मायमंदिर फ़्री कुंडली
डाउनलोड करें
Vibhor Mittal
Vibhor Mittal Nov 20, 2017

(((( फकीर का भरोसा ))))

(((( फकीर का भरोसा ))))
.
एक फकीर के घर रात चोर घुसे। घर में कुछ भी न था। सिर्फ एक कंबल था, जो फकीर ओढ़े लेटा हुआ था।
.
सर्द रात, पूर्णिमा की रात। फकीर रोने लगा, क्योंकि घर में चोर आएं और चुराने को कुछ नहीं है, इस पीड़ा से रोने लगा।
.
उसकी सिसकियां सुन कर चोरों ने पूछा कि भई क्यों रोते हो ? न रहा गया उनसे।
.
उस फकीर ने कहा कि आए थे— कभी तो आए, जीवन में पहली दफा तो आए ! यह सौभाग्य तुमने दिया!
.
मुझ फकीर को भी यह मौका दिया! लोग फकीरों के यहां चोरी करने नहीं जाते, सम्राटों के यहां जाते हैं। तुम चोरी करने क्या आए, तुमने मुझे सम्राट बना दिया!
.
क्षण भर को मुझे भी लगा कि अपने घर भी चोर आ सकते हैं! ऐसा सौभाग्य! लेकिन फिर मेरी आंखें आंसुओ से भर गई हैं,
.
मैं रोका बहुत कि कहीं तुम्हारे काम में बाधा न पड़े, लेकिन न रुक पाया, सिसकियां निकल गईं, क्योंकि घर में कुछ है नहीं।
.
तुम अगर जरा दो दिन पहले खबर कर देते तो मैं इंतजाम कर रखता। दुबारा जब आओ तो सूचना तो दे देना।
.
मैं गरीब आदमी हूं। दो—चार दिन का समय होता तो कुछ न कुछ मांग—तूंग कर इकट्ठा कर लेता।
.
अभी तो यह कंबल भर है मेरे पास, यह तुम ले जाओ। और देखो इनकार मत करना। इनकार करोगे तो मेरे हृदय को बड़ी चोट पहुंचेगी।
.
चोर तो घबड़ा गए, उनकी कुछ समझ में ही नहीं आया।
.
ऐसा आदमी उन्हें कभी मिला न था। चोरी तो जिंदगी भर से की थी, मगर आदमी से पहली बार मिलना हुआ था।
.
भीड़— भाड़ बहुत है, आदमी कहां! शक्लें हैं आदमी की, आदमी कहां!
.
पहली बार उनकी आंखों में शर्म आई, हया उठी। और पहली बार किसी के सामने नतमस्तक हुए, मना नहीं कर सके।
.
मना करके इसे क्या दुख देना, कंबल तो ले लिया। लेना भी मुश्किल! इस पर कुछ और नहीं है!
.
कंबल छूटा तो पता चला कि फकीर नंगा है। कंबल ही ओढ़े हुए था, वही एकमात्र वस्त्र था— वही ओढ़नी, वही बिछौना।
.
लेकिन फकीर ने कहा. तुम मेरी फिकर मत करो, मुझे नंगे रहने की आदत है।
.
और तुम तीन मील चल कर गांव से आए, सर्द रात, कौन घर से निकलता है। कुत्ते भी दुबके पड़े हैं।
.
तुम चुपचाप ले जाओ और दुबारा जब आओ मुझे खबर कर देना।
.
चोर तो ऐसे घबड़ा गए कि.. एकदम निकल कर बाहर हो गए। जब बाहर हो रहे थे तब फकीर चिल्लाया कि सुनो, कम से कम दरवाजा बंद करो और मुझे धन्यवाद दो
.
आदमी अजीब है, चोरों ने सोचा। और ऐसी कड़कदार उसकी आवाज थी कि उन्होंने उसे धन्यवाद दिया, दरवाजा बंद किया और भागे।
.
फिर फकीर खिड़की पर खड़े होकर दूर जाते उन चोरों को देखता रहा और उसने एक गीत लिखा—
.
जिस गीत का अर्थ है कि मैं बहुत गरीब हूं मेरा वश चलता तो आज पूर्णिमा का चांद भी आकाश से उतार कर उनको भेंट कर देता! कौन कब किसके द्वार आता है आधी रात!
.
यह आस्तिक है। इसे ईश्वर में भरोसा नहीं है, लेकिन इसे प्रत्येक व्यक्ति के ईश्वरत्व में भरोसा है।
.
कोई व्यक्ति नहीं है ईश्वर जैसा, लेकिन सभी व्यक्तियों के भीतर जो धड़क रहा है, जो प्राणों का मंदिर बनाए हुए विराजमान है,
.
जो श्वासें ले रहा है, उस फैले हुए ईश्वरत्व के सागर में इसकी आस्था है।
.
फिर चोर पकड़े गए। अदालत में मुकदमा चला, वह कंबल भी पकड़ा गया।
.
और वह कंबल तो जाना—माना कंबल था। वह उस प्रसिद्ध फकीर का कंबल था।
.
मजिस्ट्रेट तत्क्षण पहचान गया कि यह उस फकीर का कंबल है—
.
तो तुम उस गरीब फकीर के यहां से भी चोरी किए हो!
.
फकीर को बुलाया गया। और मजिस्ट्रेट ने कहा कि अगर फकीर ने कह दिया कि यह कंबल मेरा है और तुमने चुराया है,
.
तो फिर हमें और किसी प्रमाण की जरूरत नहीं है। उस आदमी का एक वक्तव्य, हजार आदमियों के वक्तव्यों से बड़ा है।
.
फिर जितनी सख्त सजा मैं तुम्हें दे सकता हूं दूंगा। फिर बाकी तुम्हारी चोरियां सिद्ध हों या न हों, मुझे फिकर नहीं है। उस एक आदमी ने अगर कह दिया...।
.
चोर तो घबड़ा रहे थे, कंप रहे थे, पसीना—पसीना हुए जा रहे थे... फकीर अदालत में आया।
.
और फकीर ने आकर मजिस्ट्रेट से कहा कि नहीं, ये लोग चोर नहीं हैं, ये बड़े भले लोग हैं।
.
मैंने कंबल भेंट किया था और इन्होंने मुझे धन्यवाद दिया था। और जब धन्यवाद दे दिया, बात खत्म हो गई।
.
मैंने कंबल दिया, इन्होंने धन्यवाद दिया। इतना ही नहीं, ये इतने भले लोग हैं कि जब बाहर निकले तो दरवाजा भी बंद कर गए थे। यह आस्तिकता है।
.
मजिस्ट्रेट ने तो चोरों को छोड़ दिया, क्योंकि फकीर ने कहा. इन्हें मत सताओ, ये प्यारे लोग हैं, अच्छे लोग हैं, भले लोग हैं।
.
फकीर के पैरों पर गिर पड़े चोर और उन्होंने कहा हमें दीक्षित करो। वे संन्यस्त हुए। और फकीर बाद में खूब हंसा।
.
और उसने कहा कि तुम संन्यास में प्रवेश कर सको इसलिए तो कंबल भेंट दिया था।
.
इसे तुम पचा थोड़े ही सकते थे। इस कंबल में मेरी सारी प्रार्थनाएं बुनी थीं। इस कंबल में मेरे सारे सिब्दों की कथा थी। यह कंबल नहीं था।
.
जैसे कबीर कहते हैं झीनी—झीनी बीनी रे चदरिया! ऐसे उस फकीर ने कहा प्रार्थनाओं से बुना था इसे! इसी को ओढ़ कर ध्यान किया था। इसमें मेरी समाधि का रंग था, गंध थी।
.
तुम इससे बच नहीं सकते थे। यह मुझे पक्का भरोसा था, कंबल ले आएगा तुमको भी। और तुम आखिर आ गए।
.
उस दिन रात आए थे, आज दिन आए। उस दिन चोर की तरह आए थे, आज शिष्य की तरह आए। मुझे भरोसा था।..


~~~~~~~~~~~~~~~~~
((((((( जय जय श्री राधे )))))))
~~~~~~~~~~~~~~~~~

+181 प्रतिक्रिया 18 कॉमेंट्स • 341 शेयर

कामेंट्स

Gopal Sajwan"कुँजा जी" Nov 20, 2017
बहुत सुंदर पोस्ट है कहानी अच्छी लगी 🍀🌹🌹🙏🙏🌹🍀🏵 जय श्री राधे कृष्णा

manoj Singh Tomar Nov 20, 2017
बहुत अच्छी लाइन हैं मॅन प्रसन्न ho गया

M.K.Jha Nov 21, 2017
अति सुन्दर

Ravi pandey Nov 21, 2017
jai shree Radhe Krishna radhe Radhe radhe Radhe radhe Radhe radhe Radhe radhe Radhe radhe Radhe radhe Radhe radhe Radhe radhe Radhe radhe Radhe Je

Miss. Sunita Devender kemar Nov 21, 2017
Vibhor Ji. aapko dil se thanks aapne eatna peyara likha ki dil ko eak eak sabed peyara laga. v v nice. Jay shri Krishna

💭 'पादना' बुरी बात नहीं है भाई !! 😛 .आज मैं ऐसे विषय पर बात कर रहा हूँ , जो इंसान के इस पृथ्वी पर आगमन के समय से ही सदा बेहद उपयोगी परन्तु बेव्हद उपेक्षित विषय रहा है, और जिसका नाम लेना भी उसी तरह असभ्यता समझी जाती है । . इसको बच्चा बच्चा जानता है ....? क्योंकि पाद ऐसा होता है जो शुरु से ही बच्चों का मनोरंजन करता है । और इसीलिये बच्चे कहीं भी पाद देते हैं..?? तब उन्हें बङे सिखाते हैं कि बेटा यूँ अचानक कहीं भी पाद देना उचित नहीं हैं..?? अब इन बङों को कौन सिखाये कि पादा भी क्या अपनी इच्छा से जाता है..?? . अरे वो तो खुद ही कभी भी कहीं भी आजाता है । अगर उदघाटक को भरी सभा में पाद आजाये तो पादेंगे नहीं क्या..? इसलिये पाद पर किसी तरह का नियंत्रण संभव ही नहीं है । . आपका यदि डाक्टरी चेकअप हो । तो ध्यान दें ...... डाक्टर ने आपसे यह सवाल भी अवश्य किया होगा कि पाद ठीक से आता है... ? क्योंकि डाक्टर जानता है कि पाद चेक करने की अभी तक कोई अल्ट्रासाउंड या एम.आर. आई. जैसी मशीन नहीं बनी...? . ये तमाम चूरन - चटनी हाजमोला जैसी गोलियों का करोङों रुपये का कारोबार केवल इसी बिन्दु पर तो निर्भर है कि जनता ठीक से पादती रहे ....? . यदि आपको दिन में 4 बार और रात को लगभग 10 बार अलग अलग तरह के पाद नहीं आते । तो आपके ये पाउडर लिपिस्टिक सब बेकार है । क्योंकि अन्दर से आपका सिस्टम बिगङ रहा है । . यदि लिवर ही ठीक से काम नहीं कर रहा तो अन्य अंगो को पोषण कहाँ से मिलेगा । इसलिये पादने में संकोच न करें और खूब पादें । क्योंकि पादना बुरी बात नहीं है भाई..? . 🚶पादों के प्रकार ....... पादों के पांच प्रकार होते हैं:- 1- पादों का राजा है "भो पाद" । हमारे पूर्वज इसे उत्तम पादम् कहते थे । यह घोषणात्मक और मर्दानगी भरा होता है । इसमें आवाज में धमक ज्यादा और बदबू कम होती है । अतएव जितनी जोर की आवाज, उतनी कम बदबू ... . 2- 'शहनाई' - हमारे पूर्वजो ने इसे मध्यमा ही कहा है । इसमें से आवाज निकलती है ठें ठें या कहें पूंऊऊऊऊऊ ....... . 3- 'खुरचनी'- जिसकी आवाज पुराने कागज के सरसराहट जैसी होती है। यह एक बार में नई निकलती है। यह एक के बाद एक कई 'पिर्र..पिर्र..पिर्र..पिर्र' की आवाज के साथ आता है । यह ज्यादा गरिष्ठ खाने से होता है । . 4- 'तबला' - तबला अपनी उद्घोषणा केवल एक फट के आवाज के साथ करता है। तबला एक खुदमुख्तार पाद है क्योंकि यह अपने मालिक के इजाजत के बगैर ही निकल जाता है। अगर बेचारा लोगों के बीच बैठा हो तो शर्म से पानी-पानी हो जाता है । . 5- 'फुस्कीं' - यह एक निःशब्द 'बदबू बम ' है । चूँकि इसमें आवाज नई होती है इसलिए ये पास बैठे व्यक्ति को बदबू का गुप्त दान देने के लिए बढ़िया है और दान देने वाला अपने नाक को बंद कर के मैने नई पादा है का दिखावा बङी आसानी से कर सकता है । लेकिन गुप्त दान देने के बाद जापानी कहावत "जो बोला , सो पादा "......याद रखते हुए लोगों को खुद ही दाता को ताङने दीजिए । आप मत बोलिए । . अब अपने पाद की श्रेणी निर्धारित करते हुए पाद का आनन्द उठाइये जम कर बेझिझक और खुलकर पादीये ....... . नोट ;— इस मेसेज को केवल व्यंग्य के तौर पर न लें जी । आपके शरीर में होने वाली कई क्रियाओं का सम्बंध है पादने से । और कम से कम आज आपको पादो की 5 श्रेणियों ( प्रकार ) का भी पता चल गया है । 💭💭 हंसी आ रही है तो शेयर करे और दूसरों को भी हंसने का मौका दें। 😀😜😀😜😀😜😀😜😀

+3 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 66 शेयर

+252 प्रतिक्रिया 34 कॉमेंट्स • 118 शेयर

+386 प्रतिक्रिया 53 कॉमेंट्स • 141 शेयर

+30 प्रतिक्रिया 7 कॉमेंट्स • 20 शेयर
Swami Lokeshanand Jun 17, 2019

आज मन बड़ी विचित्र परिस्थिति में फंसा है। चारों ओर दुख के घनघोर अंधकार ने डेरा जमा रखा है। यहाँ जब से सूर्यवंश के सूर्य पिताजी को वनवास हुआ, तब से आँसुओं की धारा सबकी आँखों से अनवरत बह रही है। दादाजी के देहावसान के बाद, बड़ी दादी खोई खोई रहती है, मुख पर तो है ही, आँखों में भी मौन उतर आया है। मंझोली दादी भी आवश्यकता अनुसार कम ही बोलती है, चुपचाप रनिवास की सब व्यवस्था संभालती है। छोटी दादी का तो पूछो ही मत, लाख बार सबने समझा कर देख लिया, पर मालूम नहीं सारी परिस्थिति का बोझ अपने सिर पर क्यूं रखे है? तीनों चाची साढ़े तेरह वर्षों से देह की सुधि भूलकर दिनरात माँ पिताजी की कुशलता की कामना करतीं हैं। बड़े चाचा को तो देखे हुए भी उतना ही समय हो गया, सुनते हैं कि नंदिग्राम में सूख कर अस्थिमात्र ही बचे हैं। छोटे चाचा जरूर कभी कभी राज्यावस्था संभालते दृष्टि में आ जाते हैं। इधर जब से आततायी पापाचारी अनाचारी दुराचारी अत्याचारी पापपुंज दुष्ट रावण, माँ को अपहृत कर ले गया, आनन्दस्वरूप पिताजी को भी वरवश, लीलावश दुख ने घेर लिया। मंझले चाचा अपने कष्ट को भुलाकर, दिन रात पिताजी को कष्ट न हो ऐसा असफल प्रयास करते हैं। उधर लंका में माँ का भी तन सूख गया है। भूख प्यास की कौन कहे, श्वास भी बमुश्किल आ जा रही है। वे तो अकेली ही नहीं हैं, अति अकेली हैं। इस परिस्थिति से उबरने का तो एक ही मार्ग है, बस एकबार किसी तरह से हमारे बड़े भैया आ जाएँ। उनके आने में देरी है, अंधेरा छंटने में देरी नहीं है। फिर तो प्रकाश हुआ ही समझो, दुख मिटा ही समझो, कष्ट कटा ही समझो। बस भैया आ जाएँ, हनुमानजी आ जाएँ। कल कथा में हनुमानजी का प्रवेश॥ अब विडियो देखें-हनुमानजी का जन्म- https://youtu.be/zMEUN8Gm0jY हनुमानजी की महिमा- https://youtu.be/iGGA-YmoUmE

+10 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 8 शेयर

+303 प्रतिक्रिया 31 कॉमेंट्स • 421 शेयर
Ajit Kumar Jun 16, 2019

BoloKumary

+5 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 0 शेयर

+8 प्रतिक्रिया 2 कॉमेंट्स • 1 शेयर

भारत का एकमात्र धार्मिक सोशल नेटवर्क

Rate mymandir on the Play Store
5000 से भी ज़्यादा 5 स्टार रेटिंग
डेली-दर्शन, भजन, धार्मिक फ़ोटो और वीडियो * अपने त्योहारों और मंदिरों की फ़ोटो शेयर करें * पसंद के पोस्ट ऑफ़्लाइन सेव करें
सिर्फ़ 4.5MB