Vivek Waghmare
Vivek Waghmare Aug 6, 2017

कैसे बनती है असली वैदिक राखी

#रक्षाबन्धन
कैसे बनती है असली वैदिक राखी, भाई की करती है हर संकट से रक्षा
रक्षा बंधन का पर्व वैदिक विधि से मनाना श्रेष्ठ माना गया है। इस विधि से मनाने पर भाई का जीवन सुखमय और शुभ बनता है। शास्त्रानुसार इसके लिए पांच वस्तुओं का विशेष महत्व होता है, जिनसे रक्षासूत्र का निर्माण किया जाता है। इनमें दूर्वा (घास), अक्षत (चावल), केसर, चन्दन और सरसों के दाने शामिल हैं। इन 5 वस्तुओं को
रेशम के कपड़े में बांध दें या सिलाई कर दें, फिर उसे कलावे में पिरो दें। इस प्रकार वैदिक राखी तैयार हो जाएगी।
पांच वस्तुओं का महत्त्व
दूर्वा (घास) - जिस प्रकार दूर्वा का एक अंकुर बो देने पर तेजी से फैलता है और हजारों की संख्या में उग जाता है। उसी प्रकार रक्षा बंधन पर भी कामना की जाती है कि भाई का वंश और उसमें सदगुणों का विकास तेजी से हो। सदाचार, मन की पवित्रता तीव्रता से बढ़ती जाए। दूर्वा विघ्नहर्ता गणेश जी को प्रिय है अर्थात हम जिसे राखी बांध
रहे हैं, उनके जीवन में विघ्नों का नाश हो जाए।
अक्षत (चावल) - हमारी परस्पर एक दूजे के प्रति श्रद्धा कभी क्षत-विक्षत ना हो सदा अक्षत रहे ।
केसर - केसर की प्रकृति तेज होती है अर्थात हम जिसे राखी बांध रहे हैं, वह तेजस्वी हो। उनके जीवन में आध्यात्मिकता का तेज, भक्ति का तेज कभी कम ना हो।
चन्दन - चन्दन की प्रकृति शीतल होती है और यह सुगंध देता है। उसी प्रकार उनके जीवन में शीतलता बनी रहे, कभी मानसिक तनाव ना हो। साथ ही उनके जीवन में परोपकार, सदाचार और संयम की सुगंध फैलती रहे।
सरसों के दाने - सरसों की प्रकृति तीक्ष्ण होती है अर्थात इससे यह संकेत मिलता है कि समाज के दुर्गुणों को, कंटकों को समाप्त करने में हम तीक्ष्ण बनें। सरसो के दाने भाई की नजर उतारने और बुरी नजर से भाई को बचाने के लिए भी प्रयोग में लाए जाते हैं।
इस प्रकार इन पांच वस्तुओं से बनी हुई एक राखी को सर्वप्रथम भगवान के चित्र पर अर्पित करें। फिर बहनें अपने भाई को, माता अपने बच्चों को, दादी अपने पोते को शुभ संकल्प करके बांधे। इस प्रकार इन पांच वस्तुओं से बनी हुई वैदिक राखी को शास्त्रोक्त नियमानुसार बांधते हैं, वह पुत्र- पौत्र एवं बंधुजनों सहित वर्षभर सुखी रहते हैं।
राखी बांधते समय बहन बोलें यह मंत्र
येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबल:।
तेन त्वां अभिबद्धनामि रक्षे मा चल मा चल।।
शिष्य गुरु को रक्षासूत्र बांधते समय यह मंत्र बोलें
'अभिबद्धनामि' के स्थान पर 'रक्षबद्धनामि कहे।
रक्षासूत्र बांधते समय मिठाई या गुड़ से मुंह मीठा कराना ही उत्तम रहता है।

+54 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 56 शेयर
Shraddha pandey Feb 28, 2020

+5 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 0 शेयर
Shraddha pandey Feb 28, 2020

+5 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 0 शेयर
Sanjay Singh Feb 28, 2020

+13 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 0 शेयर
KRISHNA BABU Feb 28, 2020

+5 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 0 शेयर
KRISHNA BABU Feb 28, 2020

+4 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 0 शेयर
Mukesh Kumar Talwar Feb 28, 2020

+7 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 3 शेयर
Shraddha pandey Feb 28, 2020

+3 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 0 शेयर
Vidhya saravanan Feb 28, 2020

+3 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 0 शेयर

भारत का एकमात्र धार्मिक सोशल नेटवर्क

Rate mymandir on the Play Store
5000 से भी ज़्यादा 5 स्टार रेटिंग
डेली-दर्शन, भजन, धार्मिक फ़ोटो और वीडियो * अपने त्योहारों और मंदिरों की फ़ोटो शेयर करें * पसंद के पोस्ट ऑफ़्लाइन सेव करें
सिर्फ़ 4.5MB