Malti Singh
Malti Singh Mar 27, 2020

🙏🙏🚩🚩JAI Mata Di 🚩🚩🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌸🌸Shubh Prabhatam 🌸🌸🙏🙏🙏

🙏🙏🚩🚩JAI Mata Di 🚩🚩🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌸🌸Shubh Prabhatam 🌸🌸🙏🙏🙏

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कामेंट्स

Mavjibhai Patel Mar 27, 2020
जय माता दी जय जय श्री राधे कृष्णा राधे कृष्णा राधे कृष्णा राधे कृष्णा राधे कृष्णा राधे कृष्णा राधे कृष्णा शुभ प्रभात

Babita Sharma Mar 27, 2020
शुभ दोपहर वंदन बहना🙏जय माता दी 🚩 मां चंद्रघंटा सदा आपका कल्याण करें आपके जीवन में सदा सुख शांति एवं समृद्धि का वास हो। शुभ नवरात्रि

Mohanmira.nigam Mar 27, 2020
Jay.shri ganesh Jay.shri maha Luxmi mata Rani ji hanuman ji Bholay.baba.ki.jay very nice

Mohanmira.nigam Mar 27, 2020
Jay.shri Chandr.Ghanta mata Rani kali.mata ji Santosi mata Rani Sarasvati mata Rani ji hanuman ji Bholay.baba.ki.jay very nice

🌹🙏जय माता दी 🌹🙏 *🔴भक्त और भगवान🙏* ************************ दो भक्त थे । एक भगवान् श्रीरामका भक्त था, दूसरा भगवान् श्रीकृष्ण का । दोनों अपने-अपने भगवान् (इष्टदेव)-को श्रेष्ठ बतलाते थे । एक बार वे जंगल में गये। वहाँ दोनों भक्त अपने-अपने भगवान को पुकारने लगे। उनका भाव यह था कि दोनों में से जो भगवान् शीघ्र आ जायँ वही श्रेष्ठ हैं। भगवान् श्रीकृष्ण शीघ्र प्रकट हो गये। इससे उनके भक्त ने उन्हें श्रेष्ठ बतला दिया। थोड़ी देर में भगवान् श्रीराम भी प्रकट हो गये। इसपर उनके भक्त ने कहा कि आपने मुझे हरा दिया; भगवान् श्रीकृष्ण तो पहले आ गये, पर आप देर से आये, जिससे मेरा अपमान हो गया ! ***** भगवान् श्रीराम ने अपने भक्तसे पूछा‒‘तूने मुझे किस रूप में याद किया था ?’ भक्त बोला ‘राजाधिराज के रूप में।’ तब भगवान् श्रीराम बोले‒‘बिना सवारी के राजाधिराज कैसे आ जायँगे। पहले सवारी तैयार होगी, तभी तो वे आयँगे !’ कृष्ण-भक्त से पूछा गया तो उसने कहा‒‘मैंने तो अपने भगवान् को गाय चराने वाले के रूप में याद किया था कि वे यहीं जंगलमें गाय चराते होंगे।’ इसीलिये वे पुकारते ही तुरन्त प्रकट हो गये। **** दुःशासन के द्वारा भरी सभा में चीर खींचे जाने के कारण द्रौपदी ने ‘द्वारकावासिन् कृष्ण’ कहकर भगवान् को पुकारा, तो भगवान् के आने में थोड़ी देर लगी। इस पर भगवान् ने द्रौपदी से कहा कि तूने मुझे ‘द्वारकावासिन्’ (द्वारका में रहने वाले) कहकर पुकारा, इसलिये मुझे द्वारका जाकर फिर वहाँ से आना पड़ा। यदि तुम कहती कि यहीं से आ जाओ तो मैं यहीं से प्रकट हो जाता। भगवान् सब जगह हैं। जहाँ हम हैं, वहीं भगवान् भी हैं। भक्त जहाँ से भगवान् को बुलाता है, वहीं से भगवान् आत हैं। भक्त की भावना के अनुसार ही भगवान् प्रकट होते हैं।

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kamlash May 8, 2020

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