Smt Neelam Sharma
Smt Neelam Sharma Apr 19, 2021

*खाटू एक न्योता नहीं है कि "* *कोई बुलाएगा तो ही जायेगे ||* *खाटू तो रूह की भूख है "* *जिसको लग गई , वो तो जाएगा ही जाएगा ||* *जय श्री श्याम "* II HARE KRISHNA II

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कामेंट्स

kamlesh Goyal🌹🙏🙏🌹 Apr 19, 2021
राधे राधे जय श्री कृष्णा बहन ठाकुर जी की कृपा राधे रानी का आशीर्वाद सदा आप पर आपके परिवार पर बना रहे शुभ संध्या वंदन मेरी प्यारी बहन

madan pal 🌷🙏🏼 Apr 19, 2021
जय श्री राधे कृष्णा जी शूभ संख्या वंदन जी आपका हर पल शूभ मंगल हों जी जय श्री श्याम बाबा जी 🌹🌹🌹🌹🌹🌹

arvind sharma Apr 19, 2021
जय➿श्रीकृष्णाय➿नमः 🚩 जय➿श्रीकृष्णाय➿नमः जय➿श्रीकृष्णाय➿नमः 🚩 जय➿श्रीकृष्णाय➿नमः ॐ त्र्यंबकं यजामहे सुगंधिम पुष्टिवर्धनम्! उर्वारुकमिव बन्धनान मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्!! भगवान _🙏_लक्ष्मीपति नारायण,, आपको--🚩आपको* खुश* रखे स्वस्थ* रखे प्रसन्न रखे---,,आपकी सदा रक्षा करें✅ मंगल नाथ आपका मंगल करे----,,!!

dhruv wadhwani Apr 19, 2021
ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय

GOVIND CHOUHAN Apr 19, 2021
Jai Jai Jai Khatu Shyam Baba 🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🙏🙏Subh Sandhiya JII 🙏🙏

Alka Devgan Apr 19, 2021
Jai Mata Di 🙏 Matarani bless you and your family aapka har pal mangalmay n shubh ho bahna ji Matarani aap sabhi ko kushiyan pradhan karein di aap sabhi par sada kirpa karein shubh sandhya vandan bahna ji Jai Mata Di 🙏🌹🌹🌹🌹🌺🍂🌾

BK WhatsApp STATUS Apr 19, 2021
जय श्री कृष्ण शुभ रात्रि स्नेह वंदन धन्यवाद 🌹🙏🙏🙏

Gopal Jalan May 9, 2021

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*एक बहुत सुंदर कहानी* 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻 *नारद मुनि जहां भी जाते थे, बस ‘नारायण , नारायण’ कहते रहते थे।नारद को तीनों लोकों में जाने की छूट थी। वह आराम से कहीं भी आ-जा सकते थे। एक दिन उन्होंने देखा कि एक किसान परमानंद की अवस्था में अपनी जमीन जोत रहा था।नारद को यह जानने की उत्सुकता हुई कि उसके आनंद का राज क्या है, जब वह उस किसान से बात करने पहुंचे, तो वह अपनी जमीन को जोतने में इतना डूबा हुआ था, कि उसने नारद पर ध्यान भी नहीं दिया। दोपहर के समय, उसने काम से थोड़ा विराम लिया और खाना खाने के लिए एक पेड़ के नीचे बैठा। उसने बर्तन को खोला, जिसमें थोड़ा सा भोजन था। उसने सिर्फ नारायण, नारायण, नारायण’ कहा और खाने लगा। किसान अपना खाना उनके साथ बांटना चाहता था मगर जाति व्यवस्था के कारण नारद उसके साथ नहीं खा सकते थे। नारद ने पूछा, ‘तुम्हारे इस आनंद की वजह क्या है?’ किसान बोला, ‘हर दिन नारायण अपने असली रूप में मेरे सामने आते हैं। मेरे आनंद का बस यही कारण है। नारद ने उससे पूछा, तुम कौन सी साधना करते हो? किसान बोला, मुझे कुछ नहीं आता।मैं एक अज्ञानी,अनपढ़ आदमी हूं। बस सुबह उठने के बाद मैं तीन बार ‘नारायण’ बोलता हूं। अपना काम शुरू करते समय मैं तीन बार ‘नारायण’ बोलता हूं, अपना काम खत्म करने के बाद मैं फिर तीन बार ‘नारायण’ बोलता हूं। जब मैं खाता हूं, तो तीन बार ‘नारायण’ बोलता हूं और जब सोने जाता हूं, तो भी तीन बार ‘नारायण’ बोलता हूं। ’नारद ने गिना कि वह खुद 24 घंटे में कितनी बार ‘नारायण’ बोलते हैं। वह लाखों बार ऐसा करते थे, मगर फिर भी उन्हें नारायण से मिलने के लिए वैकुण्ठ तक जाना पड़ता था,जो बहुत ही दूर था,मगर खाने, हल चलाने या बाकी कामों से पहले सिर्फ तीन बार ‘नारायण’बोलने वाले इस किसान के सामने नारायण वहीं प्रकट हो जाते थे। नारद को लगा कि यह ठीक नहीं है, इसमें जरूर कहीं कोई त्रुटि है।* *वह तुरंत वैकुण्ठ पहुंच गए और उन्होंने विष्णु से पुछा, ‘मैं हर समय आपका नाम जपता रहता हूं, मगर आप मेरे सामने नहीं प्रकट नहीं होते। मुझे आकर आपके दर्शन करने पड़ते हैं। मगर उस किसान के सामने आप रोज प्रकट होते हैं और वह परमानंद में जीवन बिता रहा है!’ विष्णु ने नारद की ओर देखा और लक्ष्मी को तेल से लबालब भरा हुआ एक बर्तन लाने को कहा। उन्होंने नारद से कहा, ‘पहले आपको एक काम करना पड़ेगा।तेल से भरे इस बर्तन को भूलोक ले जाइए। मगर इसमें से एक बूंद भी तेल छलकना नहीं चाहिए।इसे वहां छोड़कर आइए, फिर हम इस प्रश्न का जवाब देंगे। ’नारद तेल से भरा बर्तन ले कर भूलोक गए, उसे वहां छोड़ कर वापस आ गए और बोले, ‘अब मेरे प्रश्न का जवाब दीजिए।’ विष्णु ने पूछा, ‘जब आप तेल से भरा यह बर्तन लेकर जा रहे थे, तो आपने कितनी बार नारायण बोला?’ नारद बोले, ‘उस समय मैं नारायण कैसे बोल सकता था? आपने कहा था कि एक बूंद तेल भी नहीं गिरना चाहिए, इसलिए मुझे पूरा ध्यान उस पर देना पड़ा। मगर वापस आते समय मैंने बहुत बार ‘नारायण’ कहा।’ विष्णु बोले, ‘यही आपके प्रश्न का जवाब है। उस किसान का जीवन तेल से भरा बर्तन ढोने जैसा है जो किसी भी पल छलक सकता है। उसे अपनी जीविका कमानी पड़ती है, उसे बहुत सारी चीजें करनी पड़ती हैं। मगर उसके बावजूद, वह नारायण बोलता है। जब आप इस बर्तन में तेल लेकर जा रहे थे, तो आपने एक बार भी नारायण नहीं कहा। यानी यह आसान तब होता है जब आपके पास करने के लिए कुछ नहीं होता।’* *इसलिए ईश्वर कहते हैं "जो अपने कर्म करते हुए भी मुझे याद करता है उसके द्वार पर उसके दुख हरने मैं स्वयं जाता हूँ और जो फुरसत मिलने पर मुझे याद करता है उसे दुख के समय मेरे द्वार पर आना होगा"* *🙏🙏 भगवत्कृपा हि केवलम्🙏🙏* *जय श्री राम*🙏🙏

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Kavita Yadav May 8, 2021

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Gopal Jalan May 7, 2021

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Gopal Jalan May 7, 2021

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Anita Sharma May 9, 2021

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