Radha krishna
Radha krishna Sep 10, 2017

अनमोल वचन।

#सुविचार
छोटी हो या बडी, कम हो या अधिक, कामनाएं प्रत्येक मनुष्य में होती हैं। कामनाओं और प्रगति का यद्यपि आपस में कोई सीधा सम्बन्ध नहीं है, परन्तु मनुष्य ने कामनाओं को प्रगति से जोड दिया है। उसकी सोच यह है कि कामनाएं न हो तो आदमी कुछ पाने, आगेबढने और उन्नति की ओर अग्रसर होने की सोचेगा भी नहीं, किन्तु यह उसका भ्रम है, जो जीवन में कभी स्थिरता नहीं आने देता। प्रगति करने, उपलब्धियां अर्जित करने की भावना होनी चाहिए और इसके लिये प्रयासरत भी रहना चाहिए। अन्दर बैठा ईश्वर सदैव मनुष्य को अपने गुणों के अनुरूप चलाना चाहता है। वह दयालु है, परोपकारी है, रक्षक है, समदृष्टि वाला है, निडर है, सत्य और ज्ञान का स्रोत है। इन गुणों का अनुसरण करना ही ईश्वर के अनुकूल आचरण करना है। जब मनुष्य के कार्य इन गुणों से अभिप्रेरित होंगे तो निश्चय ही उसे जीवन में सुख और आनन्द की प्राप्ति होगी और सारी भटकन समाप्त हो जायेगी। ऐसा इसलिए क्योंकि ईश्वर आनन्द स्वरूप है। मनुष्य के अन्र्तमन में बैठकर वह मनुष्य को राह पर लाना चाहता है, किन्तु विकार मनुष्य के ज्ञान व चेतना का हरण कर लेते हैं। मनुष्य अपने मन की सुनने में असमर्थ हो जाता है। अन्त:चेतना को जागृत करना ही मनुष्य का धर्म और जीवन का लक्षय है। ऐसा न होने पर मनुष्य जीवन भर कामनाओं के हाथों छला जाता रहेगा।

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