M.S.Chauhan
M.S.Chauhan Jan 20, 2021

*शुभ रात्रि वंदन* *जय श्रीकृष्ण गोविंद* *जय श्री राधे राधे जी* *~~~~~~~~~~~~* *हर वक्त "घड़ी"* *मत देखो सिर्फ* *एक "घड़ी"* *"प्रभु"* *को देखो तो* *जिन्दगी की* *हर "घड़ी"* *सुधर जायगी*! *~~~~~~~~~* *Good Night ji🙏* 🏵️🌷🙏🌷🏵️

*शुभ रात्रि वंदन*
*जय श्रीकृष्ण गोविंद* 
*जय श्री राधे राधे जी*
*~~~~~~~~~~~~* 
*हर वक्त "घड़ी"*
*मत देखो सिर्फ* 
*एक "घड़ी"* 
*"प्रभु"* 
*को देखो तो* 
*जिन्दगी की* 
*हर "घड़ी"* 
*सुधर जायगी*!
*~~~~~~~~~*
*Good Night ji🙏*
🏵️🌷🙏🌷🏵️

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कामेंट्स

प्रवीण चौहान "२४७" Jan 20, 2021
🌷..!! जय श्री राधे राधे जी !!..🌷🌷 🦚🦚🐧🐧🐧🙏🏻🙏🏻🐧🐧🐧🦚🦚 🌺🙏🏻🌺 शुभ रात्रि वंदन जी 🌺🙏🏻🌺    अच्युतम केशवं राम नारायणं कृष्ण दामोदरम् वासुदेवं हरि, श्रीधरं माधवं गोपिका वल्लभं, जानकी नायकं रामचंद्रम भजे। अच्युतम केशवं सत्य भामधावं, माधवं श्रीधरं राधिका अराधितम, इंदिरा मन्दिरम चेतसा सुन्दरम, देवकीनन्दनं सम भजे। ⚘⚘आपका हर पल भक्ति मय रहें⚘⚘             🧡 🏹 🧡 जय श्री राम 🧡 🏹 🧡    🔥🔱🔥 जय श्री गणेश 🔥🔱🔥            ‼🔥‼ हर हर महादेव ‼🔥‼    💝💝💝 जय श्री राधे कृष्ण 💝💝💝

M T Jan 20, 2021
Jay Shri Ganesh Deva...🙏 shubh ratri ji

Renu Singh Jan 20, 2021
Shubh Ratri Vandan Bhai Ji 🙏🌹 Radhe Govind ji Aapki Sabhi Manokamnayein Puri Karein Aapka Har Pal Shubh V Mangalmay ho Bhai Ji 🙏🌹

Seema Sharma. Himachal (chd) Jan 20, 2021
 अच्छी पुस्तकें जीवंत देव प्रतिमाएं हैं, जिनकी आराधना से हमें तत्काल प्रकाश और उल्लास प्राप्त होता है।🌷🌺🌷 शुभ रात्रि जी 😊 हंसते हंसाते रहिए 🌷 बहुत बहुत धन्यवाद जी 😊🙏🌹🌷🌹

RAJ RATHOD Jan 20, 2021
🙏शुभ रात्रि वंदन 🙏 🌹जय श्री राधे🌹

Kamlesh Goyal Jan 20, 2021
शुभ रात्रि जी जय श्री कृष्ण जी

varsha lohar Jan 20, 2021
shubh ratri jai shree krishn radhey radhey ji🙏

laltesh kumar sharma Jan 20, 2021
🌹🌿🌹☘️🌹 jai shree radhe radhe ji 🌹☘️🌿🌹 Subh ratri vandan ji 🌹☘️🌹🙏🌹🙏

M.S.Chauhan Jan 20, 2021
@preetijain1 शुभ रात्रि वंदन जय श्रीकृष्ण गोविंद आपकी रात्रि सुखमय हो ! 🌼🌿🦚🙏🦚🌿🌼

M.S.Chauhan Jan 20, 2021
@krishnarish आदरणीय बहिन जी सादर प्रणाम शुभ रात्रि वंदन जय श्रीकृष्ण गोविंद जय श्री राधे राधे जी 🌼🌿🦚🙏🦚🌿🌼

M.S.Chauhan Jan 20, 2021
@noratmalmalimali जय श्रीकृष्ण गोविंद जय श्री राधे राधे जी Good Night ji.

M.S.Chauhan Jan 20, 2021
@kamleshgoyal जय श्रीकृष्ण गोविंद शुभ रात्रि वंदन

M.S.Chauhan Jan 20, 2021
@सुविचार1 आदरणीय भाई जी सादर नमन शुभ रात्रि वंदन जय श्रीकृष्ण गोविंद जय श्री राधे राधे जी 🌼🌿🦚🙏🦚🌿🌼

Jai Mata Di Mar 8, 2021

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Jai Mata Di Mar 8, 2021

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anju Mar 8, 2021

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Anuradha Tiwary Mar 8, 2021

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*जय श्री राधे कृष्णा जी* *शुभरात्रि वंदन* एक बार राजा भोज के दरबार में एक सवाल उठा कि ' ऐसा कौन सा कुआं है जिसमें गिरने के बाद आदमी बाहर नहीं निकल पाता?' इस प्रश्न का उत्तर कोई नहीं दे पाया। आखिर में राजा भोज ने राज पंडित से कहा कि इस प्रश्न का उत्तर सात दिनों के अंदर लेकर आओ, वरना आपको अभी तक जो इनाम धन आदि दिया गया है,वापस ले लिए जायेंगे तथा इस नगरी को छोड़कर दूसरी जगह जाना होगा। छः दिन बीत चुके थे।राज पंडित को जबाव नहीं मिला था।निराश होकर वह जंगल की तरफ गया। वहां उसकी भेंट एक गड़रिए से हुई। गड़रिए ने पूछा -" आप तो राजपंडित हैं, राजा के दुलारे हो फिर चेहरे पर इतनी उदासी क्यों? यह गड़रिया मेरा क्या मार्गदर्शन करेगा?सोचकर पंडित ने कुछ नहीं कहा।इसपर गडरिए ने पुनः उदासी का कारण पूछते हुए कहा -" पंडित जी हम भी सत्संगी हैं,हो सकता है आपके प्रश्न का जवाब मेरे पास हो, अतः नि:संकोच कहिए।" राज पंडित ने प्रश्न बता दिया और कहा कि अगर कलतक प्रश्न का जवाब नहीं मिला तो राजा नगर से निकाल देगा। गड़रिया बोला -" मेरे पास पारस है उससे खूब सोना बनाओ। एक भोज क्या लाखों भोज तेरे पीछे घूमेंगे।बस,पारस देने से पहले मेरी एक शर्त माननी होगी कि तुझे मेरा चेला बनना पड़ेगा।" राज पंडित के अंदर पहले तो अहंकार जागा कि दो कौड़ी के गड़रिए का चेला बनूं? लेकिन स्वार्थ पूर्ति हेतु चेला बनने के लिए तैयार हो गया। गड़रिया बोला -" *पहले भेड़ का दूध पीओ फिर चेले बनो। राजपंडित ने कहा कि यदि ब्राह्मण भेड़ का दूध पीयेगा तो उसकी बुद्धि मारी जायेगी। मैं दूध नहीं पीऊंगा। तो जाओ, मैं पारस नहीं दूंगा - गड़रिया बोला। राज पंडित बोला -" ठीक है,दूध पीने को तैयार हूं,आगे क्या करना है?" गड़रिया बोला-" अब तो पहले मैं दूध को झूठा करूंगा फिर तुम्हें पीना पड़ेगा। राजपंडित ने कहा -" तू तो हद करता है! ब्राह्मण को झूठा पिलायेगा?" तो जाओ, गड़रिया बोला। राज पंडित बोला -" मैं तैयार हूं झूठा दूध पीने को ।" गड़रिया बोला-" वह बात गयी।अब तो सामने जो मरे हुए इंसान की खोपड़ी का कंकाल पड़ा है, उसमें मैं दूध दोहूंगा,उसको झूठा करूंगा, कुत्ते को चटवाऊंगा फिर तुम्हें पिलाऊंगा।तब मिलेगा पारस। नहीं तो अपना रास्ता लीजिए।" राजपंडित ने खूब विचार कर कहा-" है तो बड़ा कठिन लेकिन मैं तैयार हूं। गड़रिया बोला-" मिल गया जवाब। यही तो कुआं है!लोभ का, तृष्णा का जिसमें आदमी गिरता जाता है और फिर कभी नहीं निकलता। जैसे कि तुम पारस को पाने के लिए इस लोभ रूपी कुएं में गिरते चले गए। जय श्री कृष्णा जी 🙏🙏🙏🙏🙏🙏

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Sanjay Awasthi Mar 7, 2021

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*जय श्री राधे कृष्णा जी* *शुभरात्रि वंदन* !! प्रारंभ !! 〰️🔸〰️ एक पुरानी कथा का स्मरण आता है, कि एक फकीर सत्य की खोज में था। उसने अपने गुरु से पूछा, कि सत्य कहां मिलेगा? उसके गुरु ने कहा, सत्य? सत्य वहां मिलेगा, जहां दुनिया का अंत होता है। तो उस दिन से वह फकीर दुनिया का अंत खोजने निकल गया। कहानी बड़ी मधुर है। वर्षों चलने के बाद, भटकने के बाद, आखिर उस जगह पहुंच गया, जहां आखिरी गांव समाप्त हो जाता है, तो उसने गांव के लोगों से पूछा कि दुनिया का अंत कितनी दूर है? उन्होंने कहा, ज्यादा दूर नहीं है। बस यह आखिरी गांव है। थोड़ी ही दूर जाकर वह पत्थर लगा है, जिस पर लिखा है कि यहां दुनिया समाप्त होती है। लेकिन गांव के लोगों ने यह भी कहा कि उधर जाओ मत, खतरा बहुत है वहां। वह फकीर हंसा। उसने कहा, हम उसी की तो खोज में निकले हैं। लोगों ने कहा, वहां बहुत भयभीत हो जाओगे। जहां दुनिया अंत होती है, उस गङ्ढ को तुम देख न सकोगे। मगर फकीर तो उसी की खोज में था, सारा जीवन गंवा दिया था। उसने कहा, हम तो उसी की खोज में हैं और गुरु ने कहा है, जब तक दुनिया के अंत को न पा लोगे, तब तक सत्य न मिलेगा। तो जाना ही पड़ेगा। कहते हैं, फकीर गया। गांव के लोगों की उसने सुनी नहीं। वह उस जगह पहुंच गया जहां आखिरी तख्ती लगी थी, कि यहां दुनिया समाप्त होती है। उसने एक आंख भरकर उस जगह को देखा, शून्य था वहां। कोई तलहटी न थी उस खड्ड में। आगे कुछ था ही नहीं। आप उसकी घबराहट समझ सकते हो। वह जो लौटकर भागा, तो जो यह यात्रा उसने पूरे जनम में पूरी की थी, वह कहते हैं, कि वापिसी में कुछ ही दिनों में पूरी हो गई। वह जो भागा, तो रुका ही नहीं। वह जाकर गुरु के चरणों में ही गिरा। तब भी वह कांप रहा था। तब भी वह बोल नहीं पा रहा था। बामुश्किल, उसको गुरु ने पूछा कि मामला क्या है? हुआ क्या? असल में वह फकीर गूंगे जैसा हो गया था। सिर्फ इशारा करता था पीछे की तरफ, क्योंकि जो देखा था, वह बहुत घबराने वाला था। गुरु ने कहा, नासमझ; मैं समझ गया! लगता है, तू दुनिया के अंत तक पहुंच गया था और तुझे तख्ती मिली होगी जिस पर लिखा होगा कि यहां दुनिया का अंत होता है? उसने कहा, कि बिलकुल ठीक, मिली थी वह तख्ती। तो तूने दूसरी तरफ तख्ती के देखा कि क्या लिखा था? उसने कहा कि दूसरी तरफ? उस तरफ खाली शून्य था। मैं तो उस खड्ड देखकर एक आंख और जो भागा हूं तो रुका ही नहीं कहीं। पानी के लिए भी नहीं, भूख के लिए भी नहीं। उस तरफ तो मैंने नहीं देखा, हिम्मत ही नहीं हुई। उसने कहा, बस, वही तो भूल हो गई। अगर तू दूसरी तरफ तख्ती के देख लेता, तो जहां इस तरफ लिखा था कि यहां दुनिया का अंत होता है तो उस दूसरी तरफ लिखा होगा कि यहां से परमात्मा का प्रारंभ होता है। असल में एक सीमा पूरी होती है तब दूसरी सीमा शुरू होती है। परमात्मा निराकार है। शून्य में उसी निराकार के करीब आप पहुंचोगे। यह कहानी बड़ी अच्छी है, बड़ी कीमती है। ऐसा दुनिया में कहीं है नहीं। निकल मत जाना खोजने उस जगह को जहां तख्ती लगी हो। असल में यह भीतर की बात है। जहां दुनिया समाप्त होती है, इसका मतलब, जहां राग-रंग समाप्त होता है, जहां दुनिया समाप्त होती है, इसका मतलब, जहां जीवन का खेल–खिलौने समाप्त होते हैं, आखिरी पड़ाव आ जाता है। देख लिया सब, जान लिया सब, हो गया दो कौड़ी का, कुछ सार न पाया। सब बुदबुदे टूट गए, फूट गए, सब रंग बेरंग हो गए। दुनिया के अंत होने का अर्थ है, जहां वासना समाप्त हो गई। वासना ही दुनिया है। महत्वाकांक्षा का विस्तार ही संसार है। लेकिन वहां आते ही घबड़ाहट होगी। क्योंकि वहां फिर शून्य साक्षात खड़ा हो जाता है। जहां महत्वाकांक्षा मिटती है, वहां शून्य रह जाता है। जय श्री कृष्णा 🌷🙏🙏🌷

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Jai Mata Di Mar 6, 2021

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