🌿"क्यों भृगु ऋषि ने मारी भगवान विष्णु के सीने पर लात"🌿

🌿"क्यों भृगु ऋषि ने मारी भगवान विष्णु के सीने पर लात"🌿

"क्यों भृगु ऋषि ने मारी भगवान विष्णु के सीने पर लात"
भृगु नाम के एक बड़े ही महान ऋषि थे। उनकी ख्याति आज भी अमर है। उन्होंने भगवान विष्णु की क्षमाशीलता की बड़ी बड़ाई सुनी थी। उन्होंने एकदिन सोचा, क्यों ना चल कर उनकी छमा शीलता की जांच कर ली जाए ? ऐसा सोच कर वे भगवान विष्णु की क्षमा की जांच के लिए उनके पास पहुंचे।
जिस समय वे पहुंचे, भगवान विष्णु मां लक्ष्मी की गोद में शेषनाग की शैय्या पर विश्राम कर रहे थे। सारे लोकाचारों को छोड़कर वे वहां पहुंचे, ना आव देखा न ताव और बिना कुछ कहे सुने ही, विष्णु के सीने में जाकर जोर से लात मार दी। मां लक्ष्मी इस घटना को देखकर आश्चर्यचकित रह गई। सीने पर चोट पड़ते ही भगवान विष्णु उठ खड़े हुए, अकचका कर और भृगु मुनि को अपने पास पाकर उनके पांव छू कर सीने से लगा लिया। भृगु मुनि तो क्रोध से भरे थे, चाहे बनाबटी रूप से ही क्यों ना हो, कारण वे तो जानबूझकर जांच करने आए थे विष्णु की क्षमाशीलता की। विष्णु भगवान उनके इस व्यवहार को देखकर चकित रह गए। विष्णु भगवान ने आगे पांव सहलाते हुए कहा – "मुनिवर, आपके पांव तो बड़े ही कोमल है और मेरा सीना तो वज्र कठोर है। मुनिश्रेष्ठ ! आपके पांव को चोट तो नहीं आई ?"
भगवान विष्णु की इस वाणी ने भृगु मुनि को बहुत ही चकित किया। उनका क्रोध विष्णु भगवान की कोमल वाणी से पानी पानी हो गया। वे तो सोच रहे थे कि विष्णु भगवान उनके इस दुर्व्यवहार के लिए, सीने पर लात मारने के लिए, बेहद नाराज होंगे और प्रतिकार रूप में जाने क्या रुख अख्तियार करें ? संभव है, बहुत ही क्रुद्ध हों और प्रतिकार रूप में अपने ढंग से दंडित करें पर यहां तो पासा ही पलट गया। क्रुद्ध होने की अपेक्षा कोमल बने रहे। भृगु अपने इस व्यवहार से बड़े लज्जित हुए। विष्णु भगवान ने इतना ही नहीं किया, वरन् उन्होंने सीने से लगाकर आदर भाव दिया और आतिथ्य कराकर सादर विदा किया। भृगु ने स्वीकार किया कि भगवान विष्णु जैसी क्षमाशीलता अन्यत्र दुर्लभ है – न भूतो न भविष्यति। ऐसा ना अतीत में हुआ और नाम भविष्य में होने की संभावना है, जब जब धरती रहेंगी। विष्णु भगवान की क्षमाशीलता की यह कहानी अमर रहेगी – जब तक सूरज चांद रहेगा। जितना महान अपराध, उतनी ही महान क्षमा !
🚩जय श्री राम🚩

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कामेंट्स

Captain Nov 15, 2017
ॐ नमो नारायणा

Tarun Mishra Nov 15, 2017
भारत की प्राचीनतम संस्कृति की जानकारी देने के लिए आपका कोटि सह धन्यवाद

Rahul Singh Nov 16, 2017
महाराज श्री हरि: की जय

Kishor Deshpande Nov 16, 2017
"ये शायद आधी जानकारी हैं। भृगु ऋषी के लात मारने पर श्री विष्णु को तो गुस्सा नहीं आया। पर श्री लक्ष्मी जी को आया। और उन्होने भृगु ऋषी को शाप दे दिया। की मेरे पति का कोई अपराध ना होते हुये भी आपने उन्हे लात मारने का जो घोर अपराध और मेरे पति का अपमान किया है, इसके लिए मै आपको शाप देतीं हु,इसी क्षण से किसी भी ब्राहमण के घर में मै कदापि वास नहीं करूंगी। ब्राह्मण हमशा लक्ष्मी हीन रहेगा। और ये शाप सुनकर भृगु तो घबरा ही गये। पर श्री विष्णु आहत हो गये और श्री लक्ष्मी जी को कहा है देवी आपने ये क्या अनर्थ कर दिया,इस साधारण भूल के लिए इतना भयंकर शाप दे दिया। कृपा करके आप इस शाप को वापस लिजीये। पर श्री लक्ष्मी जी तैयार नहीं थी क्यु की वो अपने पति अपमान सहन नहीं कर सकती थी। पर,श्री विष्णु ने उन्हे प्रार्थना करते हुये मनाया और श्री लक्ष्मी जी अपने पति की बात टाल नहीं सकती थी। और फिर श्री लक्ष्मी जी ने एक वरदान दिया कि, "जो ब्राह्मण सरस्वति की आराधना के माध्यम से ध्यान धारना,ज्ञान प्राप्ति,नित्य नियमित ब्राह्मण के कर्म संध्या वंदन,पुजा अर्चना,आराधना और धर्म का काया,वाचा,और हृदय से आचरण करेगा,जो कि किसी भी बिकट से बिकट परिस्थिति में भी धर्म और सत्य का ही साथ देगा, धर्म और सत्य के मार्ग पर ही चलेगा सिर्फ और सिर्फ ऊसी ब्राहमण के घर में मै सदैव वास करूंगी। भृगु ऋषी ने भी श्री विष्णु और माता लक्ष्मी जी की क्षमा मांगी। और ऊसी दिन से जो ब्राह्मण धर्म,सत्य,आराधना, अपना नित्य धार्मिक आचरण इन सभी का आचरण करता है आज भी श्री विष्णु और माता लक्ष्मी जी का आशीर्वाद ऊनके सिर पर सदैव बना रहता है। उसे किसी भी तरहा कोई कष्ट या दुःख नहीं रहते हैं। " "कृष्णम् वंदे जगद्गुरु" "धर्मो रक्षति रक्षित:" जय 🚩"लक्ष्मी नारायण"🚩

Sharad Katyarkar Nov 16, 2017
🌹🌹🙏🌹🌹जय श्री राम🌹🌹🙏🌹🌹

Hirdesh Kumar Dass Nov 16, 2017
क्या आप जानते हैं कि बृह्मा बिष्णू और शंकर के माता-पिता कौन हैं

Mithlesh Pandey Nov 16, 2017
आदि से अजंमे अनंत शिव है

Shetwan Mallah Nov 16, 2017
जयश्रीरामजयसीतारामजयनिषादराज

Champ Kanhaiya Nov 18, 2017
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shivani Oct 20, 2018

jai shree ram

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Dhanraj Maurya Oct 20, 2018

Om Jai Jai Om

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Harshita Malhotra Oct 20, 2018

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Aechana Mishra Oct 20, 2018

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Sunil Jhunjhunwala Oct 20, 2018

Sunil Jhunjhunwala
^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^

Jyot Pranam Flower +14 प्रतिक्रिया 8 कॉमेंट्स • 243 शेयर

*🌷🙏तलाश जिंदगी की थी*
*दूर तक निकल पड़े,,,,*

*जिंदगी मिली नही*
*तज़ुर्बे बहुत मिले,;;*

*किसी ने मुझसे कहा कि...*
*तुम इतना *ख़ुश* *कैसे रह लेते हो?*
*तो मैंने कहा कि...*.
*मैंने जिंदगी की गाड़ी से...*
*वो साइड ग्लास ही हटा दिये...*
*जिसमेँ पीछे...

(पूरा पढ़ें)
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Krishna Rai Oct 21, 2018

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shivani Oct 20, 2018

radhe radhe

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