।। आज का दोहा ।। भगवान श्री राम हम सभी के आराध्य हैं। इसलिए हमारा कर्तव्य बनता है। इस दोहे को पढ़कर अधिक से अधिक लोगों तक शेयर करें।

।। आज का दोहा ।।

भगवान श्री राम हम सभी के आराध्य हैं। इसलिए हमारा कर्तव्य बनता है। इस दोहे को पढ़कर अधिक से अधिक लोगों तक शेयर करें।

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suchit sinha Sep 24, 2020
जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जी जय हो जय

जितेन्द्र दुबे Sep 24, 2020
.*🚩🔱🚩शुभ रात्रि वंदन हरिमय🚩🔱🚩🙏 🚩🔱🚩🕉️नमो भगवते वासुदेवाय नमः🌹 ऊँ नमो नारायण 🌹ऊँ लक्ष्मीनारायणाभ्यां नमः🌹 ॐ हं हनुमते नमः 🚩ॐ नमः शिवाय 🚩ॐ नमः शिवाय 🚩ॐ राम रामाय नमः🚩 ॐ राम रामाय नमः 🚩जय श्री राधे कृष्णा जी🚩 श्री लक्ष्मीनारायण भगवान श्री हरि की कृपा आप पर सदैव बनी रहे आपका हर पल मंगलमय हो🚩🌹 राम राम जी 🚩🌹जय भोलेनाथ🚩🌹🌺शुभ गुरुवार 🚩🌹 जय जय सियाराम🚩🙏🙏🙏*

priti tomar Sep 24, 2020
जय श्रीराम राधे राधे राधे राधे राधे राधे कृष्णा🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷 राम राम जी🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🌹🌹🌹🌹श्रीराम श्रीराम श्रीराम श्रीराम श्रीराम श्रीराम श्रीराम श्रीराम श्रीराम श्रीराम श्रीराम श्रीराम श्रीराम श्रीराम श्रीराम श्रीराम श्रीराम श्रीराम🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏 🌷💐💐💐💐🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷

anjani kumar pandey Sep 24, 2020
ऊँ ऊँ ऊँ ऊँ ऊँ ऊँ हरि ऊँ ऊँ ऊँ ऊँ ऊँ ऊँ ऊँ शुभ रात्रि जयहो

आशुतोष Oct 19, 2020

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🌹💖💖💖💖💖💖💖💖🌹 *मनांत खूप साचलं की* *कुणा जवळ तरी बोला* *ऐकणाऱ्याचा खांदा* *होऊ द्या की ओला* *धरण पूर्ण भरल्यावर* *जसे दरवाजे उघडतात* *माणसं तसं वागत नाहीत* *म्हणून तब्यती बिघडतात* *त्यामुळेच आग्रह आहे* *मन मोकळं करा* *एखाद्या तरी मित्राचा* *हात हातात धरा* *जे वाटतं ते बोलून* *टेन्शन करा कमी* *खरं सांगतो व्यक्त होण्यात* *आरोग्याची हमी* *जर कुढत बसताल तर* *विपरीत परिणाम होणारच* *बी.पी. , शुगर , ECG* *कमी जास्त होणारच* *राहू केतू शनी म्हणजेच* *त्रास देणारी नाती* *ग्रहांना दोष देऊ नका* *आपलेच त्रास देती* *तोंड दाबून बुक्क्यांचा मार* *सहन करावाच लागतो* *अरे बाबा याच्या साठीच* *मनुष्य जन्म असतो* *दुःख सांगायला कोणी नसणे* *जागतिक समस्या आहे* *अनेक रोगाचं कारण हे* *कुढत बसणं आहे* *रडायला जर जागा नसेल* *लावा प्रॉपर्टीला काडी* *काय करायचं सोनं चांदी* *बंगला फ्लॅट गाडी* *हजार वेळेस सांगितलं* *माणसं जोडायला शिक* *तुला वाटतं पैसा करील* *सगळं काही ठीक* *जे होईल ते होईल म्हणून* *झुगारून टाका भीती* *प्रत्येक क्षण जगून घ्या* *नका म्हणू उरले किती ?* *🙏🏻🌹श्री. स्वामी समर्थ🌹🙏🏻*

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आशुतोष Oct 19, 2020

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आशुतोष Oct 19, 2020

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आशुतोष Oct 19, 2020

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आशुतोष Oct 19, 2020

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आशुतोष Oct 19, 2020

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आशुतोष Oct 19, 2020

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🌹।।महाअसंतुष्ट।।🌹 एक बार भगवान विष्णु और लक्ष्मी जी अपनी रचना यह जगत देखने निकले। एक स्थान पर कई लोंगों को एकत्रित देख कर लक्ष्मी जी भगवान से बोली प्रभू क्या है यहां देखना चाहिये, भगवान बोले चलो यह संसार है, देखलो रूको मत। लक्ष्मी जी हठ किया बोली महाराज देख तो ले मांजरा क्या है, दोंनों मिलकर पहुंचे जहां लोग एकत्रित थे और पता किया तो लोंगों ने एक महाशय की तरफ इशारा किया और कहा यह कभी संतुष्ट नही होते हैं हमेशा इनको शिकायत रहती है। लक्ष्मी जी भगवान की ओर देखा, भगवान कहा लक्ष्मी जी आप इसके चक्कर में न पड़े यह जैसा है इसे वैसा ही रहनें दे चलो आगे बढ़ते हैं। लक्ष्मी जी नही मानी, कहा हमें भी एक बार इसे संतुष्ट करनें का प्रयास करना चाहिये, भगवान रहस्यमयी मुस्कान मुस्कुराये और कहा ठीक है, तुम भी देखलो। लक्ष्मी जी उस व्यक्ति के पास गयी और कहा यदि आपत्ती न हो तो चलो हमारे साथ और हमारा आतीथ्य स्वीकार करो, उसने कहा चलो कहां चलना होगा, लक्ष्मी उसका हांथ पकड़ा क्षणमात्र में वैकुंठपुरी पहुंच गयी। उस व्यक्ति की व्यवस्था करवा कर परिकरों को आदेश दिया की ध्यान रहे यह हमारे विशेष अतिथी है, इन्हे सब प्रकार संतुष्ट रखना है। इस प्रकार व्यवस्था करके लक्ष्मी जी भगवान के पास विराजमान हुई। जिसकी व्यवस्था स्वयं लक्ष्मी जी करें भला वहां असंतुष्टि कैसे प्रवेश करे, इस प्रकार छ: महीने व्यतीत होगये, भगवान विष्णु जी एक दिन लक्ष्मी जी से कहा आप के अतिथि का क्या समाचार है ? लक्ष्मी जी भी तो कुछ कम नहीं तिरछी चितवन से प्रभू की ओर देखा, कहा चलिए आप स्वयं देखले। भगवान श्री के साथ चले अतिथिशाला की ओर आगे आगे लक्ष्मी जी पीछे पीछे भगवान जब अतिथीशाला पहुंचे, लक्ष्मी जी ने कहा, कहो अतिथी संतुष्ट तो हो न, अतिथि हॉथ जोड़ नमस्कार किया कहा कोई कमी नहीं है माते। लक्ष्मी जी गद्गगद् होकर भगवान की तरफ देखा, भगवान भी मुस्कान बिखेर दिये। इतने मे अतिथी लक्ष्मी और भगवान को संकेत किया और कहा बाकी तो सब ठीक है, पर एक बात हमारी समझ में नहीं आ रही की दुनियां मे इतने लोग है, यह व्यवहार हमारे साथ ही क्यों किया गया इतने दिनों से मै यही सोच रहा हूं उत्तर नहीं मिल रहा है कृपया बतायें यह व्यवहार हमारे साथ ही क्यों? भगवान ठठा कर हंसे, लक्ष्मी जी की ओर देखा, लक्ष्मी जी संकुचित हो पैर के अंगुठे चला रही थी। भगवान लक्ष्मी जी का हॉथ पकड़े प्रेम से उनकी ओर देखते हुए कहा चलो।। मिटहिं न मलिन स्वभाव अभंगू।।

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