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P.B Jun 11, 2019

राधे राधे जी

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Astrologer Kumar Shastri ji Jun 11, 2019
+91-8837553252 KUMAR SHASTRI JI लाल किताब के माहिर*व्यक्ति को उसके अच्छे-बुरे सभी कर्मों का फल उसके भाग्य के रूप में मिलता है। अच्छे कर्मों पर अच्छा तथा बुरे कर्मों पर बुरा भाग्य बनता है। हालांकि ज्योतिष के कुछ विशेष उपायों (तांत्रिक टोने-टोटकों सहित) को अपना कर व्यक्ति अपने भाग्य में कुछ हद तक परिवर्तन कर सकता है परन्तु पूरी तरह बदलना केवल ईश्वर कृपा और अच्छे कर्मों से ही संभव हो पाता है। इस पोस्ट में हम आपके लिए लाएं हैं ऐसे ही कुछ विशेष टोने-टोटके जो आपके भाग्य को पूरी तरह तो नहीं बदल सकते परन्तु आपकी समस्या का तुरंत निराकरण अवश्य कर देंगे:स्वामी जी +91-8837553252 1.आर्थिक समस्या के छुटकारे के लिए : 2.घर और कार्यस्थल में धन वर्षा के लिए : 3.परेशानी से मुक्ति के लिए :. 4.कुंवारी कन्या के विवाह हेतु : 5.व्यापार बढाने के लिए : 6.लगातार बुखार आने पर : 7.नौकरी जाने का खतरा हो या ट्रांसफर रूकवाने के लिए : 8.कारोबार में नुकसान हो रहा हो या कार्यक्षेत्र में झगडा हो रहा हो तो : 9.मुकदमें में विजय पाने के लिए : 10.धन के ठहराव के लिए : 11.मानसिक परेशानी दूर करने के लिए : 12.प्रेम विवाह में सफल होने के लिए : 13.बनता काम बिगडता हो, लाभ न हो रहा हो या कोई भी परेशानी हो तो : 14पति को वश में करने के लिए : 15.यदि आप अपना मकान, दुकान या कोई अन्य प्रापर्टी बेचना चाहते हैं और वो बिक न रही हो तो यह उपाय करें : 16फंसा हुआ धन वापिस लेने के लिए : सभी समाधान सरल उपायों दुआरा।+91-8837553252

Mamta Chauhan Jun 11, 2019
Radhe Radhe ji 🙏 aapka har pal Subh v Mangalmya ho 🙏🌷

Suresh Khurana Jun 11, 2019
Radhey Radhey ji 🙏 Jai Shree Krishna 🌸🌸 dophar vandan beta ji

🙏🌹🌹🌹❤️❤️❤️🌹🌹🌹🙏 🙏🌹🌹जय श्री राधे कृष्णा🌹🌹🙏 🙏कृष्ण जी का नाम लड्डू गोपाल कैसे पड़ा ? भगवान श्रीकृष्ण के कई नाम हैं, श्याम, मोहन, बंसीधर, कान्हा और न जाने कितने, लेकिन इनमें से एक प्रसिद्ध नाम है लड्डू गोपाल। क्या आपको पता है भगवान कृष्ण का नाम लड्डू गोपाल क्यों पड़ा। ब्रज भूमि में बहुत समय पहले श्रीकृष्ण के परम भक्त रहते थे.. कुम्भनदास जी । उनका एक पुत्र था रघुनंदन । कुंम्भनदास जी के पास बाँसुरी बजाते हुए श्रीकृष्ण जी का एक विग्रह था, वे हर समय प्रभु भक्ति में लीन रहते और पूरे नियम से श्रीकृष्ण की सेवा करते। वे उन्हें छोड़ कर कहीं नहीं जाते थे, जिससे उनकी सेवा में कोई विघ्न ना हो। एक दिन वृन्दावन से उनके लिए भागवत कथा करने का न्योता आया। पहले तो उन्होंने मना किया, परन्तु लोगों के ज़ोर देने पर वे जाने के लिए तैयार हो गए कि भगवान की सेवा की तैयारी करके वे कथा करके रोज वापिस लौट आया करेंगे व भगवान का सेवा नियम भी नहीं छूटेगा। अपने पुत्र को उन्होंने समझा दिया कि भोग मैंने बना दिया है, तुम ठाकुर जी को समय पर भोग लगा देना और वे चले गए। रघुनंदन ने भोजन की थाली ठाकुर जी के सामने रखी और सरल मन से आग्रह किया कि ठाकुर जी आओ भोग लगाओ । उसके बाल मन में यह छवि थी कि वे आकर अपने हाथों से भोजन करेगें जैसे हम खाते हैं। उसने बार-बार आग्रह किया, लेकिन भोजन तो वैसे ही रखा था.. अब उदास हो गया और रोते हुए पुकारा की ठाकुरजी आओ भोग लगाओ। ठाकुरजी ने बालक का रूप धारण किया और भोजन करने बैठ गए और रघुनंदन भी प्रसन्न हो गया। रात को कुंम्भनदास जी ने लौट कर पूछा कि भोग लगाया था बेटा, तो रघुनंदन ने कहा हाँ। उन्होंने प्रसाद मांगा तो पुत्र ने कहा कि ठाकुरजी ने सारा भोजन खा लिया। उन्होंने सोचा बच्चे को भूख लगी होगी तो उसने ही खुद खा लिया होगा। अब तो ये रोज का नियम हो गया कि कुंम्भनदास जी भोजन की थाली लगाकर जाते और रघुनंदन ठाकुरजी को भोग लगाते। जब प्रसाद मांगते तो एक ही जवाब मिलता कि सारा भोजन उन्होंने खा लिया। कुंम्भनदास जी को अब लगने लगा कि पुत्र झूठ बोलने लगा है, लेकिन क्यों.. ?? उन्होंने उस दिन लड्डू बनाकर थाली में सजा दिये और छुप कर देखने लगे कि बच्चा क्या करता है। रघुनंदन ने रोज की तरह ही ठाकुरजी को पुकारा तो ठाकुरजी बालक के रूप में प्रकट हो कर लड्डू खाने लगे। यह देख कर कुंम्भनदास जी दौड़ते हुए आये और प्रभु के चरणों में गिरकर विनती करने लगे। उस समय ठाकुरजी के एक हाथ मे लड्डू और दूसरे हाथ का लड्डू मुख में जाने को ही था कि वे जड़ हो गये । उसके बाद से उनकी इसी रूप में पूजा की जाती है और वे ‘लड्डू गोपाल’ कहलाये जाने लगे..!! 🙏🌹🌹बोलिये लड्डू गोपाल की जय हो...🌹🌹🙏

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P.B Jun 25, 2019

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🙏🌹🌹🌹जय श्री श्याम्🌹🌹🌹🙏 🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳 🥭 *सही उपयोग।* 🥭 🥭 बहुत समय पहले की बात हैं एक गरीब वृद्ध पिता के पास अपने अंतिम समय में दो बेटों को देने के लिए मात्र एक आम था। पिताजी आशीर्वाद स्वरूप दोनों को वही देना चाहते थे। किंतु बड़े भाई ने आम हठपूर्वक ले लिया। रस चूस लिया छिल्का अपनी गाय को खिला दिया। गुठली छोटे भाई के आँगन में फेंकते हुए कहा – “लो, ये पिताजी का तुम्हारे लिए आशीर्वाद है।” 🥭 छोटे भाई ने ब़ड़ी श्रद्धापूर्वक गुठली को अपनी आँखों व सिर से लगाकर गमले में गाढ़ दिया। छोटी बहू पूजा के बाद बचा हुआ जल गमले में डालने लगी। कुछ समय बाद आम का पौधा उग आया, जो देखते ही देखते बढ़ने लगा। 🥭 छोटे भाई ने उसे गमले से निकालकर अपने आँगन में लगा दिया। कुछ वर्षों बाद उसने वृक्ष का रूप ले लिया। वृक्ष के कारण घर की धूप से रक्षा होने लगी, साथ ही प्राणवायु भी मिलने लगी। बसंत में कोयल की मधुर कूक की आवाज सुनाई देने लगी। बच्चे पेड़ की छाँव में किलकारियाँ भरकर खेलने लगे। 🥭 पेड़ की शाख से झूला बाँधकर झूलने लगे। पेड़ की छोटी – छोटी लकडीयाँ हवन करने एवं बड़ी लकड़ियाँ घर के दरवाजे-खिड़कियों में भी काम आने लगीं। आम के पत्ते त्योहारों पर तोरण बाँधने के काम में आने लगे। 🥭 धीरे-धीरे वृक्ष में कैरियाँ लग गईं। कैरियों से अचार व मुरब्बा डाल दिया गया। आम के रस से घर-परिवार के सदस्य रस-विभोर हो गए तो बाजार में आम के अच्छे दाम मिलने से आर्थिक स्थिति मजबूत हो गई। 🥭 रस से पाप़ड़ भी बनाए गए, जो पूरे साल मेहमानों व घर वालों को आम रस की याद दिलाते रहते। 🥭 ब़ड़े बेटे को आम फल का सुख क्षणिक ही मिला तो छोटे बेटे को पिता का “आशीर्वाद’ दीर्घकालिक व सुख- समृद्धिदायक मिला।” 🧚‍♂ *दोस्तों, आज के सभी मनुष्यों का यही हाल है। परमात्मा हमे सब कुछ देता है, सही उपयोग हम करते नही हैं और सदैव ही दोष परमात्मा और किस्मत को देते रहते हैं।* 🙏🌹🌹🌹आप का दिन शुभ रहे जी🌹🌹🌹🙏 🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳

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shrikant mundra Jun 25, 2019

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Suresh Khurana Jun 25, 2019

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Vinod Keshav lonkar Jun 25, 2019

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