जय श्री कृष्णा

जय श्री कृष्णा

+81 प्रतिक्रिया 2 कॉमेंट्स • 73 शेयर
Dr.ratan Singh Aug 13, 2020

🎎 भगवान नर-नारायण की कथा 🎎 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 🚩🐚💐 ॐ विष्णु देवाय नमः💐🐚🚩 🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯 🌺🍀🐚 शुभ गुरुवार🐚🍀🌺 🍎🍎🍎🍎🍎🍎🍎🍎🍎🍎 🥀🌲🎳शुभरात्रि🎳🌲🥀 🎳🎳🎳🎳🎳🎳🎳🎳 🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯 🎭आप और आपके पूरे परिवार पर श्री मां लक्ष्मी जी और श्री प्रभु हरि विष्णु जी की आशिर्वाद हमेशा बनी रहे और सभी मनोकमनाएं पूर्ण हो🌸 🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿 🎭आपका गुरुवार की रात्रि शुभ अतिसुन्दर💐 🌹 शांतिमय और मंगल ही मंगलमय व्यतीत हो 🍑 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 🎎 भगवान नर-नारायण की कथा 🎎 ******************************** 🎎 भगवान विष्णु ने धर्म की पत्नी रुचि के माध्यम से नर और नारायण नाम के दो ऋषियों के रूप में अवतार लिया। वे जन्म से तपोमूर्ति थे अत: जन्म लेते ही बदरी वन में तपस्या करने के लिए चले गये। उनकी तपस्या से ही संसार में सुख और शान्ति का विस्तार होता है। बहुत से ऋषि-मुनियों ने उनसे उपदेश ग्रहण करके अपने जीवन को धन्य बनाया। आज भी भगवान नर-नारायण निरन्तर तपस्या में रत रहते हैं। इन्होंने ही द्वापर में श्रीकृष्ण और अर्जुन के रुप में अवतार लेकर पृथ्वी का भार हरण किया था। एक बार इनकी उग्र तपस्या को देखकर देवराज इन्द्र ने सोचा कि ये तप के द्वारा मेरे इन्द्रासन को लेना चाहते हैं, अत: उन्होंने इनकी तपस्या को भंग करने के लिए कामदेव, वसन्त तथा अपसराओं को भेजा। उन्होंने जाकर भगवान नर-नारायण को अपनी नाना प्रकार की कलाओं के द्वारा तपस्या से अलग करने का प्रयास किया, किंतु उनके ऊपर कामदेव तथा उनके सहयोगियों का कोई प्रभाव नहीं पड़ा। कामदेव, वसन्त तथा अप्सराएँ शाप के भय से थर-थर काँपने लगे। उनकी यह दशा देखकर भगवान नर-नारायण ने कहा – “तुम लोग जरा भी मत डरो, हम प्रेम और प्रसन्नता से तुम लोगों का स्वागत करते हैं।” भगवान नर-नारायण की अभय देने वाली वाणी को सुनकर काम अपने सहयोगियों के साथ अत्यन्त लज्जित हुआ। उसने उनकी स्तुति करते हुए कहा – “प्रभो! आप निर्विकार परम तत्त्व हैं। बड़े-बड़े आत्मज्ञानी पुरुष आपके चरण-कमलों की सेवा के प्रभाव से काम विजयी हो जाते हैं। देवताओं का तो स्वभाव ही है कि जब कोई तपस्या करके ऊपर उठना चाहता है तब वे उसके तप में विघ्न उपस्थित करते हैं। काम पर विजय प्राप्त करके भी जिन्हें क्रोध आ जाता है, उनकी तपस्या नष्ट हो जाती है। परंतु आप तो देवाधिदेव नारायण हैं। आपके सामने भला ये काम-क्रोधादि विकार कैसे फटक सकते हैं? हमारे ऊपर आप अपनी कृपादृष्टि सदैव बनाए रखें। हमारी आपसे यही प्रार्थना है।” कामदेव की स्तुति सुनकर भगवान नर-नारायण पर प्रसन्न हुए और उन्होंने अपनी योगमाया द्वारा एक अद्भुत लीला दिखाई। सभी लोगों ने देखा कि साक्षात लक्ष्मी के समान सुन्दर-सुन्दर नारियाँ नर-नारायण की सेवा कर रही हैं। नर-नारायण ने कहा – ‘तुम इन स्त्रियों में से किसी एक को माँगकर स्वर्ग में ले जा सकते हो, वह स्वर्ग के लिए भूषण स्वरुप होगी।’ उनकी आज्ञा मानकर कामदेव ने अप्सराओं में सर्वश्रेष्ठ अप्सरा उर्वशी को लेकर स्वर्ग के लिए प्रस्थान किया। उसने देव सभा में जाकर भगवान नर-नारायण की अतुलित महिमा से सबको परिचित कराया, जिसे सुनकर देवराज इन्द्र चकित और भयभीत हो गये। उन्हें भगवान नर-नारायण के प्रति अपनी दुर्भावना और दुष्कृति पर विशेष पश्चाताप हुआ। भगवान नर-नारायण के लिए यह कोई बड़ी बात नहीं थी। इससे उनके तप के प्रभाव की अतुलित महिमा का परिचय मिलता है। उन्होंने अपने चरित्र के द्वारा काम पर विजय प्राप्त करके क्रोध के अधीन होने वाले और क्रोध पर विजय प्राप्त करके अभिमान से फूल जाने वाले तपस्वी महात्माओं के कल्याण के लिये अनुपम आदर्श स्थापित किया। 🎎🐚🌹 ॐ विष्णु देवाय नमः 🌹🐚🎎 ☸️☸️☸️☸️☸️☸️☸️☸️☸️☸️☸️☸️ 🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳

+127 प्रतिक्रिया 30 कॉमेंट्स • 25 शेयर
sunita Sharma Aug 13, 2020

+10 प्रतिक्रिया 4 कॉमेंट्स • 1 शेयर
deepa chaturvedi Aug 13, 2020

+4 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 0 शेयर
Ravi Rehani Aug 13, 2020

+3 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 1 शेयर

🌹🚩🕉नमो भगवते वासुदेवाय । 🌹🚩🕉शुभ संध्या बंन्दन। 🌹🚩🕉भक्ति की उच्च शिखर वह होता जहाँ विग्यान यानी साईन्स्टिस्टिक हार जाते है सबसे उच्च भग्वतगीता की शपथ कोर्ट कचहरी है साक्षी मानकर साक्ष्य प्रस्तुत करते हैं,वहीं से शुरू होती तब उच्च क्वालिटी के जो रृषि मुनि अपने मोह त्याग कर मंत्रों केबल पर प्राकृतिक आक्सीजन पर ईश्वर के सहारे जीते हैं,उनको कोर्ट तलब कर पूछती वे बिना देखे सब सही बताते हैं,,,,एक वर्मान दृश्यान्ट,,,,,,,,, राम जन्मभूयि की केश सुपरिम कोर्ट मे चल रही थी कि मटर हिन्दू मुस्लिम का रखा करीब १००बर्ष पहले की बात है,महान् तपस्वी रामजन्म भूमिस्थल जब बाबर द्वारा बर्वर्तापूर्वक कयी हजार हिन्दुओं को काट मारकर मंस्जिद का ढाँचा दिया गया , लेकिन राम लक्ष्मण सीता आदि कि मूर्ति की पूजा होती थी,उन्हीं पुजारी को तलब किया गया वे गये और सनातन धरम जुडी़ एक पुस्तक को योग बल के दवारा वे सुपरिम कोर्ट मे ललकारे कि आप क फला पुस्तक जो जापान के संग्रहालय मे रखी है मँगायें और उसमे पेज नं फला श्लोक देखें सर आप पुस्तक अपने हाथ ले और मैं बताउँगा कि सरयू नदी इतने पग ईशान कोण में जाँय आपको मंदिर राम जन्मभूमि मिल जायेगी। जज़ वैसा ही किया और पुस्तक जापान से आयी उसको जज़ हाथ मे लिया लेकर सरयू नदी के किनारे से आगे आगे जज़ और पीछे पीछे दोनो पक्षकार चले उतनेकदम पर जितना ही संत बताये थे उसी राम जन्मभूमि स्शथल सही स्थल मिल गया किन्तु मियाँ मलेच्छ जाति नहीं माने। अतः जहाँ बिग्यान थाह नहीं पाता सब ईश्वर पर छोड़कर हट जाता वहीं हमारा अध्यात्म शुरू हो जाता हैं,और अध्यात्मिक निर्णय सटीक है। आज ,,कोरोना,,रोग से पूरी दुनियाँ परेशान है,शिव पुराण मे पहले ही लिखा जा चुका है कि शिव पुराण के श्लोक मे उसके उच्चारण मात्र से ,,कोरोना,, जैसे रोग भारत मे नहीं आ सकते। 🕉🌹🙏🌹🚩🕉जय श्री हरिः।

+5 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 0 शेयर

+6 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 2 शेयर

+3 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 0 शेयर
Sachin Kumar Trivedi Aug 13, 2020

+2 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 0 शेयर
sanjay Awasthi Aug 13, 2020

+94 प्रतिक्रिया 14 कॉमेंट्स • 10 शेयर

भारत का एकमात्र धार्मिक सोशल नेटवर्क

Rate mymandir on the Play Store
5000 से भी ज़्यादा 5 स्टार रेटिंग
डेली-दर्शन, भजन, धार्मिक फ़ोटो और वीडियो * अपने त्योहारों और मंदिरों की फ़ोटो शेयर करें * पसंद के पोस्ट ऑफ़्लाइन सेव करें
सिर्फ़ 4.5MB