Happy Thursday

Happy Thursday

Good morning

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saidas Apr 19, 2019

🌷 OM ❤ SAI ❤ RAM 🌷 श्री साईं बाबा के अनमोल विचार 💜💙💜💙💜💙💜💙💜💙 👉1. जैसा इंसान का चरित्र होता है, वैसे ही उसके मित्र होते हैं। 👉2. प्यार लोगों को करीब लाता है.. नफरत दूर ले जाती है। 👉3. जिसका का चरित्र अच्छा है, उसके अच्छे मित्र होंगे और जिसका चरित्र बुरा है, उसके इर्द-गिर्द अपने आपको मित्र कहने वाले उसके शत्रु ही घूमते रहते हैं। 👉4. स्वार्थी मत बनो। मेहनत करके अपनी रोजी-रोटी कमाओ। पैसे के पीछे मत भागो। 👉5. सच्चे और अच्छे मित्र इंसान को सदा अच्छी सलाह देते हैं। उसे बुरे रास्ते पर चलने से रोकते हैं लेकिन मित्र का चोला पहना हुआ शत्रु उसे बहकाता है, बहलाता है, भटकाता है, गलत रास्ते पर जाने की सलाह देकर काम करने के लिए उकसाता है और एक दिन इंसान अपने मित्र रुपी जाल में फंस जाता है। 👉6. ईश्वर को पाने की कोशिश करते रहो; भला होगा। 👉7. जो दूसरों को धोखा देता है, वह नहीं जानता कि उसे धोखा देने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। यही तो मालिक का न्याय है। 👉8. जहां विश्वास होता है ..वहीं विश्वासघात भी। 👉9. जो बोयेगा वही तो काटेगा इसलिए अच्छे कर्म करो, परमात्मा पर ध्यान दो, मोह माया के जाल में मत फंसो। और संमार्ग पर चलते रहो... कल्याण होगा तुम्हारा। 👉10. मिलना...बिछड़ना ये तो जिंदगी का अटूट हिस्सा है। हम सब जानते हैं फिर भी इंसान जब किसी को अपने दिल में जगह देता है तो बिछड़ते समय इंसान का दिल रोता है। 👉11. सबका मालिक एक है। 👉12. विश्वासघात वही करता है जिस पर इंसान विश्वास करता है और जब इंसान अपने विश्वास पर घात देखता है तो उसका अपना विश्वास भी डगमगा जाता है। क्यों डगमगा जाता है? क्योंकि विश्वास का अर्थ ही निश्चिंतता, निर्भयता और निर्भरता है। 👉12. गुरु के वचन चाहे कितने ही कठोर क्यों ना हो? इससे इंसान का उद्धार होता है। 👉13. जागता है.... सिर्फ दीया(दिपक)। यह दिया नहीं योगी है; परम योगी। अपने अंत तक दूसरों के लिए जलता है और दूसरों की जिंदगी को रोशन करता है। अंधेरे में रास्ता दिखाता है और जो रात के अंधेरे में काम करता है, उसको आगाह करता है कि ये मैं देख रहा हूं। 👉14. यहां कोई किसी का नहीं है। पैसा पास होता है तो दया छोड़कर भाग जाती है। कोई नाता, कोई रिश्ता पैसे से बड़ा नहीं है। पैसा भगवान से भी बड़ा है यही तो कलयुग की माया है... महिमा है। 👉15. मालिक की कृपा प्रसाद का साक्षत्कार करना है तो अपने दिल में भक्ति और विश्वास के लिए दीपक बनाकर उसमें प्रेम और श्रद्धा की ज्योति जलानी चाहिए। 👉16. असल में पैसा इंसान का दुश्मन है लेकिन इंसान अपने दुश्मन को अपने शत्रु से बड़ा दोस्त समझता है। 👉17. एक बार जिसके साथ विश्वासघात हो जाए; उसका विश्वास पर से विश्वास उठ जाता है। 👉18. पैसा साधन है सुख हासिल करने का; लेकिन पैसा कभी सुख नहीं है। 👉19. असली सुख दूसरों को सुख देने में ही मिलता है और सच्चा सुख प्रभु की भक्ति में है इसलिए मालिक को दिन रात याद करो और जन्म मरण के चक्र से मुक्त हो जाओ। 👉20. लेकिन इंसान की यही धारणा कि पैसा ही सब कुछ है.... गलत है। 👉21. याद रखो! दूसरों को कभी दुख मत दो उन्हें खुशी दो.. उनकी खुशियां छिनो मत। किसी की निंदा ना करो, किसी से नफरत नहीं क्योंकि प्यार लोगों को करीब लाता है और नफरत दूर ले जाती है। 👉22. जब तक इंसान पैसों की मोह माया के भूलभुलैया में फंसा रहेगा ;उसे पीड़ा से मुक्ति नहीं मिलेगी। 👉23. दुनिया चाहे सारे दरवाजे बंद क्यों न कर दे, इंसान का मालिक पर अटूट विश्वास रहना चाहिए। उसका विश्वास उसे सब्र करने की ताकत देता है; ऐसे समय में उसकी भक्ति ही उसकी शक्ति बन जाती है। उसकी आस्था और श्रद्धा उसे हर हाल और हालात में विश्वास दिलाती रहती है कि मालिक उसके लिए कोई ना कोई दरवाजा खोलेगा। 👉24. पैसा सब कुछ नहीं है.... पैसा ही सब कुछ होता तो हर पैसे वाला सुखी होता, दुरुस्त होता, आनंदमय में होता। 👉25. इंसान क्यों यह भूल जाता है कि भक्ति जगत नारायण की करनी चाहिए.. नगद नारायण की नहीं। 👉26. लेकिन इस संसार में कोई भी सुखी नहीं है.. तो फिर इंसान पैसों के पीछे इतना क्यों भागता है? 👉27. क्यों इंसान पैसों के लिए अपना मुंह मोड़ लेता है? जो दूसरों की आंखों को में आंसू देख कर भी उसका दिल नहीं पसीजता। 🌷 SRI SATCHIDANANDA SADGURU SAINATH MAHARAJ KI JAI 🌷

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saidas Apr 19, 2019

🌷 OM ❤ SAI ❤ RAM 🌷 अण्णा चिंचणीकर और मौसीबाई 💜💙💜💙💜💙💜💙💜💙 श्री. हेमाडपंत एक दूसरी हास्यपूर्ण कथा का वर्णन करते है, जिसमें बाबा ने शान्ति-स्थापन का कार्य किया है । दामोदर घनश्याम बाबारे, उपनाम अण्णा चिंचणीकर बाबा के भक्त थे । वे सरल, सुदृढ़ और निर्भीक प्रकृति के व्यक्ति थे । वे निडरतापूर्वक स्पष्ट भाषण करते और व्यवहार में सदैव नगद नारायण-से थे । यघपि व्यावहारिक दृष्टि से वे रुखे और असहिष्णु प्रतीत होते थे, परन्तु अन्तःकरण से कपटहीन और व्यवहार-कुशल थे । इसी कारण उन्हें बाबा विशेष प्रेम करते थे । सभी भक्त अपनी-अपनी इच्छानुसार बाबा के अंग-अंग को दबा रहे थे । बाबा का हाथे कठड़े पर रखा हुआ था । दूसरी ओर एक वृदृ विधवा उनकी सेवा कर रही थी, जिनका नाम वेणुबाई कौजलगी था । बाबा उन्हें माँ शब्द से सम्बोधित करते तथा अन्य लोग उन्हेें मौसीबाई कहते थे । वे एक शुदृ हृदय की वृदृ महिला थी । वे उस समय दोनों हाथों की अँगुलियाँ मिलाकर बाबा के शरीर को मसल रही थी । जब वे बलपूर्वक उनका पेट दबाती तो पेट और पीठ का प्रायः एकीकरण हो जाता था । बाबा भी इस दबाव के कारण यहाँ-वहाँ सरक रहे थे । अण्णा दूसरी ओर सेवा में व्यस्त थे । मौसीबाई का सिर हाथों की परिचालन क्रिया के साथ नीचे-ऊपर हो रहा था । जब इस प्रकार दोनों सेवा में जुटे थे तो अनायास ही मौसीबाई विनोदी प्रकृति की होने के कारण ताना देकर बोली कि यह अण्णा बहुत बुरा व्यक्ति है और यह मेरा चुंबन करना चाहता है । इसके केश तो पक गये है, परन्तु मेरा चुंबन करने में इसे तनिक भी लज्जा नहीं आती है । यह सुनकर अण्णा क्रोधित होकर बोले, तुम कहती हो कि मैं एक वृदृ और बुरा व्यक्ति हूँ । क्या मैं मूर्ख हूँ । तुम खुद ही छेड़खानी करके मुझसे झगड़ा कर रही हो । वहाँ उपस्थित सब लोग इस विवाद का आनन्द ले रहे थे । बाबा का स्नेह तो दोनों पर था, इसलिये उन्होंने कुशलतापूर्वक विवाद का निपटारा कर दिया । वे प्रेमपूर्वक बोले, अरे अण्णा, व्यर्थ ही क्यों झगड़ रहे हो । मेरी समझ में नहीं आता कि माँ का चुंबन करने में दोष या हानि ही क्या हैं । बाबा के शब्दों को सुनकर दोनों शान्त हो गये और सब उपस्थित लोग जी भरकर ठहाका मारकर बाबा के विनोद का आनन्द लेने लगे । (From --Sri Sai Satcharitra ) 🌷 SRI SATCHIDANANDA SADGURU SAINATH MAHARAJ KI JAI 🌷

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saidas Apr 19, 2019

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Anjana Gupta Apr 18, 2019

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amarnath patel Apr 19, 2019

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Anuradha Tiwari Apr 18, 2019

जरूर पढें - जीवन के लिए खर्च - पत्नी ने कहा - आज धोने के लिए ज्यादा कपड़े मत निकालना… पति- क्यों?? उसने कहा..- अपनी काम वाली बाई दो दिन नहीं आएगी… पति- क्यों?? पत्नी- गणपति के लिए अपने नाती से मिलने बेटी के यहाँ जा रही है, बोली थी… पति- ठीक है, अधिक कपड़े नहीं निकालता… पत्नी- और हाँ!!! गणपति के लिए पाँच सौ रूपए दे दूँ उसे? त्यौहार का बोनस.. पति- क्यों? अभी दिवाली आ ही रही है, तब दे देंगे… पत्नी- अरे नहीं बाबा!! गरीब है बेचारी, बेटी-नाती के यहाँ जा रही है, तो उसे भी अच्छा लगेगा… और इस महँगाई के दौर में उसकी पगार से त्यौहार कैसे मनाएगी बेचारी!! पति- तुम भी ना… जरूरत से ज्यादा ही भावुक हो जाती हो… पत्नी- अरे नहीं… चिंता मत करो… मैं आज का पिज्जा खाने का कार्यक्रम रद्द कर देती हूँ… खामख्वाहपाँच सौ रूपए उड़ जाएँगे, बासी पाव के उन आठ टुकड़ों के पीछे… पति- वा, वा… क्या कहने!! हमारे मुँह से पिज्जा छीनकर बाई की थाली में?? तीन दिन बाद… पोंछा लगाती हुई कामवाली बाई से पति ने पूछा... पति- क्या बाई?, कैसी रही छुट्टी? बाई- बहुत बढ़िया हुई साहब… दीदी ने पाँच सौ रूपए दिए थे ना.. त्यौहार का बोनस.. पति- तो जा आई बेटी के यहाँ…मिल ली अपने नाती से…? बाई- हाँ साब… मजा आया, दो दिन में 500 रूपए खर्च कर दिए… पति- अच्छा!! मतलब क्या किया 500 रूपए का?? बाई- नाती के लिए 150 रूपए का शर्ट, 40 रूपए की गुड़िया, बेटी को 50 रूपए के पेढे लिए, 50 रूपए के पेढे मंदिर में प्रसाद चढ़ाया, 60 रूपए किराए के लग गए.. 25 रूपए की चूड़ियाँ बेटी के लिए और जमाई के लिए 50 रूपए का बेल्ट लिया अच्छा सा… बचे हुए 75 रूपए नाती को दे दिए कॉपी-पेन्सिल खरीदने के लिए… झाड़ू-पोंछा करते हुए पूरा हिसाब उसकी ज़बान पर रटा हुआ था… पति- 500 रूपए में इतना कुछ??? वह आश्चर्य से मन ही मन विचार करने लगा...उसकी आँखों के सामने आठ टुकड़े किया हुआ बड़ा सा पिज्ज़ा घूमने लगा, एक-एक टुकड़ा उसके दिमाग में हथौड़ा मारने लगा… अपने एक पिज्जा के खर्च की तुलना वह कामवाली बाई के त्यौहारी खर्च से करने लगा… पहला टुकड़ा बच्चे की ड्रेस का, दूसरा टुकड़ा पेढे का, तीसरा टुकड़ा मंदिर का प्रसाद, चौथा किराए का, पाँचवाँ गुड़िया का, छठवां टुकड़ा चूडियों का, सातवाँ जमाई के बेल्ट का और आठवाँ टुकड़ा बच्चे की कॉपी-पेन्सिल का..आज तक उसने हमेशा पिज्जा की एक ही बाजू देखी थी, कभी पलटाकर नहीं देखा था कि पिज्जा पीछे से कैसा दिखता है… लेकिन आज कामवाली बाई ने उसे पिज्जा की दूसरी बाजू दिखा दी थी… पिज्जा के आठ टुकड़े उसे जीवन का अर्थ समझा गए थे… “जीवन के लिए खर्च” या “खर्च के लिए जीवन” का नवीन अर्थ एक झटके में उसे समझ आ गया…....!!!!🙏🏻🙏🏻🙏🏻

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prakash mehta Apr 19, 2019

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