Shanti Pathak
Shanti Pathak Feb 26, 2021

* जय श्री राधे कृष्णा जी* *शुभरात्रि वंदन* #एक_कदम_परमात्मा_की_ओर किसी नगर में एक सेठजी रहते थे। उनके घर के नजदीक ही एक मंदिर था। एक रात्रि को पुजारी के कीर्तन की ध्वनि के कारण उन्हें ठीक से नींद नहीं आयी। सुबह उन्होंने पुजारी जी को खूब डाँटा कि ~ यह सब क्या है? पुजारी जी बोले ~ एकादशी का जागरण कीर्तन चल रहा था। सेठजी बोले ~ जागरण कीर्तन करते हो,तो क्या हमारी नींद हराम करोगे? अच्छी नींद के बाद ही व्यक्ति काम करने के लिए तैयार हो पाता है। फिर कमाता है, तब खाता है। पुजारी :- सेठजी! खिलाता तो वह खिलाने वाला ही है। सेठजी :-कौन खिलाता है? क्या तुम्हारा भगवान खिलाने आयेगा? पुजारी :- वही तो खिलाता है। सेठजी :- क्या भगवान खिलाता है! हम कमाते हैं तब खाते हैं। पुजारी :- निमित्त होता है तुम्हारा कमाना, और पत्नी का रोटी बनाना, बाकी सबको खिलाने वाला, सबका पालनहार तो वह जगन्नाथ ही है। सेठजी :- क्या पालनहार-पालनहार लगा रखा है! बाबा आदम के जमाने की बातें करते हो। क्या तुम्हारा पालने वाला एक-एक को आकर खिलाता है? हम कमाते हैं तभी तो खाते हैं। पुजारी :- सभी को वही खिलाता है। सेठजी :- हम नहीं खाते उसका दिया। पुजारी :- नहीं खाओ तो मारकर भी खिलाता है। सेठजी :- पुजारी जी! अगर तुम्हारा भगवान मुझे चौबीस घंटों में नहीं खिला पाया तो फिर तुम्हें अपना यह भजन-कीर्तन सदा के लिए बंद करना होगा। पुजारी :- मैं जानता हूँ कि तुम्हारी पहुँच बहुत ऊपर तक है, लेकिन उसके हाथ बड़े लम्बे हैं। जब तक वह नहीं चाहता, तब तक किसी का बाल भी बाँका नहीं हो सकता। आजमाकर देख लेना। *निश्चित ही पुजारीजी भगवान में प्रीति रखने वाले कोई सात्त्विक भक्त रहें होंगे। पुजारी की निष्ठा परखने के लिये सेठजी घोर जंगल में चले गये ! और एक विशालकाय वृक्ष की ऊँची डाल पर ये सोचकर बैठ गये कि अब देखें इधर कौन खिलाने आता है?चौबीस घंटे बीत जायेंगे, और पुजारी की हार हो जायेगी। सदा के लिए कीर्तन की झंझट मिट जायेगी। तभी एक अजनबी आदमी वहाँ आया। उसने उसी वृक्ष के नीचे आराम किया, फिर अपना सामान उठाकर चल दिया, लेकिन अपना एक थैला वहीं भूल गया। भूल गया कहो या छोड़ गया कहो। भगवान ने किसी मनुष्य को प्रेरणा की थी अथवा मनुष्य रूप में साक्षात् भगवान ही वहाँ आये थे, यह तो भगवान ही जानें! थोड़ी देर बाद पाँच डकैत वहाँ पहुँचे। उनमें से एक ने अपने सरदार से कहा :- उस्ताद! यहाँ कोई थैला पड़ा है। क्या है? जरा देखो! खोलकर देखा, तो उसमें गरमा-गरम भोजन से भरा टिफिन! उस्ताद भूख लगी है। लगता है यह भोजन भगवान ने हमारे लिए ही भेजा है। अरे ! तेरा भगवान यहाँ कैसे भोजन भेजेगा?हमको पकड़ने या फँसाने के लिए किसी शत्रु ने ही जहर-वहर डालकर यह टिफिन यहाँ रखा होगा, अथवा पुलिस का कोई षडयंत्र होगा। इधर-उधर देखो जरा, कौन रखकर गया है। उन्होंने इधर-उधर देखा, लेकिन कोई भी आदमी नहीं दिखा। तब डाकुओं के मुखिया ने जोर से आवाज लगायी ,कोई हो तो बताये कि यह थैला यहाँ कौन छोड़ गया है? सेठजी ऊपर बैठे-बैठे सोचने लगे कि अगर मैं कुछ बोलूँगा तो ये मेरे ही गले पड़ेंगे। वे तो चुप रहे, लेकिन जो सबके हृदय की धड़कनें चलाता है, भक्तवत्सल है, वह अपने भक्त का वचन पूरा किये बिना शाँत नहीं रहता। उसने उन डकैतों को प्रेरित किया कि ...'ऊपर भी देखो। 'उन्होंने ऊपर देखा तो वृक्ष की डाल पर एक आदमी बैठा हुआ दिखा। डकैत चिल्लाये, अरे! नीचे उतर! सेठजी बोले, मैं नहीं उतरता। क्यों नहीं उतरता, यह भोजन तूने ही रखा होगा। सेठजी बोले, मैंने नहीं रखा। कोई यात्री अभी यहाँ आया था, वही इसे यहाँ भूलकर चला गया। नीचे उतर! तूने ही रखा होगा जहर मिलाकर! और अब बचने के लिए बहाने बना रहा है। तुझे ही यह भोजन खाना पड़ेगा। अब कौन-सा काम वह सर्वेश्वर किसके द्वारा, किस निमित्त से करवाये अथवा उसके लिए क्या रूप ले, यह उसकी मर्जी की बात है। बड़ी गजब की व्यवस्था है उस परमेश्वर की। सेठजी बोले :- मैं नीचे नहीं उतरूँगा और खाना तो मैं कतई नहीं खाऊँगा। पक्का तूने खाने में जहर मिलाया है। अरे! नीचे उतर अब तो तुझे खाना ही होगा। सेठजी बोले :- मैं नहीं खाऊँगा। नीचे भी नहीं उतरूँगा। अरे कैसे नहीं उतरेगा। सरदार ने एक आदमी को हुक्म दिया इसको जबरदस्ती नीचे उतारो! डकैत ने सेठ को पकड़कर नीचे उतारा। ले खाना खा! सेठजी बोले :- मैं नहीं खाऊँगा। उस्ताद ने धड़ाक से उनके मुँह पर तमाचा जड़ दिया। सेठ को पुजारीजी की बात याद आयी कि नहीं खाओगे तो, मारकर भी खिलायेगा। सेठ फिर बोला :- मैं नहीं खाऊँगा। अरे कैसे नहीं खायेगा! इसकी नाक दबाओ और मुँह खोलो। डकैतों ने सेठ की नाक दबायी, मुँह खुलवाया और जबरदस्ती खिलाने लगे। वे नहीं खा रहे थे, तो डकैत उन्हें पीटने लगे। तब सेठजी ने सोचा कि ये पाँच हैं और मैं अकेला हूँ। नहीं खाऊँगा तो ये मेरी हड्डी पसली एक कर देंगे ! इसलिए चुपचाप खाने लगे और मन-ही-मन कहा, मान गये मेरे बाप ! मारकर भी खिलाता है! डकैतों के रूप में आकर खिला, चाहे भक्तों के रूप में आकर खिला! लेकिन खिलाने वाला तो तू ही है। आपने पुजारी की बात सत्य साबित कर दिखायी ! सेठजी के मन में भक्ति की धारा फूट पड़ी। उनको मार-पीट कर डकैत वहाँ से चले गये, तो सेठजी भागे और पुजारी जी के पास आकर बोले, पुजारी जी! मान गये आपकी बात ! कि नहीं खायें तो वह मारकर भी खिलाता है !! भक्तों परमात्मा ने जिसे अपना रास्ता दिखाना हो। वो किसी के भी माध्यम से , किसी भी रूप में दिखा देता है। 🙏जय सियाराम जी 🙏

* जय श्री राधे कृष्णा जी*
*शुभरात्रि वंदन*
#एक_कदम_परमात्मा_की_ओर 

किसी नगर में एक सेठजी रहते थे। उनके घर के नजदीक ही एक मंदिर था। एक रात्रि को पुजारी के कीर्तन की ध्वनि के कारण उन्हें ठीक से नींद नहीं आयी। 
सुबह उन्होंने पुजारी जी को खूब डाँटा कि ~ यह सब क्या है?
पुजारी जी बोले ~ एकादशी का जागरण कीर्तन चल रहा था। 
सेठजी बोले ~ जागरण कीर्तन करते हो,तो क्या हमारी नींद हराम करोगे? अच्छी नींद के बाद ही व्यक्ति काम करने के लिए तैयार हो पाता है। फिर कमाता है, तब खाता है। 
पुजारी :- सेठजी! खिलाता तो वह खिलाने वाला ही है। 
सेठजी :-कौन खिलाता है? क्या तुम्हारा भगवान खिलाने आयेगा?
पुजारी :- वही तो खिलाता है। 
सेठजी :- क्या भगवान खिलाता है! हम कमाते हैं तब खाते हैं। 
पुजारी :- निमित्त होता है तुम्हारा कमाना, और पत्नी का रोटी बनाना, बाकी सबको खिलाने वाला, सबका पालनहार तो वह जगन्नाथ ही है। 
सेठजी :- क्या पालनहार-पालनहार लगा रखा है! बाबा आदम के जमाने की बातें 
            करते हो। क्या तुम्हारा पालने वाला एक-एक को आकर खिलाता है? हम 
             कमाते हैं तभी तो खाते हैं। 
पुजारी :- सभी को वही खिलाता है। 
सेठजी :- हम नहीं खाते उसका दिया। 
पुजारी :- नहीं खाओ तो मारकर भी खिलाता है। 
सेठजी :- पुजारी जी! अगर तुम्हारा भगवान मुझे चौबीस घंटों में नहीं खिला पाया तो फिर तुम्हें अपना यह भजन-कीर्तन सदा के लिए बंद करना होगा। 
पुजारी :- मैं जानता हूँ कि तुम्हारी पहुँच बहुत ऊपर तक है, लेकिन उसके हाथ बड़े लम्बे हैं। जब तक वह नहीं चाहता, तब तक किसी का बाल भी बाँका नहीं हो सकता। आजमाकर देख लेना। 

*निश्चित ही पुजारीजी भगवान में प्रीति रखने वाले कोई सात्त्विक भक्त रहें होंगे। 
           पुजारी की निष्ठा परखने के लिये सेठजी घोर जंगल में चले गये ! और एक 
            विशालकाय वृक्ष की ऊँची डाल पर ये सोचकर बैठ गये कि अब देखें 
            इधर कौन खिलाने आता है?चौबीस घंटे बीत जायेंगे, और पुजारी की हार 
          हो जायेगी। सदा के लिए कीर्तन की झंझट मिट जायेगी। 

         तभी एक अजनबी आदमी वहाँ आया। उसने उसी वृक्ष के नीचे आराम 
         किया, फिर अपना सामान उठाकर चल दिया, लेकिन अपना एक थैला वहीं 
        भूल गया। भूल गया कहो या छोड़ गया कहो। भगवान ने किसी मनुष्य को 
         प्रेरणा की थी अथवा मनुष्य रूप में साक्षात् भगवान ही वहाँ आये थे, यह तो 
          भगवान ही जानें!
थोड़ी देर बाद पाँच डकैत वहाँ पहुँचे। उनमें से एक ने अपने सरदार से कहा :- उस्ताद! यहाँ कोई थैला पड़ा है। 
    क्या है?  जरा देखो! खोलकर देखा, तो उसमें गरमा-गरम भोजन से भरा 
   टिफिन! उस्ताद भूख लगी है। लगता है यह भोजन भगवान ने हमारे लिए ही 
   भेजा है। 
    अरे ! तेरा भगवान यहाँ कैसे भोजन भेजेगा?हमको पकड़ने या फँसाने के लिए 
     किसी शत्रु ने ही जहर-वहर डालकर यह टिफिन यहाँ रखा होगा, अथवा पुलिस 
    का कोई षडयंत्र होगा। इधर-उधर देखो जरा, कौन रखकर गया है। उन्होंने इधर-उधर देखा, लेकिन कोई भी आदमी नहीं दिखा। तब डाकुओं के मुखिया ने जोर से आवाज लगायी ,कोई हो तो बताये कि यह थैला यहाँ कौन छोड़ गया है?

सेठजी ऊपर बैठे-बैठे सोचने लगे कि अगर मैं कुछ बोलूँगा तो ये मेरे ही गले पड़ेंगे। वे तो चुप रहे, लेकिन जो सबके हृदय की धड़कनें चलाता है, भक्तवत्सल है, वह अपने भक्त का वचन पूरा किये बिना शाँत नहीं रहता। उसने उन डकैतों को प्रेरित किया कि ...'ऊपर भी देखो। 'उन्होंने ऊपर देखा तो वृक्ष की डाल पर एक आदमी बैठा हुआ दिखा। डकैत चिल्लाये, अरे! नीचे उतर!

सेठजी बोले, मैं नहीं उतरता। 
क्यों नहीं उतरता, यह भोजन तूने ही रखा होगा। 
सेठजी बोले, मैंने नहीं रखा। कोई यात्री अभी यहाँ आया था, वही इसे यहाँ भूलकर चला गया। 
नीचे उतर! तूने ही रखा होगा जहर मिलाकर! और अब बचने के लिए बहाने बना रहा है। तुझे ही यह भोजन खाना पड़ेगा। 
अब कौन-सा काम वह सर्वेश्वर किसके द्वारा, किस निमित्त से करवाये अथवा उसके लिए क्या रूप ले, यह उसकी मर्जी की बात है। बड़ी गजब की व्यवस्था है उस परमेश्वर की। 
सेठजी बोले :- मैं नीचे नहीं उतरूँगा और खाना तो मैं कतई नहीं खाऊँगा। 
पक्का तूने खाने में जहर मिलाया है। अरे! नीचे उतर अब तो तुझे खाना ही होगा। 
सेठजी बोले :- मैं नहीं खाऊँगा। नीचे भी नहीं उतरूँगा। 
अरे कैसे नहीं उतरेगा। 
सरदार ने एक आदमी को हुक्म दिया इसको जबरदस्ती नीचे उतारो!
डकैत ने सेठ को पकड़कर नीचे उतारा। 
ले खाना खा!
सेठजी बोले :- मैं नहीं खाऊँगा। 
उस्ताद ने धड़ाक से उनके मुँह पर तमाचा जड़ दिया। 
सेठ को पुजारीजी की बात याद आयी कि नहीं खाओगे तो, मारकर भी खिलायेगा। 
सेठ फिर बोला :- मैं नहीं खाऊँगा। 
अरे कैसे नहीं खायेगा! इसकी नाक दबाओ और मुँह खोलो। 
डकैतों ने सेठ की नाक दबायी, मुँह खुलवाया और जबरदस्ती खिलाने लगे। वे नहीं खा रहे थे, तो डकैत उन्हें पीटने लगे। 
तब सेठजी ने सोचा कि ये पाँच हैं और मैं अकेला हूँ। नहीं खाऊँगा तो ये मेरी हड्डी पसली एक कर देंगे ! इसलिए चुपचाप खाने लगे और मन-ही-मन कहा,  मान गये मेरे बाप ! मारकर भी खिलाता है!
डकैतों के रूप में आकर खिला, चाहे भक्तों के रूप में आकर खिला! लेकिन खिलाने वाला तो तू ही है। आपने पुजारी की बात सत्य साबित कर दिखायी !
सेठजी के मन में भक्ति की धारा फूट पड़ी। उनको मार-पीट कर डकैत वहाँ से चले गये, तो सेठजी भागे और पुजारी जी के पास आकर बोले, पुजारी जी! मान गये आपकी बात ! कि नहीं खायें तो वह मारकर भी खिलाता है !!

भक्तों परमात्मा ने जिसे अपना रास्ता दिखाना हो। वो किसी के भी माध्यम से , किसी भी रूप में दिखा देता है। 
🙏जय सियाराम जी 🙏

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कामेंट्स

hindusthani mohan sen Feb 26, 2021
🌹शुभ रात्रि वंदन🌹 आंखो में नींद बहुत है पर सोना नहीं है यही समय है कुछ करने का मेरे दोस्त इसे खोना नहीं है 🚩माता रानी आप सभिको खुश रखे🚩

babulal Feb 26, 2021
jay shree krishna ji good night ji

Shanti Pathak Feb 26, 2021
@kknrajput 🌷🙏 जय श्री राधे कृष्णा जी🙏शुभ रात्रि वंदन जी 🌷 आपका हर पल शुभ एवं मंगलमय हो🌷कान्हा जी का आशीर्वाद आप एवं आपके परिवार पर सदैव बना रहे 🙏🌷

Shivsanker Shukla Feb 26, 2021
शुभ रात्रि आदरणीय बहन राधे-राधे

Uma shankar Pandey Feb 26, 2021
🍄🙏🍄🚩🕉शुभ रात्रि,बन्दन। 🍄🙏🍄🚩🕉राधे राधे।

Ansouya M Feb 26, 2021
जय श्री राधे कृष्ण 🌹🙏 शुभ रात्रि प्यारी बहना जी 🌷🙏🌷🙏 आने वाली नई सूबह ढ़ेरों खूशियाॅ लेकर पधारे आप के द्वार बहना जी 🙏🌹

Uma shankar Pandey Feb 26, 2021
🍄🙏🍄🚩🕉राधे कृष्णा,बहन। 🍄🙏🍄🚩🕉शुभ रात्रि,बन्दन बहन

K L Tiwari Feb 26, 2021
🌷🌹ॐ श्री दुर्गा देव्यै नमः🌷🌹🌷 🌷🌹राम राम बहन 🌹🌷जय श्रीमाता की बहन🌷🌺प्यारी बहना के चरणों में सादर प्रणाम करता हूँ🙏🌼🌺🌹हे जगतजननी माँ मेरी प्यारी बहना को सदैव स्वस्थ और सुंदर बनाये रखना🌺सदासुहागिन करना🌹🙏🌹श्री जगतजननी जगदम्बा की कृपा दृष्टि आप पर सदैव बनी रहे सदा स्वस्थ रखें🌻🌻आप हमेशा हँसती रहें मुस्कराती रहें बहन🌼🌷आपका हर पल शुभ और मंगलमय हो बहन🌸🌺प्रभु आपको सदा सुखी और प्रसन्न रखें बहन🌼जुग जुग जियो मेरी रानी बहना🌹🌹🙏शुभरात्रि बहन🙏🌹🌹

Shanti Pathak Feb 26, 2021
@sandeepsonkar3 🌷🙏 जय श्री राधे कृष्णा जी🙏शुभ रात्रि वंदन जी 🌷 आपका हर पल शुभ एवं मंगलमय हो🌷कान्हा जी का आशीर्वाद आप एवं आपके परिवार पर सदैव बना रहे 🙏🌷

Ravi Kumar Taneja Feb 27, 2021
ॐ श्री शनैश्वराय नमः 🙏🌼🙏 ॐ श्री हनुमंते नमः 🙏🌺🙏 🌹🙏 ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः 🙏🌹 सुप्रभात स्नेहवंदन जी सभी को माघी पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं🙏🌹🙏

Hemant Kasta Feb 27, 2021
Jai Shree Ram Ji Namah, Jai Shree Bajarangbali Namah, Om Sam Shanishcharay Namah, Beautiful Post, Anmol Massage, Dhanywad Vandaniy Bahena Ji Pranam, Subahka Ram Ram, Aap Aur Aapka Parivar Har Din Har Pal Khushiyo Se Bhara Rahe, Aap Sadaiv Hanste Muskurate Rahiye, Vandan Sister Ji, Jai Shree Radhe Krishna Ji, Suprabhat.

BK WhatsApp STATUS Feb 27, 2021
जय श्री कृष्ण शुभ प्रभात स्नेह वंदन धन्यवाद 🌹🙏🙏

Jai Mata Di Apr 16, 2021

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Jai Mata Di Apr 16, 2021

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Ajay Kumar Apr 16, 2021

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sanjay Awasthi Apr 16, 2021

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pinki saini Apr 15, 2021

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