भोजन के प्रकार 🥣 🥣 भीष्म पितामह ने अर्जुन को 4 प्रकार से भोजन न करने के लिए बताया था ... पहला भोजन .... जिस भोजन की थाली को कोई लांघ कर गया हो वह भोजन की थाली नाले में पड़े कीचड़ के समान होती है ...! दूसरा भोजन .... जिस भोजन की थाली में ठोकर लग गई,पाव लग गया वह भोजन की थाली भिष्टा के समान होता है ....! तीसरे प्रकार का भोजन .... जिस भोजन की थाली में बाल पड़ा हो, केश पड़ा हो वह दरिद्रता के समान होता है .... चौथे नंबर का भोजन .... अगर पति और पत्नी एक ही थाली में भोजन कर रहे हो तो वह मदिरा के तुल्य होता है ..... और सुनो अर्जुन अगर पत्नी,पति के भोजन करने के बाद थाली में भोजन करती है उसी थाली में भोजन करती है या पति का बचा हुआ खाती है तो उसे चारों धाम के पुण्य का फल प्राप्त होता है .. अगर दो भाई एक थाली में भोजन कर रहे हो तो वह अमृतपान कहलाता है चारों धाम के प्रसाद के तुल्य वह भोजन हो जाता है .... और सुनो अर्जुन ..... बेटी अगर कुमारी हो और अपने पिता के साथ भोजन करती है एक ही थाली में तो उस पिता की कभी अकाल मृत्यु नहीं होती .... क्योंकि बेटी पिता की अकाल मृत्यु को हर लेती है ! इसीलिए बेटी जब तक कुमारी रहे तो अपने पिता के साथ बैठकर भोजन करें ! क्योंकि वह अपने पिता की अकाल मृत्यु को हर लेती हैं ...! संस्कार दिये बिना सुविधायें देना, पतन का कारण है ... "सुविधाएं अगर आप ने बच्चों को नहीं दिए तो हो सकता है वह थोड़ी देर के लिए रोए ... पर संस्कार नहीं दिए तो वे जीवन भर रोएंगे ..🙏🙏

भोजन के प्रकार  🥣 🥣

भीष्म पितामह ने अर्जुन को 4 प्रकार से भोजन न करने के लिए बताया था ...

पहला भोजन ....
जिस भोजन की थाली को कोई लांघ कर गया हो वह भोजन की थाली नाले में पड़े कीचड़ के समान होती है ...!

दूसरा भोजन ....
जिस भोजन की थाली में ठोकर लग गई,पाव लग गया वह भोजन की थाली भिष्टा के समान होता है ....!

तीसरे प्रकार का भोजन ....
जिस भोजन की थाली में बाल पड़ा हो, केश पड़ा हो वह दरिद्रता के समान होता है ....

चौथे नंबर का भोजन ....
अगर पति और पत्नी एक ही थाली में भोजन कर रहे हो तो वह मदिरा के तुल्य होता है .....
और सुनो अर्जुन अगर पत्नी,पति के भोजन करने के बाद थाली में भोजन करती है उसी थाली में भोजन करती है या पति का बचा हुआ खाती है तो उसे चारों धाम के पुण्य का फल प्राप्त होता है ..
अगर दो भाई एक थाली में भोजन कर रहे हो तो वह अमृतपान कहलाता है

चारों धाम के प्रसाद के तुल्य वह भोजन हो जाता है ....

और सुनो अर्जुन .....
बेटी अगर कुमारी हो और अपने पिता के साथ भोजन करती है एक ही थाली में तो उस पिता की कभी अकाल मृत्यु नहीं होती ....
क्योंकि बेटी पिता की अकाल मृत्यु को हर लेती है ! इसीलिए बेटी जब तक कुमारी रहे तो अपने पिता के साथ बैठकर भोजन करें ! क्योंकि वह अपने पिता की अकाल मृत्यु को हर लेती हैं ...!

 संस्कार दिये बिना सुविधायें देना, पतन का कारण है ...

"सुविधाएं अगर आप ने बच्चों को नहीं दिए तो हो सकता है वह थोड़ी देर के लिए रोए ... 
पर संस्कार नहीं दिए तो वे जीवन भर रोएंगे ..🙏🙏

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कामेंट्स

Shivsanker Shukla Feb 22, 2021
सादर सुप्रभात बहन राधे-राधे

RAJ RATHOD Feb 22, 2021
काल अनेक महाकाल एक देव अनेक महादेव एक, शक्ति अनेक शिवशक्ती एक नेत्र अनेक त्रिनेत्रधारी एक।

dinesh patidar Feb 22, 2021
Om namah shivaya 🌷 suprabhat vandan Ji 🙏 aap ka din mangalmay ho 🌷

B K Patel Feb 22, 2021
जय श्री कृष्ण शुभ प्रभात स्नेह वंदन धन्यवाद 🌹🙏🙏

Rajpal singh Feb 22, 2021
Om Namah shivay Har Har Mahadev Ji baba bholenath ki jai good morning ji 🙏🙏

Ranveer Soni Feb 22, 2021
🌹🌹जय श्री कृष्णा🌹🌹

raadhe krishna Feb 22, 2021
जय श्री राधे राधे कृष्णा🌹🌹

N. K. M. Feb 22, 2021
ji sahi bhookh ki paribhaasa koi naa jaan paaya kahaa kab kya chaahiye ye jo samjhaa vahi jivan saar paaya su prabhat vandan radhy radhy Krishna Ji 🌹🌹🙏🌹🌹🙏

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mona Feb 26, 2021

+63 प्रतिक्रिया 12 कॉमेंट्स • 124 शेयर
Alka dhingra Feb 26, 2021

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