Jai shri Radhey Krishna ji Subh Ratri vandhan ji 🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾

Jai shri Radhey Krishna ji 
Subh Ratri vandhan ji 
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कामेंट्स

Renu Singh Apr 20, 2019
Bilkul shi Sister ji 👍 👍 👌 👌 🌸 🌸 🙏Jai Shree Radhe Krishna ji Shubh ratri vandan dear sister ji Aapka har pal mangalmay ho Sister ji 🙏 🌹

Raj Singh Apr 20, 2019
Jai Shree Krishna Radhe Radhe ji Jai Mata Rani ki Jai

sujatha Apr 20, 2019
जय श्री राधे कृष्ण जी । शुभ रात्रि जी ।

Sudesh Goyal Apr 20, 2019
Jai Shree radhe krishna ji 🙏🌷Good night ji 🙏🌹🌷

Anjana Gupta Apr 20, 2019
Radhe Radhe dear sister ji god bless you and your family always be happy and keep smiling Shubh ratri Vandan very very nice and true post ji 🌹🙏🚩🚩👌👌👌

Mohan mira nigam1951 Apr 21, 2019
Very nice Jay shri Radhe.Krishna ji and r Bholay.Baba Ki Jay om Sai.Ram Jay Radhe.Krishna ji and r Bholay.Baba Ki

Renu Singh Apr 21, 2019
Radhe Radhe pyaari sister ji Bhagwan aapki har manokamna poori kare Aapka har pal mangalmay ho Shubh dophar Vandan Meri Bahena ji 🙏 🌺 🙏 🌺 🙏 🌺 🙏 🌺 🙏

राधे राधे Apr 21, 2019
@renusingh15 जय श्री राधे कृष्णा डियर बहना जी शुभ दोपहर स्नेह वंदन बहन जी 🌷🙏

sujatha Apr 21, 2019
जय श्री राधे कृष्ण जी । शुभ दोपहर जी ।🙏🙏

Anjana Gupta Apr 21, 2019
Radhe Radhe dear sister ji god bless you and your family always keep smiling happy Sunday Ji 🌹🙏🚩🚩👌👌

Savita Apr 21, 2019
Radhe KRISHNA 🌹🌹 Radhe Radhe 🌹🌹 thakur g apni kirpa drishti Ap par sada banaye rakhe 🌹🌹

K N Padshala Apr 28, 2019
🙏🙏🙏🌹।।राम।। 🌹🙏🙏🙏 जय श्री राधे श्याम जय शियाराम शुभ दोपर स्नेह वंदन प्रणाम 🌹🙏🙏👌👌👌👌👌🌞🌻

Sunil upadhyaya May 20, 2019

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Swami Lokeshanand May 19, 2019

माया के बाद वैराग्य का वर्णन। माया समझ ली, तो राग कैसा? फिर तो स्वाभाविक वैराग्य है। जब जगत ही मिथ्या है, तब सब मैं और मेरा मिथ्या है, तो कौन, कैसे, क्यों और किसकी कामना करे? मालूम पड़ गया कि रेत ही रेत है, जल है ही नहीं, तब क्यों दौड़ में पड़ें? जान लिया कि सीप है, चाँदी है ही नहीं, तो क्यों माथा पटकना? समस्त दृश्य जगत जिसे स्वप्नवत् हो गया, वह क्योंकर झूठी वस्तु, झूठे सुख के लिए मारा मारा फिरे? अब वैराग्य, त्याग व राग का भेद- जो छोड़ा जाए वो त्याग है, जो छूट जाए वो वैराग्य। केवल तन से छूटा तो त्याग है, मन से छूटा तो वैराग्य। वस्तु में सार मालूम पड़े पर भोग न करें तो त्याग है, वस्तु असार-व्यर्थ मालूम पड़े तो वैराग्य। रागी और वैरागी में दशा का अंतर है, रागी और त्यागी में दिशा का। रागी विचार करता है मैंने इतना जोड़ा, त्यागी विचार करता है मैंने इतना छोड़ा। वस्तु का मूल्य दोनों के मन में है। एक मुंह करके खड़ा है, दूसरा पीठ करके, हैं एक ही सिक्के के दो पहलू। एक वस्तु से सटना चाहता है, दूसरा हटना, एक उसकी ओर दौड़ रहा है, दूसरा उससे दूर दौड़ रहा है, दौड़ दोनों की जारी है। एक कहता है छोड़ेंगे नहीं, दूसरा कहता है छूएँगे नहीं। वैराग्य तो भाव दशा है । रामजी कहते हैं, वैरागी बाहर से नहीं पहचाना जाएगा, उसे तो भीतर से पहचाना जाएगा। पहचान क्या है? जो तीन गुणों से और सिद्धियों से पार हो गया। जो तटस्थ रहे, जिसे राग न रहे, वस्तु छूट जाए, त्याग किया ऐसा विचार तक न रहे। मन के विचारों विकारों से तद् रूप न हो, उन्हें गुण से उत्पन्न जानता हो, असत्य जानता हो। जो असंग हो, वो वैराग्यवान है। अब विडियो देखें-पंचवटी निरूपण https://youtu.be/GkRWILO0rww

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*//-// //_ May 19, 2019

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sompal Prajapati May 19, 2019

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Aechana Mishra May 19, 2019

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भगवान के भरोसे सूर्य अस्त हो चला था। आकाश में बादल छाए हुए थे। नीम के एक पेड़ पर ढेर सारे कौवे रात बिताने के लिए बैठे हुए थे। कौवे अपनी आदत के अनुसार, आपस में एक-दूसरे से काँव-काँव करते हुए झगड़ रहे थे। उसी समय एक मैना आई और रात बिताने के लिए नीम के उस पेड़ की एक डाल पर बैठ गई। मैना को देखकर सभी कौवे उसकी ओर देखने लगे। बेचारी मैना सहम गई। डरते हुए बोली, "अँधेरा हो गया है। आसमान मे बादल छाए हुए है। किसी भी समय पानी बरस सकता है। मैं अपना ठिकाना भूल गई हूँ। आज रात भर मुझे भी इस पेड़ की एक डाल के एक कोने में रात बिता लेने दो।" कौवे भला कब उसकी बात मानते। उन्होंने कहा, "यह नहीं हो सकता। यह पेड़ हमारा है। तुम इस पेड़ नहीं बैठ सकती हो। भागो यहाँ से।" कौवों की बात सुनकर बड़े ही दीन स्वर में मैना बोली, "पेड़ तो सभी भगवान के हैं। यदि बरसात होने लगी और ओले पड़ने लगे, तो भगवान ही सबको बचा सकता है। मैं बहुत छोटी हूँ। तुम लोगों की बहन हूँ। मेरे ऊपर दया करके रात बिता लेने दो।" मैना की बात सुनकर सभी कौवे हँसने लगे। फिर बोले, "हम लोगों को तेरी जैसी बहन की कोई जरूरत नहीं है। तू भगवान का नाम बहुत ले रही है, तो भगवान के सहारे यहाँ से जाती क्यों नहीं? यदि तू यहाँ से नहीं जाएगी, तो हम सब मिलकर तुझे मार भगाएँगे।" और सभी कौवे मैना को मारने के लिए उसकी ओर दौड़ पड़े। कौवों को काँव-काँव करते हुए अपनी ओर आते देखकर मैना वहाँ से जान बचाकर भागी। वहाँ से थोड़ी दूर एक आम के पेड़ पर अकेले ही रात बिताने के लिए मैना एक कोने में छिपकर बैठ गई। रात में तेज हवा चली। कुछ देर बाद बादल बरसने लगे और इसके साथ ही बड़े-बड़े ओले भी पड़ने लगे। ओलों की मार से बहुत से कौवे घायल होकर जमीन पर गिरने लगे। कुछ तो मर भी गए। मैना आम के जिस पेड़ पर बैठी थी, उस पेड़ की एक डाल टूट गई। आम की वह डाल अन्दर से खोखली थी। डाल टूटने की वजह से डाल के अन्दर के खाली स्थान में मैना छिप गई। डाल में छिप जाने की वजह से मैना को न तो हवा लगी और न ही ओले ही उसका कुछ बिगाड़ पाए। वह रात भर आराम से बैठी रही। सवेरा होने पर जब सूरज निकला, तो मैना उस खोह से निकली और खुशी से गाती-नाचती हुई ईश्वर को प्रणाम किया। फिर आकाश में उड़ चली। मैना को आराम से उड़ते हुए देखकर, जमीन पर पड़े घायल कौवों ने कहा, "अरी मैना बहन, तुम रात को कहाँ थीं? तुम्हें ओलों की मार से किसने बचाया?" मैना बोली, "मैं आम की डाली पर बैठी ईश्वर से प्रार्थना कर रही थी कि हे ईश्वर! दुखी और असहाय लोगों की रक्षा करना। उसने मेरी प्रार्थना सुन ली और उसी ने मेरी भी रक्षा की।" मैना फिर बोली, "हे कौवों सुनो, भगवान ने केवल मेरी रक्षा ही नहीं की। वह तो जो भी उस पर विश्वास करता है और उसकी प्रार्थना करता है, उसे याद करता है, तथा भरोसा करता है, ईश्वर उसकी रक्षा अवश्य ही करता है और कठिन समय में उसे बचाता भी है।" हर हर महादेव जय शिव शंकर

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