कार्तिकी एकादशीकी हार्दिक शुभकामना.

अवघें क्षेत्र पंढरी । अवघा आनंद घरोघरीं ॥१॥

अवघा विठ्ठलचि देव । अवघा अवघिया एक भाव ॥२॥

अवघे समदृष्टी पहाती । अवघे विठ्ठलाचि गाती ॥३॥

अवघे ते दैवाचे । एका जनार्दनीं साचे ॥४॥
||कार्तिकी एकादशीच्या हार्दिक शुभेछा ||

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कामेंट्स

Rajesh Tiwari Oct 31, 2017
बहुत सुंदर और आकर्षक है।

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Raj Rani Bansal Sep 20, 2020

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B.G.Agrawal Sep 19, 2020

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Ravi Mishra Sep 19, 2020

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🥀🥀 Sep 20, 2020

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🙏🏻🌹🙌🏼👐🏽🌹🙇🏻🌹👐🏽🙌🏼🌹🙏🏻 *बृजधाम वृन्दावनधाम परिवार की प्रस्तूती🙏🏻* 🙏🏻🌹🙌🏼👐🏼🌹🙇🏻‍♂🌹👐🏼🙌🏼🌹🙏🏻 . *🌹पुरुषोत्तम मास माहात्म्य🌹* पुराणों में अधिकमास यानी मलमास के पुरुषोत्तम मास बनने की बड़ी ही रोचक कथा है। उस कथा के अनुसार, स्वामीविहीन होने के कारण अधिकमास को 'मलमास' कहने से उसकी बड़ी निंदा होने लगी। इस बात से दु:खी होकर मलमास श्रीहरि विष्णु के पास गया और उनसे दुखड़ा रोया। भक्तवत्सल श्रीहरि उसे लेकर गोलोक पहुँचे। वहाँ श्रीकृष्ण विराजमान थे। करुणासिंधु भगवान श्रीकृष्ण ने मलमास की व्यथा जानकर उसे वरदान दिया- अब से मैं तुम्हारा स्वामी हूँ। इससे मेरे सभी दिव्य गुण तुम में समाविष्ट हो जाएंगे। मैं पुरुषोत्तम के नाम से विख्यात हूँ और मैं तुम्हें अपना यही नाम दे रहा हूँ। आज से तुम मलमास के बजाय पुरुषोत्तम मास के नाम से जाने जाओगे। शास्त्रों के अनुसार हर तीसरे साल सर्वोत्तम यानी पुरुषोत्तम मास की उत्पत्ति होती है। इस मास के दौरान जप, तप, दान से अनंत पुण्यों की प्राप्ति होती है। इस मास में श्रीकृष्ण, श्रीमद्भगवतगीता, श्रीराम कथा वाचन और विष्णु भगवान की उपासना की जाती है। इस माह उपासना करने का अपना अलग ही महत्व है। पुरुषोत्तम मास में कथा पढ़ने, सुनने से भी बहुत लाभ प्राप्त होता है। इस मास में जमीन पर शयन, एक ही समय भोजन करने से अनंत फल प्राप्त होते हैं। सूर्य की बारह संक्रांति के आधार पर ही वर्ष में 12 माह होते हैं। प्रत्येक तीन वर्ष के बाद पुरुषोत्तम माह आता है। पंचांग के अनुसार सारे तिथि-वार, योग-करण, नक्षत्र के अलावा सभी मास के कोई न कोई देवता स्वामी है, किंतु पुरुषोत्तम मास का कोई स्वामी न होने के कारण सभी मंगल कार्य, शुभ और पितृ कार्य वर्जित माने जाते हैं। दान, धर्म, पूजन का महत्व पुराणे शास्त्रों में बताया गया है कि यह माह व्रत-उपवास, दान-पूजा, यज्ञ-हवन और ध्यान करने से मनुष्य के सारे पाप कर्मों का क्षय होकर उन्हें कई गुना पुण्य फल प्राप्त होता है। इस माह आपके द्वारा दान दिया गया एक रुपया भी आपको सौ गुना फल देता है। इसलिए अधिक मास के महत्व को ध्यान में रखकर इस माह दान-पुण्य देने का बहुत महत्व है। इस माह भागवत कथा, श्रीराम कथा श्रवण पर विशेष ध्यान दिया जाता है। धार्मिक तीर्थ स्थलों पर स्नान करने से आपको मोक्ष की प्राप्ति और अनंत पुण्यों की प्राप्ति मिलती है। पुरुषोत्तम मास का अर्थ जिस माह में सूर्य संक्रांति नहीं होती वह अधिक मास कहलाता होता है। इनमें खास तौर पर सर्व मांगलिक कार्य वर्जित माने गए है, लेकिन यह माह धर्म-कर्म के कार्य करने में बहुत फलदायी है। इस मास में किए गए धार्मिक आयोजन पुण्य फलदायी होने के साथ ही ये आपको दूसरे माहों की अपेक्षा करोड़ गुना अधिक फल देने वाले माने गए हैं। पुरुषोत्तम मास में दीपदान, वस्त्र एवं श्रीमद् भागवत कथा ग्रंथ दान का विशेष महत्व है। इस मास में दीपदान करने से धन-वैभव में वृद्घि होने के साथ आपको पुण्य लाभ भी प्राप्त होता है। इस वर्ष पुरुषोत्तम मास *शुक्रवार 18.09.20 से आरम्भ होकर शुक्रवार 16.10.20 तक रहेगा।* श्रीपुरुषोत्तम मास माहात्म्य कथा का आरम्भ हो रहा है। सम्पूर्ण माहात्म्य 31 पोस्ट में है। सभी मित्रों से अनुरोध है कि इस माहात्म्य की सभी पोस्टों को पढ़कर लाभान्वित हों। ╲\╭┓ ╭ 🌹 ╯ ┗╯\╲☆●══❥ *करूणा सागर* *श्री राधा माधव जी की असीम* *अनुकम्पा आप पर सदैव बनी रहे* 🙏🏻🌹🙌🏼👐🏽🌹🙇🏻🌹👐🏽🙌🏼🌹🙏🏻 *बृजधाम वृन्दावनधाम परिवार की प्रस्तूती🙏🏻* 🙏🏻🌹🙌🏼👐🏼🌹🙇🏻‍♂🌹👐🏼🙌🏼🌹🙏🏻

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