Diwakar Sharma
Diwakar Sharma Sep 12, 2017

*🕉गुरु, आचार्य, पुरोहित, पंडित और पुजारी का फर्क, जानिए....*

*🕉गुरु, आचार्य, पुरोहित, पंडित और पुजारी का फर्क, जानिए....*
---+---+---+---+---+---+---+---+---+---
🔺
अक्सर लोग पुजारी को पंडितजी या पुरोहित को आचार्य भी कह देते हैं और सुनने वाले भी उन्हें सही ज्ञान नहीं दे पाता है। यह *विशेष पदों* के नाम हैं *जिनका किसी जाति विशेष से कोई संबंध नहीं।* आओ हम जानते हैं कि उक्त शब्दों का सही अर्थ क्या है ..ताकि आगे से हम *किसी पुजारी को पंडित न कहें।*
🔺
*गुरु*: गु का अर्थ अंधकार और रु का अर्थ प्रकाश। अर्थात जो व्यक्ति आपको अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाए वह गुरु होता है। *गुरु का अर्थ अंधकार का नाश करने वाला।* अध्यात्मशास्त्र अथवा धार्मिक विषयों पर प्रवचन देने वाले व्यक्तियों में ..और गुरु में बहुत अंतर होता है। *गुरु आत्म विकास और परमात्मा की बात करता है। "प्रत्येक गुरु संत होते ही हैं; परंतु प्रत्येक संत का गुरु होना आवश्यक नहीं है।* केवल कुछ संतों में ही गुरु बनने की पात्रता होती है। गुरु का अर्थ ब्रह्म ज्ञान का मार्गदर्शक।
🔺
*आचार्य* : आचार्य उसे कहते हैं जिसे वेदों और शास्त्रों का ज्ञान हो और *जो गुरुकुल में विद्यार्थियों को शिक्षा देने का कार्य करता हो।* आचार्य का अर्थ यह कि *जो आचार, नियमों और सिद्धातों आदि का अच्छा ज्ञाता हो* और दूसरों को उसकी शिक्षा देता हो। वह *जो कर्मकाण्ड का अच्छा ज्ञाता हो और यज्ञों आदि में मुख्य पुरोहित का काम करता हो* उसे भी आचार्य कहा जाता था। आजकल आचार्य किसी महाविद्यालय के प्रधान अधिकारी और अध्यापक को कहा जाता है।
🔺
*पुरोहित* : पुरोहित दो शब्दों से बना है:- *'पर' + 'हित', अर्थात ऐसा व्यक्ति जो दुसरो के कल्याण की चिंता करे।* प्राचीन काल में आश्रम प्रमुख को पुरोहित कहते थे जहां शिक्षा दी जाती थी। हालांकि *यज्ञ कर्म करने वाले मुख्य व्यक्ति को भी पुरोहित कहा जाता था।यह पुरोहित सभी तरह के संस्कार कराने के लिए भी नियुक्त होता है।* प्रचीनकाल में किसी राजघराने से भी पुरोहित संबंधित होते थे। अर्थात *राज दरबार में पुरोहित नियुक्त होते थे, जो धर्म-कर्म का कार्य देखने के साथ ही सलाहकार समीति में शामिल रहते थे।*
🔺
*पुजारी* : पूजा और पाठ से संबंधित इस शब्द का अर्थ स्वत: ही प्रकाट होता है। अर्थात *जो मंदिर या अन्य किसी स्थान पर पूजा पाठ करता हो वह पुजारी। किसी देवी-देवता की मूर्ति या प्रतिमा की पूजा करने वाले व्यक्ति* को पुजारी कहा जाता है।
🔺
*पंडित* : पंडः का अर्थ होता है विद्वता। किसी विशेष ज्ञान में पारंगत होने को ही पांडित्य कहते हैं। पंडित का अर्थ होता है किसी ज्ञान विशेष में दश या कुशल। इसे विद्वान या निपुण भी कह सकते हैं। किसी विशेष विद्या का ज्ञान रखने वाला ही पंडित होता है। प्राचीन भारत में, *वेद शास्त्रों आदि के बहुत बड़े ज्ञाता को पंडित कहा जाता था। इस पंडित को ही पाण्डेय, पाण्डे, पण्ड्या कहते हैं। आजकल यह नाम ब्रह्मणों का उपनाम भी बन गया है।* कश्मीर के ब्राह्मणों को तो कश्मीरी पंडितों के नाम से ही जाना जाता है। पंडित की पत्नी को देशी भाषा में पंडिताइन कहने का चलन है।
🔺
*ब्राह्मण* : ब्राह्मण शब्द ब्रह्म से बना है। जो ब्रह्म (ईश्वर) को छोड़कर अन्य किसी को नहीं पूजता, वह ब्राह्मण कहा गया है। जो पुरोहिताई करके अपनी जीविका चलाता है, वह ब्राह्मण नहीं, याचक है। जो ज्योतिषी या नक्षत्र विद्या से अपनी जीविका चलाता है वह ब्राह्मण नहीं, ज्योतिषी है।
🔺
*पंडित तो किसी विषय के विशेषज्ञ को कहते हैं और जो कथा बांचता है वह ब्राह्मण नहीं कथावाचक है।* इस तरह वेद और ब्रह्म को छोड़कर जो कुछ भी कर्म करता है वह ब्राह्मण नहीं है। *जिसके मुख से ब्रह्म शब्द का उच्चारण नहीं होता रहता, वह ब्राह्मण नहीं।* स्मृतिपुराणों में ब्राह्मण के 8 भेदों का वर्णन मिलता है- *मात्र, ब्राह्मण, श्रोत्रिय, अनुचान, भ्रूण, ऋषिकल्प, ऋषि और मुनि।* 8 प्रकार के ब्राह्मण श्रुति में पहले बताए गए हैं। इसके अलावा *वंश, विद्या और सदाचार से ऊंचे उठे हुए ब्राह्मण ‘त्रिशुक्ल’ कहलाते हैं। ★ब्राह्मण को धर्मज्ञ विप्र और द्विज भी कहा जाता है, "जिसका किसी जाति या समाज से कोई संबंध नहीं ll"*🌺

*-हरिःओउःम्🔔*

Like Pranam Jyot +97 प्रतिक्रिया 5 कॉमेंट्स • 138 शेयर

कामेंट्स

Prem Sep 12, 2017
अच्छी उक्ती है,जान कर धन्य हुँ।

JAI SHRI KRISHNA Oct 21, 2018

🤔🤔🤔🤔🤔🤔
"अगर आप रास्ते पे चल रहे है और आपको वहां पड़ी हुई दो पत्थर की मुर्तिया मिले
1) राम की
और
2)रावण की
और आपको एक मूर्ति उठाने का कहा जाए तो अवश्य आप राम की मूर्ति उठा कर घर लेके जाओगे।
क्यों की राम सत्य , निष्ठा,
सकारात्मकता के प्रतिक हे ...

(पूरा पढ़ें)
Milk Pranam Like +64 प्रतिक्रिया 30 कॉमेंट्स • 156 शेयर
reena tuteja Oct 21, 2018

क्या आप जानते हो कि जो पाप कर्म आप ने किया, उसका फल केवल आप ही भोगोगे या आपका परिवार भी उस पापकर्म के फल को भोगेगा? https://www.shriharinam.com/single-post/2018/10/21/Paap-ka-fal---parivar-nhi-bhogega

Pranam Like +3 प्रतिक्रिया 3 कॉमेंट्स • 1 शेयर
Ashish shukla Oct 21, 2018

Like Pranam Flower +279 प्रतिक्रिया 114 कॉमेंट्स • 1300 शेयर
Sunil Jhunjhunwala Oct 21, 2018

आप सभी को सबसे पहले मेरी तरफ से "शरद पूर्णिमा" की ढेर सारी हार्दिक शुभकामनाएं, माता महालक्ष्मी आपका कल्याण करे : ॐ श्री महालक्ष्मी नमः

Sunil Jhunjhunwala
^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^

Lotus Like Pranam +424 प्रतिक्रिया 85 कॉमेंट्स • 1135 शेयर

!! शुभ रविवार के शुभ संदेश !!

सच्चे दिल से की हुई दुवा कभी खाली नही जाती


!! ,, दुवा,, दवाई से भी ताकतवर है,, !!

Tulsi Fruits Bell +272 प्रतिक्रिया 149 कॉमेंट्स • 716 शेयर
Samir Pratap Singh Oct 19, 2018

एक बार फिर रावण जल गया।
हमारा मन नहीं भरता, बार बार जलाते हैं।
रावण जलाते हैं, ताकि हम पर सवाल खड़े ना हो जाएं।
रावण जलता है, मन खिन्न और उदास हो जाता है, विद्वता का ऐसा अंत ?
रावण के साथ ज्ञान की परंपरा का भी दहन हो जाता है।
ज्ञान से उपजे वैभव का...

(पूरा पढ़ें)
Pranam Dhoop Like +97 प्रतिक्रिया 19 कॉमेंट्स • 196 शेयर

🍃🌺🌺 #जय_श्री_माँ_लक्ष्मी_जी_की🌺🌺🍃

एक बार अकबर बीरबल हमेशा की तरह टहलने जा रहे थे!

रास्ते में एक तुलसी का पौधा दिखा .. मंत्री बीरबल ने झुक कर प्रणाम किया !

अकबर ने पूछा कौन हे ये ?
बीरबल -- मेरी माता हे !

अकबर ने तुलसी के झाड़ को उखाड़ क...

(पूरा पढ़ें)
Lotus Like Pranam +9 प्रतिक्रिया 2 कॉमेंट्स • 37 शेयर

Like Pranam Flower +94 प्रतिक्रिया 35 कॉमेंट्स • 327 शेयर

सत्संग----
सत्संग (संस्कृत, सत् = सत्य , संग= संगति) का अर्थ भारतीय दर्शन में है—
(1) "परम सत्य" की संगति,
(2) गुरु की संगति, या
(3) व्यक्तियों की ऐसी सभा की संगति जो सत्य सुनती है, सत्य की बात करती है और सत्य को आत्मसात् करती है | इसमें विशिष्...

(पूरा पढ़ें)
0 कॉमेंट्स • 0 शेयर
Dhall Ajay Oct 21, 2018

हे गुरुवर तुझे याद किये बिन कट जाए, ऐसी कोई रात नही, सुबह उठकर तेरा नाम लेता हूँ तो है पहचान मेरी,
वरना मेरी कोई औकात नही,

0 कॉमेंट्स • 0 शेयर

भारत का एकमात्र धार्मिक सोशल नेटवर्क

Rate mymandir on the Play Store
5000 से भी ज़्यादा 5 स्टार रेटिंग
डेली-दर्शन, भजन, धार्मिक फ़ोटो और वीडियो * अपने त्योहारों और मंदिरों की फ़ोटो शेयर करें * पसंद के पोस्ट ऑफ़्लाइन सेव करें
सिर्फ़ 4.5MB