मोहन
मोहन Aug 24, 2017

परमात्मा की प्राप्ति कैसे करे

परमात्मा की प्राप्ति कैसे करे

परमात्मा की प्राप्ति कैसे करे

प्यारे मित्रो , सभी महा पुरुष कहते है की मानव जीवन का एक मात्र उददेश्य  आत्मा का साक्षात्कार करना एवं परमात्मा की अनुभूति करना  है परन्तु बहुत कम लोग यह जानते है की आत्म साक्षात्कार कैसे किया जाता है ; एक बार एक जिज्ञासु व्यक्ति एक बहुत बड़े महापुरुष संत के पास पहुँचता  है और उनसे निवेदन करता है की हे गुरुदेव मैं वर्षो से पूजा पाठ कर रहा हूँ , मैं कर्म कांड  भी सभी करता हूँ , मैंने सारे तीर्थ  भी कर लिए है सत्संग में भी जाता हूँ परन्तु अभी तक मुझे परमात्मा की प्राप्ति नहीं हुई है , कृपया मेरा मार्गदर्शन करे मैं कैसे परमात्मा को प्राप्त करू , उन महापुरुष ने मुस्कुराते हुए कहा , जो भी व्यक्ति अपने जीवन में परमात्मा को प्राप्त करना चाहता है उसे अपने भीतर उतरना होगा , पूजा पाठ , कर्म कांड , तीर्थ , सत्संग करने से परमात्मा की प्राप्ति नहीं होगी हाँ  ये प्रारंभ हो सकते है , साधन हो सकते है , परन्तु परमात्मा की अनुभूति सिर्फ और सिर्फ अपने भीतर उतरने पर ही होगी ,उस व्यक्ति ने प्रशन किया " गुरुदेव अपने भीतर कैसे उतरते  है ? " महात्मा ने कहा अपने भीतर उतरने की सीढ़ियों का नाम है "  स्वास " यदि आप ध्यान दे तो परमात्मा ने यह शरीर बनाने  के बाद हमें पूरी तरह स्वतंत्र छोड़ दिया है की हम अपनी समस्त इन्द्रियो का जैसा चाहे उपयोग करे वो रोज़ - रोज़  हस्तछेप  नहीं करता , हम अपनी ज्ञान इन्द्रियों का कर्म इन्द्रियों का उपयोग करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है  वो नहीं रोकता की  हम आँखों  से क्या देखे , हाथों से क्या स्पर्श करे , कानो से क्या सुने हम पूरी तरह स्वतंत्र है , इतने सब कार्य के स्वतंत्र करने के बाद भी एक चीज परमात्मा ने सीधे अपने पास रखी है , और आदमी हो या औरत उसी काम के लिए दावा करते है की मैं कर रहा हूँ , या मैं कर रही हूँ  , और वो काम है स्वास लेना , हम कहते है मैं स्वास ले रहा हूँ , मैं स्वास ले रही हूँ , यदि ये बात सच है तो इस दुनिया में कोई मरता ही नहीं भला कौन स्वास लेना बंद करता बताइए ? तो हम स्वास नहीं ले रहे कोई दे रहा है , तो हम ले रहे है , जिस दिन उसने अंतिम डोर काट दी , जिस दिन उसने अंतिम स्वास पर हस्ताक्षर कर दिए उस दिन अपने आस पास दुनिया भर के धन्वन्तरी इकट्ठे कर लेना , अपनी सारी  दौलत लगा कर चिकित्सा की व्यवस्था जुटा लेना  अगर उसने अंतिम स्वास तय कर दी है तो जाना पड़ेगा , और जाते है लोग !बाकि वो रोज़ रोज़ हस्तक्षेप नहीं करता ,फिर भी हम कहते मैं स्वास ले रहा हूँ या  मैं स्वास ले रही हूँ , बस यही एक काम ऐसा है की हम स्वास नहीं ले रहे है कोई दे रहा है तो हम ले रहे है  , और जैसे ही हम स्वास से जुड़ते है परमात्मा से जुड़ जाते है , और स्वास लेने के विज्ञानं का नाम है प्राणायाम , " साइंस आफ ब्रीदिंग "
जैसे ही हम अपनी चेतना को आती हुई स्वास और जाती हुई स्वास से जोड़ते है हमारे विचार रुक जाते है - मन शांत होते लगता है और धीरे धीरे भीतर की यात्रा प्रारंभ हो जाती है फिर क्या अनुभूति होती है                   '' शिवोSम  शिवोSम शिवोSम शिवोSम वही  आत्मा सच्चिदानन्द  मैं हूँ अमर आत्मा सच्चिदानन्द  मैं हूँ "

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