sukhadev awari
sukhadev awari Apr 8, 2021

Radhe-Radhe

Radhe-Radhe

+21 प्रतिक्रिया 4 कॉमेंट्स • 2 शेयर

कामेंट्स

BK WhatsApp STATUS Apr 8, 2021
जय श्री राधे कृष्ण शुभ प्रभात स्नेह वंदन धन्यवाद 🌹🌹🙏🙏👌👌👍👍🕉️🌄

dhruv wadhwani Apr 8, 2021
जय माता की जय माता की जय माता की जय माता की जय माता की जय माता की

🌹•°🔥°•💐•°🍂°•🥀°•☘️°•🌹 🔔°•🔔•°🔔°•🔔•°🔔°•🔔•°🔔 ॐ ह्रीं श्रीं शुक्राय नमः सुप्रभातम् ॐ श्री गणेशाय नमः अथ् पंचांगम् दिनाँक 16-04-2021 शुक्रवार, अक्षांश- 30°:36", रेखांश 76°:80" अम्बाला शहर, हरियाणा, पिन कोड 134 007 ॐ मनिभ्द्राय रत्नशोभिताय ऐरावत वाहनाय मम गृहे व्यापारे रिद्धि वृद्धि सिद्धि कुरु कुरु स्वाहा महालक्ष्मी वंदना महालक्ष्मी नमस्तुभ्यं, नमस्तुभ्यं सुरेश्र्वरी । हरिप्रिये नमस्तुभ्यं, नमस्तुभ्यं दयानिधे ।। शुभम करोति कल्याणम, अरोग्यम धन संपदा, शत्रु-बुद्धि विनाशायः, दीपःज्योति नमोस्तुते ! ॐ हिमकुंद मृणालाभं दैत्यानां परम् गुरुम्र। सर्वशास्र प्रवक्तारं भार्गवं प्रणमाम्यहम्। 🥀🌹🌾🌷🍁🌹🍂🥀 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏 ------समाप्तिकाल----- °••°°••°°••°°••°°••°°••°°••°°••°°••°°•° 📒 तिथि चतुर्थी 18:07:38 ☄️नक्षत्र रोहिणी 23:40:27 🛑 करण विष्टि 18:07:38 🔓 पक्ष शुक्ल 🛑 योग सौभाग्य 18:22:31 🗝️ वार शुक्रवार 🌄सूर्योदय 05:55:21 🌃 चन्द्रोदय 08:24:00 🌙 चन्द्र राशि 🐂 वृषभ 🌌 सूर्यास्त 18:50:44 🌑 चन्द्रास्त 22:42:59 🔓 ऋतु वसंत 🌈 🏵️ शक सम्वत 1943 प्लव 🏵️ कलि सम्वत 5123 🏵️ दिन काल 12:55:23 🏵️ विक्रम सम्वत 2078 🏵️ मास अमांत चैत्र 🏵️ मास पूर्णिमांत चैत्र 📯 शुभ समय 🎊 अभिजित 11:57:12 - 12:48:53 🕳️ दुष्टमुहूर्त : 🕳️ 08:30:25 - 09:22:07 🕳️ 12:48:53 - 13:40:35 🕳️ कंटक 13:40:35 - 14:32:17 🕳️ यमघण्ट 17:07:21 - 17:59:03 😈 राहु काल 10:46:07 - 12:23:02 🕳️ कुलिक 08:30:25 - 09:22:07 🕳️ कालवेला 15:23:58 - 16:15:40 🕳️ यमगण्ड 15:36:53 - 17:13:49 🕳️ गुलिक 07:32:16 - 09:09:11 🛑 दिशा शूल पश्चिम 🚩🚩 होरा 🛑शुक्र 05:55:21 - 06:59:57 🛑बुध 06:59:57 - 08:04:35 🛑चन्द्रमा 08:04:35 - 09:09:12 🛑शनि 09:09:12 - 10:13:49 🛑बृहस्पति 10:13:49 - 11:18:26 🛑मंगल 11:18:26 - 12:23:03 🛑सूर्य 12:23:03 - 13:27:40 🛑शुक्र 13:27:40 - 14:32:17 🛑बुध 14:32:17 - 15:36:54 🛑चन्द्रमा 15:36:54 - 16:41:31 🛑शनि 16:41:31 - 17:46:08 🛑बृहस्पति 17:46:08 - 18:50:45 🛑मंगल 18:50:44 - 19:46:02 🛑सूर्य 19:46:02 - 20:41:20 🛑शुक्र 20:41:20 - 21:36:37 🚩🚩 चोघडिया 🛑चल 05:55:21 - 07:32:16 ⛩️लाभ 07:32:16 - 09:09:11 ⛩️अमृत 09:09:11 - 10:46:07 😈काल 10:46:07 - 12:23:02 ⛩️शुभ 12:23:02 - 13:59:58 ☘️रोग 13:59:58 - 15:36:53 🕳️उद्वेग 15:36:53 - 17:13:49 🕳️चल 17:13:49 - 18:50:44 ☘️रोग 18:50:44 - 20:13:41 🕳️काल 20:13:41 - 21:36:37 🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴 🍁 ग्रह गोचर 🍁 🌞 सूर्य - मेष 🦌 🌙 चन्द्र - वृष 🐂 🥏 मंगल - मिथुन 👬🏼 🥏 बुध मेष 🦌 20:56 पर 🥏 बृहस्पति - कुम्भ ⚱️ 🥏 शुक्र - मेष 🦌 🥏 शनि - मकर 🐊 🥏 राहु - वृष 🐂 🥏 केतु - वृश्चिक 🦞 --------------------------------------------- 🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴 व्रत एवम् त्योहार 30अप्रैल तक 🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️ 🛑 गुरु - 15 अप्रैल भद्रा 28:47 से, गणगौरी तृतीया, श्रीमत्स्य - जयंती । 🏵️शुक्र-16 अप्रैल भद्रा 18:06 तक, 🥀बुध अश्विनी 1, मेष🦌 में 20:56, 🥀राक्षस नामक संवत्सर। 🏵️ शनि- 17 अप्रैल श्री(लक्ष्मी) पंचमी नाग पंचमी 🏵️ रवि- 18 अप्रैल स्कंद षष्ठी व्रत, 🥀शुक्र पश्चिम में उदय 23:10 🏵️ चंद्र - 19 अप्रैल भद्रा, 24:02 से, 🌞सूर्य सायन वृष 🐂 में 🥀26:05, 💥ग्रीष्म ऋतु 🥀प्रारंभ 🏵️मंगल- 20 अप्रैल भद्रा 12:23 तक श्री दुर्गा अष्टमी, भवान्युत्पत्ति, अशोक अष्टमी, मेला बाहू फोर्ट, जम्मू कांगड़ा देवी, नैना देवी (हिमाचल प्रदेश) शुक्र भरणी में 25:04, अन्नपूर्णा पूजन, अगस्त्य अस्त । 🏵️ बुध- 21 अप्रैल- श्रीदुर्गा नवमी, नवरात्र समाप्त, श्रीरामनवमी, मेला मनसा देवी (पंचकूला) समाप्त, स्नान तिथि कुंभ- महापर्व (हरिद्वार) शुक्र बाल्यत्व समाप्त 23:10, शक वैशाख प्रारंभ, गंड मूल 7:59 से। 🏵️ गुरु- 22 अप्रैल -बुध 🥀भरणी में 28:24 🏵️ शुक्र - 23 अप्रैल -भद्रा 10:42 से 21:48 तक,🥀 कामदा एकादशी व्रत, लक्ष्मीकांत दोलोत्सव, गंड मूल 7:42 तक 🏵️शनि -24 अप्रैल - शनि प्रदोष व्रत, मंगल आर्द्रा में 25:37, श्रीविष्णु दमन उत्सव । 🏵️ रवि - 25 अप्रैल - गुरु धनिष्ठा 4 में 8:35, अनंग त्रयोदशी, श्रीमहावीर जयंती (जैन)। 🏵️ चंद्र 26 अप्रैल- भद्रा 12:45 से 22:54 तक , 🥀श्रीसत्यनारायण व्रत, 🥀श्रीशिव दमन उत्सव। 🏵️ मंगल 27 अप्रैल - 🥀चैत्र पूर्णिमा, चतुर्थ (अंतिम ) शाही स्नान कुंभ पर्व (हरिद्वार),🌞 सूर्य भरणी में 18:22, श्रीहनुमान जयंती (दक्षिण -भारत), वैशाख स्नान🥀 प्रारंभ। 🏵️ मंगल वैशाख कृष्ण प्रतिपदा 🥀तिथि का क्षय॰॰ ॰॰ ॰॰ 🏵️ बुध 28 अप्रैल 🏵️ गुरु 29 अप्रैल -भद्रा 11:53 से 20:10 तक, बुध🥀 कृतिका में 13:26, गंड मूल 14:29 से। 🏵️ शुक्र 30 अप्रैल- श्री गणेश चतुर्थी व्रत, बुध🥀 वृष 🐂 में 29:41, बुध पश्चिम में 🥀उदय 19:02, सती अनुसूइया जयंती। ☘️☘️☘️☘️☘️☘️ बाजार मंदा 📉तेजी 📈30 अप्रैल तक 🛑🛑🛑 🏵️18 अप्रैल -को शुक्र पश्चिम में उदय🎇 होने से घी खांड में मामूली 📉मंदी, रूई वस्त्र सूत सन् सोना चांदी तिल चावल में तेजी 📈बनेगी। 🏵️ 20 अप्रैल -को शुक्र भरणी ☄️ में आने से सोना चांदी अफीम लाल रंग की जिन्सें सरसों तिल तेल अल्सी घी उड़द नारियल में मंदी📉 जबकि चना मूंग मोठ ग्वार तुवर रुई कपास में घटा बढ़ी के बाद तेजी 📈बनेगी। 🏵️22 अप्रैल - को बुध भरनी नक्षत्र☄️ में आकर शुक्र के साथ एक नक्षत्र संबंध बनाएगा। चावल गेहूं आदि अनाजों चने में 8 दिनों के भीतर अच्छी तेजी📈 बनेगी। 🏵️24 अप्रैल - को मंगल आर्द्रा☄️ में आने से रुई सूत कपास अलसी एरण्ड गुड़ खांड तिल तेल नमक में तेजी📈 बनेगी चांदी घी कुछ मंदे 📉रहेंगे । 🏵️ 25 अप्रैल - को गुरु धनिष्ठा☄️ में आने से गेहूं चावल जौ चना घी हल्दी सोने में कुछ मंदी📉 बने। 🏵️ 29 अप्रैल- को बुध कृतिका☄️ में आने से चांदी अफीम शेयर में विशेष घटा बढ़ी होकर मंदी बने, अनाज रूई में तेजी बनेगी 📈 🏵️30 अप्रैल - को बुध वृष🐂 राशि में आकर राहु के साथ मेल करेगा। यह योग विशेष घटा बढ़ी करके मामूली या अधिक तेजी 📈लेकर आएगा। गेहूं चना चावल मटर रुई कपास, अफीम तिल तेल आदि में अच्छी घटा बढ़ी के बाद तेजी 📈बनेगी। इसी दिन बुध पश्चिम उदय 🎇होने से सोना चांदी बैंकिंग शेयरों में अच्छी घटा 📉बढ़ी 📈रहेगी। आज का राशिफल 🛑🛑🛑 मेष🦌 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ) आज के दिन आपका ध्यान काम की बातों को छोड़ या तो मौज मस्ती में रहेगा अन्यथा एकांत में रहना पसंद करेंगे। मन से संतोषि नजर आएंगे लेकिन अंदर ही अंदर किसी विशेष कार्य को लेकर जोड़ तोड़ लगी रहेगी। स्वभाव आज भी परोपकारी ही रहेगा पूर्व में किये शुभ कर्मों के कारण शुभ समाचार भी मिलने की संभावना है मध्यान का समय भविष्य को लिये नई दिशा प्रदान करेगा। समाज के वरिष्ठ व्यक्तियों का अप्रत्याशित सहयोग मिलने से उत्साहित रहेंगे। इसके बाद का अधिकांश समय घरेलू कार्य सुलझाने में व्यतीत होगा संध्या के समय आनंद प्राप्ति के अवसर भी मिलेंगे खर्च पर नियंत्रण करने का पूरा प्रयास रहेगा फिर भी परिजनों की प्रसन्नता के लिए थोड़ा बहुत खर्च करना ही पड़ेगा। पेट संबंधित व्याधि हो सकती है। वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो) आज आपका ध्यान अनर्गल बातो में अधिक रहेगा दुसरो को सताने में आंनद आएगा लेकिन किसी की नाराजगी के बाद कि स्थिति से अनजान रहेंगे। स्वभाव में चंचलता रहेगी सभी से नरमी से पेश आएंगे परिजनों का व्यवहार भी आपके प्रति अच्छा रहेगा लेकिन उटपटांग हरकतों से आस पास के लोगो को असहज करेंगे किसी बड़े से डांट भी सुनने मिलेगी। कार्य क्षेत्र पर आज जबरदस्ती खाना पूर्ति के लिये ही कार्य करेंगे बाहर घूमना मनोरंजन की ओर ध्यान रहने से लाभ को ज्यादा महत्त्व नही देंगे। आज मध्यान के आस पास धन की आमद होने से अन्य दिनों की अपेक्षा अधिक प्रसन्नता होगी। महिलाए भी कामना पूर्ति के लिये सुबह से नाराज रहेंगी मध्यान बाद पूर्ण होने पर प्रसन्न हो जाएंगी। सेहत में संध्या बाद बदलाव आने की संभावना है सतर्क रहें। मिथुन👫 (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा) आज के दिन भी आपको सावधान रहने की सलाह है आज आपकी आशा के एकदम विपरीत दिनचर्या रहेगी। आकस्मिक धन हानि के योग बन रहे है चाहे किसी भी रूप में हो। कार्य क्षेत्र पर आज भी स्थिति नुकसान दायक रहेगी किसी भी वस्तु का संग्रह ना करे। मध्यान का समय धन संबंधित मामलों को लेकर अधिक बेचैन रहेंगे कही से कोई आशा ना दिखने से मन मे नकारात्मक भाव आएंगे। आज किसी से मदद की उम्मीद ना रखे नाही कुछ मांगे अन्यथा सामने वाले के प्रति हीं भावना आने से आगे के लिए व्यवहार खराब होंगे। संध्या का समय दिन की तुलना में बेहतर रहेगा मन ना होने पर भी मनोरंजन के अवसर मिलने से मानसिक रूप से हल्का पन आएगा। घर मे किसी से बहस ना करे सेहत नरम-गरम रहेगी। कर्क🦀 (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो) आज के दिन आपको घर के सदस्यों के साथ सार्वजनिक क्षेत्र के अनुभवियों से बहुत कुछ नया सीखने को मिलेगा। स्वभाव में आज नरमी रहेगी लेकिन अपना हित साधने के लिये क्रोध भी करेंगे। कार्य व्यवसाय आज भगवान भरोसे ही रहेगा लाभ के नजदीक पहुच कर कोई ना कोई बाधा आने से निराश होना पड़ेगा। दैनिक खर्च चलाने लायक धन भी मुश्किल से ही मिल सकेगा। मध्यान के बाद मित्र रिश्तेदारी से मिलकर मन की भड़ास निकालेंगे लेकिन ध्यान रहे परिजनों की बुराई भलाई से बचे अन्यथा बाद में ग्लानि होगी। सेहत में थोड़ा उतार चढ़ाव लगा रहेगा आंख अथवा कमर कंधे संबंधित समस्या गहरा भी सकती है। धन को लेकर व्यर्थ की भागदौड़ से बचे हासिल कुछ नही होगा। सिंह🦁 (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे) आज आप अन्य दिनों की तुलना में अधिक आलस्य करेंगे दिनचर्या धीमी गति से चलेगी। दिन के आरंभ से ही प्रत्येक कार्य में टालमटोल करेंगे लेकिन आराम ज्यादा देर नही कर पाएंगे कई दिन से लटके घरेलू कार्य सर पर आने से मजबूरी में करने पड़ेंगे अन्यथा घर मे कलह का भय रहेगा। कार्य क्षेत्र पर आज ज्यादा ध्यान नही दे सकेंगे फिर भी जरूरत के अनुसार धन की आमद थोड़े ही समय मे हो जाएगी संतोषि मन व्यर्थ के कामो से दूर रखेगा। संध्या का समय मनोरंजन में बीतेगा छोटी धार्मिक एवं पर्यटक यात्रा के योग भी बन रहे है खर्च आज आय की तुलना में दुगना होगा फिर भी अखरेगा नही। घर मे छोटी मोटी बातो पर कुछ समय के लिये अशांति बनेगी सेहत में थोड़ी नरमी रहेगी। कन्या👩🏻‍🦱 (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो) आज के दिन सेहत में सुधार आएगा लेकिन स्वभाव में चिड़चिड़ापन रहने से आस पास के लोगो को परेशानी होगी। घर एवं कार्य क्षेत्र पर लोगो को संदेह की दृष्टि से देखेंगे बाहर के लोग स्वार्थ के कारण कुछ नही कहेगे लेकिन घर मे किसी न किसी से अवश्य कहासुनी होगी। कार्य व्यवसाय से आज ज्यादा आशा ना रखें मध्यान तक मन मारके काम करेंगे लाभ भी उसी अनुसार सीमित ही होगा। घरेलू कार्य एवं परिजनों से किया वादा पूरा करने में आनाकानी करेंगे लेकिन मौज शौक के लिये तैयार रहेंगे घर मे कलह का यह भी एक कारण बन सकता है। संध्या बाद पराक्रम में वृद्धि होगी लेकिन स्वभाव पहले से अधिक रूखा भी बनेगा। तुला⚖️ (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते) आज आपका मन थोड़ा उदासीन रहेगा कार्य व्यवसाय के कारण परिजनों को समय नही दे सकेंगे इस कारण मन दुखी भी होगा परन्तु परिजनों को समझाने में असफ़ल रहेंगे। दिन के आरंभ से ही किसी महत्तवपूर्ण कार्य के सिलसिले से व्यस्त हो जाएंगे आकस्मिक यात्रा भी हो सकती है। भाग दौड़ का फल मध्यान बाद मन को तसल्ली होगी धन की आमद आज निश्चित नही रहेगी फिर भी भविष्य के लिये लाभ के सौदे पक्के होंगे। आज भी धन लाभ आवश्यकता अनुसार हो ही जायेगा लेकिन संध्या का समय अत्यंत खर्चीला रहने के कारण बचत मुश्किल से ही कर पाएंगे। सेहत उत्तम रहेगी फिर भी खाने पीने में संयम रखें। वृश्चिक🦂 (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू) आज का दिन घरेलू उलझनों को छोड़ अन्य विषयों में विजय दिलाने वाला रहेगा घर मे किसी सदस्य के कारण सामाजिक सम्मान में कमी आने की संभावना है बाद में पश्चाताप करने से पहले ही सतर्क रहें। धर्म कर्म आध्यात्म में आज रुचि कम ही रहेगी दैनिक पूजा पाठ भी व्यवहारिकता के लिये करेंगे लेकिन किसी को आवश्यकता पड़ने पर सहायता के लिये मना नहीं करेंगे। कार्य क्षेत्र पर आज कम समय मे आशाजनक लाभ मिल सकता है लेकिन इसके लिए मन को मनोरंजन पर्यटन से हटा काम पर लगाना पड़ेगा। धन की आमद कम समय मे आवश्यकता अनुसार हो जाएगा। संध्या का समय लोगो की फरमाइशें पूरी करने में बीतेगा। धनु🏹 (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे) आज के दिन आपका स्वभाव अत्यंत जिद्दी रहेगा अपनी बात को मनवाकर ही दम लेंगे घर के सदस्यों के प्रति व्यवहार में कटुता रहेगी लेकिन विरोधियो के प्रति नरमी दिखाएंगे कार्य क्षेत्र अथवा सामाजिक स्तर पर इस वजह से हानि भी हो सकती है। व्यवसायियों को क्षेत्रीय कार्य की तुलना में विदेश अथवा बाहरी कार्यो से लाभ की संभावना अधिक है धन लाभ आज सामान्य रहेगा लेकिन दिखावे के खर्च अधिक रहेंगे। मौज शौक के लिये खर्च करने से पहले सोचेंगे नही महिलाए भी आज पुरुषों की तुलना में बराबर खर्चीली रहेंगी। घर में किसी वस्तु की खरीद के लिये बड़े बुजुर्गों से मतभेद हो सकते है। यात्रा से बचे अन्यथा धन व्यय के साथ सेहत भी खराब होगी। मकर🐊 (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी) आज के दिन आपके विचार कई दिनों बाद अन्य लोगो से मेल खाएंगे। सामाजिक क्षेत्र पर आपका व्यक्तित्त्व निखरा रहेगा लेकिन घर मे आपकी दाल नही गलेगी परिजन आपके रहस्यमयी स्वभाव से चिढ़े रहेंगे। नौकरी पेशाओ के लिये दिन व्यवसायी वर्ग की तुलना में अधिक आनंद दायक रहेगा दिन भर आराम के साथ मनोरंजन के अवसर भी सुलभ होंगे लेकिन मन किसी कारण से भयभीत भी रहेगा। व्यवसायी वर्ग मध्यान तक कारोबारी माथापच्ची में रहेंगे किसी अधूरे कार्य को पूर्ण करने के बाद काम करने का मन नही करेगा। मित्र परिजनों के साथ देव यात्रा मौज-मस्ती करने का मौका मिलेगा खर्च भी आज आवश्यकता से अधिक होगा। अपने साथ परिजनों की सेहत का ख्याल रखें सर्दी संबंधित संमस्या हो सकती है। कुंभ⚱️ (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा) आज का दिन भी प्रतिकूल रहने वाला है क्रोधी स्वभाव पर नियंत्रण रखें अन्यथा परिणाम गंभीर भी हो सकते है। कुछ दिनों से चल रही नाकामयाबी का क्रोध परिजनों के ऊपर उतारने से घर का वातावरण अशांत होगा इसकी ग्लानि भी होगी लेकिन सब अस्त व्यस्त होने के बाद कोई लाभ नही होगा। परिजन किसी ना किसी बात पर जले भुने रहेंगे बेहतर रहेगा आज मौन धारण करले। कार्य क्षेत्र पर आकस्मिक लाभ होने की संभावना है इसके लिये पूरा समय भी देना पड़ेगा लेकिन व्यवसाय के अतिरिक्त भी काम रहने से ये संभव नही हो सकेगा। विरोधी पीठ पीछे सक्रिय रहेंगे सामने बोलने की हिम्मत नही जुटा पाएंगे। कुछ समय के लिये कमजोरी एवं शारीरिक दर्द की समस्या अनुभव होगी। मीन🐬 (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची) आज दिन का अधिकांश समय आलस्य में बीतेगा सेहत ठीक रहने पर भी काम करने से दूर भागेंगे व्यावसायिक क्षेत्र पर भी आज लेदेकर काम पूरा करने की वृत्ति से लाभ में कमी आएगी। धन लाभ की संभावना दिन भर लगी रहेगी लेकिन बार बार टलने से मन निराश होगा। लेखन अथवा कला के क्षेत्र से जुड़े जातको को आकस्मिक लाभ तो होगा लेकिन कटु अनुभवों से गुजरने के बाद ही। परिवार के सदस्यों में केवल स्वार्थ झलकेगा पिता से किसी बात को लेकर ठनेगी भाई बहनों से संबंध सामान्य रहने पर भी ज्यादा महत्त्व नहीं देंगे। मध्यान बाद एकांत स्थान पर भ्रमण का मन करेगा। सार्वजनिक क्षेत्र से प्रसन्नता दायक समाचार मिलेंगे लेकिन सुख बांटने वालो का अभाव खलेगा। अधूरे कार्य आज पूर्ण कर ले कल कलह क्लेश की भेंट चढ़ सकते है। ACHARYA ANIL PARASHAR, VADIC,KP ASTROLOGER. आप का जीवन मंगलमय हो । 🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️

+2 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 13 शेयर

🍁•°🌹°•🍂•°🌷°•💐•°🥀°•🌹 🔔°•🔔•°🔔°•🔔•°🔔°•🔔•°🔔 ॐ वैश्वा नराय नमः,ॐ अग्नये नमः ॐ हवीर भुजे नमः,ॐ द्रवीणोदाय नमः ॐ समवरताय नमः,ॐ ज्वलनाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय, ॐ बृहस्पतये अति यदर्यो अर्हाद् धुमाद्विभाति क्रतुमज्जनेषु । यद्दीदयच्छवस ॠतप्रजात तदस्मासु द्रविणं धेहि चित्रम् ।। ॐ ह्रीं क्लीं हूँ बृहस्पतये नमः सुप्रभातम् ॐ श्री गणेशाय नमः अथ् पंचांगम् दिनाँक 15-04-2021 बृहस्पतिवार, अक्षांश- 30°:36", रेखांश 76°:80" अम्बालाा शहर, हरियाणा पिन कोड- 134 007 🥀🍁 💐🍁🌹🌹🌾🌷☘️🥀 🙏🙏🙏🙏🙏🙏 --------------------समाप्तिकाल------------ 📒 तिथि तृतीया 15:28:59 ☄️ नक्षत्र कृत्तिका 20:33:01 🏵️ करण : 🏵️ गर 15:28:59 🏵️ वणिज 28:49:05 🔓 पक्ष शुक्ल 🏵️ योग आयुष्मान 17:18:44 🗝️ वार गुरूवार 🌄 सूर्योदय 05:56:27 🌃 चन्द्रोदय 07:46:59 🌙 चन्द्र राशि 🐂 वृषभ 🌌 सूर्यास्त 18:50:07 🌑 चन्द्रास्त 21:48:00 🔓 ऋतु वसंत 🌈 🏵️ शक सम्वत 1943 प्लव 🏵️ कलि सम्वत 5123 🏵️ दिन काल 12:53:39 🏵️ विक्रम सम्वत 2078 🏵️ मास अमांत चैत्र 🏵️ मास पूर्णिमांत चैत्र 📯 शुभ समय 🎊 अभिजित 11:57:30 - 12:49:05 🕳️दुष्टमुहूर्त : 🕳️ 10:14:21 - 11:05:56 🕳️ 15:23:49 - 16:15:24 🕳️ कंटक 15:23:49 - 16:15:24 🕳️ यमघण्ट 06:48:02 - 07:39:37 😈 राहु काल 14:00:00 - 15:36:43 🕳️ कुलिक 10:14:21 - 11:05:56 🕳️कालवेला 17:06:58 - 17:58:33 🕳️ यमगण्ड 05:56:27 - 07:33:10 🕳️ गुलिक 09:09:52 - 10:46:35 🏵️ दिशा शूल दक्षिण 🚩🚩होरा 🛑बृहस्पति 05:56:27 - 07:00:56 🛑मंगल 07:00:56 - 08:05:24 🛑सूर्य 08:05:24 - 09:09:52 🛑शुक्र 09:09:52 - 10:14:21 🛑बुध 10:14:21 - 11:18:49 🛑चन्द्रमा 11:18:49 - 12:23:18 🛑शनि 12:23:18 - 13:27:46 🛑बृहस्पति 13:27:46 - 14:32:14 🛑मंगल 14:32:14 - 15:36:43 🛑सूर्य 15:36:43 - 16:41:11 🛑शुक्र 16:41:11 - 17:45:39 🛑बुध 17:45:39 - 18:50:08 🛑चन्द्रमा 18:50:07 - 19:45:34 🛑शनि 19:45:34 - 20:41:00 🛑बृहस्पति 20:41:00 - 21:36:26 🚩🚩चोघडिया ⛩️शुभ 05:56:27 - 07:33:10 ☘️रोग 07:33:10 - 09:09:52 🕳️उद्वेग 09:09:52 - 10:46:35 🛑चल 10:46:35 - 12:23:18 ⛩️लाभ 12:23:18 - 14:00:00 😈अमृत 14:00:00 - 15:36:43 🕳️काल 15:36:43 - 17:13:25 ⛩️शुभ 17:13:25 - 18:50:07 ⛩️अमृत 18:50:07 - 20:13:17 🛑चल 20:13:17 - 21:36:26 🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴 🍁 ग्रह गोचर 🍁 🌞 सूर्य - मेष 🦌 🌙 चन्द्र - वृष 🐂 🥏 मंगल - वृष 🐂 🥏 बुध - मीन 🐬 🥏 बृहस्पति - कुम्भ ⚱️ 🥏 शुक्र - मेष 🦌 🥏 शनि - मकर 🐊 🥏 राहु - वृष 🐂 🥏 केतु - वृश्चिक 🦞 --------------------------------------------- 🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴 व्रत त्यौहार मास 09-15 अप्रैल तक ☘️🌾🌸💐🥀☘️💐🌸 🛑 गुरु - 15 अप्रैल भद्रा 28:47 से, गणगौरी तृतीया,श्री मत्स्य जयन्ती । 🌸 16 अप्रैल को बुध भी मेष🦌 राशि में आकर सूर्य 🌞एवं शुक्र के साथ मेल🔗 करेगा। अकेला बुध यद्यपि यहां मंदी कारक होता है। परंतु ग्रह योग से यहां मंदी📉 की जगह तेजी📈 बनेगी। सोना चांदी आदि धातुओं गेहूं चना जौं आदि अन्न तेल सरसों रुई कपास घी गुड़ खांड में घटा बढ़ी के बाद तेजी📈 बनेगी। आज का राशिफल 🏵️🏵️🏵️🏵️ मेष 🦌 आज का दिन आपके लिए मिश्रित परिणाम लेकर आएगा। बीमा व्यवसाय से जुड़े जातकों के लिए आज दिन उत्तम रहेगा। जीवनसाथी के साथ अच्छा समय व्यतीत होगा, लेकिन घरेलू खर्च के कारण मानसिक तनाव हो सकता है। यदि आपका कोई नया एक मामला चल रहा है, तो स्थिति आज आपके पक्ष में दिखेंगी। नौकरी मैं किसी सहयोगी के कारण आज विश्वासघात का सामना करना पड़ सकता है, इसलिए अपने कार्यों को सावधानीपूर्वक पूरा करें। विद्यार्थियों की शिक्षा में आ रही बाधा सायंकाल के समय दूर हो जाएगी। वृष 🐂 आज का दिन आपके लिए उत्तम फलदायक रहेगा। संतान के भविष्य से संबंधित कोई शुभ सूचना आज आपको प्राप्त हो सकती है। व्यापारियों को आज कोई सुखद सूचना मिल सकती है, जिसके लिए उन्हें कुछ यात्रा भी करनी पड़ेगी। सायंकाल के समय आप किसी सामाजिक समारोह में भी सम्मिलित हो सकते हैं। भाइयों की मदद से आज आपको सहयोग प्राप्त होगा। सामाजिक कार्य करने की इच्छा भी आज जागृत होगी। मामा पक्ष से लाभ होता दिख रहा है। आज किसी अतिथि का आगमन हो सकता है, जिसमें परिवार के सभी सदस्य आवभगत में लगे रहेंगे। मिथुन 👬🏼 आज का दिन राजनीति से जुड़े जातकों के लिए उत्तम रहेगा। कार्यक्षेत्र में आज आपके गुप्त शत्रु नुकसान पहुंचाने का हर संभव प्रयास करेंगे, लेकिन आपको सचेत रहना है। आज आप अपनी कार्यकुशलता से अपनी हर समस्या का समाधान निकालने का प्रयास करेंगे। आपकी आर्थिक स्थिति तनावपूर्ण हो सकती है। अपने सभी खर्चों पर नियंत्रण करें और समझदारी से धन का व्यय करें। आपकी माता जी से किसी बात को लेकर आज मनमुटाव की स्थिति बनती दिख रही है, लेकिन आपको अपनी वाणी पर नियंत्रण रखना होगा। कर्क 🦀 आज का दिन आपके जीवनसाथी की भावनाओं और आवश्यकताओं का ध्यान रखें, जिससे आपके रिश्ते में मजबूती आएगी और प्रेम जीवन सुखमय रहेगा। आज आपकी खोई हुई चीज मिलने के आसार दिख रहे हैं। विद्यार्थियों को आज गुरुजनों का सहयोग मिलेगा, जिससे वह अपने अधूरे लक्ष्यों को पूरा करने में सफल रहेंगे। प्रशासन के सहयोग से आज आपके कार्य पूरे होंगे और जरूरी दस्तावेजों भी पूरे होंगे। आज आप सामाजिक सेवा में भी कुछ धन व्यय करेंगे। विवाह योग्य जातकों के लिए आज विवाह के अच्छे अवसर प्राप्त होंगे। सिंह 🦁 आज का दिन आपके लिए कुछ निराशाजनक रहेगा। व्यापार में आज आपके प्रतिद्वंदी आपका सिर दर्द बने रहेंगे और अपने कार्यों को पूरा करने मे विध्न डाल सकते है। संतान के भविष्य से संबंधित आज आपको कोई शुभ सूचना प्राप्त हो सकती है। आपके द्वारा किए गए मार्गदर्शन से लोगों का फायदा होगा, इससे आपका सामाजिक दायरा भी बढ़ेगा, जिससे व्यक्ति आपसे मित्रता रखने की चेष्टा रखेंगे। विद्यार्थियों को शिक्षा के क्षेत्र में कुछ अड़चनें आ सकती हैं। सायंकाल के समय किसी पुराने मित्र से मुलाकात आनंददायक रहेगी। कारोबार में प्रगति होने के लाभ बनते दिख रहे हैं, जिससे आपके आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। कन्या 👩🏻‍🦱 आज का दिन आपके लिए मिश्रित फलदायक रहेगा। परिवार और कार्य क्षेत्र में काफी दिनों से बनी हुई असमंजस की स्थिति का आज अंत होगा और आपके सभी कार्य सुचारू रूप से चलते रहेंगे। किसी प्रियजन से आज आपको कोई उपहार मिल सकता है। ननिहाल पक्ष से संबंधों में मधुरता आएगी। सायंकाल का समय मौज मस्ती में व्यतीत होगा। कारोबार में आ रही रुकावट आज समाप्त होगी। नौकरी से जुड़े जातकों के लिए आज प्रमोशन मिल सकता है, लेकिन आपके कुछ नए शत्रु भी उत्पन्न हो सकते हैं, इसलिए सतर्क रहें। तुला ⚖️ छात्रों को अपने भविष्य के प्रति अधिक जागरूक रहने की आवश्यकता पड़ेगी, वह सफलता की सीढ़ी चढ़ाएंगी। व्यवसायिक यात्राएं मुश्किल भरी हो सकती है, लेकिन भविष्य में आपको उसका लाभ अवश्य मिलेगा। संतान के विवाह संबंधी समस्या खत्म होगी और व्यवस्था के प्रस्ताव पर बातचीत पूरी होती नजर आएगी। किसी सदस्य से आपको कोई अच्छा समाचार सुनने को मिलेगा। कार्यक्षेत्र में आज तरक्की होगी और अचानक धन लाभ होने के योग बनेंगे। सायंकाल का समय आप अपने माता पिता के साथ कुछ जरूरी मुद्दों पर बातचीत में व्यतीत करेंगे। वृश्चिक 🦂 आज का दिन आपके लिए मिलाजुला रहेगा। कई प्रकार के विवाद आपके सामने आ सकते हैं, लेकिन आपको धैर्य रखकर सभी को संभालना होगा। राजकीय क्षेत्र से जुड़े जातकों के लिए समय उत्तम रहेगा।, उनका मान सम्मान बढेगा। कार्य क्षेत्र में समय लगाकर अपने कार्य कौशल में सुधार लाएं, जिससे आप की मुसीबतें कम होंगी। सायंकाल के समय किसी सामाजिक राजनीतिक कार्यक्रम में समय व्यतीत होगा। पैतृक संपत्ति संबंधित विभाग विवाद का किसी बड़े आदमी की सलाह से समाधान होगा। आज आपका घरेलू और व्यावसायिक वातावरण काफी व्यस्त रहने वाला है। धनु🏹 आज का दिन आपके लिए उत्तम सफलता दायक रहेगा। यदि आप किसी विवाद से गुजर रहे हैं, तो स्थितियां आज आपके पक्ष में नजर आएंगी। आप अपनी वाणी से सभी को संतुष्ट करेंगे और कुछ भविष्य के लिए भी निर्णय लेंगे। लव लाइफ में मधुरता आएगी। यदि आपके कुछ कार्य लंबे समय से रुके हुए हैं, तो आज आप उनको पूरा करने का मन बना सकते हैं। ससुराल पक्ष से किसी व्यक्ति से आज कोई विवाद हो सकता है, लेकिन जीवन साथी इस में आपके साथ खड़े नजर आएंगे। आज अपने स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहें क्योंकि पेट से संबंधित कोई समस्या आज परेशान कर सकती है। मकर 🐊 आज का दिन आपके लिए खुशहाली लेकर आएगा। भविष्य की योजनाओं को पूरा करने के लिए विशेषज्ञ से सलाह लेंगे। व्यापार में किसी बड़े लाभ के चक्कर में भाग दौड़ करने के लिए भी तत्पर रहेंगे। सायंकाल के समय आप अपने माता-पिता की सेहत का ध्यान रखें। ससुराल पक्ष से आज आपको सहयोग प्राप्त होगा, जिससे आपके कार्य बनते नजर आएंगे। कार्यक्षेत्र में आज स्थित सुधरने लगेंगी और एक-एक करके सभी कार्य बनते चले जाएंगे। संतान आपके व्यापार में आज आपका हाथ बटायेगी। कुंभ ⚱️ आज का दिन आपके व्यापार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और आपके कार्यों में कुछ अवरोध भी उत्पन्न हो सकते हैं। आज आपको अपने पिताजी के स्वास्थ्य का ध्यान रखना होगा और उनके भीड़भाड़ वाली जगह पर जाने से पहले सुरक्षा के इंतजाम करने होंगे। मित्रों के साथ अच्छा समय व्यतीत होगा और आपको मानसिक शांति मिलेगी। आज कई कार्य एक साथ आ जाने से भागदौड़ वाली स्थिति रहेगी। जीवनसाथी का आर्थिक सहयोग मिलेगा, जिससे आप किसी नए कार्य को करने की योजना भी बना सकते हैं। मीन 🐬 आज का दिन आपके लिए उत्तम फलदायक रहेगा। आपके व्यावहारिक शिक्षा क्षेत्र का विकास होगा और नए अवसरों का फायदा उठाकर आप व्यापार की योजनाएं बनाएंगे। संतान के विवाह का प्रस्ताव आज प्रबल होगा। प्रेम जीवन में नया अध्याय जुड़ेगा। यदि कहीं निवेश करने का सोच रहे हैं, तो उसके लिए दिन उत्तम रहेगा। कर्ज से राहत मिलेगी और आपके धन कोष में वृद्धि होगी। साझेदारी में यदि कोई व्यापार करना चाहते हैं, तो भविष्य में आप को लाभ पहुंचाएगा। आपको अपने परिवार और रोजगार दोनों को ठीक तरह से संभाल कर चलना होगा, नहीं तो एक काम को सही करने के चलते दूसरा काम खराब हो सकता है। ACHARYA ANIL PARASHAR, VADIC,KP ASTROLOGER.

+23 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 62 शेयर

. ॥हरि ॐ तत्सत्॥ श्रीमद्भागवत-कथा श्रीमद्भागवत-महापुराण पोस्ट - 177 स्कन्ध - 08 अध्याय - 18 इस अध्याय में:- वामन भगवान का प्रकट होकर राजा बलि की यज्ञशाला में पधारना श्रीशुकदेव जी कहते हैं- परीक्षित! इस प्रकार जब ब्रह्मा जी ने भगवान की शक्ति और लीला की स्तुति की, तब जन्म-मृत्यु रहित भगवान अदिति के सामने प्रकट हुए। भगवान के चार भुजाएँ थीं; उनमें वे शंख, गदा, कमल और चक्र धारण किये हुए थे। कमल के समान कोमल और बड़े-बड़े नेत्र थे। पीताम्बर शोभायमान हो रहा था। विशुद्ध श्यामवर्ण का शरीर था। मकराकृति कुण्डलों की कान्ति से मुखकमल की शोभा और भी उल्लसित हो रही थी। वक्षःस्थल पर श्रीवत्स का चिह्न, हाथों में कंगन और भुजाओं में बाजूबंद, सिर पर किरीट, कमर में करधनी की लड़ियाँ और चरणों में सुन्दर नूपुर जगमगा रहे थे। भगवान गले में अपनी स्वरूपभूत वनमाला धारण किये हुए थे, जिसके चारों ओर झुंड-के-झुंड भौंरे गुंजार कर रहे थे। उनके कण्ठ में कौस्तुभ मणि सुशोभित थी। भगवान की अंग कान्ति से प्रजापति कश्यप जी के घर का अन्धकार नष्ट हो गया। उस समय दिशाएँ निर्मल हो गयीं। नदी और सरोवरों का जल स्वच्छ हो गया। प्रजा के हृदय में आनन्द की बाढ़ आ गयी। सब ऋतुएँ एक साथ अपना-अपना गुण प्रकट करने लगीं। स्वर्गलोक, अन्तरिक्ष, पृथ्वी, देवता, गौ, द्विज और पर्वत- इन सबके हृदय में हर्ष का संचार हो गया। परीक्षित! जिस समय भगवान ने जन्म ग्रहण किया, उस समय चन्द्रमा श्रवण नक्षत्र पर थे। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की श्रवण नक्षत्र वाली द्वादशी थी। अभिजित् मुहूर्त में भगवान का जन्म हुआ था। सभी नक्षत्र और तारे भगवान के जन्म को मंगलमय सूचित कर रहे थे। परीक्षित! जिस तिथि में भगवान का जन्म हुआ था, उसे ‘विजय द्वादशी’ कहते हैं। जन्म के समय सूर्य आकाश के मध्य भाग में स्थित थे। भगवान के अवतार के समय शंख, ढोल, मृदंग, डफ और नगाड़े आदि बाजे बजने लगे। इन तरह-तरह के बाजों और तुरहियों की तुमुल ध्वनि होने लगी। अप्सराएँ प्रसन्न होकर नाचने लगीं। श्रेष्ठ गन्धर्व गाने लगे। मुनि, देवता, मनु, पितर और अग्नि स्तुति करने लगे। सिद्ध, विद्याधर, किम्पुरुष, किन्नर, चारण, यक्ष, राक्षस, पक्षी, मुख्य-मुख्य नागगण और देवताओं के अनुचर नाचने-गाने एवं भूरि-भूरि प्रशंसा करने लगे तथा उन लोगों ने अदिति के आश्रम को पुष्पों की वर्षा से ढक दिया। जब अदिति ने अपने गर्भ से प्रकट हुए परम पुरुष परमात्मा देखा, तो वह अत्यन्त आश्चर्यचकित और परमानन्दित हो गयी। प्रजापति कश्यप जी भी भगवान को अपनी योगमाया से शरीर धारण किये हुए देख विस्मित हो गये और कहने लगे ‘जय हो! जय हो। परीक्षित! भगवान स्वयं अव्यक्त एवं चित्स्वरूप हैं। उन्होंने जो परम कान्तिमय आभूषण एवं आयुधों से युक्त वह शरीर ग्रहण किया था, उसी शरीर से, कश्यप और अदिति के देखते-देखते वामन ब्रह्मचारी का रूप धारण कर लिया- ठीक वैसे ही, जैसे नट अपना वेष बदल ले। क्यों न हो, भगवान की लीला तो अद्भुत है ही। भगवान को वामन ब्रह्मचारी के रूप में देखकर महर्षियों को बड़ा आनन्द हुआ। उन लोगों ने कश्यप प्रजापति को आगे करके उनके जातकर्म आदि संस्कार करवाये। जब उनका उपनयन-संस्कार होने लगा, तब गायत्री के अधिष्ठातृ-देवता स्वयं सविता ने उन्हें गायत्री का उपदेश किया। देवगुरु बृहस्पति जी ने यज्ञोपवीत और कश्यप ने मेखला दी। पृथ्वी ने कृष्णमृग का चर्म, वन के स्वामी चन्द्रमा ने दण्ड, माता अदिति ने कौपीन और कटिवस्त्र एवं आकाश के अभिमानी देवता ने वामन वेषधारी भगवान् को छत्र दिया। परीक्षित! अविनाशी प्रभु को ब्रह्मा जी ने कमण्डलु, सप्तर्षियों ने कुश और सरस्वती ने रुद्राक्ष की माला समर्पित की। इस रीति से जब वामन भगवान का उपनयन-संस्कार हुआ, तब यक्षराज कुबेर ने उनको भिक्षा का पात्र और सतीशिरोमणि जगज्जननी स्वयं भगवती उमा ने भिक्षा दी। इस प्रकार जब सब लोगों ने वटु वेषधारी भगवान का सम्मान किया, तब वे ब्रह्मर्षियों से भरी हुई सभा मे अपने ब्रह्मतेज के कारण अत्यन्त शोभायमान हुए। इसके बाद भगवान ने स्थापित और प्रज्ज्वलित अग्नि का कुशों से परिसमूहन और परिस्तरण करके पूजा की और समिधाओं से हवन किया। परीक्षित! उसी समय भगवान् ने सुना कि सब प्रकार की सामग्रियों से सम्पन्न यशस्वी बलि भृगुवंशी ब्राह्मणों के आदेशानुसार बहुत-से अश्वमेध यज्ञ कर रहे हैं, तब उन्होंने वहाँ के लिये यात्रा की। भगवान समस्त शक्तियों से युक्त हैं। उनके चलने के समय उनके भार से पृथ्वी पग-पग पर झुकने लगी। नर्मदा नदी के उत्तर तट पर ‘भृगुकच्छ’ नाम का एक बड़ा सुन्दर स्थान है। वहीं बलि के भृगुवंशी ऋत्विज श्रेष्ठ यज्ञ का अनुष्ठान करा रहे थे। उन लोगों ने दूर से ही वामन भगवान को देखा, तो उन्हें ऐसा जान पड़ा, मानो साक्षात् सूर्य देव का उदय हो रहा हो। परीक्षित! वामन भगवान् के तेज से ऋत्विज, यजमान और सदस्य-सब-के-सब निस्तेज हो गये। वे लोग सोचने लगे कि कहीं यज्ञ देखने के लिये सूर्य, अग्नि अथवा सनत्कुमार तो नहीं आ रहे हैं। भृगु के पुत्र शुक्राचार्य आदि अपने शिष्यों के साथ इसी प्रकार अनेकों कल्पनाएँ कर रहे थे। उसी समय हाथ में छत्र, दण्ड और जल से भरा कमण्डलु लिये हुए वामन भगवान ने अश्वमेध यज्ञ के मण्डप में प्रवेश किया। वे कमर में मूँज की मेखला और गले में यज्ञोपवीत धारण किये हुए थे। बगल में मृगचर्म था और सिर पर जटा थी। इसी प्रकार बौने ब्राह्मण के वेष में अपनी माया से ब्रह्मचारी बने हुए भगवान् ने जब उनके यज्ञ मण्डप में प्रवेश किया, तब भृगुवंशी ब्राह्मण उन्हें देखकर अपने शिष्यों के साथ उनके तेज से प्रभावित एवं निष्प्रभ हो गये। वे सब-के-सब अग्नियों के साथ उठ खड़े हुए और उन्होंने वामन भगवान का स्वागत-सत्कार किया। भगवान के लघु रूप के अनुरूप सारे अंग छोटे-छोटे बड़े ही मनोरम एवं दर्शनीय थे। उन्हें देखकर बलि को बड़ा आनन्द हुआ और उन्होंने वामन भगवान को एक उत्तम आसन दिया। फिर स्वागत-वाणी से उनका अभिनन्दन करके पाँव पखारे और संगरहित महापुरुषों को भी अत्यन्त मनोहर लगने वाले वामन भगवान की पूजा की। भगवान् के चरणकमलों का धोवन परममंगलमय है। उससे जीवों के सारे पाप-ताप धुल जाते हैं। स्वयं देवाधिदेव चन्द्रमौलि भगवान शंकर ने अत्यन्त भक्तिभाव से उसे अपने सिर पर धारण किया था। आज वही चरणामृत धर्म के मर्मज्ञ राजा बलि को प्राप्त हुआ। उन्होंने बड़े प्रेम से उसे अपने मस्तक पर रखा। बलि ने कहा- ब्राह्मणकुमार! आप भले पधारे। आपको मैं नमस्कार करता हूँ। आज्ञा कीजिये, मैं आपकी क्या सेवा करूँ? आर्य! ऐसा जान पड़ता है कि बड़े-बड़े ब्रह्मर्षियों की तपस्या ही स्वयं मूर्तिमान होकर मेरे सामने आयी है। आज आप मेरे घर पधारे, इससे मेरे पितर तृप्त हो गये। आज मेरा वंश पवित्र हो गया। आज मेरा यह यज्ञ सफल हो गया। ब्राह्मणकुमार! आपके पाँव पखारने से मेरे सारे पाप धुल गये और विधिपूर्वक यज्ञ करने से, अग्नि में आहुति डालने से जो फल मिलता, वह अनायास ही मिल गया। आपके इन नन्हे-नन्हे चरणों और इनके धोवन से पृथ्वी पवित्र हो गयी। ब्राह्मणकुमार! ऐसा जान पड़ता है कि आप कुछ चाहते हैं। परमपूज्य ब्रह्मचारी जी! आप जो चाहते हों- गाय, सोना, सामग्रियों से सुसज्जित घर, पवित्र अन्न, पीने की वस्तु, विवाह के लिये ब्राह्मण की कन्या, सम्पत्तियों से भरे हुए गाँव, घोड़े, हाथी, रथ-वह सब आप मुझसे माँग लीजिये। अवश्य ही वह सब मुझसे माँग लीजिये। ~~~०~~~ श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारे। हे नाथ नारायण वासुदेवाय॥ "जय जय श्री हरि" "कुमार रौनक कश्यप " ********************************************

+2 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 2 शेयर
sukhadev awari Apr 15, 2021

+61 प्रतिक्रिया 18 कॉमेंट्स • 0 शेयर
sukhadev awari Apr 14, 2021

+112 प्रतिक्रिया 16 कॉमेंट्स • 29 शेयर

. श्री श्रीचैतन्य चरित्रावली पोस्ट - 150 छोटे हरिदास को स्त्री-दर्शन का दण्ड निष्किंचनस्य भगवद्भजनोन्मुखस्य पारं परं जिगमिषोर्भवसागरस्य। संदर्शनं विषयिणामथ योषितांच हा हन्त ! हन्त ! विषभक्षणतोऽप्यसाधु॥ सचमुच संसार के आदि से सभी महापुरुष एक स्वर से निष्किंचन, भगवद्भक्त अथवा ज्ञाननिष्ठ वैरागी के लिये कामिनी और कांचन- इन दोनों वस्तुओं को विष बताते आये हैं। उन महापुरुषों ने संसार के सभी प्रिय लगने वाले पदार्थों का वर्गीकरण करके समस्त विषय-सुखों का समावेश इन दो ही शब्दों में कर दिया है। जो इन दोनों से बच गया वह इस अगाध समुद्र के परले पार पहुँच गया और जो इनमें फंस गया वह मंझधार में डुबकियां खाता बिलबिलाता रहा। कबीर दास ने क्या सुन्दर कहा है- चलन चलन सब कोइ कहे, बिरला पहुँचे कोय। एक 'कनक' अरु 'कामिनी' घाटी दुरलभ दोय॥ यथार्थ में इन दो घाटियों का पार करना अत्यन्त ही कठिन हैं, इसीलिये महापुरुष स्वयं इनसे पृथक रहकर अपने अनुयायियों को कहकर, लिखकर, प्रसन्न होकर, नाराज होकर तथा भाँति-भाँति से घुमा-फिराकर इन्हीं दो वस्तुओं से पृथक रहने का उपदेश देते हैं। त्याग और वैराग्य के साकार स्वरूप चैतन्य महाप्रभुदेव जी भी अपने विरक्त भक्तों को सदा इनसे बचे रहने का उपदेश करते और स्वयं भी उन पर कड़ी दृष्टि रखते। तभी तो आज त्यागिशिरोमणि श्रीगौर का यश सौरभ दिशा-विदिशाओं में व्याप्त हो रहा है। व्रजभूमि में असंख्यों स्थान महाप्रभु के अनुयायिकों के त्याग-वैराग्य का अभी तक स्मरण दिला रहे हैं। पाठक महात्मा हरिदास जी के नाम से तो परिचित ही होंगे। हरिदास जी वयोवृद्ध थे और सदा नाम-जप ही किया करते थे। इनके अतिरिक्त एक-दूसरे कीर्तनिया हरिदास और थे। वे हरिदास जी से अवस्था में बहुत छोटे थे, गृहत्यागी थे और महाप्रभु को सदा अपने सुमधुर स्वर से संकीर्तन सुनाया करते थे। भक्तों में वे 'छोटे हरिदास' के नाम से प्रसिद्ध थे। वे पुरी में ही प्रभु के पास रहकर भजन-संकीर्तन किया करते थे। प्रभु के समीप बहुत-से विरक्त भक्त पृथक-पृथक स्थानों में रहते थे। वे सभी भक्ति के कारण कभी-कभी प्रभु को अपने स्थान पर बुलाकर भिक्षा कराया करते थे। भक्तवत्सल गौर उनकी प्रसन्नता के निमित्त उनके यहाँ चले आते थे और उनके भोजन की प्रशंसा करते हुए भिक्षा भी पा लेते थे। वहीं पर भगवानाचार्य नाम के एक विरक्त पण्डित निवास करते थे, उनके पिता सतानन्द खां घोर संसारी पुरुष थे, उनके छोटे भाई का नाम थो गोपाल भट्टाचार्य। गोपाल श्री काशी जी से वेदान्त पढ़कर आया था, उसकी बहुत इच्छा थी कि मैं प्रभु को अपना पढ़ा हुआ शारीरकभाष्य सुनाऊं, किन्तु वहाँ तो सब श्री कृष्ण कथा के श्रोता थे। जिसे जगत प्रपंच समझना हो और जीव-ब्रह्म की एकता का निर्णय करना हो, वह वेदान्तभाष्य सुन अथवा पढ़े। जहाँ श्री कृष्ण प्रेम को ही जीवन का एकमात्र ध्येय मानने वाले पुरुष हैं, जहाँ भेदाभेद को अचिन्त्य बताकर उससे उदासीन रहकर श्रीकृष्ण कथा की ही प्रधानता दी जाती है, वहाँ पदार्थों की सिद्धि के प्रसंग को सुनना कोई क्यों पसंद करेगा। अत: स्वरूप गोस्वामी के कहने से वे भट्टाचार्य महाशय अपने वेदान्त ज्ञान को ज्यों-का-त्यों ही लेकर अपने निवास स्थान को लौट गये। आचार्य भगवान जी वहीं पुरी में रह गये। उनकी स्वरूप दामोदर जी से बड़ी घनिष्ठता थी। वे बीच-बीच में कभी-कभी प्रभु का निमन्त्रण करके उन्हें भिक्षा कराया करते थे। जगन्नाथ जी में बने-बनाये पदार्थों का भोग लगता है और भगवान के महाप्रसाद को दुकानदार बेचते भी हैं। किन्तु जो चावल बिना सिद्ध किये कच्चे ही भगवान को अर्पण किये जाते हैं, उन्हें 'प्रसादी' या 'अमानी' अन्न कहते हैं, उस का घर पर ही लोग भात बना लेते हैं। भगवान जी ने घर पर ही प्रभु के लिये भात बनाने का निश्चय किया। पाठकों को सम्भवत: शिखि माहिती का स्मरण होगा, वे श्री जगन्नाथ जी के मन्दिर में हिसाब-किताब लिखने का काम करते थे, उनके मुरारी नाम का एक छोटा भाई और माधवी नाम की एक बहिन थी। दक्षिण की यात्रा से लौटने पर सार्वभौम भट्टाचार्य ने इन तीनों भाई-बहिनों का प्रभु से परिचय कराया था। ये तीनों ही श्रीकृष्ण भक्त थे और परस्पर बड़ा ही स्नेह रखते थे। माधवी दासी परम तपस्विनी और सदाचारिणी थी। इन तीनों का ही महाप्रभु के चरणों में दृढ़ अनुराग था। महाप्रभु माधवी दासी का गणना राधा जी के गणों में करते थे। उन दिनों राधा जी के गणों में साढ़े तीन पात्रों की गणना थी- (1) स्वरूप दामोदर, (2) राय रामानन्द, (3) शिखि माहिती और आधे पात्र में माधवी देवी की गणना थी। इन तीनों का महाप्रभु के प्रति अत्यन्त ही मधुर श्रीमती जी का-सा सरस भाव था। भगवानाचार्य जी ने प्रभु के निमन्त्रण के लिये बहुत बढ़िया महीन शुक्ल चावल लाने के लिये छोटे हरिदास से कहा। छोटे हरिदास जी माधवी दासी के घर में भीतर चले गये और भीतर जाकर उनसे चावल मांगकर ले आये। आचार्य ने विधिपूर्वक चावल बनाये। कई प्रकार के शाक, दाल, पना तथा और भी कई प्रकार की चीजें उन्होंने प्रभु के निमित्त बनायीं। नियत समय पर प्रभु स्वयं आ गये। आचार्य ने इनके पैर धोये और सुन्दर स्वच्छ आसन पर बैठाकर उनके सामने भिक्षा परोसी। सुगन्धि युक्त बढ़िया चावलों को देखकर प्रभु ने पूछा- 'भगवन ! ये ऐसे सुन्दर चावल कहाँ से मंगाये?' सरलता के साथ भगवान जी ने कहा- 'प्रभो ! माधवी देवी के यहाँ से मंगाये हैं। 'सुनते ही महाप्रभु के भाव में एक प्रकार का विचित्र परिवर्तन-सा हो गया। उन्होंने गम्भीरता के साथ पूछा- 'माधवी के यहाँ से लेने कौन गया था? 'उसी प्रकार उन्होंने उत्तर दिया- 'प्रभो ! छोटे हरिदास गये थे।' यह सुनकर महाप्रभु चुप हो गये और मन-ही-मन कुछ सोचने लगे। पता नहीं वे हरिदास जी की किस बात से पहले से ही असन्तुष्ट थे। उनका नाम सुनते ही वे भिक्षा से उदासीन-से हो गये। फिर कुछ सोचकर उन्होंने भगवान के प्रसाद को प्रणाम किया और अनिच्छापूर्वक कुछ थोड़ा-बहुत प्रसाद पा लिया। आज वे प्रसाद पाते समय सदा की भाँति प्रसन्न नहीं दीखते थे, उनके हृदय में किसी गहन विषय पर द्वन्द्व-युद्ध हो रहा था। भिक्षा पाकर वे सीधे अपने स्थान पर आ गये। आते ही उन्होंने अपने निजी सेवक गोविन्द को बुलाया। हाथ जोड़े हुए गोविन्द प्रभु के सम्मुख उपस्थित हुआ। उसे देखते ही प्रभु रोष के स्वर में कुछ दृढ़ता के साथ बोले- 'देखना, आज से छोटा हरिदास हमारे यहाँ कभी न आने पावेगा। यदि उसने भूल में हमारे दरवाजे में प्रवेश किया तो फिर हम बहुत अधिक असन्तुष्ट होंगे। मेरी इस बात का ध्यान रखना और दृढ़ता के साथ इसका पालन करना।' गोविन्द सुनते ही सन्न रह गया। वह प्रभु की इस आज्ञा का कुछ भी अर्थ न समझ सका। धीरे-धीरे वह प्रभु के पास से उठकर स्वरूपगोस्वामी के पास चला गया। उसने सभी वृतान्त उनसे कह सुनाया। सभी प्रभु की इस भीषण आज्ञा को सुनकर चकित हो गये। प्रभु तो ऐसी आज्ञा कभी नहीं देते थे। वे तो पतितों से भी प्रेम करते थे, आज यह बात क्या हुई। वे लोग दौड़े-दौड़े हरिदास के पास गये और उसे सब सुनाकर पूछने लगे- 'तुमने ऐसा कोई अपराध तो नहीं कर डाला जिससे प्रभु इतने क्रुद्ध हो गये? 'इस बात के सुनते ही छोटे हरिदास का मुख सफेद पड़ गया। उसके होश-हवास उड़ गये। अत्यन्त ही दु:ख और पश्चात्ताप के स्वर में उसने कहा- 'और तो मैंने कोई अपराध किया नहीं, हाँ, भगवानाचार्य के कहने से माधवी दासी के घर से मैं थोड़े-से चावलों की भिक्षा अवश्य माँग लाया था।' सभी भक्त समझ गये कि इस बात के अंदर अवश्य ही कोई गुप्त रहस्य है। प्रभु इसी के द्वारा भक्तों को त्याग-वैराग्य की कठोरता समझाना चाहते हैं। सभी मिलकर प्रभु के पास गये और प्रभु के पैर पकड़कर प्रार्थना करने लगे- 'प्रभो ! हरिदास अपने अपराध के लिये हृदय से अत्यन्त ही दु:खी हैं। उन्हें क्षमा मिलनी चाहिये। भविष्य में उनसे ऐसी भूल कभी न होगी। उन्हें दर्शनों से वंचित न रखिये।' प्रभु ने उसी प्रकार कठोरता के स्वर में कहा- 'तुम लोग अब इस सम्बन्ध में मुझसे कुछ भी न कहो। मैं ऐसे आदमी का मुख देखना नहीं चाहता जो वैरागी वेष बनाकर स्त्रियों से सम्भाषण करता है।' अत्यन्त ही दीनता के साथ स्वरूपगोस्वामी ने कहा- 'प्रभो ! उनसे भूल हो गयी, फिर माधवी देवी तो परम साध्वी भगवदभक्ति परायणा देवी हैं, उनके दर्शनों के अपराध के ऊपर इतना कठोर दण्ड न देना चाहिये।' प्रभु ने दृढ़ता के साथ कहा- 'चाहे कोई भी क्यों न हो ! स्त्रियों से बात करने की आदत पड़ना ही विरक्त साधु के लिये ठीक नहीं। शास्त्रों में तो यहाँ तक कहा है कि अपनी सगी माता, बहिन और युवती लड़की से भी एकान्त में बातें न करनी चाहिये। ये इन्द्रियाँ इतनी प्रबल होती हैं कि अच्छे-अच्छे विद्वानों का मन भी अपनी ओर आकर्षित कर लेती हैं।' प्रभु का ऐसा दृढ़ निश्चय देखकर और उनके स्वर में दृढ़ता देखकर फिर किसी को कुछ कहने का साहस नहीं हुआ। हरिदास जी ने जब सुना कि प्रभु किसी भी तरह क्षमा करने के लिये राजी नहीं हैं, तब तो उन्होंने अन्न-जल बिलकुल छोड़ दिया। उन्हें तीन दिन बिना अन्न-जल के हो गये, किन्तु प्रभु अपने निश्चय से तिलभर भी न डिगे। तब तो स्वरूपगोस्वामी जी को बड़ी चिन्ता हुई। प्रभु के पास रहने वाले सभी विरक्त भक्त डरने लगे। उन्होंने नेत्रों से तो क्या मन से भी स्त्रियों का चिन्तन करना त्याग दिया। कुछ विरक्त स्त्रियों से भिक्षा ले आते थे, उन्होंने उनसे भिक्षा लाना ही बन्द कर दिया। स्वरूप गोस्वामी डरते-डरते एकान्त में प्रभु के पास गये। उस समय प्रभु स्वस्थ होकर कुछ सोच रहे थे। स्वरूप जी प्रणाम करके बैठ गये। प्रभु प्रसन्नता पूर्वक उनसे बातें करने लगे। प्रभु को प्रसन्न देखकर धीरे-धीरे स्वरूपगोस्वामी कहने लगे- 'प्रभो ! छोटे हरिदास ने तीन दिन से कुछ नहीं खाया है। उसके ऊपर इतनी अप्रसन्नता क्यों? उसे अपने किये का बहुत दण्ड मिल गया, अब तो उसे क्षमा मिलनी चाहिये।' प्रभु ने अत्यन्त ही स्नेह के साथ विवशता के स्वर में कहा- 'स्वरूप जी ! मैं क्या करूं? मैं स्वयं अपने को समझाने में असमर्थ हूँ। जो पुरुष साधु होकर प्रकृति संसर्ग रखता है और उनसे सम्भाषण करता है, मैं उससे बातें नहीं करना चाहता। देखो, मैं तुम्हें एक अत्यन्त ही रहस्यपूर्ण बात बताता हूँ इसे ध्यानपूर्वक सुनो और सुनकर हृदय में धारण करो, वह यह है - श्रृणु हृदयरहस्यं यत्प्रशस्तं मुनीनां न खलु न खलु योषित्सन्निधि: संनिधेय:। हरति हि हरिणाक्षी क्षिप्रमक्षिक्षुरप्रै: पिहितशमतनुत्रं चित्तमप्युत्तमानाम्॥ मैं तुमसे हृदय के रहस्य को बतलाता हूँ जिसकी ऋषि-मुनियों ने भूरि-भूरि प्रशंसा की है, उसे सुनो; (विरक्त पुरुषों को) स्त्रियों की सन्निधि में नहीं रहना चाहिये, नहीं रहना चाहिये, क्योंकि हरिणी के समान सुन्दर नेत्रों वाली कामिनी अपने तीक्ष्ण कटाक्ष-बाणों से बड़े-बड़े महापुरुषों के चित्त को भी, जो शान्ति के कवच से ढँका हुआ है, शीघ्र ही अपनी ओर खींच लेती है। इसलिये भैया ! मेरे जाने, वह भूखों मर ही क्यों न जाय अब मैं जो निश्चय कर चुका उससे हटूँगा नहीं। 'स्वरूप जी उदास मन से लौट गये। उन्होंने सोचा- 'प्रभु परमानन्दपुरी महाराज का बहुत आदर करते हैं, यदि पुरी उनसे आग्रह करें तो सम्भवतया वे मान भी जाये। 'यह सोचकर वे पुरी महाराज के पास गये। सभी भक्तों के आग्रह करने पर पुरी महाराज प्रभु से जाकर कहने के लिये राजी हो गये। वे अपनी कुटिया में से निकलकर प्रभु के शयन स्थान में गये। पुरी को अपने यहाँ आते देखकर प्रभु उठकर खड़े हो गये और उनकी यथा विधि अभ्यर्चना करके उन्हें बैठने के लिये आसन दिया। बातों-ही-बातों में पुरी जी ने हरिदास का प्रसंग छेड़ दिया और कहने लगे- 'प्रभो ! इन अल्प शक्ति वाले जीवों के साथ ऐसी कड़ाई ठीक नहीं है। बस, बहुत हो गया, अब सबको पता चल गया, अब कोई भूल से भी ऐसा व्यवहार न करेगा। अब आप उसे क्षमा कर दीजिये और अपने पास बुलाकर उसे अन्न-जल ग्रहण करने की आज्ञा दे दीजिये।' पता नहीं प्रभु ने उसका और भी पहले कोई ऐसा निन्द्य आचरण देखा था या उसके बहाने सभी भक्तों को घोर वैराग्य की शिक्षा देना चाहते थे। हमारी समझ में आ ही क्या सकता है ! महाप्रभु पुरी के कहने पर भी राजी नहीं हुए। उन्होंने उसी प्रकार दृढ़ता के स्वर में कहा- 'भगवान ! आप मेरे पूज्य हैं, आपकी उचित-अनुचित सभी प्रकार की आज्ञाओं का पालन करना मैं अपना कर्तव्य समझता हूँ, किन्तु न जाने क्यों, इस बात को मेरा हृदय स्वीकार नहीं करता। आप इस सम्बन्ध में मुझसे कुछ भी न कहें।' पुरी महाराज ने अपने वृद्धपने के सरल भाव से अपना अधिकार-सा दिखाते हुए कहा- 'प्रभो ! ऐसा हठ ठीक नहीं होता, जो हो गया सो हो गया उसके लिये इतनी ग्लानि का क्या काम? सभी अपने स्वभाव से मजबूर हैं।' प्रभु ने कुछ उत्तेजना के साथ निश्चयात्मक स्वर में कहा- 'श्रीपाद ! इसे मैं भी जानता हूँ कि सभी अपने स्वभाव से मजबूर हैं। फिर मैं ही ही इससे कैसे बच सकता हूँ। मैं भी तो ऐसा करने के लिये मजबूर ही हूँ। इसका एक ही उपाय है, आप यहाँ सभी भक्तों को साथ लेकर रहें, मैं अकेला अलालनाथ में जाकर रहूँगा। बस, ऊपर के कामों के निमित्त गोविन्द मेरे साथ वहाँ रहेगा। 'यह कहकर प्रभु ने गोविन्द को जोरों से आवाज दी और आप अपनी चद्दर को उठाकर अलालनाथ की ओर चलने लगे। जल्दी से उठकर पुरी महाराज ने प्रभु को पकड़ा और कहने लगे- 'आप स्वतन्त्र ईश्वर हैं, आपकी माया जानी नहीं जाती। पता नहीं क्या कराना चाहते हैं। अच्छी बात है, जो आपको अच्छा लगे वही कीजिये। मेरा ही यहाँ क्या रखा है? केवल आपके ही कारण मैं यहाँ ठहरा हुआ हूँ। आपके बिना मैं यहाँ रहने ही क्यों लगा? यदि आपने ऐसा निश्चय कर लिया है तो ठीक है। अब मैं इस सम्बन्ध में कभी कुछ न कहूँगा।' यह कहकर पुरी महाराज अपनी कुटिया में चले गये, प्रभु फिर वहीं लेट गये। जब स्वरूपगोस्वामी ने समझ लिया कि प्रभु अब किसी की भी न सुनेंगे तो वे जगदानन्द, भगवानाचार्य, गदाधर गोस्वामी आदि दस-पांच भक्तों के साथ छोटे हरिदास के पास गये और उसे समझाने लगे- 'उपवास करके प्राण गँवाने से क्या लाभ? जीओगे तो भगवन्नाम-जाप करोगे, स्थान पर जाकर न सही, जब प्रभु जगन्नाथ जी के दर्शनों को जाया करें तब दूरसे दर्शन कर लिया करो। उनके होकर उनके दरबार में पड़े रहोगे तो कभी-न-कभी वे प्रसन्न हो ही जायँगे।' कीर्तनिया हरिदास जी की समझ में यह बात आ गयी, उसने भक्तों के आग्रह से अन्न-जल ग्रहण कर लिया। वह नित्यप्रति दर्शनों को मन्दिर जाते समय दूर से दर्शन कर लेता और अपने को अभागा समझता हुआ कैदी की तरह जीवन बिताने लगा। उसे खाना-पीना कुछ भी अच्छा नहीं लगता था, किसी से मिलने की इच्छा नहीं होती थी, गाना-बजाना उसने एकदम छोड़ दिया। सदा वह अपने असद व्यवहार के विषय में ही सोचता रहता। होते-होते उसे संसार से एकदम वैराग्य हो गया। ऐसा प्रभुकृपाशून्य जीवन बीताना उसे भार-सा प्रतीत होने लगा। अब उसे भक्तों के सामने मुख दिखाने में भी लज्जा होने लगी। इसलिये उसने इस जीवन का अन्त करने का दृढ़ निश्चय कर लिया। श्रीकृष्ण! गोविन्द! हरे मुरारे! हे नाथ! नारायण! वासुदेव! ----------:::×:::---------- - प्रभुदत्त ब्रह्मचारी श्री श्रीचैतन्य चरित्रावली (123) गीताप्रेस (गोरखपुर) "जय जय श्री राधे" "कुमार रौनक कश्यप " *******************************************

+2 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 1 शेयर
Neha Sharma, Haryana Apr 16, 2021

💐🍂💐🍂💐🍂💐🍂💐🍂 *मेरे तो गिरिधर गोपाल दूसरो न कोई। *जाके सिर मोर मुकुट मेरो पति सोई। तात मात भ्रात बंधु आपनो न कोई॥। *छाँड़ि दी कुल की कानि कहा करिहै कोई। *संतन ढिंग बैठि-बैठि लोक लाज खोई॥ *चुनरी के किये टूक ओढ़ लीन्ही लोई। *मोती मूँगे उतार बनमाला पोई॥ *अँसुवन जल सींचि सींचि प्रेम बेलि बोई। *अब तो बेल फैल गई आणँद फल होई॥ *दूध की मथनियाँ बड़े प्रेम से बिलोई। *माखन जब काढ़ि लियो छाछा पिये कोई॥ *भगत देख राजी हुई जगत देखि रोई। *दासी "मीरा" लाल गिरिधर तारो अब मोही॥ .......*मीराबाई *जय श्री राधेकृष्णा*🙏🌸🌸 *शुभ रात्रि नमन*🙏🌸🌸 . "जीवन लक्ष्य" ये शरीर कृष्ण कृपा से मिला है और केवल कृष्ण की प्राप्ति के लिये ही मिला है। इसलिये हम को चाहे कुछ भी त्यागना पडें, सब छोड़कर कृष्ण भक्ति में तुरन्त लग जाना चाहिये। जैसे छोटा बालक कहता है कि माँ मेरी है। उससे कोई पूँछे कि माँ तेरी क्यों है तो इसका उत्तर उसके पास नहीं है। उसके मन में यह शंका ही पैदा नहीं होती कि माँ मेरी क्यों है ? माँ मेरी है बस इसमें उसको कोई सन्देह नहीं होता। इसी तरह आप भी सन्देह मत करो और यह बात दृढता से मान लो कि कृष्ण मेरे हैं। कृष्ण के सिवाय और कोई मेरा नहीं है क्योंकि वह सब छूटने वाला है। जिनके प्रति आप बहुत आसक्त रहते हैं, वे माँ-बाप, पति-पत्नी, बच्चे, रूपये, जमीन, मकान, रिश्ते-नाते आदि सब छूट जायेंगें। उनकी याद तक नहीं रहेगी। अगर याद रहने की रीत हो तो बतायें कि इस जन्म से पहले आप कहाँ थे। आपके माँ, बाप स्त्री, पुत्र कौन थे ? आपका घर कौन सा था। जैसे पहले जन्म की याद नहीं है, ऐसे ही इस जन्म की भी याद नहीं रहेगी। जिसकी याद तक नही रहेगी उसके लिये आप अकारण परेशान हो रहे हो। यह सबके अनुभव की बात है कि हमारा कोई नहीं है सब मिले हैं और विछुड जायेगें, आज नहीं तो कल इसलिये- "मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई", ऐसा मानकर मस्त हो जाओ। दुनियाँ सब की सब चली जाये तो परवाह नहीं है पर हम केवल कृष्ण के हैं, और केवल कृष्ण हमारे हैं। केवल एक मात्र यही सच है और बाकी सब झूठ। इसके सिवाय और किसी बात की ओर देखो ही मत, विचार ही मत करो। आज से कृष्ण के होकर रहो, कोई क्या कर रहा है कृष्ण जानें, हमें मतलब नहीं है। सब संसार नाराज हो जाये तो परवाह नहीं पर कृष्ण तो मेरे हैं - इस बात को पकड़ कर रखो। ----------:::×:::--------- "जय जय श्री राधेकृष्णा" 🌸🌸🙏🌸🙏🌸🌸 *************************************************

+101 प्रतिक्रिया 14 कॉमेंट्स • 30 शेयर
Mona Bhardwaj Apr 16, 2021

0 कॉमेंट्स • 0 शेयर

. "उलझे केश" एक दिन श्यामसुंदर राधाजी के बालों को संवारने लगे। कंघी करते जाएँ पर बाल उलझते जाएँ, कंघी करते-करते सब बाल आपस में उलझते चले गए उम्मीद नहीं थी की रात तक भी सुलझ जायेंगे। राधाजी की सखियाँ दूर बैठकर हंस रही थीं। काफी देर के बाद श्यामसुन्दर पसीने से तरबतर हो गए व परेशान दिखने लगे। राधाजी मस्त आँखें बंद किये इस सारे प्रसंग का आनंद ले रही थीं। सखियाँ पास आई और बोली:- किशोरी जी तुमको पता नहीं चला तुम्हारे बाल उलझ चुके हैं श्याम सुंदर से सुलझ नहीं रहे उठो उनसे कंघी वापिस लो और अपने बाल सुलझाओ। ये सुनते ही राधाजी के मुख पर अश्रुबिंदु प्रवाहित होने लगे। राधाजी बोली:- अगर श्यामसुन्दर इसी तरह चुपचाप प्रेम से मेरे बाल सुलझाते रहे तो मै चाहती हूँ कि --ये मेरे केश सारी उम्र उलझे ही रहे व श्यामसुन्दर प्रेम से इन्हें सारी उम्र सुलझाते ही रहें। ये और उलझ जाएँ ये ही मेरी तमन्ना है। ----------:::×:::---------- "जय जय श्री राधे" "कुमार रौनक कश्यप " ********************************************

+11 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 16 शेयर

भारत का एकमात्र धार्मिक सोशल नेटवर्क

Rate mymandir on the Play Store
5000 से भी ज़्यादा 5 स्टार रेटिंग
डेली-दर्शन, भजन, धार्मिक फ़ोटो और वीडियो * अपने त्योहारों और मंदिरों की फ़ोटो शेयर करें * पसंद के पोस्ट ऑफ़्लाइन सेव करें
सिर्फ़ 4.5MB