Meena Dubey
Meena Dubey Feb 24, 2021

Om namoh bhagvte vasudevay jai shri Radhy Krishna Radhy Radhy 💐🙏💐🌲🍋🌲🍋🌲🍋🌲🍋🌳🍋🌳🍋🏖🌳🏖🌳🌼🏖🌼🏖🌼🏖🌼🏖🍀🌻🍀🏖🌳🏖🌳🏖

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कामेंट्स

जय हिन्द🙏,🇮🇳, Feb 24, 2021
🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥त्रेता युग के रावण को वर्ष में एक ही बार जलाना पड़ता है,,,,,💯 कलयुग के रावण ऑ रूप रंग मोहराचेहरा छुपा कर बदल आते हैं इसे रोज ज़लाना पड़ता है,,,🔥🔥🔥💥रावण के घर में हनुमान जन्म नहीं ले,,,सकते हनुमान ने स्वयं गुप्त शादी रचाई हुई है,,, गोरखधंधे ,,,मुख मैं,,,,,, राम ,,नाम,,,,,🔥🔥🔥 गलत सोच और नियत से कभी भी,,,, शुभ,, परिणाम परिणाम नहीं आते,,,,,,,💥🔥🔥🔥 सोशल मीडिया के रंगमंच के नामी कलाकार है,,,,, जो बहुत सारे अलग-अलग रूप रंग चेहरा मोहरा और व्यक्ति को बदलकर💥🔥🔥🔥

YOGESH kumar bansal Feb 24, 2021
RADHE RADHE SHYAM OM NAMO BHAGWATE VASHU DEVAY ÑÀMÀHEY YOGESH KUMAR BANSAL GOOD MORNING TO ALL NEAREST AND DEAREST OMG GANESH ÝOGESH KUMAR BANSAL GOOD LUCK FOR TODAY TO ALL NEAREST AND DEAREST OMG GANESH ÝOGESH KUMAR

Ramesh Kumar Shiwani Feb 24, 2021
RADHE RADHE RADHE RADHE RADHE RADHE RADHE RADHE RADHE RADHE KRISHNA KRISHNA JI 🙏🌹🙏

Balraj sethi Feb 24, 2021
🙏🍁Jai Shree Radhe Krishna ji ki. 🙏🌹🌹🌷🌷🎄

Dolly Rawal Apr 19, 2021

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Dolly Rawal Apr 19, 2021

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SunitaSharma Apr 18, 2021

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Dolly Rawal Apr 19, 2021

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. ॥हरि ॐ तत्सत्॥ श्रीमद्भागवत-कथा श्रीमद्भागवत-महापुराण पोस्ट - 179 स्कन्ध - 08 अध्याय - 20 इस अध्याय में:- भगवान वामन जी का विराट् रूप होकर दो ही पग से पृथ्वी और स्वर्ग को नाप लेना श्रीशुकदेव जी कहते हैं- राजन! जब कुलगुरु शुक्राचार्य ने इस प्रकार कहा, तब आदर्श गृहस्थ राजा बलि ने एक क्षण चुप रहकर बड़ी विनय और सावधानी से शुक्राचार्य जी के प्रति यों कहा। राजा बलि ने कहा- भगवन! आपका कहना सत्य है। गृहस्थाश्रम में रहने वालों के लिये वही धर्म है जिससे अर्थ, काम, यश और आजीविका में कभी किसी प्रकार बाधा न पड़े। परन्तु गुरुदेव! मैं प्रह्लाद जी का पौत्र हूँ और एक बार देने की प्रतिज्ञा कर चुका हूँ। अतः अब मैं धन लोभ से ठग की भाँति इस ब्राह्मण से कैसे कहूँ कि ‘मैं तुम्हें नहीं दूँगा’। इस पृथ्वी ने कहा है कि ‘असत्य से बढ़कर कोई अधर्म नहीं है। मैं सब कुछ सहने में समर्थ हूँ, परन्तु झूठे मनुष्य का भार मुझसे नहीं सहा जाता’। मैं नरक से, दरिद्रता से, दुःख के समुद्र से, अपने राज्य के नाश से और मृत्यु से भी उतना नहीं डरता, जितना ब्राह्मण से प्रतिज्ञा करके उसे धोखा देने से डरता हूँ। इस संसार में मर जाने के बाद धन आदि जो-जो वस्तुएँ साथ छोड़ देती हैं, यदि उनके द्वारा दान आदि से ब्राह्मणों को भी संतुष्ट न किया जा सका, तो उनके त्याग का लाभ ही क्या रहा? दधीचि, शिबि आदि महापुरुषों ने अपने परम प्रिय दुस्त्यज प्राणों का दान करके भी प्राणियों की भलाई की है। फिर पृथ्वी आदि वस्तुओं को देने में सोच-विचार करने की क्या आवश्यकता है? ब्रह्मन! पहले युग में बड़े-बड़े दैत्यराजों ने इस पृथ्वी का उपभोग किया है। पृथ्वी में उनका सामना करने वाला कोई नहीं था। उनके लोक और परलोक को तो काल खा गया, परन्तु उनका यश अभी पृथ्वी पर ज्यों-का-त्यों बना हुआ है। गुरुदेव! ऐसे लोग संसार में बहुत हैं, जो युद्ध में पीठ न दिखाकर अपने प्राणों की बलि चढ़ा देते हैं; परन्तु ऐसे लोग बहुत दुर्लभ हैं, जो सत्पात्र के प्राप्त होने पर श्रद्धा के साथ धन का दान करें। गुरुदेव! यदि उदार और करुणाशील पुरुष अपात्र याचक की कामना पूर्ण करके दुर्गति भोगता है, तो वह दुर्गति भी उसके लिये शोभा की बात होती है। फिर आप-जैसे ब्रह्मवेत्ता पुरुषों को दान करने से दुःख प्राप्त हो तो उसके लिये क्या कहना है। इसलिये मैं इस ब्रह्मचारी की अभिलाषा अवश्य पूर्ण करूँगा। महर्षे! वेदविधि के जानने वाले आप लोग बड़े आदर से यज्ञ-यागादि के द्वारा जिनकी आराधना करते हैं-वे वरदानी विष्णु ही इस रूप में हों अथवा कोई दूसरा हो, मैं इनकी इच्छा के अनुसार इन्हें पृथ्वी का दान करूँगा। यदि मेरे अपराध न करने पर भी ये अधर्म से मुझे बाँध लेंगे, तब भी मैं इनका अनिष्ट नहीं चाहूँगा। क्योंकि मेरे शत्रु होने पर भी इन्होंने भयभीत होकर ब्राह्मण का शरीर धारण किया है। यदि ये पवित्रकीर्ति भगवान् विष्णु ही हैं तो अपना यश नहीं खोना चाहेंगे (अपनी माँगी हुई वस्तु लेकर ही रहेंगे)’। मुझे युद्ध में मारकर भी पृथ्वी छीन सकते हैं और यदि कदाचित ये कोई दूसरा ही हैं, तो मेरे बाणों की चोट से सदा के लिये रणभूमि में सो जायेंगे। श्रीशुकदेव जी कहते हैं- जब शुक्राचार्य जी ने देखा कि मेरा यह शिष्य गुरु के प्रति अश्रद्धालु है तथा मेरी आज्ञा का उल्लंघन कर रहा है, तब दैव की प्रेरणा से उन्होंने राजा बलि को शाप दे दिया-यद्यपि वे सत्यप्रतिज्ञ और उदार होने के कारण शाप के पात्र नहीं थे। शुक्राचार्य जी ने कहा- ‘मूर्ख! तू है तो अज्ञानी, परन्तु अपने को बहुत बड़ा पण्डित मानता है। तू मेरी उपेक्षा करके गर्व कर रहा है। तूने मेरी आज्ञा का उल्लंघन किया है। इसलिये शीघ्र ही तू अपनी लक्ष्मी खो बैठेगा’। राजा बलि बड़े महात्मा थे। अपने गुरुदेव के शाप देने पर भी वे सत्य से नहीं डिगे। उन्होंने वामन भगवान् की विधिपूर्वक पूजा की और हाथ में जल लेकर तीन पग भूमि का संकल्प कर दिया। उसी समय राजा बलि की पत्नी विन्ध्यावली, जो मोतियों के गहनों से सुसज्जित थी, वहाँ आयी। उसने अपने हाथों वामन भगवान के चरण पखारने के लिये जल से भरा सोने का कलश लाकर दिया। बलि ने स्वयं बड़े आनन्द से उनके सुन्दर-सुन्दर युगल चरणों को धोया और उनके चरणों का वह विश्व पावन जल अपने सिर पर चढ़ाया। उस समय आकाश में स्थित देवता, गन्धर्व, विद्याधर, सिद्ध, चारण-सभी लोग राजा बलि के इस अलौकिक कार्य तथा सरलता की प्रशंसा करते हुए बड़े आनन्द से उनके ऊपर दिव्य पुष्पों की वर्षा करने लगे। एक साथ ही हजारों दुन्दुभियाँ बार-बार बजने लगीं। गन्धर्व, किम्पुरुष और किन्नर गान करने लगे- ‘अहो धन्य है! इन उदारशिरोमणि बलि ने ऐसा काम कर दिखाया, जो दूसरों के लिये अत्यन्त कठिन है। देखो तो सही, इन्होंने जान-बूझकर अपने शत्रु को तीनों लोकों का दान कर दिया’। इसी समय एक बड़ी अद्भुत घटना घट गयी। अनन्त भगवान् का वह त्रिगुणात्मक वामन रूप बढ़ने लगा। वह यहाँ तक बढ़ा कि पृथ्वी, आकाश, दिशाएँ, स्वर्ग, पाताल, समुद्र, पशु-पक्षी, मनुष्य, देवता और ऋषि- सब-के-सब उसी में समा गये। ऋत्विज, आचार्य और सदस्यों के साथ बलि ने समस्त ऐश्वर्यों के एकमात्र स्वामी भगवान् के उस त्रिगुणात्मक शरीर में पंचभूत, इन्द्रिय, उनके विषय, अन्तःकरण और जीवों के साथ वह सम्पूर्ण त्रिगुणमय जगत् देखा। राजा बलि ने विश्वरूप भगवान के चरणतल में रसातल, चरणों में पृथ्वी, पिंडलियों में पर्वत, घुटनों में पक्षी और जाँघों में मरुद्गण को देखा। इसी प्रकार भगवान् के वस्त्रों में सन्ध्या, गुह्य-स्थानों में प्रजापतिगण, जघनस्थल में अपने सहित समस्त असुरगण, नाभि में आकाश, कोख में सातों समुद्र और वक्षःस्थल में नक्षत्र समूह देखे। उन लोगों को भगवान् के हृदय में धर्म, स्तनों में ऋत (मधुर) और सत्य वचन, मन में चन्द्रमा, वक्षःस्थल पर हाथों में कमल लिये लक्ष्मी जी, कण्ठ में सामवेद और सम्पूर्ण शब्दसमूह उन्हें दीखे। बाहुओं में इन्द्रादि समस्त देवगण, कानों में दिशाएँ, मस्तक में स्वर्ग, केशों में मेघमाला, नासिका में वायु, नेत्रों में सूर्य और मुख में अग्नि दिखायी पड़े। वाणी में वेद, रसना में वरुण, भौंहों में विधि और निषेध, पलकों में दिन और रात। विश्वरूप के ललाट में क्रोध और नीचे के ओठ में लोभ के दर्शन हुए। परीक्षित! उनके स्पर्श में काम, वीर्य में जल, पीठ में अधर्म, पदविन्यास में यज्ञ, छाया में मृत्यु, हँसी में माया और शरीर के रोमों में सब प्रकार की ओषधियाँ थीं। उनकी नाड़ियों में नदियाँ, नखों में शिलाएँ और बुद्धि में ब्रह्मा, देवता एवं ऋषिगण दीख पड़े। इस प्रकार वीरवर बलि ने भगवान् की इन्द्रियों और शरीर में सभी चराचर प्राणियों का दर्शन किया। परीक्षित! सर्वात्मा भगवान् में यह सम्पूर्ण जगत देखकर सब-के-सब दैत्य अत्यन्त भयभीत हो गये। इसी समय भगवान् के पास असह्य तेज वाला सुदर्शन चक्र, गरजते हुए मेघ के समान भयंकर टंकार करने वाला शारंग धनुष, बादल की तरह गम्भीर शब्द करने वाला पांचजन्य शंख, विष्णु भगवान् की अत्यन्त वेगवती कौमुदकी गदा, सौ चन्द्राकार चिह्नों वाली ढाल और विद्याधर नाम की तलवार, अक्षय बाणों से भरे दो तरकश तथा लोकपालों के सहित भगवान् के सुनन्द आदि पार्षदगण सेवा करने के लिये उपस्थित हो गये। उस समय भगवान की बड़ी शोभा हुई। मस्तक पर मुकुट, बाहुओं में बाजूबंद, कानों में मकराकृत कुण्डल, वक्षःस्थल पर श्रीवत्स चिह्न, गले में कौस्तुभ मणि, कमर में मेखला और कंधे पर पीताम्बर शोभायमान हो रहा था। वे पाँच प्रकार के पुष्पों की बनी वनमाला धारण किये हुए थे, जिस पर मधुलोभी भौंरे गुंजार कर रहे थे। उन्होंने अपने एक पग से बलि की सारी पृथ्वी नाप ली, शरीर से आकाश और भुजाओं से दिशाएँ घेर लीं; दूसरे पग से उन्होंने स्वर्ग को भी नाप लिया। तीसरा पैर रखने के लिये बलि की तनिक-सी भी कोई वस्तु न बची। भगवान का वह दूसरा पग ही ऊपर की ओर जाता हुआ महर्लोक, जनलोक और तपलोक से भी ऊपर सत्यलोक में पहुँच गया। ~~~०~~~ श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारे। हे नाथ नारायण वासुदेवाय॥ "जय जय श्री हरि" "कुमार रौनक कश्यप " ********************************************

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Rajesh Kumar Apr 19, 2021

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. "मन की गुलामी" एक बार एक महात्मा बाजार से होकर गुजर रहा था। रास्ते में एक व्यक्ति खजूर बेच रहा था। उस महात्मा के मन में विचार आया कि खजूर लेनी चाहिए। उसने अपने मन को समझाया और वहाँ से चल दिए। किन्तु महात्मा पूरी रात भर सो नहीं पाया। अगले दिन वह विवश होकर जंगल में गया और जितना बड़ा लकड़ी का गट्ठर उठा सकता था, उसने उठाया। उस महात्मा ने अपने मन से कहा कि यदि तुझे खजूर खानी है, तो यह बोझ उठाना ही पड़ेगा। महात्मा थोड़ी दूर ही चलता, फिर गिर जाता, फिर चलता और गिरता। उसमें एक गट्ठर उठाने की हिम्मत नहीं थी लेकिन उसने लकड़ी के भारी भारी दो गट्ठर उठा रखे थे। दो ढाई मील की यात्रा पूरी करके वह शहर पहुँचा और उन लकड़ियों को बेचकर जो पैसे मिले उससे खजूर खरीदने के लिए जंगल में चल दिया। खजूर सामने देखकर महात्मा का मन बड़ा प्रसन्न हुआ। महात्मा ने उन पैसों से खजूर खरीदें लेकिन महात्मा ने अपने मन से कहा कि आज तूने खजूर मांगी है, फिर तेरी कोई और इच्छा करेगी। कल अच्छे-अच्छे कपड़े और स्त्री मांगेगा अगर स्त्री आई तो बाल बच्चे भी होंगे। तब तो मैं पूरी तरह से तेरा गुलाम ही हो जाऊँगा। सामने से एक मुसाफिर आ रहा था। महात्मा ने उस मुसाफिर को बुलाकर सारी खजूर उस आदमी को दे दी और खुद को मन का गुलाम बनने से बचा लिया। यदि मन का कहना नहीं मानोगे तो इस जीवन का लाभ उठाओगे यदि मन की सुनोगे तो मन के गुलाम बन जाओगे। ----------:::×:::---------- "जय जय श्री राधे" "कुमार रौनक कश्यप " *******************************************

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🌹•°🍁°•🥀•°🌻°•🍂•°🎋°•🌻 🔔°•🔔•°🔔°•🔔°•🔔°•🔔•°🔔 जय श्री महाकालेश्वर विश्वेश्वराय नरकार्णव तारणाय कर्णामृताय शशिशेखर धारणाय कर्पूरकान्ति धवलाय जटाधराय दारिद्र्यदुःख दहनाय नमश्शिवाय गौरीप्रियाय रजनीश कलाधराय कालान्तकाय भुजगाधिप कङ्कणाय गङ्गाधराय गजराज विमर्धनाय दारिद्र्यदुःख दहनाय नम:शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ ऐं क्लीं सोमाय नमः । ॐ श्रां श्रीं श्रीं सः चन्द्राय नमः । सुप्रभातम् ॐ श्रीगणेशाय नमः अथ् पंचांगम् दिनाँक 19-04-2021 सोमवार अक्षांश- 30°:36", रेखांश 76°:80" अम्बाला शहर हरियाणा, पिन कोड- 134 007 ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥ ॐ शिवाय नम:,ॐ सर्वात्मने नम: ॐ त्रिनेत्राय नम:,ॐ हराय नम: ॐ इन्द्र्मुखाय नम:ॐ श्रीकंठाय नम: ॐ स द्योजाताय नम:,ॐ वामदेवाय नम: ॐ अघोरह्र्द्याय नम:,ॐ तत्पुरुषाय नम: ॐ ईशानाय नम:,ॐ अनंतधर्माय नम: ॐ ज्ञानभूताय नम:, ॐ अनंतवैराग्यसिंघायनम:, ॐ प्रधानाय नम: ॐ व्योमात्मने नम:, ॐ युक्तकेशात्मरूपाय नम: ॐ महेश्वराए नमः, ॐ शूलपानायाय नमः, ॐ पिनाकपनाये नमः, ॐ पशुपति नमः । 🙏🙏🙏🙏🙏 🍁🍁•°🌹°•🍂•°🌷°•💐•°🥀 --------------समाप्तिकाल----------------- 📒तिथि सप्तमी 24:02:58 ☄️ नक्षत्र पुनर्वसु पूर्ण रात्रि 🛑 करण : 🛑 गर 11:24:45 🛑 वणिज 24:02:58 🔓 पक्ष शुक्ल 🛑 योग सुकर्मा 20:04:59 🗝️ वार सोमवार 🌄 सूर्योदय 05:52:03 🌃 चन्द्रोदय 10:43:59 🌙 चन्द्र 👬🏼 मिथुन - 24:29:04 तक 🌌 सूर्यास्त 18:52:40 🌑 चन्द्रास्त 25:21:00 🛑 ऋतु वसंत 🌈 🛑शक सम्वत 1943 प्लव 🛑 कलि सम्वत 5123 🛑 दिन काल 13:00:36 🛑 विक्रम सम्वत 2078 🛑 मास अमांत चैत्र 🛑 मास पूर्णिमांत चैत्र 📯 शुभ समय 🥁 अभिजित 11:56:20 - 12:48:23 🕳️ दुष्टमुहूर्त : 🕳️ 12:48:23 - 13:40:25 🕳️15:24:30 - 16:16:32 🕳️ कंटक 08:28:11 - 09:20:13 🕳️ यमघण्ट 11:56:20 - 12:48:23 😈 राहु काल 07:29:38 - 09:07:13 🕳️ कुलिक 15:24:30 - 16:16:32 🕳️ कालवेला 10:12:15 - 11:04:18 🕳️ यमगण्ड 10:44:47 - 12:22:22 🕳️गुलिक 13:59:56 - 15:37:31 🛑दिशा शूल पूर्व 🚩🚩 होरा 🛑चन्द्रमा 05:52:03 - 06:57:06 🛑शनि 06:57:06 - 08:02:10 🛑बृहस्पति 08:02:10 - 09:07:13 🛑मंगल 09:07:13 - 10:12:15 🛑सूर्य 10:12:15 - 11:17:18 🛑शुक्र 11:17:18 - 12:22:21 🛑बुध 12:22:21 - 13:27:24 🛑चन्द्रमा 13:27:24 - 14:32:27 🛑शनि 14:32:27 - 15:37:30 🛑बृहस्पति 15:37:30 - 16:42:33 🛑मंगल 16:42:33 - 17:47:37 🛑सूर्य 17:47:37 - 18:52:40 🛑शुक्र 18:52:40 - 19:47:31 🛑बुध 19:47:31 - 20:42:23 🛑चन्द्रमा 20:42:23 - 21:37:15 🚩🚩 चोघडिया ⛩️अमृत 05:52:03 - 07:29:38 😈काल 07:29:38 - 09:07:13 ⛩️शुभ 09:07:13 - 10:44:47 ☘️रोग 10:44:47 - 12:22:22 🕳️उद्वेग 12:22:22 - 13:59:56 🛑चल 13:59:56 - 15:37:31 ⛩️लाभ 15:37:31 - 17:15:05 ⛩️अमृत 17:15:05 - 18:52:40 🛑चल 18:52:40 - 20:14:57 ☘️रोग 20:14:57 - 21:37:15 🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴 🍁 ग्रह गोचर 🍁 🌞 सूर्य - मेष 🦌 🌙 चन्द्र - मिथुन 👬🏼 🌑 मंगल - मिथुन 👬🏼 🌑 बुध - मेष 🦌 🌑 बृहस्पति - कुम्भ ⚱️ 🌑 शुक्र - मेष 🦌 🌑 शनि - मकर 🐊 🌑 राहु - वृष 🐂 🌑 केतु - वृश्चिक 🦞 --------------------------------------------- 🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴 व्रत एवम् त्योहार 30अप्रैल तक 🛑🛑🛑 🏵️ चंद्र - 19 अप्रैल भद्रा, 24:02 से, 🌞सूर्य सायन वृष 🐂 में 🥀26:05, 💥ग्रीष्म ऋतु 🥀प्रारंभ 🏵️मंगल- 20 अप्रैल भद्रा 12:23 तक श्री दुर्गा अष्टमी, भवान्युत्पत्ति, अशोक अष्टमी, मेला बाहू फोर्ट, जम्मू कांगड़ा देवी, नैना देवी (हिमाचल प्रदेश) शुक्र भरणी में 25:04, अन्नपूर्णा पूजन, अगस्त्य अस्त । 🏵️ बुध- 21 अप्रैल- श्रीदुर्गा नवमी, नवरात्र समाप्त, श्रीरामनवमी, मेला मनसा देवी (पंचकूला) समाप्त, स्नान तिथि कुंभ- महापर्व (हरिद्वार) शुक्र बाल्यत्व समाप्त 23:10, शक वैशाख प्रारंभ, गंड मूल 7:59 से। 🏵️ गुरु- 22 अप्रैल -बुध 🥀भरणी में 28:24 🏵️ शुक्र - 23 अप्रैल -भद्रा 10:42 से 21:48 तक,🥀 कामदा एकादशी व्रत, लक्ष्मीकांत दोलोत्सव, गंड मूल 7:42 तक 🏵️शनि -24 अप्रैल - शनि प्रदोष व्रत, मंगल आर्द्रा में 25:37, श्रीविष्णु दमन उत्सव । 🏵️ रवि - 25 अप्रैल - गुरु धनिष्ठा 4 में 8:35, अनंग त्रयोदशी, श्रीमहावीर जयंती (जैन)। 🏵️ चंद्र 26 अप्रैल- भद्रा 12:45 से 22:54 तक , 🥀श्रीसत्यनारायण व्रत, 🥀श्रीशिव दमन उत्सव। 🏵️ मंगल 27 अप्रैल - 🥀चैत्र पूर्णिमा, चतुर्थ (अंतिम ) शाही स्नान कुंभ पर्व (हरिद्वार),🌞 सूर्य भरणी में 18:22, श्रीहनुमान जयंती (दक्षिण -भारत), वैशाख स्नान🥀 प्रारंभ। 🏵️ मंगल वैशाख कृष्ण प्रतिपदा 🥀तिथि का क्षय॰॰ ॰॰ ॰॰ 🏵️ बुध 28 अप्रैल 🏵️ गुरु 29 अप्रैल -भद्रा 11:53 से 20:10 तक, बुध🥀 कृतिका में 13:26, गंड मूल 14:29 से। 🏵️ शुक्र 30 अप्रैल- श्री गणेश चतुर्थी व्रत, बुध🥀 वृष 🐂 में 29:41, बुध पश्चिम में 🥀उदय 19:02, सती अनुसूइया जयंती। ☘️☘️☘️☘️☘️☘️ बाजार मंदा 📉तेजी 📈30 अप्रैल तक 🛑🛑🛑 🏵️ 20 अप्रैल -को शुक्र भरणी ☄️ में आने से सोना चांदी अफीम लाल रंग की जिन्सें सरसों तिल तेल अल्सी घी उड़द नारियल में मंदी📉 जबकि चना मूंग मोठ ग्वार तुवर रुई कपास में घटा बढ़ी के बाद तेजी 📈बनेगी। 🏵️22 अप्रैल - को बुध भरनी नक्षत्र☄️ में आकर शुक्र के साथ एक नक्षत्र संबंध बनाएगा। चावल गेहूं आदि अनाजों चने में 8 दिनों के भीतर अच्छी तेजी📈 बनेगी। 🏵️24 अप्रैल - को मंगल आर्द्रा☄️ में आने से रुई सूत कपास अलसी एरण्ड गुड़ खांड तिल तेल नमक में तेजी📈 बनेगी चांदी घी कुछ मंदे 📉रहेंगे । 🏵️ 25 अप्रैल - को गुरु धनिष्ठा☄️ में आने से गेहूं चावल जौ चना घी हल्दी सोने में कुछ मंदी📉 बने। 🏵️ 29 अप्रैल- को बुध कृतिका☄️ में आने से चांदी अफीम शेयर में विशेष घटा बढ़ी होकर मंदी बने, अनाज रूई में तेजी बनेगी 📈 🏵️30 अप्रैल - को बुध वृष🐂 राशि में आकर राहु के साथ मेल करेगा। यह योग विशेष घटा बढ़ी करके मामूली या अधिक तेजी 📈लेकर आएगा। गेहूं चना चावल मटर रुई कपास, अफीम तिल तेल आदि में अच्छी घटा बढ़ी के बाद तेजी 📈बनेगी। इसी दिन बुध पश्चिम उदय 🎇होने से सोना चांदी बैंकिंग शेयरों में अच्छी घटा 📉बढ़ी 📈रहेगी। 💮🚩 दैनिक राशिफल 🚩💮 🦌मेष रोजगार प्राप्ति के प्रयास सफल रहेंगे। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। निवेश के सुखद परिणाम आएंगे। अप्रत्याशित लाभ हो सकता है। किसी बड़ी बाधा के दूर होने से प्रसन्नता रहेगी। भाग्य का साथ मिलेगा। पुराना रोग उभर सकता है। विवाद से क्लेश संभव है। लेन-देन में जल्दबाजी न करें। 🐂वृष अप्रत्याशित खर्च सामने आएंगे। कर्ज लेना पड़ सकता है। वाणी पर नियंत्रण रखें। दूसरों से अपेक्षा पूर्ण नहीं होने से खिन्नता रहेगी। कार्य में विलंब होगा। स्वास्थ्य का पाया कमजोर रहेगा। पारिवारिक चिंता बनी रहेगी। कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। व्यवसाय ठीक चलेगा। आय बनी रहेगी। व्यस्तता रहेगी। 👫मिथुन पुराने शत्रु परेशान कर सकते हैं। थकान व कमजोरी रह सकती है। जीवनसाथी के स्वास्थ्य की चिंता रहेगी। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। डूबी हुई रकम प्राप्त हो सकती है। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। भाग्य का साथ रहेगा। व्यापार में वृद्धि के योग हैं। निवेश शुभ रहेगा। आय होगी। प्रमाद न करें। 🦀कर्क नई योजना बनेगी। कार्यप्रणाली में सुधार होगा। कारोबार में वृद्धि होगी। जोखिम उठाने का साहस कर पाएंगे। नए व्यापारिक अनुबंध होंगे। धनार्जन होगा। लंबे समय से रुके कार्यों में गति आएगी। सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। शत्रु परास्त होंगे। स्वास्थ्‍य का ध्यान रखें। 🦁सिंह कुसंगति से हानि होगी। पूजा-पाठ में मन लगेगा। कोर्ट व कचहरी के कार्य अनुकूल रहेंगे। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। परिवार के साथ समय अच्‍छा व्यतीत होगा। आर्थिक उन्नति के प्रयास सफल रहेंगे। कारोबार अच्छा चलेगा। नौकरी में उच्चाधिकारी प्रसन्नता रहेंगे। भाइयों का सहयोग मिलेगा। प्रसन्नता बनी रहेगी। 👩🏻‍🦱कन्या वाहन व मशीनरी आदि के प्रयोग में सावधानी रखें, विशेषकर स्त्रियां रसोई में ध्यान रखें। वाणी में हल्के शब्दों के प्रयोग से बचें। किसी व्यक्ति से बेवजह विवाद हो सकता है। लेन-देन में जल्दबाजी न करें। धनलाभ के अवसर प्राप्त होंगे। आय में निश्चितता होगी। ऐश्वर्य पर व्यय होगा। ⚖️तुला शत्रु परास्त होंगे। कोर्ट व कचहरी के कार्य मनोनुकूल रहेंगे। जीवनसाथी से सहयोग प्राप्त होगा। सुख के साधन जुटेंगे। कारोबार में वृद्धि होगी। निवेशादि शुभ रहेंगे। नौकरी में सहकर्मी साथ देंगे। स्त्री पक्ष से लाभ होगा। अज्ञात भय रहेगा। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। पार्टनरों का सहयोग मिलेगा। घर-बाहर प्रसन्नता रहेगी। 🦂वृश्चिक लेन-देन में जल्दबाजी न करें। किसी अपरिचित पर अतिविश्वास न करें। आय में वृद्धि होगी। भूमि व भवन संबंधी योजना बनेगी। कोई बड़ा लाभ हो सकता है। रोजगार प्राप्ति के प्रयास सफल रहेंगे। भाग्य बेहद अनुकूल है, लाभ लें। चोट व रोग से बचें। प्रेम-प्रसंग में अनुकूलता रहेगी। घर-बाहर प्रसन्नता रहेगी। 🏹धनु किसी गलती का खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। जल्दबाजी व लापरवाही न करें। अज्ञात भय सताएगा। पुराना रोग उभर सकता है। भागदौड़ रहेगी। विद्यार्थी वर्ग सफलता हासिल करेगा। किसी आनंदोत्सव में भाग लेने का अवसर प्राप्त होगा। स्वादिष्ट भोजन का आनंद मिलेगा। प्रसन्नता रहेगी। 🐊मकर पुराना रोग उभर सकता है। किसी बड़ी समस्या से सामना हो सकता है। लेन-देन में विशेष सावधानी रखें। वाणी में हल्के शब्दों के प्रयोग से बचें। दु:खद समाचार मिल सकता है। किसी व्यक्ति से बेवजह विवाद हो सकता है। व्यर्थ भागदौड़ होगी। कार्य में विलंब होगा। चिंता तथा तनाव रहेंगे। आय में निश्चितता रहेगी। ⚱️कुंभ प्रयास सफल रहेंगे। सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। पराक्रम बढ़ेगा। आय में वृद्धि होगी। पराक्रम बढ़ेगा। किसी बड़े काम को करने में रुझान रहेगा। कारोबार में वृद्धि होगी। नौकरी में प्रशंसा प्राप्त होगी। शेयर मार्केट व म्युचुअल फंड से लाभ होगा। चोट व रोग से बचें। सुख के साधन जुटेंगे। घर में तनाव रह सकता है। 🐟मीन शुभ समाचार प्राप्त होंगे। घर में मेहमानों का आगमन होगा। आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। विवेक से कार्य करें। विरोधी सक्रिय रहेंगे। मित्रों का सहयोग प्राप्त होगा। व्यापार-व्यवसाय लाभदायक रहेगा। नौकरी में चैन रहेगा। आय में वृद्धि होगी। मित्रों के साथ समय मनोरंजक व्यतीत होगा। प्रमाद न करें। ACHARYA ANIL PARASHAR, VADIC,KP ASTROLOGER. 🙏आपका दिन मंगलमय हो🙏 🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺

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❤Dev❤ Apr 19, 2021

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