Usha Gupta
Usha Gupta Apr 4, 2020

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Mavjibhai Patel Apr 4, 2020
जय हो मेरा भारत महान शुभ रात्री

madanpal singh May 28, 2020

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Dayashankar Shukla May 28, 2020

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Laxmi Narain Khinchi May 28, 2020

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💐💐आज का विचार💐💐 💐💐💐 मनुष्य का मन अनुभूतिशील है।शरीर तो संसार में रहता है, परन्तु मन को जहाँ चाहें वहां रख सकतें है,जिसमें चाहे लगा कर रख सकतें है। विचारणीय विषय यह है कि हम मन को संसार में लगाएं या भगवानमें। यदि मन को संसार में लगाकर रखतेंहै तो निश्चित रूपसे सुख और दुःख की अनुभूति होती है,क्योंकि इस संसार में सुख और दुःख दोनों है। हालांकि सुख की अनुभूति क्षणिक ही होती है।सुख क्षण भर के लिए ही आपाता है।क्योंकि मन की अनुकूल अवस्था ही सुख की अनुभूति कराती है।मन की प्रतिकूल अवस्था केवल दुःख की ही अनुभूति कराती है और इस संसार में केवल प्रतिकूल अवस्थाएँ ही अधिक है।सभी जगह प्रतिकूलता ही दिखती है।इस कारण केवल दुःख ही दुःख की अनुभूति होती है। वास्तवमें यह संसार दुःख से भरा हुआ है,इसलिए संसार को दुःखालय तथा दुःख का दरिया कहा गया है।हमें जो सांसारिक सुख की अनुभूति होती है वह वास्तविक नहीं है। यह कृत्रिम और बनावटी है। 💐💐सु प्र भा त💐

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Anjana Gupta May 28, 2020

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Manisha Mehta May 28, 2020

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Sunil bhagwat May 28, 2020

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Manisha Mehta May 28, 2020

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Manisha Mehta May 28, 2020

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