🌹हरे कृष्णा 👏 भक्तों का संसार 🙏🌹हमारा सांवर दिलदार 🌹🙏 एक उच्च कोटि के संत के श्री मुख से हमने सुना वो कह रहे थे.... . हमने 10 साल की आयु मे घर छोड़ा करीब 20 साल हम पैदल ही घूमते रहे !! . पूरे भारतवर्ष के कोने कोने मे जा कर संतो से मिले व् ज्ञान प्राप्त किया !! . . हमको हमारे गुरुजनों ने पैसा अपने पास रखने से मना किया था और ये भी कहा था की इस ज्ञान को बेचना नहीं !! . अगर कोई देता भी तो गंगा जी मे या किसी नदी तालाब मे फैंक देते !! . हमको एक दिन अचानक मन मे आया की हम कभी रेलगाड़ी मे नहीं बैठे... . चलो आज रेल द्वारा ही सफ़र करते हैं... . पर जब टिकेट चेकर आया उसने 2-4 गालियाँ दी हमको और गाडी से उतार दिया साथ मे कहा की... . महाराज हट्टे कट्टे दीखते हो कुछ काम किया करो... . कुछ पैसे जोड़ कर टिकेट खरीद कर ही रेल मे सफ़र किया करो !! . हमको तो हर बात मे प्रभु की इच्छा ही दिखती थी... . अगले स्टेशन पर हमको उतार दिया गया . हमने पैदल चलना शुरू किया की इतने मे एक बहुत ही प्यारा गोल मटोल सा छोटा सा बच्चा आया बोला.... . ये लो टिकेट और अगली ट्रेन आएगी उसमे बैठ जाना !! . हम उससे कुछ और पूछते वो इतनी देर मे जल्दी से भागता हुआ आँखों से ओझल हो गया !! . पहली बार हमने सोचा ट्रेन मे बैठे किसी सज्जन ने टिकट भिजवा दी होगी... . उसके बाद भी 2-3 बार ऐसा ही हुआ !! . हमको शक सा हुआ की ये बच्चा हर जगह कैसे पहुँच जाता है.... . और टिकेट भी उसी जगह की कैसे दे जाता है जहां हमने जाना होता है !! . हम तो ठहरे फक्कड़ संत हमको अपने प्रोग्रामे का खुद पता नहीं होता एक रात पहले की हम सुबह किधर को जायेंगे !! . हमने एक बार ठाना की हम जगन्नाथ पुरी जायेंगे सुबह ही हम उत्तरप्रदेश से पैदल ही निकलने वाले थे!! . सुबह जैसे ही हम निकले थोड़ी दूर वो ही प्यारा सा बच्चा सिर्फ पीली पीताम्बरी पहने हमारे पास आया व् हाथ पकड़ कर बोला ये लो टिकेट.... . हमने भी आज जैसे सोच रक्खा था उसका हाथ कस के पकड़ लिया व् पुछा की तुम कौन हो और तुमको कैसे पता की हमको जाना है??? . तुम्हारे पास पैसे कहाँ से आये कौन तुमको भेजता है ??? . वो बच्चा मुस्कराया और बोला बाबा मे वो ही हूँ जिसको तुम दिन रात रिझाते हो अपने भावो मे .... . बाबा तुम्हारे अंतर मे जो छिपा है जो पूरे विश्व को चलाता है मे वो ही हूँ !! . बाबा तुमने अपना सब भार मुझ पर छोड़ रक्खा है तो क्या मे तुम्हारा योगक्षेम वहन नहीं करूंगा !! . बाबा कहते हैं काफी मीठे शब्द व् आत्मा परमात्मा की एकता का ज्ञान करवा के वो बच्चा चला गया !! . हम भी बहुत दिन वहीँ उसी जगह बेसुध पड़े रहे !! . आज हम 92 साल के हो गए और शरीर छूटने को है.... . कहीं जाना हो या कुछ किसी साथी संत को जरूरत हो वो बच्चा आज भी उसी रूप मे टिकेट या भोजन या दवाई लेकर आ जाता है !! . ये भी देखो हम वृद्ध हो गए पर वो बच्चा अभी भी बच्चा ही है उसकी न उम्र बड़ी हुई है न शक्ल बदली है !! . कुछ समझे वो हमारा सांवर दिलदार ही है !! . जरूरत है तो उस प्रभु पर विश्वास करने की... . इंसान सोचता है की मे ही अपनी ताकत दिमाग व् मेहनत से सब कुछ खरीद या पा सकता हूँ.... . आप अपनी सोच बदलिए कर्म करते जाईये फल उस पर छोड़ दीजिये !! . परम पूज्य श्री प्रभु दत्त ब्रह्मचारी जी महाराज संकीर्तन लगातार करते करवाते थे !! . उनका रोम रोम संकीर्तन मय हो चुका था !! . scientist n doctors ने एक्सपेरिमेंट किया उनके पूरे शरीर ,पर उनकी heart beat व् नब्ज पर instuments लगा दिए.... . जब उस ग्राफ को उन्होंने study किया तो सिर्फ और सिर्फ हर बार उनका मंत्र ही पाया . श्री कृष्ण गोविन्द हरे.मुरारी हे नाथ नारायण वासुदेव !! जय जय श्री राधे 🙏🙏 . .

🌹हरे कृष्णा 👏
   भक्तों का संसार
🙏🌹हमारा सांवर दिलदार 🌹🙏

एक उच्च कोटि के संत के श्री मुख से हमने सुना वो कह रहे थे....
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हमने 10 साल की आयु मे घर छोड़ा करीब 20 साल हम पैदल ही घूमते रहे !! 
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पूरे भारतवर्ष के कोने कोने मे जा कर संतो से मिले व् ज्ञान प्राप्त किया !! .
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हमको हमारे गुरुजनों ने पैसा अपने पास रखने से मना किया था और ये भी कहा था की इस ज्ञान को बेचना नहीं !! 
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अगर कोई देता भी तो गंगा जी मे या किसी नदी तालाब मे फैंक देते !! 
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हमको एक दिन अचानक मन मे आया की हम कभी रेलगाड़ी मे नहीं बैठे...
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चलो आज रेल द्वारा ही सफ़र करते हैं...
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पर जब टिकेट चेकर आया उसने 2-4 गालियाँ दी हमको और गाडी से उतार दिया साथ मे कहा की... 
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महाराज हट्टे कट्टे दीखते हो कुछ काम किया करो... 
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कुछ पैसे जोड़ कर टिकेट खरीद कर ही रेल मे सफ़र किया करो !! 
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हमको तो हर बात मे प्रभु की इच्छा ही दिखती थी... 
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अगले स्टेशन पर हमको उतार दिया गया 
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हमने पैदल चलना शुरू किया की इतने मे एक बहुत ही प्यारा गोल मटोल सा छोटा सा बच्चा आया बोला.... 
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ये लो टिकेट और अगली ट्रेन आएगी उसमे बैठ जाना !!
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हम उससे कुछ और पूछते वो इतनी देर मे जल्दी से भागता हुआ आँखों से ओझल हो गया !!
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पहली बार हमने सोचा ट्रेन मे बैठे किसी सज्जन ने टिकट भिजवा दी होगी... 
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उसके बाद भी 2-3 बार ऐसा ही हुआ !! 
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हमको शक सा हुआ की ये बच्चा हर जगह कैसे पहुँच जाता है....
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और टिकेट भी उसी जगह की कैसे दे जाता है जहां हमने जाना होता है !! 
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हम तो ठहरे फक्कड़ संत हमको अपने प्रोग्रामे का खुद पता नहीं होता एक रात पहले की हम सुबह किधर को जायेंगे !! 
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हमने एक बार ठाना की हम जगन्नाथ पुरी जायेंगे सुबह ही हम उत्तरप्रदेश से पैदल ही निकलने वाले थे!! 
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सुबह जैसे ही हम निकले थोड़ी दूर वो ही प्यारा सा बच्चा सिर्फ पीली पीताम्बरी पहने हमारे पास आया व् हाथ पकड़ कर बोला ये लो टिकेट.... 
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हमने भी आज जैसे सोच रक्खा था उसका हाथ कस के पकड़ लिया व् पुछा की तुम कौन हो और तुमको कैसे पता की हमको जाना है??? 
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तुम्हारे पास पैसे कहाँ से आये कौन तुमको भेजता है ??? 
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वो बच्चा मुस्कराया और बोला बाबा मे वो ही हूँ जिसको तुम दिन रात रिझाते हो अपने भावो मे ....
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बाबा तुम्हारे अंतर मे जो छिपा है जो पूरे विश्व को चलाता है मे वो ही हूँ !! 
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बाबा तुमने अपना सब भार मुझ पर छोड़ रक्खा है तो क्या मे तुम्हारा योगक्षेम वहन नहीं करूंगा !!
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बाबा कहते हैं काफी मीठे शब्द व् आत्मा
परमात्मा की एकता का ज्ञान करवा के वो बच्चा चला गया !! 
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हम भी बहुत दिन वहीँ उसी जगह बेसुध पड़े रहे !! 
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आज हम 92 साल के हो गए और शरीर छूटने को है.... 
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कहीं जाना हो या कुछ किसी साथी संत को जरूरत हो वो बच्चा आज भी उसी रूप मे टिकेट या भोजन या दवाई लेकर आ जाता है !! 
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ये भी देखो हम वृद्ध हो गए पर वो बच्चा अभी भी बच्चा ही है उसकी न उम्र बड़ी हुई है न शक्ल बदली है !! 
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कुछ समझे वो हमारा सांवर दिलदार ही है !! 
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जरूरत है तो उस प्रभु पर विश्वास करने की... 
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इंसान सोचता है की मे ही अपनी ताकत दिमाग व् मेहनत से सब कुछ खरीद या पा सकता हूँ.... 
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आप अपनी सोच बदलिए कर्म करते जाईये फल उस पर छोड़ दीजिये !! 
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परम पूज्य श्री प्रभु दत्त ब्रह्मचारी जी महाराज संकीर्तन लगातार करते करवाते थे !!
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उनका रोम रोम संकीर्तन मय हो चुका था !! 
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scientist n doctors ने एक्सपेरिमेंट किया उनके पूरे शरीर ,पर उनकी heart beat व् नब्ज पर instuments लगा दिए.... 
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जब उस ग्राफ को उन्होंने study किया तो सिर्फ और सिर्फ हर बार उनका मंत्र ही पाया
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 श्री कृष्ण गोविन्द हरे.मुरारी 
हे नाथ नारायण वासुदेव !!

जय जय श्री राधे 🙏🙏

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कामेंट्स

manju garg Apr 21, 2019
जय श्री राधे कृष्णा

Anita Mittal May 17, 2019

🌷🌷प्रेम की डोर बहुत नाज़ुक होती है ....... !! लेकिन मजबूत भी इतनी कि वह ईश्वर को भी बाँध सकती है .....!! 🌷🌷 🌹🌹जय जय श्री राधे जी 🌹🌹 🌹🌹 राधा के प्रेम का चरणोदक 🌹🌹 --------------------------------------- देवर्षि नारद खीझ से गये थे , तीनों लोकों में राधा की स्तुति जो हो रही थी । वह स्वयं भी कृष्ण से कितना प्रेम करते हैं। इसी मानसिक संताप को छिपाये वह कृष्ण के पास पहुँचे , तो उन्होंने देखा कि कृष्ण भयंकर सिरदर्द से कराह रहे हैं । देवर्षि के हृदय में टीस उठी , पूछा , भगवन् ! क्या इस वेदना का कोई उपचार नहीं है ? क्या मेरे हृदय के रक्त से यह शांत नहीं हो सकती ? कृष्ण ने उत्तर दिया , मुझे रक्त की आवश्यकता नहीं । यदि मेरा कोई भक्त अपना चरणोदक पिला दे तो शायद शांत हो सकता है । नारद ने सोचा , भक्त का चरणोदक भगवन् के श्रीमुख में । आखिर रुक्मिणी के पास जाकर उन्होंने ये सारा हाल सुनाया । रुक्मिणी भी बोली , नहीं.! नहीं ! देवर्षि ! मैं यह पाप नहीं कर सकती । नारद जी ने लौटकर रुक्मिणी की असहमति कृष्ण के पास जाकर व्यक्त कर दी । तभी कृष्ण ने उन्हें राधा के पास भेजा । राधा ने जो सुना , तो तत्काल एक पात्र में जल लाकर अपने दोनों पैर डुबा दिये और नारद जी से बोली , देवर्षि ! इसे तत्काल कृष्ण के पास ले जाइये । मैं जानती हूँ , इससे मुझे रौरव नर्क मिलेगा , किंतु अपने प्रियतम के सुख के लिये मैं अनंत युगों तक यातना भोगने को तैयार हूँ । इसपर देवर्षि नारद समझ गये कि तीनों लोको में राधा के ही प्रेम की स्तुति क्यों हो रही है । 🌻🌻श्री राधेरानी जी की रहमतें व कृपा आपके साथ बनी रहें 🌻🌻 🌹🌹जय हो बरसाने वाली की 🌹🌹 🌹🌹जय हो वृषभानु दुलारी की 🌹🌹

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M.K.Pushpak May 18, 2019

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shuchi singhal May 18, 2019

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Mahesh Bhargava May 18, 2019

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Rachna Jerath May 18, 2019

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