ध्येय सदा सविष्तृ मंडल मध्यवर्ती। नारायण: सर सिंजासन सन्नि: विष्ठ:।। केयूरवान्मकर कुण्डलवान किरीटी। हारी हिरण्यमय वपुधृत शंख चक्र।। भावार्थः-👉 सौर-मण्डल के मध्य में, कमल के आसन पर विराजमान (सूर्य) नारायण जो बाजूबंद, मकर की आकृति के कुण्डल, मुकुट, शंख, चक्र धारण किये हुए तथा स्वर्ण आभायुक्त शरीर वाले हैं, का सदैव ध्यान करते हैं। 🌄🌄 प्रभात वंदन 🌄🌄 मकरसंक्रांति पर्व की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं

ध्येय सदा सविष्तृ मंडल मध्यवर्ती।
नारायण: सर सिंजासन सन्नि: विष्ठ:।।
केयूरवान्मकर कुण्डलवान किरीटी।
हारी हिरण्यमय वपुधृत शंख चक्र।।

भावार्थः-👉 सौर-मण्डल के मध्य में, कमल के आसन पर विराजमान (सूर्य) नारायण जो बाजूबंद, मकर की आकृति के कुण्डल, मुकुट, शंख, चक्र धारण किये हुए तथा स्वर्ण आभायुक्त शरीर वाले हैं, का सदैव ध्यान करते हैं।

           🌄🌄 प्रभात वंदन 🌄🌄
मकरसंक्रांति पर्व की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं

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anju Jan 22, 2021

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Surinder Jan 22, 2021

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Jaikumar Jan 22, 2021

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balram choudhary Jan 22, 2021

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