Anita Sharma
Anita Sharma Aug 11, 2020

*🌹जन्माष्टमी का शुभ मुहूर्त कब मनाएं* 🌹 भाद्रपद महीने की अष्टमी तिथि ,रोहिणी नक्षत्र ,चंद्र वृषभ राशि पर होने पर अति विशेष जयंती नाम शुभ मुहूर्त मैं हमारे तारणहार प्रभु कृष्ण का जन्म हुआ था। यह बहुत ही महत्वपूर्ण शुभ महा संयोग माना जाता है ।लेकिन इस साल जन्माष्टमी की तारीख को लेकर दो मत हैं। पंचांगों में 11 और 12 अगस्त को जन्माष्टमी बताई गई है। भारतवर्ष के अनेक विद्वानों ने परस्पर विचार विमर्श कर सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया है कि 12 अगस्त को ही जन्मोत्सव ,जन्माष्टमी मनाना उत्तम और श्रेष्ठ है। मथुरा- वृंदावन- गोकुल और द्वारिका में 12 अगस्त को जन्मोत्सव मनाया जाएगा। जबकि जगन्नाथ पुरी, काशी और उज्जैन में 11 अगस्त को ऋषिकेश हरिद्वार में रोहिणी नक्षत्र युक्त 13 अगस्त को जन्माष्टमी मनाई जाएगी। *🌹जन्माष्टमी पूजन का समय व शुभ मुहूर्त*🌹 💐 11 अगस्त 2020 मंगलवार को प्रातः 9 बज के:07 पर अष्टमी तिथि प्रारंभ होगी इस दिन कृतिका नक्षत्र, चंद्रमा मेष राशि में, सूर्य कर्क राशि में,और वृद्धि योग है। अत सभी ( स्मार्त) गृहस्थी कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत इसी दिन रखेंगे। रात्रि में पूजा का समय 11 अगस्त की रात्रि 12 अगस्त की सुबह 12:05 से लेकर 12:47 तक शुभ पूजा का समय है।राहुकाल दिन में 3:00 बजे से लेकर 4:30 बजे तक रहेगा।और 12 अगस्त 2020 बुधवार को उदय कालीन अष्टमी है 11 बज के 17 मिनट तक रहेगी कृतिका नक्षत्र, वृष राशि के चंद्रमा मैं नवमी युक्त वैष्णवों को जन्माष्टमी एवं जन्मोत्सव मनाना श्रेष्ठ एवं उत्तम रहेगा राहु कॉल 12:00 बजे से लेकर 1:30 बजे तक रहेगा। श्री कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत तथा श्री कृष्ण जन्मोत्सव यह दोनों अलग-अलग स्थितियां है, अतः जन्मोत्सव 12 अगस्त बुधवार को ही मनाया जाएगा। *💐🌹स्मार्त और वैष्णव में भेद*🌹💐 स्मार्त — श्रुति- स्मृति, पुराण, वेद, आदि शास्त्रों को मानने वाले धर्मानुलम्बी, धर्मपरायण समस्त गृहस्थी लोग स्मार्त कहलाते हैं। वैष्णव— वह धर्म परायण जो वैष्णव संप्रदाय से दीक्षित हो गले में कंठी व चंदन धारण किया हो मस्तक पर ऊर्द्धपुण्ड त्रिपुंड चंदन लगाया हो किसी विशिष्ट संप्रदाय के साधु सन्यासी तथा विदुषी एवं विधवाओं ने सन्यास धारण कर लिया हो वह सभी भक्तजन वैष्णव कहलाते हैं। धर्म सिंधु के अनुसार– एकादशी एवं अष्टमी के व्रत- उपवास सभी स्मार्त एवं गृहस्ती जन तिथि के प्रारंभ को ग्रहण कर व्रता व्रतादि करते हैं। लेकिन विधवा एवं वैष्णव संप्रदाय से संबंधित परवर्ती तिथि को ग्रहण कर उपवास व्रत आदि कर्म करते हैं। "स्मार्तानां ग्रहाणां पूर्वो पोष्या। यतिर्भि : निष्काम गृहिभि:" वनस्थौ:विधवाभि वैष्णवैश्च परैवोपोष्या।। *💐🌹 जयंती नाम योग में प्रभु का जन्म*🌹💐 श्री कृष्ण जी का जन्म विष्णु जी के आठवें अवतार के रूप में हुआ, पापी कंस का विनाश करने के लिए मथुरा में अष्टमी तिथि रोहिणी नक्षत्र के महा सयोग से जयंती नाम योग में, आज से 5126 वर्ष पूर्व रात्रि के 12:00 बजे शून्यकाल में”अवतरण हुआ। *💐🌹 लड्डू गोपाल जी का श्रृंगार करें*🌹💐 लड्डू गोपाल जी के सिंगार में, सिर पर मुकुट ,उनके कानों में बाली, कलाई में कड़ा, हाथों में बांसुरी, पारिजात एवं वैजयंती के फूल अति प्रिय हैं,सुगंधित गोपी चंदन से तिलक करें पूजा में राखी रखें ,मोर पंख अवश्य होना चाहिए। *🌹 लड्डू गोपाल जी को भोग में प्रिय सामग्री*🌹 💐 कान्हा को माखन चोर के नाम से जाना जाता है इसलिए माखन, मिश्री, तुलसी, एवं धनिया की पंजीरी पंचमेवा मिश्रित , का भोग लगाएं। उससे पूर्व पंचामृत से स्नान कराकर , वह चरणामृत प्रसाद के रूप में ग्रहण करें। *💐🌹व्रत परायण के बाद दान करें* 🌹💐 व्रत का पारण करने के पश्चात वस्तुओं का दान करने से दीर्घायु, सुख, शांति, समृद्धि,भगवान कृष्ण की कृपा से मनोकामना पूर्ति ,मन इच्छित वरदान,के साथ-साथ लक्ष्मी जी की अपार कृपा बरसती है। श्री कृष्ण जी पीतांबर धारी है अत: पीला वस्त्र,पीला अन्न स्वर्ण रजत, दान ब्राह्मण को करना श्रेयस्कर श्रेष्ठ उत्तम है।। *💐💥 मतभेद का कारण💥💐* इसका कारणः कृष्ण जन्म की तिथि और नक्षत्र का एक साथ नहीं मिल रहे। 11 अगस्त को अष्टमी तिथि सूर्योदय के बाद लगेगी, लेकिन पूरे दिन और रात में रहेगी। किंतु चंद्रमा वृष राशि पर एवं उदय कालीन अष्टमी तिथि 12 अगस्त को है किंतु रात्रि में अष्टमी नहीं है भगवान कृष्ण का जन्म अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इस साल जन्माष्टमी पर्व पर श्रीकृष्ण की तिथि और जन्म नक्षत्र का संयोग नहीं बन रहा है। सभी धर्म प्रेमी एवं कृष्ण भक्त शास्त्र सम्मत मूर्धन्य विद्वानों के परामर्श अनुसार भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव श्रद्धा भक्ति पूर्वक 12 अगस्त को ही मनाएंगे जय श्री राधे 💐🌹*“हाथी घोड़ा पालकी जय कन्हैया लाल की”💐🌹 💐 “नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की “💐

*🌹जन्माष्टमी का शुभ मुहूर्त कब मनाएं* 🌹

भाद्रपद महीने की अष्टमी तिथि ,रोहिणी नक्षत्र ,चंद्र वृषभ राशि पर होने पर अति विशेष जयंती नाम शुभ मुहूर्त मैं हमारे तारणहार प्रभु कृष्ण का जन्म हुआ था। यह बहुत ही महत्वपूर्ण शुभ महा संयोग माना जाता है ।लेकिन इस साल जन्माष्टमी की तारीख को लेकर दो मत हैं। पंचांगों में 11 और 12 अगस्त को जन्माष्टमी बताई गई है। भारतवर्ष के अनेक विद्वानों ने परस्पर विचार विमर्श कर सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया है कि 12 अगस्त को ही जन्मोत्सव ,जन्माष्टमी मनाना उत्तम और श्रेष्ठ है। मथुरा- वृंदावन- गोकुल और द्वारिका में 12 अगस्त को जन्मोत्सव मनाया जाएगा। जबकि जगन्नाथ पुरी, काशी और उज्जैन में 11 अगस्त को ऋषिकेश हरिद्वार में रोहिणी नक्षत्र युक्त 13 अगस्त को जन्माष्टमी मनाई जाएगी।

*🌹जन्माष्टमी पूजन का समय व शुभ मुहूर्त*🌹

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11 अगस्त 2020 मंगलवार को प्रातः 9 बज के:07 पर अष्टमी तिथि प्रारंभ होगी इस दिन कृतिका नक्षत्र, चंद्रमा मेष राशि में, सूर्य कर्क राशि में,और वृद्धि योग है। अत सभी ( स्मार्त) गृहस्थी कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत इसी दिन रखेंगे। रात्रि में पूजा का समय 11 अगस्त की रात्रि 12 अगस्त की सुबह 12:05 से लेकर 12:47 तक शुभ पूजा का समय है।राहुकाल दिन में 3:00 बजे से लेकर 4:30 बजे तक रहेगा।और 12 अगस्त 2020 बुधवार को उदय कालीन अष्टमी है 11 बज के 17 मिनट तक रहेगी कृतिका नक्षत्र, वृष राशि के चंद्रमा मैं नवमी युक्त वैष्णवों को जन्माष्टमी एवं जन्मोत्सव मनाना श्रेष्ठ एवं उत्तम रहेगा राहु कॉल 12:00 बजे से लेकर 1:30 बजे तक रहेगा। श्री कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत तथा श्री कृष्ण जन्मोत्सव यह दोनों अलग-अलग स्थितियां है, अतः जन्मोत्सव 12 अगस्त बुधवार को ही मनाया जाएगा।

 *💐🌹स्मार्त और वैष्णव में भेद*🌹💐
स्मार्त — श्रुति- स्मृति, पुराण, वेद, आदि शास्त्रों को मानने वाले धर्मानुलम्बी, धर्मपरायण समस्त गृहस्थी लोग स्मार्त कहलाते हैं।
वैष्णव— वह धर्म परायण जो वैष्णव संप्रदाय से दीक्षित हो गले में कंठी व चंदन धारण किया हो मस्तक पर ऊर्द्धपुण्ड त्रिपुंड चंदन लगाया हो किसी विशिष्ट संप्रदाय के साधु सन्यासी तथा विदुषी एवं विधवाओं ने सन्यास धारण कर लिया हो वह सभी भक्तजन वैष्णव कहलाते हैं।

धर्म सिंधु के अनुसार–
एकादशी एवं अष्टमी के व्रत- उपवास सभी स्मार्त एवं गृहस्ती जन तिथि के प्रारंभ को ग्रहण कर व्रता व्रतादि करते हैं। लेकिन विधवा एवं वैष्णव संप्रदाय से संबंधित परवर्ती तिथि को ग्रहण कर उपवास व्रत आदि कर्म करते हैं।

"स्मार्तानां ग्रहाणां पूर्वो पोष्या। यतिर्भि : निष्काम गृहिभि:"
वनस्थौ:विधवाभि वैष्णवैश्च परैवोपोष्या।।
*💐🌹 जयंती नाम योग में प्रभु का जन्म*🌹💐

श्री कृष्ण जी का जन्म विष्णु जी के आठवें अवतार के रूप में हुआ, पापी कंस का विनाश करने के लिए मथुरा में अष्टमी तिथि रोहिणी नक्षत्र के महा सयोग से जयंती नाम योग में, आज से 5126 वर्ष पूर्व रात्रि के 12:00 बजे शून्यकाल में”अवतरण हुआ।

*💐🌹 लड्डू गोपाल जी का श्रृंगार करें*🌹💐

लड्डू गोपाल जी के सिंगार में, सिर पर मुकुट ,उनके कानों में बाली, कलाई में कड़ा, हाथों में बांसुरी, पारिजात एवं वैजयंती के फूल अति प्रिय हैं,सुगंधित गोपी चंदन से तिलक करें पूजा में राखी रखें ,मोर पंख अवश्य होना चाहिए।

*🌹 लड्डू गोपाल जी को भोग में प्रिय सामग्री*🌹                                       💐

कान्हा को माखन चोर के नाम से जाना जाता है इसलिए माखन, मिश्री, तुलसी, एवं धनिया की पंजीरी पंचमेवा मिश्रित , का भोग लगाएं। उससे पूर्व पंचामृत से स्नान कराकर , वह चरणामृत प्रसाद के रूप में ग्रहण करें।

  *💐🌹व्रत परायण के बाद दान करें* 🌹💐
व्रत का पारण करने के पश्चात वस्तुओं का दान करने से दीर्घायु, सुख, शांति, समृद्धि,भगवान कृष्ण की कृपा से मनोकामना पूर्ति ,मन इच्छित वरदान,के साथ-साथ लक्ष्मी जी की अपार कृपा बरसती है। श्री कृष्ण जी पीतांबर धारी है अत: पीला वस्त्र,पीला अन्न स्वर्ण रजत, दान ब्राह्मण को करना श्रेयस्कर श्रेष्ठ उत्तम है।।

      *💐💥 मतभेद का कारण💥💐*
इसका कारणः कृष्ण जन्म की तिथि और नक्षत्र का एक साथ नहीं मिल रहे। 11 अगस्त को अष्टमी तिथि सूर्योदय के बाद लगेगी, लेकिन पूरे दिन और रात में रहेगी। किंतु चंद्रमा वृष राशि पर एवं उदय कालीन अष्टमी तिथि 12 अगस्त को है किंतु रात्रि में अष्टमी नहीं है भगवान कृष्ण का जन्म अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इस साल जन्माष्टमी पर्व पर श्रीकृष्ण की तिथि और जन्म नक्षत्र का संयोग नहीं बन रहा है। 
सभी धर्म प्रेमी एवं कृष्ण भक्त शास्त्र सम्मत मूर्धन्य विद्वानों के परामर्श अनुसार भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव श्रद्धा भक्ति पूर्वक 12 अगस्त को ही मनाएंगे 
जय श्री राधे
💐🌹*“हाथी घोड़ा पालकी
                जय कन्हैया लाल की”💐🌹
💐 “नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की “💐

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कामेंट्स

GOVIND CHOUHAN Aug 11, 2020
Jaisree Radhey Radhey 🌹 jaisree Radhey Krishna 🌹 Prabhu Shree Hari Vishnu ji ka aashirvad hamesha aapke sath rhe Subh prabht Radhey Radhey 🌹 🌹

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Anilkumar Tailor Sep 22, 2020

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Anilkumar Tailor Sep 22, 2020

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〰〰🌺〰〰〰🌺〰〰 *_🚩श्री गणेशाय नम:🚩_* *_🔸🔥सुभाषितम्🔥🔸_* *_काको कृष्णः पिको कृष्णः_* *_को भेदो पिककाकयो।_* *_वसन्तकाले संप्राप्ते_* *_काको काकः पिको पिकः॥_* *_👉कोयल भी काले रंग की होती है और कौवा भी काले रंग का ही होता है फिर दोनों में क्या भेद (अन्तर) है? वसन्त ऋतु के आगमन होते ही पता चल जाता है कि कोयल कोयल होती है और कौवा कौवा होता है।_* *_📜 दैनिक पंचांग 📜_* *_☀ 23 - 09 - 2020_* *_☀श्रीमाधोपुर- पंचांग_* _💝 *तिथि* सप्तमी 19:58:39_ _💝 *नक्षत्र* ज्येष्ठा 18:25:15_ _💝 *करण :*_ _गर 08:40:47_ _वणिज 19:58:39_ *_💝 पक्ष शुक्ल_* _💝 *योग* आयुष्मान 23:38:48_ _💝 *वार* बुधवार_ *_☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ_* _🔥 सूर्योदय 06:16:38_ _🔥 चन्द्रोदय 12:28:00_ _🔥 चन्द्र राशि वृश्चिक - 18:25:15 तक_ _🔥 सूर्यास्त 18:22:30_ _🔥 चन्द्रास्त 23:07:59_ _🔥 ऋतु शरद_ *_☀ हिन्दू मास एवं वर्ष_* _🔸 शक सम्वत 1942 शार्वरी_ _🔸 कलि सम्वत 5122_ _🔸 दिन काल 12:05:51_ _🔸विक्रम सम्वत 2077_ _🔸 मास अमांत आश्विन (अधिक)_ _🔸 मास पूर्णिमांत आश्विन (अधिक)_ *_☀ शुभ और अशुभ समय_* *_☀ शुभ समय_* _🌷 अभिजित कोई नहीं_ *_☀ अशुभ समय_* _🟡 दुष्टमुहूर्त 11:55:22 - 12:43:46_ _🟡 कंटक 16:45:43 - 17:34:06_ _🟡 यमघण्ट 08:41:49 - 09:30:12_ _🟡 राहु काल 12:19:34 - 13:50:18_ _🟡 कुलिक 11:55:22 - 12:43:46_ _🟡 कालवेला या अर्द्धयाम 07:05:02 - 07:53:25_ _🟡 यमगण्ड 07:47:22 - 09:18:06_ _🟡 गुलिक काल 10:48:50 - 12:19:34_ *_☀ दिशा शूल_* _🟡 दिशा शूल उत्तर_ *_☀ चन्द्रबल और ताराबल_* *_☀ ताराबल_* _🟡 अश्विनी, भरणी, रोहिणी, आर्द्रा, पुष्य, आश्लेषा, मघा, पूर्वा फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, ज्येष्ठा, मूल, पूर्वाषाढ़ा, श्रवण, शतभिषा, उत्तराभाद्रपद, रेवती_ *_☀ चन्द्रबल_* _🟡 वृषभ, मिथुन, कन्या, वृश्चिक, मकर, कुम्भ_ *_🏀चौघडिया-मुहूर्त🏀_* *_🏀लाभ06:16:38-07:47:22_* *_🏀अमृत07:47:22-09:18:06_* *_🏀काल09:18:06-10:48:50_* *_🏀शुभ10:48:50-12:19:34_* *_🏀 रोग12:19:34-13:50:18_* *_🏀उद्वेग13:50:18-15:21:02_* *_🏀चल15:21:02-16:51:46_* *_🏀लाभ16:51:46-18:22:29_* *_🏀उद्वेग18:22:30-19:51:49_* *_🏀शुभ19:51:49-21:21:09_* *_🏀अमृत21:21:09-22:50:28_* *_🏀चल22:50:28-24:19:48_* *_🏀रोग24:19:48-25:49:08_* *_🏀काल25:49:08-27:18:27_* *_🏀लाभ27:18:27-28:47:47_* *_🏀उद्वेग28:47:47-30:17:06_* *_💝लग्न-तालिका💝_* _सूर्योदय का समय: 06:16:38_ _सूर्योदय के समय लग्न कन्या द्विस्वाभाव_ _155°42′01″_ *_🍋कन्या द्विस्वाभाव_* _शुरू: 05:51 AM समाप्त: 08:06 AM_ *_🍋तुला चर_* _शुरू: 08:06 AM समाप्त: 10:25 AM_ *_🍋वृश्चिक स्थिर_* _शुरू: 10:25 AM समाप्त: 12:43 PM_ *_🍋धनु द्विस्वाभाव_* _शुरू: 12:43 PM समाप्त: 02:48 PM_ *_🍋मकर चर_* _शुरू: 02:48 PM समाप्त: 04:31 PM_ *_🍋कुम्भ स्थिर_* _शुरू: 04:31 PM समाप्त: 06:00 PM_ *_🍋मीन द्विस्वाभाव_* _शुरू: 06:00 PM समाप्त: 07:27 PM_ *_🍋मेष चर_* _शुरू: 07:27 PM समाप्त: 09:03 PM_ *_🍋वृषभ स्थिर_* _शुरू: 09:03 PM समाप्त: 11:00 PM_ *_🍋मिथुन द्विस्वाभाव_* _शुरू: 11:00 PM समाप्त: अगले दिन 01:14 AM_ *_🍋कर्क चर_* _शुरू: अगले दिन 01:14 AM समाप्त: अगले दिन 03:34 AM_ *_🍋सिंह स्थिर_* _शुरू: अगले दिन 03:34 AM समाप्त: अगले दिन 05:51 AM_ 2️⃣3️⃣🔸0️⃣9️⃣🔸2️⃣0️⃣ *_🔸🌷जयश्रीकृष्णा🌷🔸_* *_ज्योतिषशास्त्री:-सुरेन्द्र कुमार चेजारा,व्याख्याता राउमावि होल्याकाबास_* *_निवास:-श्रीमाधोपुर ☎️9461044090_* 〰️〰️🔥〰️〰️🔥〰️〰️

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Sunil Sharma Sep 22, 2020

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