ऊँ गं गणपते नमः

ऊँ गं गणपते नमः

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प्रात: कालीन वंदन प्रिय आदरणीय साथियों 🙏🙏🙏🙏🙏
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सामान्यतः चार भुजाओं वाले श्री गणेश की प्रतिमा की ही पूजा की जाती है।लेकिन अलग अलग रंग के गणपति महाराज की कृपा और महत्व अलग अलग होता है।
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सफेद रंग के गणेश जी ज्ञानवर्धक माने जाते हैं।इनकी उपासना से ज्ञान, विद्या और बुद्धि तो मिलती ही है साथ ही परिवार मे शांति बनी रहती है।
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परीक्षा के पहले इनका स्मरण व ध्यान करने से परीक्षा में सफलता मिलती है। सफ़ेद रंग के गणपति भाग्य के लिए उत्तम माने जाते है। कार्यों में सफलता पाने के लिए सफ़ेद गणेश जी पूजा जरूर करें।
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पीले रंग के गणपति की उपासना से सब मंगल होता है।ये मंगलकारी गणेश जी होते हैं और हल्दी की तरह शुद्ध पीले होते हैं।इनकी पूजा से घर में सुख समृद्धि आती है।
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इससे घर में सुख शांति का माहौल बनता है और तरक्की के नए साधन खुलते है। पीला रंग धार्मिक कार्यों में बहुत महत्व रखता है और इसी वजह से भी भगवान् गणेश की पिली मूर्ति अपने आप में ख़ास है।
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लाल रंग के गणपति विघ्नहर्ता होते हैं।इनको दूर्वा अर्पित करके पूरी श्रद्धा से प्रार्थना करने से किसी भी प्रकार का संकट टल जाता है।
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लाल रंग के गणपति इंसान को शत्रुओं से बचाते है और साथ ही उनपर विजय पाने का भी मार्ग प्रशस्त करते है। लाल रंग के गणपति भी धार्मिक महत्व में बहुत पूजनीय माने जाते है और सच्चे मन से इनकी भक्ति का फल भी बहुत उत्तम मिलता है।
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#नोट : उक्त जानकारी सोशल मीडिया से प्राप्त किया गया है
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( #इस_आलेख_में_दी_गई_जानकारियां_धार्मिक_आस्थाओं_और_लौकिक_मान्यताओं_पर_आधारित_हैं,_जिसे_मात्र_सामान्य_जनरुचि_को_ध्यान_में_रखकर_प्रस्तुत_किया_गया_है।)
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कामेंट्स

Sajjan Singhal Apr 21, 2019

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anju mishra Apr 21, 2019

कैसे होती है उच्छिष्ट गण‍पति की साधना...  उच्छिष्ट गणपति की साधना में साधक का मुंह जूंठा होना चाहिए। जैसे पान, इलायची, सुपारी आदि कोई चीज साधना के समय मुंह में होनी चाहिए। अलग-अलग कामना के लिए अलग-अलग वस्तु का प्रयोग करना चाहिए। * वशीकरण के लौंग और इलायची का प्रयोग करना चाहिए। * किसी भी फल की कामना के लिए सुपारी का प्रयोग करना चाहिए। * अन्न या धन वृद्धि के लिए गुड़ का प्रयोग करना चाहिए। * सर्वसिद्धि के लिए ताम्बुल का प्रयोग करना चाहिए। मंत्र और विनियोग...  ।। हस्ति पिशाचि लिखे स्वाहा ।। विनियोग ॐ अस्य श्री उच्छिष्ट गणपति मंत्रस्य कंकोल ऋषि:,  विराट छन्द:, श्री उच्छि गणपति देवता,  मम अभीष्ट (जो भी कामना हो) या सर्वाभीष्ट सिद्धयर्थे जपे विनियोग:। न्यास  ॐ अस्य श्री उच्छिष्ट गणपति मंत्रस्य कंकोल ऋषि: नम: शिरीस।  विराट छन्दसे नम: मुखे। उच्छिष्ट गणपति देवता नम: हृदये। सर्वाभीष्ट सिद्धयर्थे जपे विनियोगाय नम: सर्वांगे।  ऐसा कहकर निर्दिष्ट अंगों पर हाथ लगाएं... ॐ हस्ति अंगुष्ठाभ्यां नम: हृदयाय नम: ॐ पिशाचि तर्जनीभ्यां नम: शिरसे स्वाहा ॐ लिखे मध्यमाभ्यां नम: शिखाये वषट्‍ ॐ स्वाहा अनामिकाभ्यां नम: कवचाय हुँ ॐ हस्ति पिशाचि लिखे कनिष्ठकाभ्यां नम: नैत्रत्रयाय वोषट्‍ ॐ हस्ति पिशाचि लिख स्वाहा करतल कर पृष्ठाभ्यां नम: अस्त्राय फट्‍ ध्यान ।। रक्त वर्ण त्रिनैत्र, चतुर्भुज, पाश, अंकुश, मोदक पात्र तथा हस्तिदंत धारण किए हुए। उन्मत्त गणेशजी का मैं ध्यान करता हूं। हर गणेश का फल भी अलग  गणेशजी को घी से तथा दुग्ध धारा द्वारा व जलधारा द्वारा शुद्ध करके पोंछ कर रखें तथा पूजन करें। गणेश प्रतिमा श्वेतार्क की (हस्ति चित्र पर बैठकर) बनाएं। इसे रवि पुष्य या गुरु पुष्य में बनाने का विशेष महत्व है।  * श्वेतार्क मूर्ति को गल्ले या तिजोरी में रखने से धन बढ़ता है।  * शत्रु नाश के लिए नीम की लकड़ी से बने गणेशजी की आराधना करें। * गुड़ की प्रतिमा से धन की वृद्धि होती है। आठ हजार जप नित्य कर दशांस हवन करें। भोजन से पूर्व गणपति के निमित्त ग्रास निकालें। ऐसी मान्यता है कि उच्छिष्ट गणपति की आराधना से कुबेर को नौ निधियां प्राप्त हुई थीं और विभिषण लंकापति बने थे। विशेष : इस तरह की साधना किसी योग्य गुरु या आचार्य के मार्गदर्शन में करें। क्योंकि अकेले में इस तरह के प्रयोग से व्यक्ति को नुकसान भी हो सकता है।

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|| एक अंजान सी अंतहीन दौड़ ||📚🕉️ एक किसान के घर एक दिन उसका कोई परिचित मिलने आया। उस समय वह घर पर नहीं था। उसकी पत्नी ने कहा-'वह खेत पर गए हैं। मैं बच्चे को बुलाने के लिए भेजती हूं। तब तक आप इंतजार करें।' कुछ ही देर में किसान खेत से अपने घर आ पहुंचा। उसके साथ-साथ उसका पालतू कुत्ता भी आया। कुत्ता जोरों से हांफ रहा था। उसकी यह हालत देख, मिलने आए व्यक्ति ने किसान से पूछा-'क्या तुम्हारा खेत बहुत दूर है?' किसान ने कहा-'नहीं, पास ही है। लेकिन आप ऐसा क्यों पूछ रहे हैं?' उस व्यक्ति ने कहा-'मुझे यह देखकर आश्चर्य हो रहा है कि तुम और तुम्हारा कुत्ता दोनों साथ-साथ आए, लेकिन तुम्हारे चेहरे पर रंच मात्र थकान नहीं जबकि कुत्ता बुरी तरह से हांफ रहा है।' किसान ने कहा-'मैं और कुत्ता एक ही रास्ते से घर आए हैं। मेरा खेत भी कोई खास दूर नहीं है। मैं थका नहीं हूं। मेरा कुत्ता थक गया है। इसका कारण यह है कि मैं सीधे रास्ते से चलकर घर आया हूं, मगर कुत्ता अपनी आदत से मजबूर है। वह आसपास दूसरे कुत्ते देखकर उनको भगाने के लिए उसके पीछे दौड़ता था और भौंकता हुआ वापस मेरे पास आ जाता था। फिर जैसे ही उसे और कोई कुत्ता नजर आता, वह उसके पीछे दौड़ने लगता। अपनी आदत के अनुसार उसका यह क्रम रास्ते भर जारी रहा। इसलिए वह थक गया है।' देखा जाए तो यही स्थिति आज के इंसान की भी है। जीवन के लक्ष्य तक पहुंचना यूं तो कठिन नहीं है, लेकिन लोभ,मोह अहंकार और ईर्ष्या जीव को उसके जीवन की सीधी और सरल राह से भटका रही है। अपनी क्षमता के अनुसार जिसके पास जितना है, उससे वह संतुष्ट नहीं। आज लखपति, कल करोड़पति, फिर अरबपति बनने की चाह में उलझकर इंसान दौड़ रहा है। अनेक लोग ऐसे हैं जिनके पास सब कुछ है। भरा-पूरा परिवार, कोठी, बंगला, एक से एक बढ़िया कारें, क्या कुछ नहीं है। फिर भी उनमें बहुत से दुखी रहते हैं। बड़ा आदमी बनना, धनवान बनना बुरी बात नहीं, बनना चाहिए। यह हसरत सबकी रहती है। उसके लिए स्वस्थ प्रतिस्पर्धा होगी तो थकान नहीं होगी। लेकिन दूसरों के सामने खुद को बड़ा दिखाने की चाह के चलते आदमी राह से भटक रहा है और यह भटकाव ही इंसान को थका रहा है।

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MAHESH MALHOTRA Apr 21, 2019

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