PDJOSHI
PDJOSHI Apr 14, 2021

*🌹🌹प्रथम नवरात्रा -माँ शैलपुत्री🌹🌹* *अर्थ- पहाड़ों की पुत्री होता है।* *मुहूर्त:....* चैत्र घटस्थापना मंगलवार 13 अप्रैल 2021 को घटस्थापना मुहूर्त- 05:58 AM से 10:14 AM अवधि- 04 घण्टे 16 मिनट *नवरात्रि पूजन सामग्री:*= श्रीदुर्गा की प्रतिमा, सिंदूर, दर्पण, कंघी, केसर, कपूर, धूप, वस्त्र, बंदनवार आम के पत्तों का, पुष्प, सुपारी साबुत, दूर्वा, मेंहदी, बिंदी, हल्दी की गांठ, पिसी हुई हल्दी, पटरा, आसन, पुष्पहार, बेलपत्र, चौकी, रोली, मौली, कमलगट्टा, दीपक, दीपबत्ती, जायफल, जावित्री, नारियल, नैवेद्य, मधु, शक्कर, पंचमेवा, मिट्टी, पान, लौंग, इलायची, हवन सामग्री, कलश मिट्टी या पीतल का, पूजन के लिए थाली, सरसों सफेद और पीली, श्वेत वस्त्र, दूध, दही, ऋतुफल, गंगाजल। कौन हैं ‘महिषासुर मर्दिनी’ यानि मां दुर्गा *नवरात्रि पूजन का महत्व व विधि:* = नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा की पूजा करने से पहले कलश स्थापित किया जाता है। कलश को पांच तरह के पत्तों से सजाकर उसमें हल्दी की गांठ, सुपारी, दूर्वा रखी जाती है। कलश को स्थापित करने से पहले उसके नीचे बालू की वेदी बनाई जाती है जिसमें जौ बोये जाते हैं। मान्यता है कि जौ बोने से देवी अन्नपूर्णा प्रसन्न होती हैं। नवरात्रि पूजन के समय माँ दुर्गा की प्रतिमा को पूजा स्थल के बीचों-बीच स्थापित किया जाता है और माँ की पूजा में श्रृंगार सामग्री, रोली, चावल, माला, फूल, लाल चुनरी आदि का प्रयोग किया जाता है। कई जगह पूरे नौ दिनों तक पूजा स्थल में एक अखंड दीप भी जलाया जाता है। कलश स्थापना करने के बाद गणेश जी और मां दुर्गा की आरती करते हैं। *शैलपुत्री देवी दुर्गा* के नौ रूप में पहले स्वरूप में जानी जाती हैं। ये ही नवदुर्गाओं में प्रथम दुर्गा हैं। पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री रूप में उत्पन्न होने के कारण इनका नाम 'शैलपुत्री' पड़ा नवरात्र-पूजन में प्रथम दिवस इन्हीं की पूजा और उपासना की जाती है। इस प्रथम दिन की उपासना में योगी अपने मन को 'मूलाधार' चक्र में स्थित करते हैं। यहीं से उनकी योग साधना का प्रारंभ होता है। *श्लोक....* वन्दे वंछितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम् | वृषारूढाम् शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम् || *अर्थात*... देवी वृषभ (साँड,बैल)पर विराजित हैं। शैलपुत्री के दाहिने हाथ में त्रिशूल है और बाएं हाथ में कमल पुष्प सुशोभित है। यही नवदुर्गाओं में प्रथम दुर्गा है। नवरात्रि के प्रथम दिन देवी उपासना के अंतर्गत शैलपुत्री का पूजन करना चाहिए। *माँ की शोभा...* वृषभ-स्थिता इन माताजी के दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएँ हाथ में कमल-पुष्प सुशोभित है। अपने पूर्व जन्म में ये प्रजापति दक्ष की कन्या के रूप में उत्पन्न हुई थीं, तब इनका नाम 'सती' था। इनका विवाह भगवान शंकरजी से हुआ था। *कथा सार....* एक बार प्रजापति दक्ष ने एक बहुत बड़ा यज्ञ किया। इसमें उन्होंने सारे देवताओं को अपना-अपना यज्ञ-भाग प्राप्त करने के लिए निमंत्रित किया, किन्तु शंकरजी को उन्होंने इस यज्ञ में निमंत्रित नहीं किया। सती ने जब सुना कि उनके पिता एक अत्यंत विशाल यज्ञ का अनुष्ठान कर रहे हैं, तब वहाँ जाने के लिए उनका मन विकल हो उठा। अपनी यह इच्छा उन्होंने शंकरजी को बताई। सारी बातों पर विचार करने के बाद उन्होंने कहा- प्रजापति दक्ष किसी कारणवश हमसे रुष्ट हैं। अपने यज्ञ में उन्होंने सारे देवताओं को निमंत्रित किया है। उनके यज्ञ-भाग भी उन्हें समर्पित किए हैं, किन्तु हमें जान-बूझकर नहीं बुलाया है। कोई सूचना तक नहीं भेजी है। ऐसी स्थिति में तुम्हारा वहाँ जाना किसी प्रकार भी श्रेयस्कर नहीं होगा।' शंकरजी के इस उपदेश से सती का प्रबोध नहीं हुआ। पिता का यज्ञ देखने, वहाँ जाकर माता और बहनों से मिलने की उनकी व्यग्रता किसी प्रकार भी कम न हो सकी। उनका प्रबल आग्रह देखकर भगवान शंकरजी ने उन्हें वहाँ जाने की अनुमति दे दी। सती ने पिता के घर पहुँचकर देखा कि कोई भी उनसे आदर और प्रेम के साथ बातचीत नहीं कर रहा है। सारे लोग मुँह फेरे हुए हैं। केवल उनकी माता ने स्नेह से उन्हें गले लगाया। बहनों की बातों में व्यंग्य और उपहास के भाव भरे हुए थे। परिजनों के इस व्यवहार से उनके मन को बहुत क्लेश पहुँचा। उन्होंने यह भी देखा कि वहाँ चतुर्दिक भगवान शंकरजी के प्रति तिरस्कार का भाव भरा हुआ है। दक्ष ने उनके प्रति कुछ अपमानजनक वचन भी कहे। यह सब देखकर सती का हृदय क्षोभ, ग्लानि और क्रोध से संतप्त हो उठा। उन्होंने सोचा भगवान शंकरजी की बात न मान, यहाँ आकर मैंने बहुत बड़ी गलती की है। वे अपने पति भगवान शंकर के इस अपमान को सह न सकीं। उन्होंने अपने उस रूप को तत्क्षण वहीं योगाग्नि द्वारा जलाकर भस्म कर दिया। वज्रपात के समान इस दारुण-दुःखद घटना को सुनकर शंकरजी ने क्रुद्ध होअपने गणों को भेजकर दक्ष के उस यज्ञ का पूर्णतः विध्वंस करा दिया।

*🌹🌹प्रथम नवरात्रा -माँ शैलपुत्री🌹🌹*

*अर्थ- पहाड़ों की पुत्री होता है।*

*मुहूर्त:....*
चैत्र घटस्थापना मंगलवार 13 अप्रैल 2021 को
घटस्थापना मुहूर्त- 05:58 AM से 10:14 AM
अवधि- 04 घण्टे 16 मिनट

*नवरात्रि पूजन सामग्री:*= श्रीदुर्गा की प्रतिमा, सिंदूर, दर्पण, कंघी, केसर, कपूर, धूप, वस्त्र, बंदनवार आम के पत्तों का, पुष्प, सुपारी साबुत, दूर्वा, मेंहदी, बिंदी, हल्दी की गांठ, पिसी हुई हल्दी, पटरा, आसन, पुष्पहार, बेलपत्र, चौकी, रोली, मौली, कमलगट्टा, दीपक, दीपबत्ती, जायफल, जावित्री, नारियल, नैवेद्य, मधु, शक्कर, पंचमेवा, मिट्टी, पान, लौंग, इलायची, हवन सामग्री, कलश मिट्टी या पीतल का, पूजन के लिए थाली, सरसों सफेद और पीली, श्वेत वस्त्र, दूध, दही, ऋतुफल, गंगाजल। कौन हैं ‘महिषासुर मर्दिनी’ यानि मां दुर्गा

*नवरात्रि पूजन का महत्व व विधि:* =
नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा की पूजा करने से पहले कलश स्थापित किया जाता है। कलश को पांच तरह के पत्तों से सजाकर उसमें हल्दी की गांठ, सुपारी, दूर्वा रखी जाती है। कलश को स्थापित करने से पहले उसके नीचे बालू की वेदी बनाई जाती है जिसमें जौ बोये जाते हैं। मान्यता है कि जौ बोने से देवी अन्नपूर्णा प्रसन्न होती हैं। नवरात्रि पूजन के समय माँ दुर्गा की प्रतिमा को पूजा स्थल के बीचों-बीच स्थापित किया जाता है और माँ की पूजा में श्रृंगार सामग्री, रोली, चावल, माला, फूल, लाल चुनरी आदि का प्रयोग किया जाता है। कई जगह पूरे नौ दिनों तक पूजा स्थल में एक अखंड दीप भी जलाया जाता है। कलश स्थापना करने के बाद गणेश जी और मां दुर्गा की आरती करते हैं।

*शैलपुत्री देवी दुर्गा* के नौ रूप में पहले स्वरूप में जानी जाती हैं। ये ही नवदुर्गाओं में प्रथम दुर्गा हैं। पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री रूप में उत्पन्न होने के कारण इनका नाम 'शैलपुत्री' पड़ा  नवरात्र-पूजन में प्रथम दिवस इन्हीं की पूजा और उपासना की जाती है। इस प्रथम दिन की उपासना में योगी अपने मन को 'मूलाधार' चक्र में स्थित करते हैं। यहीं से उनकी योग साधना का प्रारंभ होता है।

*श्लोक....*
वन्दे वंछितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम् | वृषारूढाम् शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम् ||

*अर्थात*...
देवी वृषभ (साँड,बैल)पर विराजित हैं। शैलपुत्री के दाहिने हाथ में त्रिशूल है और बाएं हाथ में कमल पुष्प सुशोभित है। यही नवदुर्गाओं में प्रथम दुर्गा है। नवरात्रि के प्रथम दिन देवी उपासना के अंतर्गत शैलपुत्री का पूजन करना चाहिए।

*माँ की शोभा...*
वृषभ-स्थिता इन माताजी के दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएँ हाथ में कमल-पुष्प सुशोभित है। अपने पूर्व जन्म में ये प्रजापति दक्ष की कन्या के रूप में उत्पन्न हुई थीं,  तब इनका नाम 'सती' था। इनका विवाह भगवान शंकरजी से हुआ था।

*कथा सार....*
एक बार प्रजापति दक्ष ने एक बहुत बड़ा यज्ञ किया। इसमें उन्होंने सारे देवताओं को अपना-अपना यज्ञ-भाग प्राप्त करने के लिए निमंत्रित किया, किन्तु शंकरजी को उन्होंने इस यज्ञ में निमंत्रित नहीं किया। सती ने जब सुना कि उनके पिता एक अत्यंत विशाल यज्ञ का अनुष्ठान कर रहे हैं, तब वहाँ जाने के लिए उनका मन विकल हो उठा।

अपनी यह इच्छा उन्होंने शंकरजी को बताई। सारी बातों पर विचार करने के बाद उन्होंने कहा- प्रजापति दक्ष किसी कारणवश हमसे रुष्ट हैं। अपने यज्ञ में उन्होंने सारे देवताओं को निमंत्रित किया है। उनके यज्ञ-भाग भी उन्हें समर्पित किए हैं, किन्तु हमें जान-बूझकर नहीं बुलाया है। कोई सूचना तक नहीं भेजी है। ऐसी स्थिति में तुम्हारा वहाँ जाना किसी प्रकार भी श्रेयस्कर नहीं होगा।'

शंकरजी के इस उपदेश से सती का प्रबोध नहीं हुआ। पिता का यज्ञ देखने, वहाँ जाकर माता और बहनों से मिलने की उनकी व्यग्रता किसी प्रकार भी कम न हो सकी। उनका प्रबल आग्रह देखकर भगवान शंकरजी ने उन्हें वहाँ जाने की अनुमति दे दी।

सती ने पिता के घर पहुँचकर देखा कि कोई भी उनसे आदर और प्रेम के साथ बातचीत नहीं कर रहा है। सारे लोग मुँह फेरे हुए हैं। केवल उनकी माता ने स्नेह से उन्हें गले लगाया। बहनों की बातों में व्यंग्य और उपहास के भाव भरे हुए थे।

परिजनों के इस व्यवहार से उनके मन को बहुत क्लेश पहुँचा। उन्होंने यह भी देखा कि वहाँ चतुर्दिक भगवान शंकरजी के प्रति तिरस्कार का भाव भरा हुआ है। दक्ष ने उनके प्रति कुछ अपमानजनक वचन भी कहे। यह सब देखकर सती का हृदय क्षोभ, ग्लानि और क्रोध से संतप्त हो उठा। उन्होंने सोचा भगवान शंकरजी की बात न मान, यहाँ आकर मैंने बहुत बड़ी गलती की है।

वे अपने पति भगवान शंकर के इस अपमान को सह न सकीं। उन्होंने अपने उस रूप को तत्क्षण वहीं योगाग्नि द्वारा जलाकर भस्म कर दिया। वज्रपात के समान इस दारुण-दुःखद घटना को सुनकर शंकरजी ने क्रुद्ध होअपने गणों को भेजकर दक्ष के उस यज्ञ का पूर्णतः विध्वंस करा दिया।

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Renu Singh May 14, 2021

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Renu Singh May 14, 2021

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Archana Singh May 14, 2021

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🌹🌹.!! ॐ श्री गणेशाय नमः !!.🌹🌹 ******************************** 🌻🌻"पञ्चाङ्ग - 14-05-2021"🌻🌻 ******************************** "अक्षय-तृतिया की हार्दिक शुभकामनाएं" 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 शुभ् विक्रम् संवत् - 2078 राक्षस, (आनन्द), शालिवाहन् शक् संवत् - 1943 प्लव, मास - (अमावस्यांत) वैशाख-माह, पक्ष - शुक्ल, (पूर्णिमांत) वैसाख-माह, तिथि - द्वितीया 05:38:06, बाद-तृतीया, दिन - शुक्रवार, सूर्य प्रविष्टे 1 ज्येष्ठ गते, नक्षत्र - रोहिणी 05:43:52, बाद-मृगशीर्षा, योग - सुकर्मा 25:44:23*, करण - कौलव 05:38:06, बाद-तैतुल, सूर्य - मेष 23:23:35, बाद-वृषभ राशिगत, चन्द्र - वृष 19:12:42, बाद-मिथुन राशिगत, ऋतु - ग्रीष्म, अयन - उत्तरायण, सूर्योदय - 05:32:15, सूर्यास्त - 19:03:00, चंद्रोदय - 07:06:04, चंद्रास्त - 21:27:56, दिन काल - 13:30:44, रात्री काल - 10:28:39, राहू काल - 10:36-12:18 अशुभ, यम घण्टा - 15:40-17:22 अशुभ, अभिजित - 11:51-12:45 शुभ, 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 दिशा शूल - पश्चिम, दक्षिण-पश्चिम अशुभ, दिशा शूल शुभता :- आज शुक्रवार के दिन दही खा कर घर से बाहर निकलें, शुभ रहेगा। ☀️ विशेष :- आज अक्षय-तृतीया तिथि के दिन भगवान श्री परशुराम जी का जन्मोत्सव है। द्वितीया तिथि के दिन बृहती (छोटा बैगन या कटेहरी) एवं तृतीया तिथि के दिन परवल (परमल) खाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त-पुराण : ब्रह्म-खण्ड), 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 ☀️ दिन की शुभ चौघड़ियाँ :~ चर - 05:32 - 07:14, लाभ - 07:14 - 08:55, अमृत - 08:55 - 10:36, शुभ - 12:18 - 13:59, चर - 17:22 - 19:03, ☀️ रात्री की शुभ चौघड़ियाँ :~ लाभ - 21:40 - 22:59, शुभ - 24:17* - 25:36*, अमृत - 25:36* - 26:55*, चर - 26:55* - 28:13*, ☀️ दिन का होरा चक्र ..... शुक्र- 05:32 - 06:40, बुध- 06:40 - 07:47, चन्द्र- 07:47 - 08:55, शनि- 08:55 - 10:03, बृहस्पति- 10:03 - 11:10, मंगल- 11:10 - 12:18, सूर्य- 12:18 - 13:25, शुक्र- 13:25 - 14:33, बुध- 14:33 - 15:40, चन्द्र- 15:40 - 16:48, शनि- 16:48 - 17:55, बृहस्पति- 17:55 - 19:03, ☀️ रात्री का होरा चक्र ..... मंगल- 19:03 - 19:55, सूर्य- 19:55 - 20:48, शुक्र- 20:48 - 21:40, बुध- 21:40 - 22:33, चन्द्र- 22:33 - 23:25, शनि- 23:25 - 24:17*, बृहस्पति- 24:17* - 25:10*, मंगल- 25:10* - 26:02*, सूर्य- 26:02* - 26:55*, शुक्र- 26:55* - 27:47*, बुध- 27:47* - 28:39*, चन्द्र- 28:39* - 29:32*, ******************************** ✡️⚛️श्री शिव दुर्गा दिव्य धाम⚛️✡️ ☸️संस्थापक-पंडित राजेश शर्मा☸️ ☯️करोल बाग,जस्सियां रोड लुधियाना☯️ ⭐सम्पर्क सूत्र- ⭐+91 94171 90476⭐ ⭐+91 99143 90476⭐ ********************************* !!🍒!! राशिफल !!🍒!! ☀️ मेष राशि :- आज आप अपने कार्य के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करके लोगों की सराहना हासिल करेंगे। छात्रों का पढ़ाई में मन लगेगा। धार्मिक कार्यों में हिस्सा लेंगे। पूजा पाठ में रुचि बढ़ेगी। वाहन चलाते समय सावधानी बरतें। आज मंदिर जाकर आराधना करें। कार्यस्थल पर चुनौती मिलेगी। नौकरीपेशा का ट्रांसफर हो सकता है। सेहत का ध्यान रखें। जीवन-साथी से मधुरता रहेगी। शुभ अंक - 1 और शुभ रंग - लाल है। ☀️ वृष राशि :- परिवार की उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए आपको कुछ कर दिखाना होगा। धन की अहमियत को आप अच्छे से जानते हैं, इसलिए आज के दिन आपके द्वारा बचाया गया धन आपके काफी काम आएगा। किसी की सेहत को लेकर चिंतित हो सकते हैं। अनजान लोगों से लेन-देन करने में सावधानी रखें। मित्रों से मुलाकात होगी। दिन ठीक रहेगा। शुभ अंक - 2 और शुभ रंग - सफेद है। ☀️ मिथुन राशि :- कार्य की अधिकता के बावजूद भी आज आप काफी ऊर्जावान रहेंगे।सामाजिक जिम्मेदारियों को पूरा कर पाएंगे। रिश्तेदारों से सुखद सूचना मिलेगी। प्रसन्न रहेंगे। धन लाभ होने की संभावना है। कार्य को तय वक्त से पहले ही पूरा कर सकते हैं। आप अपने पुराने मित्रों से मिलने का प्लान बना सकते हैं। जीवन-साथी को उपहार देंगे। शुभ अंक - 3 और शुभ रंग - पीला है। ☀️ कर्क राशि :- आज आपको पैसों की जरुरत होगी, लेकिन इंतजाम करने में काफी दिक्कत होगी। अपने आफिस से जल्दी निकलने की कोशिश करें और वे काम करें जिन्हें आप वाकई पसंद करते हैं। आपने बीते समय में बहुत पैसा खर्च किया है, जिसका खामियाजा आज आपको भुगतना पड़ सकता है। शुभ अंक - 4 और शुभ रंग - सफेद है। ☀️ सिंह राशि :- यदि घर में किसी लंबे समय से किसी सदस्य की तबियत खराब रही हो तो उसमें सुधार दिखेगा। वाणी की मधुरता आज आपको कार्यक्षेत्र में मान सम्मान दिलाएगी। आप छोटी दूरी की यात्रा पर जा सकते हैं। कर्ज की रकम वापस मिलेगी। नए प्रोजेक्ट पर कार्य शुरू कर सकते हैं। निवेश से फायदा होगा। मित्रों की मदद मिलेगी। शुभ अंक - 5 और शुभ रंग - गोल्डन है। ☀️ कन्या राशि :- आज कारोबार में विस्तार को लेकर निर्णय ले सकते हैं। आपको किस्मत का पूरा सहयोग मिलेगा। युवाओं को कामयाबी मिलेगी। स्वभाव को थोड़ा शांत बना कर रखें। वाणी पर संयम रखना जरूरी होगा। किसी को आपकी बातों से ठेस लग सकती है। संतान पक्ष से खुशखबरी मिलेगी। शासकीय कार्य पूरा कर पाएंगे। धन की स्थिति ठीक रहेगी। शुभ अंक - 1 और शुभ रंग - हरा है। ☀️ तुला राशि :- मन में नकारात्मक विचार की अधिकता रहेगी। किसी मित्र की मदद से अपनी जिम्मेदारी पूरी कर पाएंगे। नया काम लाभ देगा। किसी के साथ मनमुटाव हो सकता है। पास की जगह यात्रा पर जा सकते हैं। मनोरंजन के साधनों पर व्यय होगा। परिवार के साथ अच्छा समय व्यतीत होगा। कुछ तनाव दूर होगा। सेहत का ध्यान रखें। शुभ अंक - 2 और शुभ रंग - सफेद है। ☀️ वृश्चिक राशि :- आज के दिन आलस्य अधिक रहेगा। गुस्से पर नियंत्रण रखने का प्रयास करें। किसी कार्य के पूरा नहीं होने से तनाव में आ सकते हैं। लेकिन धैर्य रखना होगा। दंपत्तियों के बीच मधुरता रहेगी। किसी की बातों के चलते घर का माहौल बिगड़ सकता है। कार्यस्थल पर किसी से मतभेद हो सकते हैं। वाहन सावधानी से चलाएं। कुसंगति से हानि होगी। शुभ अंक - 1 और शुभ रंग - लाल है। ☀️ धनु राशि :- आज आप किसी विषय पर ज्यादा अपनी राय न दें, विपरीत असर पड़ सकता है। शिक्षा के क्षेत्र में कमी का सामना करना पड़ेगा लेकिन ईश्वर की आराधना करने से मन को शांति प्राप्त होगी। अपने कार्य के क्षेत्र पर किसी के साथ गुस्से का प्रयोग न करें। इससे लड़ाई झगड़ा होने की आशंका रहेगी। शुभ अंक - 9 और शुभ रंग - पीला है। ☀️ मकर राशि :- आज सुखद समाचार मिलेगा। सेहत में सुधार दिखेगा। परिवार के लोगों के साथ समय बिता पाएंगे। कार्य क्षेत्र में आपकी सराहना होगी। आप सकारात्मक रहेंगे। यात्रा पर भी जाना पड़ सकता है। कारोबार की स्थिति अच्छी रहेगी। पुरानी रकम की वापसी होगी। धन संबंधी दिक्कत दूर होने से आप काफी प्रसन्न रहेंगे। युवाओं को लाभ होगा। शुभ अंक - 1 और शुभ रंग - नीला है। ☀️ कुम्भ राशि :- आज के दिन छात्रों को काफी मेहनत करनी होगी। कैरियर से जुड़ी समस्या का हल होगा। नौकरी मिल सकती है। धन लाभ होगा। कारोबार के सिलसिले में नए फैसले ले सकते हैं। घर के सदस्यों के साथ मधुरता रहेगी। पारिवारिक कार्यक्रम में शामिल होने जा सकते हैं। अनजान लोगों से सावधान रहें। वाणी पर नियंत्रण रखें। शुभ अंक - 2 और शुभ रंग - नीला है। ☀️ मीन राशि :- आज आपके स्वभाव में क्रोध रहेगा। पूर्व में की गई मेहनत का लाभ पा सकते हैं। अचानक नया खर्च सामने आने से आपका मासिक बजट बिगड़ सकता है। सामाजिक लोगों से मुलाकात होगी। आपको कार्यक्षेत्र में लाभ होगा। अपरिचित व्यक्ति से सतर्क रहना होगा, नुकसान हो सकता है। दफ्तर में किसी से अनबन होने की आशंका है। शुभ अंक - 9 और शुभ रंग - पीला है। ******************************** !!🥀!! सुविचार !!🥀!! "पंच त्वाऽनुगमिष्यन्ति यत्र यत्र गमिष्यसि। मित्राण्यमित्रा मध्यस्था उपजीव्योपजीविनः॥" भावार्थ :- पाँच लोग छाया की तरह सदा आपके पीछे लगे रहते हैं। ये पाँच लोग हैं - मित्र, शत्रु, उदासीन, शरण देने वाले और शरणार्थी। भगवान श्री गणेश जी आप सभी का मङ्गल करें। 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐

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Mamta Chauhan May 14, 2021

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