🌿"क्यों भृगु ऋषि ने मारी भगवान विष्णु के सीने पर लात"🌿

🌿"क्यों भृगु ऋषि ने मारी भगवान विष्णु के सीने पर लात"🌿

"क्यों भृगु ऋषि ने मारी भगवान विष्णु के सीने पर लात"
भृगु नाम के एक बड़े ही महान ऋषि थे। उनकी ख्याति आज भी अमर है। उन्होंने भगवान विष्णु की क्षमाशीलता की बड़ी बड़ाई सुनी थी। उन्होंने एकदिन सोचा, क्यों ना चल कर उनकी छमा शीलता की जांच कर ली जाए ? ऐसा सोच कर वे भगवान विष्णु की क्षमा की जांच के लिए उनके पास पहुंचे।
जिस समय वे पहुंचे, भगवान विष्णु मां लक्ष्मी की गोद में शेषनाग की शैय्या पर विश्राम कर रहे थे। सारे लोकाचारों को छोड़कर वे वहां पहुंचे, ना आव देखा न ताव और बिना कुछ कहे सुने ही, विष्णु के सीने में जाकर जोर से लात मार दी। मां लक्ष्मी इस घटना को देखकर आश्चर्यचकित रह गई। सीने पर चोट पड़ते ही भगवान विष्णु उठ खड़े हुए, अकचका कर और भृगु मुनि को अपने पास पाकर उनके पांव छू कर सीने से लगा लिया। भृगु मुनि तो क्रोध से भरे थे, चाहे बनाबटी रूप से ही क्यों ना हो, कारण वे तो जानबूझकर जांच करने आए थे विष्णु की क्षमाशीलता की। विष्णु भगवान उनके इस व्यवहार को देखकर चकित रह गए। विष्णु भगवान ने आगे पांव सहलाते हुए कहा – "मुनिवर, आपके पांव तो बड़े ही कोमल है और मेरा सीना तो वज्र कठोर है। मुनिश्रेष्ठ ! आपके पांव को चोट तो नहीं आई ?"
भगवान विष्णु की इस वाणी ने भृगु मुनि को बहुत ही चकित किया। उनका क्रोध विष्णु भगवान की कोमल वाणी से पानी पानी हो गया। वे तो सोच रहे थे कि विष्णु भगवान उनके इस दुर्व्यवहार के लिए, सीने पर लात मारने के लिए, बेहद नाराज होंगे और प्रतिकार रूप में जाने क्या रुख अख्तियार करें ? संभव है, बहुत ही क्रुद्ध हों और प्रतिकार रूप में अपने ढंग से दंडित करें पर यहां तो पासा ही पलट गया। क्रुद्ध होने की अपेक्षा कोमल बने रहे। भृगु अपने इस व्यवहार से बड़े लज्जित हुए। विष्णु भगवान ने इतना ही नहीं किया, वरन् उन्होंने सीने से लगाकर आदर भाव दिया और आतिथ्य कराकर सादर विदा किया। भृगु ने स्वीकार किया कि भगवान विष्णु जैसी क्षमाशीलता अन्यत्र दुर्लभ है – न भूतो न भविष्यति। ऐसा ना अतीत में हुआ और नाम भविष्य में होने की संभावना है, जब जब धरती रहेंगी। विष्णु भगवान की क्षमाशीलता की यह कहानी अमर रहेगी – जब तक सूरज चांद रहेगा। जितना महान अपराध, उतनी ही महान क्षमा !
🚩जय श्री राम🚩

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कामेंट्स

Captain Nov 15, 2017
ॐ नमो नारायणा

Tarun Mishra Nov 15, 2017
भारत की प्राचीनतम संस्कृति की जानकारी देने के लिए आपका कोटि सह धन्यवाद

Rahul Singh Nov 16, 2017
महाराज श्री हरि: की जय

Kishor Deshpande Nov 16, 2017
"ये शायद आधी जानकारी हैं। भृगु ऋषी के लात मारने पर श्री विष्णु को तो गुस्सा नहीं आया। पर श्री लक्ष्मी जी को आया। और उन्होने भृगु ऋषी को शाप दे दिया। की मेरे पति का कोई अपराध ना होते हुये भी आपने उन्हे लात मारने का जो घोर अपराध और मेरे पति का अपमान किया है, इसके लिए मै आपको शाप देतीं हु,इसी क्षण से किसी भी ब्राहमण के घर में मै कदापि वास नहीं करूंगी। ब्राह्मण हमशा लक्ष्मी हीन रहेगा। और ये शाप सुनकर भृगु तो घबरा ही गये। पर श्री विष्णु आहत हो गये और श्री लक्ष्मी जी को कहा है देवी आपने ये क्या अनर्थ कर दिया,इस साधारण भूल के लिए इतना भयंकर शाप दे दिया। कृपा करके आप इस शाप को वापस लिजीये। पर श्री लक्ष्मी जी तैयार नहीं थी क्यु की वो अपने पति अपमान सहन नहीं कर सकती थी। पर,श्री विष्णु ने उन्हे प्रार्थना करते हुये मनाया और श्री लक्ष्मी जी अपने पति की बात टाल नहीं सकती थी। और फिर श्री लक्ष्मी जी ने एक वरदान दिया कि, "जो ब्राह्मण सरस्वति की आराधना के माध्यम से ध्यान धारना,ज्ञान प्राप्ति,नित्य नियमित ब्राह्मण के कर्म संध्या वंदन,पुजा अर्चना,आराधना और धर्म का काया,वाचा,और हृदय से आचरण करेगा,जो कि किसी भी बिकट से बिकट परिस्थिति में भी धर्म और सत्य का ही साथ देगा, धर्म और सत्य के मार्ग पर ही चलेगा सिर्फ और सिर्फ ऊसी ब्राहमण के घर में मै सदैव वास करूंगी। भृगु ऋषी ने भी श्री विष्णु और माता लक्ष्मी जी की क्षमा मांगी। और ऊसी दिन से जो ब्राह्मण धर्म,सत्य,आराधना, अपना नित्य धार्मिक आचरण इन सभी का आचरण करता है आज भी श्री विष्णु और माता लक्ष्मी जी का आशीर्वाद ऊनके सिर पर सदैव बना रहता है। उसे किसी भी तरहा कोई कष्ट या दुःख नहीं रहते हैं। " "कृष्णम् वंदे जगद्गुरु" "धर्मो रक्षति रक्षित:" जय 🚩"लक्ष्मी नारायण"🚩

Hirdesh Kumar Dass Nov 16, 2017
क्या आप जानते हैं कि बृह्मा बिष्णू और शंकर के माता-पिता कौन हैं

Mithlesh Pandey Nov 16, 2017
आदि से अजंमे अनंत शिव है

Shetwan Mallah Nov 16, 2017
जयश्रीरामजयसीतारामजयनिषादराज

Champ Kanhaiya Nov 18, 2017
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Neha Sharma, Haryana Jan 22, 2020

जय श्री राधेकृष्णा शुभ प्रभात वंदन *कुएँ का गिरगिट अर्थात राजा नृग की कथा:* श्रीकृष्ण उन दिनों अपनी राजधानी द्वारका पुरी में ही रह रहे थे। जरासंध के उत्पातों से तंग आकर उन्होंने वहाँ से दूर पश्चिमी समुद्र के पास द्वारका में अपनी राजधानी बनाई थी। यह राजधानी अत्यन्त सुंदर थी। इसमें ऊँचे-ऊँचे महल और अट्टालिकाएँ थीं। ऊँचे शिखरों और लहराते ध्वजों वाले मन्दिर थे। सुन्दर और आकर्षक वस्तुओं से पटे बड़े-बड़े बाजार थे। इसकी सड़कें चौड़ी और चिकनी थीं। इन पर दोनों शाम सुगन्धित जल का छिड़काव होता था। बाजार में सुन्दर-सुन्दर सरोवर और जलाशय थे जिनकी सीढ़ियाँ सफेद संगमरमर की बनी हुई थीं। इन तालाबों में सदा जल भरा रहता था जिसमें कमल, कुमुदनी आदि विविधरंगी और सुगन्धपूरित पुष्प खिले रहते थे। फूलों पर भौरे मंडराते रहते थे, जिसके फलस्वरूप कोई उनके पास जाकर उन्हें तोड़ने का प्रयास नहीं करता था। इन जलाशयों में विविध मछलियाँ अठखेलियाँ करती थीं, जिसके फलस्वरूप इन सरोवरों की शोभा निराली हो उठती थी। नगर के भीतर ऐसी शोभा थी तो बाहर भी वह कुछ कम नहीं थी। नगर के किनारे-किनारे बड़े-बड़े और मन मोहक उपवन लगे थे। कुछ में सभी ऋतुओं में फल देने वाले फलदार वृक्ष लगे थे तो कुछ में सभी प्रकार के गन्ध-पूरित फूल। उन फूलों में सभी थे-गुलाब, जूही चमेली बेला, रातरानी कनैल, अड़हुल, गेंदा, गन्धराज आदि। इन सुन्दर उपवनों में नगरवासी प्रायः भ्रमण-हेतु आते ही रहते थे शुद्ध वायु के लिए उपवनों से अच्छा स्थान नहीं हो सकता था। एक दिन श्रीकृष्ण-पुत्र प्रद्युम्न अपने कुछ साथियों के साथ जैसे चारुभानु, गद और साम्ब आदि के साथ उपवन के परिभ्रमण को आए। वह देर तक इधर-उधर घूमते फूलों की शोभा निहारते रहे और उनकी गन्ध से अपने को तृप्त करते रहे। घूमते-घूमते उन्हें प्यास लग आई। वे प्यास बुझाने के लिए पानी ढूँढ़ते रहे पर दुर्भाग्यवश पानी उन्हें कहीं नहीं मिला। नगर के अन्दर तो कई सरोवर थे पर नई बस रही राजधानी के उपवनों में अभी तक जलाशय की व्यवस्था करने की बात किसी के ध्यान में नहीं आई थी। श्रीकृष्ण-पुत्र प्रद्युम्न ने सोचा, वह पिता से कहकर इन उपवनों में सुन्दर स्वच्छ जलाशयों का निर्माण कराएँगे जिससे आगे चलकर किसी को पेयजल के संकट का सामना नहीं करना पड़े। पर यह तो भविष्य की बात थी। अभी जो सभी पिपासा से पीड़ित हो रहे थे, उसका क्या उपाय था। घूमते-घूमते वे एक कुएँ के पास पहुँचे। उन्हें कुएँ को देखकर बहुत प्रसन्नता हुई। प्यास से व्याकुल उन लोगों ने सोचा कि उनकी प्यास अब शान्त होकर रहेगी। वे कुएँ के पास गये और उसके भीतर झाँका तो उनकी सारी आशा निराशा में परिवर्तित हो गई। कुएँ में एक बूँद जल नहीं था। पता नहीं वह कब से सूखा पड़ा था किन्तु उसमें एक विचित्र जीव को देख कर उनके आश्चर्य की सीमा नहीं रही। उसमें एक बहुत बड़ा गिरगिट पड़ा था। कुआँ काफी लम्बा-चौड़ा और गहरा था। गिरगिट का आकार किसी पर्वत की तरह लग रहा था। कुछ देर तक तो इन लोगों ने गिरगिट को कौतूहल पूर्वक देखा किन्तु शीघ्र ही उसकी छटपटाहट से द्रवित हो गये। वह कुएँ से निकलने को बेचैन था किन्तु लाख प्रयासों के बाद भी वह उससे बाहर नहीं निकल पा रहा था। वह कुएँ की दीवार पर, शक्ति लगाकर चढ़ने का प्रयास करता किन्तु थोड़ा ऊपर जाने के बाद ही फिसल कर गिर पड़ता। वह बारी-बारी से कुएँ के चारों दीवारों पर चढ़ने का प्रयास करता किन्तु थोड़ा ऊपर जाने के बाद ही फिसलकर गिर पड़ता। इन लोगों को उसके कष्ट के निवारण का कोई उपाय नहीं सूझ रहा था। दीवारों से फिसलने और गिरने के कारण उसका शरीर लहूलुहान हो रहा था। दर्शकों को इन पर बहुत दया आई। उन्होंने पेड़ की डालियों और रस्सियों के सहारे उसको निकालने का प्रयास किया किन्तु इस पर्वताकार गिरगिट को निकालना आसान नहीं था। कोई भी रस्सी या पेड़ की डाली उसके भार को सहन नहीं कर पाती और टूट जाती। वे निराश हो गए और उन्होंने मन ही मन भगवान कृष्ण को स्मरण किया। वह तत्काल उस कुएँ के पास पहुँच गए। जिसमें वह गिरगिट गिरा पड़ा था। दर्शकों ने उन्हें बताया कि इस दुःखी जीव को निकालने का उन्होंने बहुत प्रयास किया परन्तु वे उसे निकालने में सफल नहीं हो सके। उसके दुःख से सभी दुःखी हैं। उन्होंने आगे कहा, *"पता नहीं कब से भूख-प्यास से पीड़ित इस अन्धे कुएँ में पड़ा है। आप सर्व-शक्तिमान हैं। कृपाकर इस निरीह प्राणी को इस अन्धकूप से निकालिए।"* भगवान श्रीकृष्ण के लिए यह कौन-सी बड़ी बात थी ? उन्होंने बाएँ हाथ से ही उस विशाल गिरगिट को कुएँ से बाहर निकाल दिया। निकलते ही वह गिरगिट गिरगिट नहीं रहा। एक प्रकाशवान पुरुष के रूप में वह परिवर्तित हो गया। उसके सिर पर मुकुट और शेष शरीर पर बहुमूल्य वस्त्र और आभूषण शोभा पा रहे थे। उसका रंग इतना गोरा था कि लगता था कि वह कच्चे सोने से बना है। इस तेजोमय पुरुष को देखकर भगवान श्रीकृष्ण सब कुछ समझ गए किन्तु अन्य लोगों की जानकारी के लिए उन्होंने उससे पूछा *"आप देखने से ही कोई देवपुरुष लगते हैं। आपको गिरगिट की योनि में जन्म लेकर इतना कष्ट क्यों सहना पड़ा ? निश्चित ही आप पूर्व जन्म में कोई पराक्रमी राजा-महराजा थे।"* उस पुरुष ने श्रीकृष्ण को प्रणाम करते हुए कहा, *"आपका सोचना एकदम ठीक है। आप कोई अन्तर्यामी हैं ? आप से क्या छिपा है फिर भी आप पूछते हैं तो बताना ही पड़ेगा। क्योंकि आपकी मुझ पर अपार कृपा है। आपके दर्शन-मात्र से बिना कोई यज्ञ जाप या तपस्या किए गिरगिट की योनि से मेरा उद्धार हो गया।"* *"मैं पहले नृग नामक राजा था। मेरे पास अपार सम्पत्ति थी। मैं उसे अपने भोग-विलास में नहीं लगाकर दूसरों के मध्य उनके दान में लगा रहता था। दान लेने वालों की मेरे यहां भीड़ लगी रहती थी। विशेषकर ब्राह्मणों की।"* *"मैंने कई दुधारी गायों को बछड़ों के साथ ब्राह्मणों को दान दिया। दान देने के पूर्व मैं गायों के सींगों को सोने से मढ़वाना नहीं भूलता था।"* *"उनके खुरों में चाँदी मढ़वाता था तथा उन्हें रेशमी वस्त्र, स्वर्णनिर्मित हार और अन्य आभूषणों से सजाकर ही दान करता था। भगवान ! मेरी दानशीलता प्रसिद्ध थी। मैंने गायें ही नहीं, भूमि, सोना, घर, घोड़े, हाथी, तिलों के पर्वत, चाँदी, शय्या, वस्त्र, रत्न आदि दान किए। अनेक यज्ञों का अनुष्ठान किया। बहुत से कुएँ जलाशय आदि बनवाए।"* भगवान कृष्ण ने पूछा, *"इतना सब करने के बाद भी आपको यह निकृष्ट गिरगिट योनि क्यों प्राप्त हुई ?"* राजा नृग ने कहा *"भगवान ने ठीक ही पूछा। एक अनजानी गलती से मेरी यह दुर्दशा हुई। एक दिन ऐसे तपस्वी ब्राह्मण की गाय, जो कभी दान नहीं लेता था मेरी गायों के झुण्ड में आ मिली। मुझे इसका कोई पता नहीं था। मैंने अन्य गायों की तरह उसे भी सजा-सँवार कर किसी अन्य ब्राह्मण को दान में दे दिया।"* *"जब वह ब्राह्मण इस सजी-सजाई गाय को लेकर चला तो गाय के वास्तविक मालिक से उसकी मुलाकात हो गई।"* *"उसने कहा, ‘यह गाय मेरी है तुम कहाँ लिये जा रहे हो ? इसको सजाने-सँवारने से मैं इसको पहचानने में भूल नहीं सकता।’"* *"दान लिए ब्राह्मण ने कहा, ‘गाय तुम्हारी नहीं मेरी है क्योंकि राजा नृग ने मुझे इसे दान में दिया है। वे दोनों ब्राह्मण आपस में झगड़ते हुए मेरे समीप पहुँचे। एक ने कहा—‘यह गाय मुझे अभी-अभी दान में दी गई है।’ दूसरे ने कहा, ‘यदि ऐसी बात है तो राजा द्वारा मेरी गाय चुरा ली गई है।"* *मैंने दोनों ब्राह्मणों से अनुनय-विनय की और कहा, ‘मैं लाख उच्चकोटि की गाय दूँगा। आप लोग यह गाय मुझे वापिस कर दीजिए।"* *"गाय के वास्तविक मालिक ने कहा, ‘मैं अपनी गाय के बदले कुछ नहीं लूँगा और वह चला गया।"* *"दूसरे ने कहा, ‘एक लाख क्या कई लाख गाएँ भी मुझे दीजिए तो भी मैं लेने को तैयार नहीं।’ और दूसरा ब्राह्मण भी चला गया।"* *"कालक्रम से मेरी मृत्यु हुई। मैं यमलोक पहुँचा।’ यमराज ने पूछा, ‘आप ने बहुत पुण्य कार्य किए हैं किन्तु एक छोटा-सा पाप भी आपसे हुआ है। भले ही अनजाने में हुआ हो। आप बताइए कि आप पहले अपने पाप का फल भोगेंगे अथवा पुण्य का ?"* *‘‘मैंने कहा, ‘पहले पाप का ही भोग लेता हूँ।’ मेरे कहते ही मैं विशाल गिरगिट बन कर धरती पर आ गिरा। यही मेरी कहानी है"* शुभ प्रभात। आज का दिन आपके लिए शुभ एवं मंगलमय हो।

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kamlesh sharma Jan 22, 2020

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Udit Sagar Jan 22, 2020

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Neha Sharma, Haryana Jan 21, 2020

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*“खरी कमाई”* 🙏🏻🚩🌹 👁❗👁 🌹🚩🙏🏻 एक बड़े सदाचारी और विद्वान ब्राह्मण थे| उनके घर में प्रायः रोटी-कपड़े की तंगी रहती थी| साधारण निर्वाहमात्र होता था| वहाँ के राजा बड़े धर्मात्मा थे| ब्राह्मणी ने अपने पति से कई बार कहा कि आप एक बार तो राजा से मिल आओ, पर ब्राह्मण कहते हैं कि वहाँ जाने के लिए मेरा मन नहीं कहता| वहाँ जाकर आप माँगो कुछ नहीं, केवल एक बार जाकर आ जाओ| पत्नी ने ज्यादा कहा तो स्त्री की प्रसन्नता के लिए वे राजा के पास चले गये| राजा ने उनको बड़े त्याग से रहने वाले गृहस्थ ब्राह्मण जानकर उनका बड़ा आदर-सत्कार किया और उनसे कहा कि आप एक दिन और पधारें| अभी तो आप मर्जी से आये हैं, एक दिन आप मेरे पर कृपा करके मेरी मर्जी से पधारें| ऐसा कहकर राजा ने उनकी पूजा करके आनंदपूर्वक उनको विदा कर दिया| घर आने पर ब्राह्मणी ने पूछा कि राजा ने क्या दिया? ब्राह्मण बोले- दिया क्या, उन्होंने कहा कि एक दिन आप फिर आओ| ब्राह्मणी ने सोचा कि अब माल मिलेगा| राजा ने निमन्त्रण दिया है, इसलिए अब जरुर कुछ देंगे| एक दिन राजा रात्रि में अपना वेश बदलकर, बहुत गरीब आदमी के कपड़े पहनकर घूमने लगे| ठंडी के दिन थे| एक लुहार के यहाँ एक कड़ाह बन रहा था| उसमें घन मारने वाले आदमी की जरूरत थीं| राजा इस काम के लिए तैयार हो गये| लुहार ने कहा की एक घंटा काम करने के दो पैसे दिये जायँगे| राजा ने बड़े उत्साह से, बड़ी तत्परता से दो घंटे काम किया| राजा के हाथों में छाले पड़ गये, पसीना आ गया, बड़ी मेहनत पड़ी| लुहार ने चार पैसे दे दिये| राजा उन चार पैसों को लेकर आ गया और आकर हाथों पर पट्टी बाँधी| धीरे-धीरे हाथों में पड़े छाले ठीक हो गये| एक दिन ब्राह्मणी के कहने पर वे ब्राह्मण देवता राजा के यहाँ फिर पधारे| राजा ने उनका बड़ा आदर किया, आसन दिया, पूजन किया और उनको वे चार पैसे भेंट दे दिये| ब्राह्मण बड़े संतोषी थे| वे उन चार पैसों को लेकर घर पहुँचे| ब्राह्मणी सोच रही थी कि आज खूब माल मिलेगा| जब उसने चार पैसों को देखा तो कहा कि राजा ने क्या दिया और क्या आपने लिया! आप-जैसे पण्डित ब्राह्मण और देने वाला राजा! ब्राह्मणी ने चार पैसे बाहर फेंक दिये| जब सुबह उठकर देखा तो वहाँ चार जगह सोने की सीकें दिखाई दींए| सच्चा धन उग जाता है| सोने की उन सीकों की वे रोजाना काटते पर दूसरे दिन वे पुनः उग आतीं| उनको खोदकर देखा तो मूल में वे ही चार पैसे मिले! राजा ने ब्राह्मण को अन्न नहीं दिया; क्योंकि राजा का अन्न शुद्ध नहीं होता, खराब पैसों का होता है| मदिरा आदि पर लगे टैक्स के पैसे होते हैं, चोरों को दंड देने से प्राप्त हुए पैसे होते हैं-ऐसे पैसों को देकर ब्राह्मण को भ्रष्ट नहीं करना है| इसलिये राजा ने अपनी खरी कमाई के पैसे दिये| आप भी धार्मिक अनुष्ठान आदि में अपनी खरी कमाई का धन खर्च करिये|. जय गणेश

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Neha Sharma, Haryana Jan 20, 2020

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devi Lakshmi Jan 21, 2020

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🟢🟢🟢 ⚜🕉⚜ 🟢🟢🟢 *🙏ॐ श्रीगणेशाय नम:🙏* *🙏शुभप्रभातम् जी🙏* *इतिहास की मुख्य घटनाओं सहित पञ्चांग-मुख्यांश ..* *📝आज दिनांक 👉* *📜 22 जनवरी 2020* *बुधवार* *🏚नई दिल्ली अनुसार🏚* *🇮🇳शक सम्वत-* 1941 *🇮🇳विक्रम सम्वत-* 2076 *🇮🇳मास-* माघ *🌓पक्ष-* कृष्णपक्ष *🗒तिथि-* त्रयोदशी-25:50 तक *🗒पश्चात्-* चतुर्दशी *🌠नक्षत्र-* मूल-24:20 तक *🌠पश्चात्-* पूर्वाषाढ़ा *💫करण-* गर-13:45 तक *💫पश्चात्-* वणिज *✨योग-* व्याघात-27:39 तक *✨पश्चात्-* हर्षण *🌅सूर्योदय-* 07:13 *🌄सूर्यास्त-* 17:51 *🌙चन्द्रोदय-* 29:53 *🌛चन्द्रराशि-* धनु-दिनरात *🌞सूर्यायण-* उत्तरायन *🌞गोल-* दक्षिणगोल *💡अभिजित-* कोई नहीं *🤖राहुकाल-* 12:32 से 13:52 *🎑ऋतु-* शिशिर *❄अवधि* सर्दियों का मौसम *⏳दिशाशूल-* उत्तर *✍विशेष👉* *_🔅आज बुधवार को 👉 माघ बदी त्रयोदशी 25:50 तक पश्चात् चतुर्दशी शुरु , प्रदोष व्रत , विघ्नकारक भद्रा 25:49 से , मूल संज्ञक नक्षत्र 24:20 तक , मेरू त्रयोदशी व्रत ( जैन ) , श्री आदिनाथ निर्वाण दिवस ( जैन ) , ठाकुर श्री रोशनसिंह जयन्ती व श्री माणिक सरकार जन्मदिवस।_* *_🔅कल बृहस्पतिवार को 👉 माघ बदी चतुर्दशी 26:19 तक पश्चात् अमावस्या शुरु , रटन्ती कालिका पूजन , मास शिवरात्रि व्रत , विघ्नकारक भद्रा 14:04 बजे तक , भगवान ऋषभदेव निर्वाणोत्सव ( माघ बदी चतुर्दशी ) , नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जयन्ती , श्री बाला साहेब केशव ठाकरे जयन्ती , श्री नरेन्द्र मोहन सेन बलिदान दिवस व कुष्ठ निवारण अभियान दिवस।_* *🎯आज की वाणी👉* 🌹 *एदतर्थं कुलीनानां* *नृपाः कुर्वन्ति सङ्ग्रहम् ।* *आदिमध्यावसानेषु* *न त्यजन्ति च ते नृपम् ।।* *भावार्थ👉* _राजा लोग अपने आस पास अच्छे कुल के लोगों को इसलिए रखते हैं क्योंकि ऐसे लोग ना आरम्भ में, न बीच में और न ही अंत में साथ छोड़कर जाते हैं।_ 🌹 *22 जनवरी की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ👉* 1517 - तुर्की ने काहिरा पर कब्जा किया। 1673 - न्यूयॉर्क एवं बोस्टन के बीच डाक सेवा की शुरुआत हुई। 1760 - वांदीवाश के युद्ध में अंग्रेजों ने फ्रांसिसियों को हराया। 1771 – स्पेन ने फॉकलैंड द्वीप इंग्लैंड को सौंपा। 1811 - कास विद्रोह की शुरुआत सैन एंटोनियो, स्पेनिश टेक्सास में हुई। 1824 - अशंती ने गोल्ड कोस्ट में ब्रिटिश सेना को कुचलने के लिए, ब्रिटिश गवर्नर सर चार्ल्स मैककैथी की हत्या कर दी थी। 1831 – प्रख्यात जीवविज्ञानी चार्ल्स डार्विन स्नातक बने। 1837 - दक्षिणी सीरिया में भूकंप से हजारों लोग मरे। 1905 - रूस के सेंट पीट्सबर्ग में मजदूरों पर गोलियां चलाई गयी जिसमें 500 से ज्यादा लोग मरे। 1924 - रैमसे मैकडोनाल्ड ब्रिटेन में लेबर पार्टी के पहले प्रधानमंत्री बने। 1963 - देहरादून में दृष्टिहीनों के लिए राष्ट्रीय पुस्तकालय की स्थापना हुई। 1965 – पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर में इस्पात कारखाना शुरू हुआ। 1970 - बोइंग 747 का न्यूयॉर्क एवं लंदन के बीच पहली व्यावसायिक उड़ान शुरु हुई। 1972 – इस्तानबुल की पूरी आबादी को 24 घंटे की अवधि के लिए नजरबंद किया गया। 1973 – अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने गर्भपात को कानूनी मान्यता दे दी। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि महिलाओं गर्भवती होने के पहले 6 महीने के भीतर गर्भपात करवा सकती हैं। 1973 – जॉर्डन एयरलाइंस का विमान नाइजीरिया मे दुर्घटनाग्रस्त हुआ जिसमें 176 यात्रियों की मौत हुई। 1981 - रोनाल्ड रीगन का सं.रा. अमेरिका के 40वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ग्रहण। 1993 - इंडियन एयरलांइस का विमान औरंगाबाद मे दुर्घटनाग्रस्त, 61 यात्रियों की मौत। 1996 - कैलीफ़ोर्निया विश्वविद्यालय की वेधशाला के वैज्ञानिकों ने पृथ्वी से लगभग 3,50,000 प्रकाश वर्ष की दूरी पर दो नये ग्रहों की खोज की। 1998 - अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन पर मोनिका लेविंस्की ने अवैध शारीरिक संबंध स्थापित करने का आरोप लगाया। 2002 - फ़िलिस्तीनी शहर तुल्कोरम पर इस्रायल का कब्ज़ा। 2002 - अफ़ग़ानिस्तान के पुनर्निर्माण के लिए टोकियो में अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की बैठक में 3.5 अरब डॉलर की मदद की घोषणा। 2003 – नासा के अंतरिक्षयान पायनीयर 10 पृथ्वी से सर्वाधिक दूर मानव निर्मित यान से अंतिम बार संपर्क स्थापित हुआ। 2006 - श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंद्रा राजपक्षे ने विद्रोही संगठन लिट्टे से बातचीत की पेशकश की। 2006 - इवा मोराल्स ने बोलीविया के राष्ट्रपति पद की शपथ ली। 2008 - राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने लोकसभा में विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी को आगामी लोकसभा चुनाव के दौरान भावी प्रधानमंत्री के रूप में पेश करने के प्रस्ताव का समर्थन किया। 2008 - पाकिस्तान के दक्षिणी वजीरिस्तान में लाक्या क़िले पर आतंकवादियों के हमले में पांच पाकिस्तानी सैनिक मारे गये। 2009- फ़िल्म स्लमडॉग मिलेनियर का ऑस्कर के लिए नामांकन हुआ। 2009 - सरकार ने सार्वजनिक निजी भागीदारी आधार वाली तीन बंदरगाह परियोजनाओं को मंज़ूदी दी। 2014 – लघु ग्रह सेरेज पर जल वाष्प की उपस्थिति का पता चला। 2015 - उक्रेन के दोनेत्स्क में हुए विस्फोट में 13 लोगों की माैत। 2019 - राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद ने प्रधानमंत्री राष्‍ट्रीय बाल पुरस्‍कार -2019 प्रदान किए। 2019 - जाने-माने गुजराती कवि सितांशु यशशचंद्र सरस्‍वती सम्‍मान 2017 से पुरस्‍कृत। 2019 - हरियाणा सरकार ने ऐसिड सर्वाइवर्स को मासिक पेंशन देने की एक योजना शुरू की। 2019 - अफगानिस्तान: तालिबानी हमले में करीब 65 लोगों की मौत। *22 जनवरी को जन्मे व्यक्ति👉* 1531 – ब्रिटेन के गणितज्ञ और दार्शनिक फ़्रांसीस बेकन का जन्म हुआ। 1775 – फ़्रांस के भौतिकशास्त्री एवं गणितज्ञ आन्द्रे मेरी ऐम्पेयर का जन्म हुआ। उन्होंने इलोक्ट्रोनिक टेलीग्राफ़ बनाया और विद्युत की गति की तीव्रता का पता लगाया और उसे मापने के लिए एक यंत्र बनाया। 1788 – जार्ज गोईन बायरन नामक ब्रिटिश कवि का जन्म हुआ। 1892 - ठाकुर रोशन सिंह - भारत की आज़ादी के लिए संघर्ष करने वाले क्रांतिकारियों में से एक। 1909 - यू. थांट - बर्मा के राजनयिक तथा संयुक्त राष्ट्र के तीसरे महासचिव थे। 1934 - विजय आनंद - फिल्म अभिनेता , निर्माता व सम्पादक। 1949 - माणिक सरकार- राजनीतिज्ञ एवं त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री। 1972 - नम्रता शिरोडकर - फिल्म अभिनेत्री । 1976 - टी. एम. कृष्णा - कर्नाटक संगीत शैली के प्रसिद्ध गायक तथा मैग्सेसे पुरस्कार प्राप्त व्यक्ति। 1977 - तरुण राम फुकन, असम के सामाजिक कार्यकर्ता *22 जनवरी को हुए निधन👉* 1666 – मुगल बादशाह शाहजहाँ का निधन हुआ। 1901 – ब्रिटेन की रानी विक्टोरिया का 82 वर्ष की आयु में निधन हुआ। 2014 - ए. नागेश्वर राव - भारतीय सिनेमा के प्रसिद्ध तेलुगु फ़िल्म अभिनेता और फ़िल्म निर्माता। *22 जनवरी के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव👉* 🔅 श्री आदिनाथ निर्वाण दिवस (जैन ) । 🔅 _ठाकुर श्री रोशनसिंह जयन्ती।_ 🔅 _श्री माणिक सरकार जन्मदिवस।_ *कृपया ध्यान दें जी👉* *यद्यपि इसे तैयार करने में पूरी सावधानी रखने की कोशिश रही है। फिर भी किसी घटना , तिथि या अन्य त्रुटि के लिए मेरी कोई जिम्मेदारी नहीं है ।* 🌻आपका दिन *_मंगलमय_* हो जी ।🌻 ⚜⚜ 🌴 💎 🌴⚜⚜

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