सरस श्रद्धांजलि --- सरस श्री धाम वृन्दावन में श्रीयुगल नाम की सरसता का रसास्वादन केवल रसिक संत ही करा सकते है | मुझ जैसे अधमाति अधम जीव को मधुरातिमधुर नाम का चस्का लगाने को संत किस युक्ति से कार्य करते है ये चिंतन बुद्धिजीवियों की क्षमता से परे है | कुछ इसी विलक्षण परोपकारी प्रतिभा से सम्पन्न श्रीकीर्तनिया बाबा जी थे | आप का जन्म असम में हुआ और आप श्रीनिम्बार्क सम्प्रदाय में दीक्षित होकर विरक्ति के सभी लक्षणों से सुशोभित होकर श्रीधाम वृन्दावन में विराजते थे | आप सरलता और त्याग की मूर्ती थे | सरलता तो सभी प्रकार से सरलता लेकिन सरलता का अर्थ किसी प्रकार से हीनता नहीं जैसा की आजकल माना जाता है | आप सरल थे सरलता से कीर्तन कराते थे लेकिन उस सरल कीर्तन में भी सरसता थी सरसता की हिलोर ह्रदय द्रवित कर देती थी | बलिहार श्रीकीर्तनिया बाबा जी की श्रीचरण रज पर | जब कभी अचानक मिलना होता था तो मुझे तो बहुत सावधान रहना पड़ता था ऐसे मिलते थे जैसे मुझसे काफी छोटे हों | मुझ जैसे अधम जीवो से भी सहज नाम उच्चारण कराने का एक अद्भुत विधान खोज निकाला | आपने देखा होगा कि श्रीधाम वृन्दावन की दीवारों एवं वृक्षों पर श्रीराधा श्रीराधा लिखा रहता था ये दिव्य युक्ति जीव कल्याणार्थ और एतदर्थ परिश्रम सर्व विध श्लाघनीय और वन्दनीय है | आप श्रीनिम्बार्क सम्प्रदाय के सदाचार के साक्षात स्वरूप थे हम सभी को उनके दर्शन मात्र से सदाचार की प्रेरणा मिलती रहती थी | श्रीधाम में रसिक जन के प्रिय श्रीकीर्तनिया बाबा जी निकुंज प्रवेश | हमें कल्याण कारी सरस स्मृतियों के साथ सगौरव बिलखते छोड़ कर | कोटि कोटि नमन

सरस श्रद्धांजलि --- सरस श्री धाम वृन्दावन में श्रीयुगल नाम की सरसता का रसास्वादन केवल रसिक संत ही करा सकते है | मुझ जैसे अधमाति  अधम जीव को मधुरातिमधुर नाम का चस्का लगाने को संत किस युक्ति से कार्य करते है ये चिंतन बुद्धिजीवियों की क्षमता से परे  है | कुछ इसी विलक्षण परोपकारी प्रतिभा से सम्पन्न श्रीकीर्तनिया बाबा जी थे | आप का जन्म असम  में हुआ और आप श्रीनिम्बार्क सम्प्रदाय में दीक्षित होकर विरक्ति के सभी लक्षणों से सुशोभित होकर श्रीधाम वृन्दावन में विराजते थे | आप सरलता और त्याग की मूर्ती थे | सरलता तो सभी प्रकार से सरलता लेकिन सरलता का अर्थ किसी प्रकार से हीनता नहीं जैसा की आजकल माना जाता है | आप सरल थे सरलता से कीर्तन कराते थे लेकिन उस सरल कीर्तन में भी सरसता थी सरसता की  हिलोर  ह्रदय द्रवित कर देती थी | बलिहार श्रीकीर्तनिया बाबा जी की श्रीचरण रज पर | जब कभी अचानक मिलना होता था तो मुझे तो बहुत सावधान रहना पड़ता था ऐसे मिलते थे जैसे मुझसे काफी छोटे हों | मुझ जैसे अधम जीवो से भी सहज नाम उच्चारण कराने का एक अद्भुत विधान खोज निकाला | आपने देखा होगा कि श्रीधाम वृन्दावन की दीवारों एवं वृक्षों पर श्रीराधा  श्रीराधा लिखा रहता था ये दिव्य युक्ति  जीव कल्याणार्थ और एतदर्थ परिश्रम सर्व विध श्लाघनीय और वन्दनीय है | आप श्रीनिम्बार्क सम्प्रदाय के सदाचार के साक्षात स्वरूप थे हम सभी को उनके दर्शन मात्र से सदाचार की प्रेरणा मिलती रहती थी | श्रीधाम में रसिक जन के प्रिय श्रीकीर्तनिया बाबा जी निकुंज प्रवेश | हमें कल्याण कारी सरस स्मृतियों के साथ सगौरव बिलखते छोड़ कर  | कोटि कोटि नमन

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Shivsanker Shukla Sep 21, 2019
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