Neeta  Trivedi
Neeta Trivedi Apr 8, 2021

जय माता रानी की शुभ प्रभात वंदन जी 🙏🌹🙏

जय माता रानी की शुभ प्रभात वंदन जी 🙏🌹🙏

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कामेंट्स

कृष्णा Apr 9, 2021
सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते। 🚩🚩🚩🚩🙇‍♀🙇‍♀🚩🚩🚩🚩 * ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी। दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।। या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।। * या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।। * या देवी सर्वभूतेषु तुष्टिरूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।। * या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।। * या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।। * या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।। * या देवी सर्वभूतेषु शांतिरूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।। जय माता दी🙏🙏🙏🙏🙏 .कर्पूरगौरम् करुणावतारम् |संसारसारम् भुजगेन्द्रहारम् ||सदा वसन्तम् हृदयारविन्दे |भवम् भवानि सहितम् नमामि || 🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩 मैया रानी के आशीर्वाद से आप सब हमेशा खुश रहे, स्वस्थ रहें, मस्त रहें 🚩🙇‍♀जय माता दी🙇‍♀🚩

p kumar Apr 9, 2021
🙏🌷सुप्रभात🌷🙏 🙏🌷जय श्री राम🌷🙏 🙏🌷जय हनुमान🌷🙏 🙏🌷जय माता की🌷🙏 🙏🌷ॐ नमः शिवाय🌷🙏 🙏🌷हर हर महादेव🌷🙏 🌷जय श्री महाकाल🌷 ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

GOVIND CHOUHAN Apr 9, 2021
Jai Mata Di 🌷 Jai Maa Aadhyashakthi Nav Durga Devi Mata 🌷 Jai Maa Shero Wali Ambe Jagtambe Mata 🌷 Suprabhat Vandan Neeta Jii 🙏 Maa ka aashirwad Hamesha Aap V Aapke Sampurn Parivaar Pr bna rhe Jii 🙏🌹🙏 Vvvery Nice Post Jiii 👌👌👌

Devendra Tiwari Apr 9, 2021
🙏🌹Jai Mata Di 🌹🙏 🌹Jai Shree Radhe Krishna 🌹 Subh Prabhat Bandan ji

RAJ RATHOD Apr 9, 2021
🙏शुभ प्रभात वंदन 🙏 🚩🚩हे माता..हमारी चाहत हमारी राहत just you, हमारा दिल हमारी जान only for you.🙏🙏जय माता दी 👣👣

Brajesh Sharma Apr 9, 2021
प्रेम से बोलो जय माता दी जय माता दी हर हर महादेव.... ॐ नमः शिवाय आप हर पल मस्त रहें स्वस्थ रहें खुश रहें

Govind Singh Chauhan Apr 9, 2021
जय माता दी माता रानी की कृपा आप पर सदैव बनी रहे जय माता दी 🙏🌹🌷🌺💐🙏

Daya Shankar Apr 9, 2021
Jay Mata Di good morning Mata Rani ki kripa drishti aap aur aapke parivar per hamesha bani Rahe Jay Shri Radhe 🙏🙏🙏🙏🙏🌹🌹🌹🌹🌹🚩🚩🚩🚩

Nitin Sharma Apr 9, 2021
सुप्रभात.!💐💐 आपका दिन शुभ हो.. माँ लक्ष्मी की कृपा से आपके जीवन.. में सुख, समृद्धि एवं संपन्नता बनी रहें।। 🙏🙏🙏

babulal Apr 9, 2021
jay mata rani ki good morning ji

Shivsanker Shukla Apr 9, 2021
सागर सुप्रभात बहन राधे-राधे

Shivsanker Shukla Apr 9, 2021
हर हर महादेव बहन जय भोलेनाथ की

प्रवीण चौहान २४७ Apr 9, 2021
🌼... ‼ जय माता दी ‼ ...🌼 💠💠💠🔷️🔷️🔷️🔷️💠💠💠 💜💜 आपका दिन शुभ एवं मंगलमय रहें 💜💜 💛💛 शिव प्रदोष व्रत की हार्दिक शुभकामनाएं सहित सस्नेह वंदन 💛💛 🔮🔮 जय संतोषी माता 🔮🔮 🔱‼🔱 हर हर महादेव 🔱‼🔷️

Sushil Kumar Sharma 🙏🙏🌹🌹 Apr 9, 2021
Good Afternoon My Sister ji 🙏🙏 Jay Mata di 🙏🙏🌹🌹 Mata Rani 🙏🙏🌹🌹 Ki Kripa Dristi Aap Our Aapke Priwar Per Hamesha Sada Bhni Rahe ji 🙏 Aapka Har Pal Har Din Shub Mangalmay Ho ji 🙏🙏🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹.

Lalbahadur Joshi Apr 9, 2021
🙏 जय माता दी शुभ रात्रि वन्द्न 🙏

Amit Kumar May 15, 2021

जय-जय श्री राधे, सुनो रे राम कहानी, सुनो रे राम कहानी.....! सुनते ही अंखियों से आये पानी.....! सुन्दर राम कथा......! डॉक्टर शिखा शर्मा के संग..... सुनो प्यारे राम कहानी.....! राम भालु कपि कटक बटोरा। सेतु हेतु श्रम किन्ह न थोरा।। नाम लेत भवसिंधु सुखाहीं। करहु बिचारू सुजन मनमाहीं।। गोस्वामी जी कहते हैं कि श्रीराम जी ने सीता जी को रावण के चंगुल से मुक्त करने के लिए जाने के क्रम में समुद्र पर सेतु बनाने के लिए वानर भालुओं की सेना ही बटोर लिए और इसके बाद भी बहुत परिश्रम किए तब जाकर सेतु बना। यद्यपि श्रीराम जी के कृपा से राजा बनने के बाद सुग्रीव ने अपने दूतों के माध्यम से सेना इकट्ठा की है लेकिन उसके मूल में श्रीराम इच्छा है अतः ... "राम भालु कपि कटक बटोरा"। "बटोरा" - गूढ़ भाव- बंदर भालु का इस तरह सदुपयोग परमात्मा ही कर सकते हैं। भला जो स्वयं के लिए एक जाड़ा गर्मी बरसात से बचने के लिए गृहादि साधन नहीं कर पाते वे सेतु निर्माण करेंगे? और वो भी कोई नदी नाले पर नहीं बल्कि अथाह समुद्र पर?? इसलिए तो दूतों के मुख से सेतु बंधन सुनकर रावण को विश्वास नहीं हो रहा था... "बांध्यो बननिधि...??? जब माता पार्वती जी ने शंकर जी से वानरी सेना की संख्या पूछीं तो शंकर जी कहते हैं... "सो मूरख जो करन चह लेखा"!!! सजीव, चर प्राणी, के संख्या ज्ञात करने के लिए उनमें स्थिरता, अनुशासन की आवश्यकता होती है लेकिन अत्यंत चंचल और असंख्य बंदरों की गिनती करने की कोशिश करने वाला मूर्ख ही होगा। लेकिन श्रीराम जी ऐसे "कपि चंचल सबहिं बिधि हीना" से भी समुद्र पर सेतु बनवा लिए। (नाम प्रसंग अर्थात नाम प्रधानता प्रसंग के कारण अधिक विस्तार उचित नहीं)। गोस्वामी जी कहते हैं कि इसे सुनकर कितने लोगों को आश्चर्य होगा कि जो स्वयं परमात्मा है उन्हें एक समुद्र पर सेतु बनाने के लिए वानरी सेना इकट्ठा करना पड़ा! उन्हें सेतु बनाने के लिए कठिन परिश्रम करने की आवश्यकता हुई... "सेतु हेतु श्रम कीन्ह न थोरा" "न थोरा" अर्थात बहुत ज्यादा परिश्रम करना पड़ा !!! लेकिन श्रीराम जी न स्वयं पर्वत ला रहे थे, न पेड़ ला रहे थे, बल्कि सभी जानते हैं कि बंदर भालु ला रहे थे... "सैल बिसाल आनि कपि देहीं। कंदुक इव नल नील ते लेहीं"।। और नल नील सेतु निर्माण कर रहे थे... ...नल नीलहि "रचहिं ते सेतु बनाइ"!!! प्यारे भक्तों, यदि हम इस दृष्टिकोण से देखेंगे तो महलों में रहने वाले न स्वयं अपने महल को बनाते हैं ( मिस्त्री और मजदूर ही श्रम करते हैं) , और न कोई नेता गण ही, लेकिन उन्हें श्रेय मिलता है। क्योंकि श्रम की इतनी संकुचित परिभाषा नहीं है और इसके लिए श्रीराम जी ने जामवंत, विभीषण आदि से मंत्रणा की अर्थात् मंत्रीमंडल की बैठक हुई। फिर उन्होने समुद्र से सहयोग हेतु लगातार तीन दिन तक प्रायोपवेशन व्रत (अनशन) पर बैठना पड़ा... बिनय न मानत जलधि जड़ गए "तीन दिन"बीति। उन्होंने अंत में आग्णेयास्त्र का संधान करना चाहा, अतः हम ये कैसे कह सकते हैं कि श्रीराम जी ने सेतु बनाने के लिए परिश्रम नहीं किया??? श्रम केवल शारीरिक ही नहीं बल्कि बौद्धिक भी होता है , अतः गोस्वामी जी के यह कथन बिल्कुल सत्य है कि श्रीराम जी ने ... "सेतु हेतु श्रम कीन्ह न थोरा".... सगुण साकार श्रीराम जी को समुद्र पर सेतु बनाने के लिए बहुत परिश्रम करना पड़ा। और अब गोस्वामी जी नाम महाराज की ओर दृष्टि करते हुए कहते हैं कि एक दृश्य समुद्र, जिसका क्षेत्रफल ज्ञात है... जो नाघइ "सत जोजन" सागर...। "सत जोजन" अर्थात सौ योजन चौड़ी समुद्र। उसे सभी नेत्र वाले देख सकते हैं, परंतु "भवसागर" एक ऐसा समुद्र है, जिसके प्रत्यक्षदर्शी हमें नहीं मिलते हैं , परंतु इसे अनुभव अवश्य करते हैं। भलसिंधु-भवसागर- "पुनरपि जननं पुनरपि मरणं पुनरपि जननी जठरे शयनम्"। जन्म मरण के चक्र में फंसे रहना ही भवसागर में पड़े रहना है। "भव प्रवाह" संतत हम परे। अब प्रभ पाहि...।। नाम लेत भवसिंधु सुखाहीं- "नाम लेत"- बिना किसी परिश्रम के, बस सहज ही नाम स्मरण किया कि- "भवसिंधु सुखाहीं" - अर्थात जन्म मरण से मुक्ति मिल गई, आपको पता भी नहीं चलेगा कि हमने इतना परिश्रम किया था । गोस्वामी जी कहते हैं कि - हे सज्जन वृंद! आप जरा मन में विचार करें कि जो काम स्वयं सगुण साकार श्रीराम जी को करने के लिए (वानरी सेना को समुद्र पार करने के लिए) उतना परिश्रम करना पड़ा, तभी वानरी सेना पार हुई। उसमें भी समुद्री जीवों ने भी उन्हें पार करने में सहयोग किया .... बंध भई भीर अति कपि नभ पंथ उड़ाहिं। "अपर जलचरन्हि उपर चढ़ि चढ़ि पारहि जाहिं"।। किन्तु नाम महाराज के अवलंबन लेने से भवसागर सूख जाता है अतः किसी के सहयोग की आवश्यकता नहीं होती है... नाम लेत भवसिंधु "सुखाहीं"। जब समुद्र सूख गया तो जलचर प्राणी के भय या सहयोग के प्रश्न ही नहीं है... इहां न बिषय कथा रस नाना। "करहु बिचारू सुजन मनमाहीं"- गोस्वामी जी सज्जनों से विचार करने के लिए कहते हैं अर्थात ये दुर्जन, दुष्ट प्रवृत्ति वाले लोगों के वश की चीज नहीं है। "मनमाहीं" - आप सभी सज्जन वृंद अपने मन में विचार करें कि श्रीराम जी बड़े हैं या उनका नाम बड़ा है। "मनमाहीं" - प्रकट रुप से, स्पष्ट कह कर बड़ा छोटा कहने पर व्यर्थ के विवाद में नहीं पड़ना चाहिए, स्वयं अनुभव कर नाम महाराज के अवलंबन लें.. डॉक्टर शिखा शर्मा

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*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳* *💐💐एहसान💐💐* एक बहेलिया था। एक बार जंगल में उसने चिड़िया फंसाने के लिए अपना जाल फैलाया। थोड़ी देर बाद ही एक उकाब उसके जाल में फंस गया। वह उसे घर लाया और उसके पंख काट दिए। अब उकाब उड़ नहीं सकता था, बस उछल उछलकर घर के आस-पास ही घूमता रहता। उस बहेलिए के घर के पास ही एक शिकारी रहता था। उकाब की यह हालत देखकर उससे सहन नहीं हुआ। वह बहेलिए के पास गया और कहा-"मित्र, जहां तक मुझे मालूम है, तुम्हारे पास एक उकाब है, जिसके तुमने पंख काट दिए हैं। उकाब तो शिकारी पक्षी है। छोटे-छोटे जानवर खा कर अपना भरण-पोषण करता है। इसके लिए उसका उड़ना जरूरी है। मगर उसके पंख काटकर तुमने उसे अपंग बना दिया है। फिर भी क्या तुम उसे मुझे बेच दोगे?" बहेलिए के लिए उकाब कोई काम का पक्षी तो था नहीं, अतः उसने उस शिकारी की बात मान ली और कुछ पैसों के बदले उकाब उसे दे दिया। शिकारी उकाब को अपने घर ले आया और उसकी दवा-दारू करने लगा। दो माह में उकाब के नए पंख निकल आए। वे पहले जैसे ही बड़े थे। अब वह उड़ सकता था। जब शिकारी को यह बात समझ में आ गई तो उसने उकाब को खुले आकाश में छोड़ दिया। उकाब ऊंचे आकाश में उड़ गया। शिकारी यह सब देखकर बहुत प्रसन्न हुआ। उकाब भी बहुत प्रसन्न था और शिकारी बहुत कृतज्ञ था। अपनी कृतज्ञता प्रकट करने के लिए उकाब एक खरगोश मारकर शिकारी के पास लाया। एक लोमड़ी, जो यह सब देख रही थी, लोमड़ी उकाब से बोली-"मित्र! जो तुम्हें हानि नहीं पहुंचा सकता उसे प्रसन्न करने से क्या लाभ?" इसके उत्तर में उकाब ने कहा-"व्यक्ति को हर उस व्यक्ति का एहसान मानना चाहिए, जिसने उसकी सहायता की हो और ऐेसे व्यक्तियों से सावधान रहना चाहिए जो हानि पहुंचा सकते हों।" *कहानी से सीख :-* *व्यक्ति को सदा सहायता करने वाले का कृतज्ञ रहना चाहिए।* *सदैव प्रसन्न रहिये।* *जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।* 🙏🙏🙏🙏🌳🌳🙏🙏🙏🙏🙏

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Amar jeet mishra May 17, 2021

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