Bhavsar Umesh
Bhavsar Umesh Jul 15, 2017

श्री राम चरित मानस ( अयोध्याकाण्ड - ( ३५ )

श्री राम चरित मानस                             ( अयोध्याकाण्ड - ( ३५ )

श्री #राम चरित मानस
( #अयोध्याकाण्ड - ( ३५ )
जय श्रीराम जी
शुभ रात्रि वन्दना
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भरतजी का श्रृंगवेरपुर पहुचना - निषाद गुह की शंका
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भरत जी का स्नेह देख प्रेम मगन हो सब ,लोग घोड़े, हाथी, रथो को छोड़ उनके साथ पैदल चलने लगे । तब राजमाता कौशल्या ने अपनी पालकी उनके पास रुकवा करके मृदु वाणी बोली- हे बेटा ! माता बलैया लेती है, तुम रथ पर चढ़ जाओ नही सारा कुटुम्ब दुखी हो जाएगा । तुम पैदल चलोगे तो सभी लोग पैदल चलेगे, मार्ग पैदल चलने योग्य नही है । माता की आज्ञा सिर चढ़ाकर , और उनके चरणों में सिर नवाकर दोनों भाई रथ पर चढ़कर चलने लगे । पहले दिन तमसा वास ( मुकाम ) करके दुसरा मुकाम गोमती पर किया । कोई दूध पर, कोई फल खाके, कुछ रात को एक समय भोजन करके ; सब लोग श्रीरामचंद्रजी के लिये नियम और व्रत करते है ।
सब लोग श्रृंगवेरपुर के समीप जा पहुचे । निषादराज ने समाचार सुन दुःखी हो ह्रदय में विचार करते है, क्या कारण है भरत वन को जा रहे है । मन में कुछ कपट भाव अवश्य है, यदि मन में कुटिलता न होती तो सेना क्यों साथ में ले चले है । सोचते छोटे भाई लक्ष्मण सहित मार् कर सुख से निष्कण्टक राज्य करूँगा । भरत जी ने राजनीति को स्थान नही दिया । पहले तो कलंक ही लगा था, अब जीवन से हाथ धोना पड़ेगा । सम्पूर्ण देवता और दैत्य वीर जुट जाये, तो भी श्रीरामचन्द्रजी को कोई जीतने वाला नही है । विष के फैले अमृतफल कभी नही फलते । ऐसा विचार के गुहँ ने अपने जाती वालो से कहां - नावो को अपने हाथो में ले लेलो , और सब घाट को अपने कब्जे में ले लो और नावो को दूर छुपा दो । हथियार सजा भरत से लड़ मरने को तैयार हो जाओ, मैं सामने से मोर्चा लूँगा और जीते जी गंगा पार नही उतरने दुँगा । युद्ध में मरण, फिर गंगा जी तट और श्रीरामचन्द्रजी के काम में क्षण भंगुर शरीर का चाहे नाश हो जाये, भरतजी श्रीरामजी के भाई और राजा और हम नीच सेवक केवट " बड़े भाग्य से ऐसी मृत्यु मिलती है । मैं स्वामी काम के लिये रण में लड़ाई करूँगा और चौदह लोको में अपने यश को उज्ज्वल कर दुँगा । श्रीरामजी के निमित्त प्राण त्याग दुँगा । मेरे दोनों हाथ में लड्डु है, जीत गया तो राम सेवक यश को प्राप्त करूँगा; और मारा गया तो श्रीरामजी की नित्य सेवा प्राप्त करूँगा ।
॥ जय जय श्री सीताराम जी ॥
क्रमशः - भाग - ३६

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Ruby Jain Apr 6, 2020

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Virtual Temple Apr 6, 2020

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Pawan Saini Apr 6, 2020

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Virtual Temple Apr 6, 2020

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Virtual Temple Apr 6, 2020

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Dr. Seema Soni Apr 6, 2020

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