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PDJOSHI Jun 8, 2018

BARSHANE AAJA SAWAREEYA

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Shanti Pathak Aug 6, 2020

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Shanti Pathak Aug 6, 2020

(((( कन्हैया की बाल लीला )))) . कबहुं बोलत तात खीझत जात माखन खात। अरुन लोचन भौंह टेढ़ी बार बार जंभात॥ . कबहुं रुनझुन चलत घुटुरुनि धूरि धूसर गात। कबहुं झुकि कै अलक खैंच नैन जल भरि जात॥ . कबहुं तोतर बोल बोलत कबहुं बोलत तात। सूर हरि की निरखि सोभा निमिष तजत न मात॥ . यह पद राग रामकली में बद्ध है। . एक बार श्रीकृष्ण माखन खाते-खाते रूठ गए और रूठे भी ऐसे कि रोते-रोते नेत्र लाल हो गए। . भौंहें वक्र हो गई और बार-बार जंभाई लेने लगे। . कभी वह घुटनों के बल चलते थे जिससे उनके पैरों में पड़ी पैंजनिया में से रुनझुन स्वर निकलते थे। . घुटनों के बल चलकर ही उन्होंने सारे शरीर को धूल-धूसरित कर लिया। . कभी श्रीकृष्ण अपने ही बालों को खींचते और नैनों में आंसू भर लाते। . कभी तोतली बोली बोलते तो कभी तात ही बोलते। . सूरदास कहते हैं कि श्रीकृष्ण की ऐसी शोभा को देखकर यशोदा उन्हें एक पल भी छोड़ने को न हुई अर्थात् श्रीकृष्ण की इन छोटी-छोटी लीलाओं में उन्हें अद्भुत रस आने लगा। ~~~~~~~~~~~~~~~~~ ((((((( जय जय श्री राधे ))))))) ~~~~~~~~~~~~~~~~~

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Manoj Kumar dhawan Aug 6, 2020

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jyoti Aug 4, 2020

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Manoj Kumar dhawan Aug 5, 2020

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Durgesh Aug 5, 2020

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Kamal kishor Kamal Aug 5, 2020

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