Krishna Singh
Krishna Singh Sep 30, 2017

रावण जलाया नहीं पूजा जाता है।

रावण जलाया नहीं  पूजा  जाता है।

।।मंदसौर | ।
भले ही आज पूरे देश में बुराई पर भलाई की जीत का जश्न दशहरे के रूप में मनाया जा रहा हो लेकिन मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले में रावण की पूजा की जाती है। इतिहास की कहानियों से स्पष्ट है कि रावण बहुत बड़ा शिवभक्त था। उसकी भगवान के प्रति श्रद्धा में कोई कमी नहीं थी। लेकिन एमपी के मंदसौर जिले में उसे पूजे जाने का एक बहुत बड़ा कारण है।

कहा जाता है कि मंदसौर जिले का रावनरुं दी गांव रावण की पत्नी मंदोदरी का गांव है, और इसीलिए यहां के लोग अपने दामाद, रावण की पूजा करते हैं।गांव में नामदेव वैष्णव समाज के लोग रावण की पूजा करते हैं। इस गांव में रावण की भव्य प्रतिमा भी है और वे रावण को अपने आराध्य के तौर पर पूजते हैं। यह सिलसिला वर्षो से चला आ रहा है।
रावनरुं दी के निवासियों मानना है कि मंदोदरी उनके इलाके की बेटी थी। इस लिहाज से रावण उनके दामाद हुए। यही कारण है कि खानपुर क्षेत्र में इस गांव के लोगों ने रावण की प्रतिमा भी स्थापित की है। पूर्व में स्थापित रावण की 25 फिट की एक प्रतिमा 1982 में आसमानी बिजली के गिरने से नष्ट हो गई थी।
यही नहीं एमपी के विदिशा, मंदसौर, पिपलदा उज्जैन, महेश्वर और अमरवाड़ा छिंदवाड़ा में अलग..अलग रूपों में रावण की पूजा होती है। उन्होंने कहा कि उत्तरप्रदेश में भी कुछ स्थानों पर रावण को आराध्य का दर्जा हासिल है।
आगे की खबर स्लाइडों में...

मंदसौर गांव में रावण के बेटे मेघनाद की भी पूजा की जाती है। यहां रावण का वध तो होता है, मगर वध करने से पहले गांववासी रावण से क्षमा मांगते हैं। यहां की महिलाएं विशेष रूप से अपने दामाद की पूजा करती हैं।

स्थानीय नगर पालिका ने शहर के शिवना नदी के किनारे खानपुरा मोहल्ले में रावण की 35 फिट ऊंची प्रतिमा बनाई है। सीमेंट और कंक्रीट से बनी यह प्रतिमा बैठी हुई मुद्रा में है। करीब ढाई लाख रुपये की लागत से बनी इस प्रतिमा के दोनों ओर चार-चार मुख हैं और प्रमुख मुख के ऊपर दसवें सिर के रूप में गधे का मुंह बनाया गया है।

मान्यता के मुताबिक, रावण की प्रतिमा के सामने लोग मन्नत मांगने आते हैं और मन्नत पूरी होने पर प्रसाद चढ़ाते हैं। इसके साथ-साथ दशहरे पर हर साल शहर में रावण दहन के कार्यक्रम भी होते हैं।

लोग कहते हैं कि परिसंवाद जैसे कार्यक्रमों के जरिये रावण के व्यक्तित्व के छिपे पहलुओं को सामने लाकर उनकी आम छवि बदलने की कोशिश करते हैं। इसके साथ ही जनता से अनुरोध करते हैं कि दशहरे पर रावण के पुतले फूंकने का सिलसिला बंद हो।

विदिशा, मंदसौर, पिपलदा उज्जैन, महेश्वर और अमरवाड़ा छिंदवाड़ा में अलग..अलग रूपों में रावण की पूजा होती है।उत्तरप्रदेश में भी कुछ स्थानों पर रावण को आराध्य का दर्जा हासिल है।

+70 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 55 शेयर
Prabhu Ram Sharma Aug 15, 2020

+6 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 2 शेयर
Devidas Chitale Aug 15, 2020

+8 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 3 शेयर
Devidas Chitale Aug 15, 2020

+4 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 0 शेयर

+107 प्रतिक्रिया 11 कॉमेंट्स • 44 शेयर
rekha Aug 15, 2020

+12 प्रतिक्रिया 4 कॉमेंट्स • 10 शेयर
nirmal mehta Aug 15, 2020

+6 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 10 शेयर
vandana Aug 15, 2020

+7 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 0 शेयर

भारत का एकमात्र धार्मिक सोशल नेटवर्क

Rate mymandir on the Play Store
5000 से भी ज़्यादा 5 स्टार रेटिंग
डेली-दर्शन, भजन, धार्मिक फ़ोटो और वीडियो * अपने त्योहारों और मंदिरों की फ़ोटो शेयर करें * पसंद के पोस्ट ऑफ़्लाइन सेव करें
सिर्फ़ 4.5MB