Malkhan Singh UP
Malkhan Singh UP Jun 1, 2018

प्रेणादायक बहुत ही सुंदर वीडियो

*यह वीडियो अन्ततक देखें*
*काफी प्रभावित होगें*

🎂शुभमध्यान नमस्कार जी🎂

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कामेंट्स

Akhilesh Jun 1, 2018
very very nice jai shree Krishna

Suru Jun 1, 2018
very nice vedio 🌹🌹🌹🌹🌹

ALKA GUPTA LUCKNOW Jun 1, 2018
Nice video Bhaiya ji JAI SHREE KRISHNA SHUBH DOPAHAR 🙏🙏🌷🌹🌾

Jay Sri radhe radhe Jun 1, 2018
very beautiful video very nice Jay Sri radhe radhe ji subh Sandhya ji pranam

Vinod Agrawal Jun 1, 2018
Beautiful video ji 🌷Jai Shree Radhey Krishna🌷 Lovely Smiley Eveng ji

aravind Jun 1, 2018
very nice video bhai ji Radhe Radhe jai shri Krishna good night

🌹🙏❤️ मातृ दिवस ❤️🙏🌹 🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯 😃🌺🌲⛲शुभ रविवार⛲🌲🌺 🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️ 🌞🌲🚩ॐ सूर्य देवता नमः 🌞🌲🚩 🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞 🌅🌀🌻सुप्रभात🌻🌀🌅 🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼 🙏आपको सपरिवार मातृ दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं🙏 🌹आप और आपके पूरे परिवार पर ममता मयी मां और भगवान सूर्यदेव की आशीर्वाद हमेशा बनी रहे 🙏 🌀आपका दिन शुभ और मंगलमय हो 🌀 ❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️ 💮वेदों में मिलती है मां की महिमा💮 ***************************** ❤️वेदों में'मां'कोअंबा','अम्बिका','दुर्गा','देवी','सरस्वती',' शक्ति','ज्योति','पृथ्वी' आदि नामों से संबोधित किया गया है। इसके अलावा 'मां' को 'माता', 'मात', 'मातृ', 'अम्मा', 'अम्मी', 'जननी', 'जन्मदात्री', 'जीवनदायिनी', 'जनयत्री', 'धात्री', 'प्रसू' आदि अनेक नामों से पुकारा जाता है। """"""""''""""""""""""""""""""""""""""""""""""""''''"""""""""""""""""""""""""""""" 🌹रामायण में श्रीराम अपने श्रीमुख से 'मां' को स्वर्ग से भी बढ़कर मानते हैं। वे कहते हैं- 🌹'जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गदपि गरीयसी।' अर्थात, जननी और जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर है। 🔯महाभारत में जब यक्ष धर्मराज युधिष्ठर से सवाल करते हैं कि 'भूमि से भारी कौन?' तब युधिष्ठर जवाब देते हैं- 'माता गुरुतरा भूमेरू।' अर्थात, माता इस भूमि से कहीं अधिक भारी होती हैं। 🎎इसके साथ ही महाभारत महाकाव्य के रचियता महर्षि वेदव्यास ने 'मां' के बारे में लिखा है- 'नास्ति मातृसमा छाया, नास्ति मातृसमा गतिः। नास्ति मातृसमं त्राण, नास्ति मातृसमा प्रिया।।' अर्थात, माता के समान कोई छाया नहीं है, माता के समान कोई सहारा नहीं है। माता के समान कोई रक्षक नहीं है और माता के समान कोई प्रिय चीज नहीं है तैतरीय उपनिषद में 'मां' के बारे में इस प्रकार उल्लेख मिलता है- ❤️'मातृ देवो भवः।' अर्थात, माता देवताओं से भी बढ़कर होती है। 'शतपथ ब्राह्मण' की सूक्ति कुछ इस प्रकार है- 🌹अथ शिक्षा प्रवक्ष्यामः मातृमान् पितृमानाचार्यवान पुरूषो वेदः।' अर्थात, जब तीन उत्तम शिक्षक अर्थात एक माता, दूसरा पिता और तीसरा आचार्य हो तो तभी मनुष्य ज्ञानवान होगा। 'मां' के गुणों का उल्लेख करते हुए आगे कहा गया है- 'प्रशस्ता धार्मिकी विदुषी माता विद्यते यस्य स मातृमान।' अर्थात, धन्य वह माता है जो गर्भावान से लेकर, जब तक पूरी विद्या न हो, तब तक सुशीलता का उपदेश करे। 🏵️ हितोपदेश- आपदामापन्तीनां हितोऽप्यायाति हेतुताम् । मातृजङ्घा हि वत्सस्य स्तम्भीभवति बन्धने ॥ 🥀 जब विपत्तियां आने को होती हैं, तो हितकारी भी उनमें कारण बन जाता है। बछड़े को बांधने में मां की जांघ ही खम्भे का काम करती है। 🏵️स्कन्द पुराण- नास्ति मातृसमा छाया नास्ति मातृसमा गतिः। नास्ति मातृसमं त्राण, नास्ति मातृसमा प्रिया।।' महर्षि वेदव्यास ❤️ माता के समान कोई छाया नहीं, कोई आश्रय नहीं, कोई सुरक्षा नहीं। माता के समान इस दुनिया में कोई जीवनदाता नहीं❤️ 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

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Babita Sharma May 8, 2020

🚩*जय माता दी*🚩 🙏 *शुभ प्रभात नमन* 🙏 *आपका जीवन खुशियों से परिपूर्ण हो*🌹🌹 संतोषी सदा सुखी 🙏🙏🥀 पुराने समय में एक सेठ ने अपनी पूरी संपत्ति का पूरा मूल्यांकन किया तो उसे मालूम हुआ कि उसके पास इतना धन है, जिससे उसकी सात पीढ़ियों के पास सभी सुख-सुविधाएं रहेंगी। व्यापारी ने सोचा कि मेरी सिर्फ सात पीढ़ियां ही सुखी रहेंगी, आठवीं पीढ़ी दुखी रहेगी? उन्हें सुख कैसे मिलेगा? ये बातें सोचकर वह परेशान हो गया। तब वह क्षेत्र के प्रसिद्ध संत के पास पहुंचा। सेठ ने संत से कहा कि महाराज कृपया मेरी चिंता दूर करें। मेरे पास सिर्फ सात पीढ़ियों के लिए ही धन है। मेरी आठवीं पीढ़ी भी सुखी जीवन जी सके, इसके लिए मुझे क्या करना चाहिए, कृपया कोई उपाय बताएं। संत ने सेठ की बात ध्यान से सुनी और कहा कि गांव में एक वृद्ध महिला है, उसके घर में कमाने वाला कोई नहीं है। बड़ी मुश्किल से उसे रोज का खाना मिल पाता है। तुम एक काम करो, उस महिला को थोड़ा सा आटा दे दो। इस छोटे से दान से तुम्हारी चिंता दूर हो जाएगी। सेठ तुरंत ही अपने घर गया और वहां से उसने एक बोरी आटा लिया और महिला के घर पहुंचा। उसने वृद्ध महिला से कहा कि मैं आपके लिए एक बोरी आटा लाया हूं। कृपया इसे ग्रहण करें। महिला बोली कि मेरे पास आज के लिए पर्याप्त आटा है, इसीलिए मुझे ये नहीं चाहिए। सेठ ने कहा कि इसे स्वीकार करें, इससे आपको कई दिनों तक खाने की चिंता नहीं करनी पड़ेगी। महिला बोली कि मैं इसे रखकर क्या करूंगी, मेरे लिए आज के खाने की व्यवस्था हो गई है। तब सेठ ने कहा कि ठीक है ज्यादा मत रखो, थोड़ा ही ले लो कल काम आ जाएगा। महिला बोली कि मैं कल की चिंता नहीं करती, जैसे आज खाना मिला है, कल भी मिल जाएगा। भगवान की कृपा से मेरा का भरण-पोषण रोज हो जाता है। ये बातें सुनकर सेठ समझ गया कि महिला के पास कल के लिए भोजन की व्यवस्था नहीं है, लेकिन ये कल की चिंता नहीं करती है। मेरे पास तो अपार धन-संपत्ति है, फिर भी मैं बिना वजह चिंतित हो रहा हूं। मेरी ये चिंता व्यर्थ है। सेठ ने भविष्य की चिंता करना छोड़ दिया और वह सुख-शांति से रहने लगा। कथा की सीख: भविष्य में क्या होगा, ये बात सोचकर वर्तमान को खराब नहीं करना चाहिए। आज परेशानियों का सामना करके भविष्य के लिए धन बचाने का कोई लाभ नहीं है। हमें वर्तमान को अच्छी तरह जीना चाहिए। आज धर्म के अनुसार काम करेंगे तो भविष्य में भी अच्छा ही फल मिलेगा। जय माता दी 🚩

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