Rammohan Mahant
Rammohan Mahant Feb 23, 2021

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dinesh patidar Feb 23, 2021
Jay shree ram🌷 Jay shree hanuman ji 🌷 suprabhat vandan Ji🙏

sanjay choudhary Feb 23, 2021
🙏🙏 जय श्री राम 🙏🙏 ।। जय बजरंग बली ।।। ।।।।। शुभ प्र्भात् जी।।।। *🙏🌸प्रातः!!🌼!!अभिनंदन🌸🙏* *✍️...मन की सच्चाई और अच्छाई कभी* *व्यर्थ नहीं जाती,* *ये वो पूजा है* *जिसकी खोज ईश्वर खुद करते है...✍️*                        *🌼आज का दिन शुभ हो🌼*                         *🙏सुप्रभात🌼!!राधेराधे!!🙏* 🍃💫🍃💫🍃💫🍃💫🍃

Ravi Kumar Taneja Feb 23, 2021
जय श्री राम जी 🌹🙏🌹जय श्री हनुमानजी🙏⚘🙏आपका दिन आपका हर पल शुभ हो जी 🙏🌟🙏सुप्रभात वन्दन जी 🙏🌸🙏

Ravi Kumar Taneja Feb 23, 2021
जय श्री राम जी 🌹🙏🌹जय श्री हनुमानजी🙏⚘🙏आपका दिन आपका हर पल शुभ हो जी 🙏🌟🙏सुप्रभात वन्दन जी 🙏🌸🙏

arvind sharma Feb 23, 2021
जय श्री राम🐕‍🦺🚩 🎻 दुख मे सोयम कि एक उंगली आंसू पहुंचती है और सुख मे हाथो कि दसो उंगलियां ताली बजाती है जब स्वयं का शरीर ही ऐसा करता है तो दुनिया से क्या गिला शिकवा 🌮🌮 हंसते रहिये हंसाते रहिये🌮🌮 आपका दिन मंगलम हो 🌾🌾💮💮 🔥 जय मंगल नाथ 🔥

JAI MAA VAISHNO Feb 23, 2021
JAI BHOLE NATH KI JAI GANPATI BAPPA KIRPA KARO BAPPA JAI SHIV PARIVAR KI JAI GANPATI BAPPA KIRPA KARO BAPPA JAI SHIV PARIVAR KI JAI GANPATI BAPPA KIRPA KARO BAPPA JAI MATA VAISHNO DEVI KIRPA KARO MAA

JAI MAA VAISHNO Feb 23, 2021
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Lucky Sharma May 7, 2021

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(((( श्री रामभद्र जी )))) . श्री रामभद्र जी भगवान्श्री राम के परम भक्त थे। चातुर्मास्य व्रत के लिये आप एक स्थानपर ठहरे। . वहां आपके सदुपदेशों को सुनने के लिये बहुत भीड़ एकत्र होती। वर्षा ऋतु के बीत जाने पर आप वहां से चलने के लिये तैयार हो गये। . तब भगवान् ने स्वप्न दिया कि वर्षा के बाद शरद् ऋतु में भी यहीं निवास करो और अपने उपदेशों से लोगो में भक्ति का प्रचार को। . आपने स्वप्न में मिले आदेश का उल्लंघन कर दिया। . उसे केवल अपने मन का विकार माना और प्रतिपदा को ही चल दिये। मार्ग में एक नदी मिली। . आपने देखा कि पानी थोड़ा है, अत: पैदल ही उसे पार करने के लिये उसमें घुसे। . बीच धार मे पहुंचते ही जल की बाढ आ गयी। तेज गहरी धार मे श्री रामभद्र जी बहने और डूबने लगे। . तब आपको भगवान् श्रीराम की याद आयी, अपनी भूल पर पछताने लगे। शरीर का अन्तिम समय समझ कर राम नाम का स्मरण करने लगे। . तब श्री राम ने झट हाथ पकड़ लिया और बडी मधुर वाणी से बोले... . तुमने मेरी आज्ञा को छोडा, अब मैं तुमको नदी के जल में छोड़ रहा हूं। . श्री रामभद्र जी ने कहा- प्रभो ! मैं अज्ञानी जीव, आपका शिशु अनुचित कर सकता हूं पर आप अपने स्वभाव को नहीं छोड़ सकते हैं। . ऐसे दीन वचन सुनकर प्रभु ने इन्हें नदी सेे निकाल कर तट पर खड़ा कर दिया और भगवान् फिर नदी में कूद पड़े। . भगवत्स्पर्श और दर्शन से कृतार्थ हुए श्री रामभद्र जी से नहीं रहा गया, ये भी नदी में कूद पड़े। . हंसकर प्रभु ने इन्हें फिर निकाला और अपने दर्शनों से इनके मनोरथ को पूर्ण किया। . प्रेममग्न होकर आप पुन: उसी स्थान पर आ गये। सुन कर लोगों को भीड़ उमड़ पडी। . आपने स्वप्नादेश और भगवत्कृपा का वर्णन कर के सभी के मन में भक्तिभाव भर दिया। . ~~~~~~~~~~~~~~~~~ ((((((( जय जय श्री राधे ))))))) ~~~~~~~~~~~~~~~~~ 🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿

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