ही भोजन करे ! २. गीले पैरों खाने से आयु में वृद्धि होती है ! ३. प्रातः और सायं ही भोजन का विधान है ! ४. पूर्व और उत्तर दिशा की ओर मुह करके ही खाना चाहिए ! ५. दक्षिण दिशा की ओर किया हुआ भोजन प्रेत को प्राप्त होता है ! ६ . पश्चिम दिशा की ओर किया हुआ भोजन खाने से रोग की वृद्धि होती है ! ७. शैय्या पर , हाथ पर रख कर , टूट...े फूटे वर्तनो में भोजन नहीं करना चाहिए ! ८. मल मूत्र का वेग होने पर , कलह के माहौल में , अधिक शोर में , पीपल , वट वृक्ष के नीचे , भोजन नहीं करना चाहिए ! ९ परोसे हुए भोजन की कभी निंदा नहीं करनी चाहिए ! १०. खाने से पूर्व अन्न देवता , अन्नपूर्णा माता की स्तुति कर के , उनका धन्यवाद देते हुए , तथा सभी भूखो को भोजन प्राप्त हो इस्वर से ऐसी प्राथना करके भोजन करना चाहिए ! ११. भोजन बनने वाला स्नान करके ही शुद्ध मन से , मंत्र जप करते हुए ही रसोई में भोजन बनाये और सबसे पहले ३ रोटिया अलग निकाल कर ( गाय , कुत्ता , और कौवे हेतु ) फिर अग्नि देव का भोग लगा कर ही घर वालो को खिलाये ! १२. इर्षा , भय , क्रोध , लोभ , रोग , दीन भाव , द्वेष भाव , के साथ किया हुआ भोजन कभी पचता नहीं है ! १३. आधा खाया हुआ फल , मिठाईया आदि पुनः नहीं खानी चाहिए ! १४. खाना छोड़ कर उठ जाने पर दुबारा भोजन नहीं करना चाहिए ! १५. भोजन के समय मौन रहे ! १६. भोजन को बहुत चबा चबा कर खाए ! १७. रात्री में भरपेट न खाए ! १८. गृहस्थ को ३२ ग्रास से ज्यादा न खाना चाहिए ! १९. सबसे पहले मीठा , फिर नमकीन , अंत में कडुवा खाना चाहिए ! २०. सबसे पहले रस दार , बीच में गरिस्थ , अंत में द्राव्य पदार्थ ग्रहण करे ! २१. थोडा खाने वाले को --आरोग्य , आयु , बल , सुख, सुन्दर संतान , और सौंदर्य प्राप्त होता है ! २२. जिसने ढिढोरा पीट कर खिलाया हो वहा कभी न खाए ! २३. कुत्ते का छुवा , रजस्वला स्त्री का परोसा , श्राध का निकाला , बासी , मुह से फूक मरकर ठंडा किया , बाल गिरा हुवा भोजन , अनादर युक्त , अवहेलना पूर्ण परोसा गया भोजन कभी न करे ! २४. कंजूस का , राजा का , वेश्या के हाथ का , शराब बेचने वाले का दिया भोजन कभी नहीं करना चाहिए !

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. *एक प्रेरणा दायक कहानी अवश्य पढ़ें ।।* *संगठन में शक्ति * *एक आदमी था, जो हमेशा अपने संगठन में सक्रिय रहता था, उसको सभी जानते थे, बड़ा मान सम्मान मिलता था; अचानक किसी कारण वश वह निष्क्रिय रहने लगा, मिलना - जुलना बंद कर दिया और संगठन से दूर हो गया।* *कुछ सप्ताह पश्चात् एक बहुत ही ठंडी रात में उस संगठन के प्रमुख ब्यक्ति ने उससे मिलने का फैसला किया । संगठन प्रमुख उस आदमी के घर गया और पाया कि आदमी घर पर अकेला ही था। एक अंगीठी में जलती हुई लकड़ियों की लौ के सामने बैठा आराम से आग ताप रहा था। उस आदमी ने आगंतुक प्रमुख का बड़ी खामोशी से स्वागत किया।* *दोनों चुपचाप बैठे रहे। केवल आग की लपटों को ऊपर तक उठते हुए ही देखते रहे। कुछ देर के बाद प्रमुख ने बिना कुछ बोले, उन अंगारों में से एक लकड़ी जिसमें लौ उठ रही थी (जल रही थी) उसे उठाकर किनारे पर रख दिया। और फिर से शांत बैठ गया।* *मेजबान हर चीज़ पर ध्यान दे रहा था। लंबे समय से अकेला होने के कारण मन ही मन आनंदित भी हो रहा था कि वह आज अपने संगठन के प्रमुख के साथ है। लेकिन उसने देखा कि अलग की हुई लकड़ी की आग की लौ/ज्योति धीरे- धीरे कम हो रही है। कुछ देर में आग बिल्कुल बुझ गई। उसमें कोई ताप नहीं बचा। उस लकड़ी से आग की चमक जल्द ही बाहर निकल गई।* *कुछ समय पूर्व जो उस लकड़ी में उज्ज्वल प्रकाश था और आग की तपन थी वह अब एक काले और मृत टुकड़े से ज्यादा कुछ शेष न था।* *इस बीच.. दोनों मित्रों ने एक दूसरे का बहुत ही संक्षिप्त अभिवादन किया, कम से कम शब्द बोले। जाने से पहले मुखिया ने अलग की हुई बेकार लकड़ी को उठाया और फिर से आग के बीच में रख दिया। वह लकड़ी फिर से सुलग कर लौ/ज्योति बनकर जलने लगी और चारों ओर रोशनी तथा ताप बिखेरने लगी।* *जब आदमी, मुखिया को छोड़ने के लिए दरवाजे तक पहुंचा तो उसने मुखिया से कहा मेरे घर आकर मुलाकात करने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद ।* *आज आपने बिना कुछ बात किए ही मुझे एक सुंदर पाठ पढ़ाया है कि अकेले व्यक्ति का कोई अस्तित्व नहीं होता, संगठन का साथ मिलने पर ही वह चमकता है और रोशनी बिखेरता है । संगठन से अलग होते ही वह इस लकड़ी की भाँति बुझ जाता है।* *संगठन ही हमारी पहचान बनती है, हमारी मूल शक्ति है, इसलिए संगठन हमारे लिए सर्वोपरि होना चाहिए ।* *संगठन के प्रति हमारी निष्ठा और समर्पण किसी व्यक्ति के लिए नहीं, उससे जुड़े विचार के प्रति होनी चाहिए ।* *संगठन किसी भी प्रकार का हो सकता है , पारिवारिक, सामाजिक, व्यापारिक, सांस्कृतिक इकाई, सेवा संस्थान आदि।* *संगठनों के बिना मानव जीवन अधूरा है, अतः हर क्षेत्र में जहाँ भी रहें, संगठित रहें।* 🙏🙏🙏🙏🙏🙏 .

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Ramesh Agrawal May 7, 2021

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⊰᯽⊱●🕉️●⊰᯽⊱ ••╌──┈⊰᯽⊱🌹⊰᯽⊱┈──╌•• 🌷(((( पिछले जन्म का कर्ज )))) . संसार चक्रवत् घूम रहा है, हमारे कर्म, कर्म फल बनकर कभी न कभी अवश्य भोगने पड़ते हैं । . ये कर्म व्यवस्था के नियम सब पर लागू होते हैं, हम पर भी और आप पर भी। अतः बुरे कर्म कभी न करें। . मथुरा की माँट तहसील के एक ग्राम में एक युवक गम्भीर रूप से बीमार पड़ा। उसकी पत्नी ने दिन रात एक कर अपने पति की सेवा की। . वृद्ध पिता ने यथाशक्ति सब जमा-पूंजी खर्चकर पुत्र का इलाज कराया; परंतु कोई लाभ न हुआ। युवक ठीक नहीं हुआ। . एक दिन पुत्र ने पिता को अपने पास बुलाकर कहा कि ‘पास के ग्राम में अमुक वैद्य जी से दवा ले आइये; दवा की कीमत साढ़े तीन रुपये होगी। उस दवा से मैं ठीक होऊँगा।’ . पिता पास के उस ग्राम में जाकर वैद्यजी से दवा ले आये थे। दवा खाकर युवक सो गया। . दो-तीन घण्टे के बाद पिता ने पुत्र को जगाकर उसका हाल जानना चाहा तो पुत्र पिता पर बिगड़ उठा और कहने लगा.. . ‘अब न मैं तुम्हारा पुत्र हूँ, न तुम मेरे पिता।’ पिछले जन्म में तुम एक डाकू थे और मेरी यह पत्नी पिछले जन्म में मेरी घोड़ी थी। . एक दिन मैं अपनी घोड़ी पर चढ़ा कहीं जा रहा था। रास्ते में तुमने मुझे लूट लिया था और मेरी हत्या कर दी थी। . पिछले जन्म का बदला मैंने इस जन्म में तुम्हारा बीमार पुत्र बनकर ले लिया है और तुम्हारी सारी कमाई खर्च करा दी है । . पिछले जन्म में मेरी घोड़ी ने मुझे संकट में डालकर तुम्हारे हवाले करा दिया था और... . जब तुमने पास ही खेत की मेंड़ पर घास की गठरी लिए बैठे हुए घसियारे को डरा-धमकाकर उसकी घास मेरी घोड़ी के आगे डलवा दी थी तो मेरे लाख प्रयास करने पर भी घोड़ी अड़कर खड़ी हो गयी थी; . तब तुम्हें मुझको लूटने और मेरी हत्या करने का मौका मिल गया। . इस जन्म में भी मैं इसे आज अकेला छोड़कर (विधवा बनाकर) ही जा रहा हूँ । उस घसियारे के साढ़े तीन रुपये का कर्जा भी तुमसे अदा करवा दिया है । . वह घसियारा ही इस जन्म में वैद्य है । मैं अब जा रहा हूँ ।’ और तभी युवक के प्राणपखेरू उड़ गये। . यह घटना हमें संकेत करती है कि जीवन में किये कर्मों का फल अवश्य भुगतना पड़ता है, इसलिए हमारा हमेशा यही प्रयास होना चाहिए कि हमारे किसी भी कार्य से किसी को कोई कष्ट न पहुंचे। . अवश्यमेव भोक्तव्यं कृते कर्म शुभाशुभम् । नाभुक्तं क्षीयते कर्म कल्पकोटिशतैरपि ॥ . नीति किए गए शुभ एवं अशुभ कर्मों का कभी क्षय नहीं होता है, उसे अवश्य ही भोगना पड़ता है । ~~~~~~~~~ ((((((( जय जय श्री राधे )))))))

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Ramesh Agrawal May 7, 2021

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