Guddi Chaudhary
Guddi Chaudhary May 30, 2018

Good night all Jai Shri Radhe Krishna

Sundar se bhi ATI Sundar Hai Tu,
Log to Pathar Pujhte He Meri to Pooja hai tu,
Puche Jo Mujhse Kaun Hai Tu haskar
Keheti hu Zindagi Hu, Mai Aur Saans Hai Tu..... Jai Shri Radhe Krishna

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Rakesh dubey May 30, 2018
Radhe Radhe Ji 🍃 Good Night 🍁🍁 Sweet Dreams 🌾🌾

*प्राचीनकाल में गोदावरी नदी के किनारे वेदधर्म मुनि का आश्रम था। एक दिन गुरुजी ने अपने शिष्यों से कहा की- शिष्यों! अब मुझे कोढ़ निकलेगा और मैं अंधा भी हो जाऊँगा, इसिलिए काशी में जाकर रहूँगा। है कोई शिष्य जो मेरे साथ रह कर सेवा करने के लिए तैयार हो ? सब चुप हो गये। उनमें संदीपनी ने कहा- गुरुदेव! मैं आपकी सेवा में रहूँगा। गुरुदेव ने कहा इक्कीस वर्ष तक सेवा के लिए रहना होगा। संदीपनी बोले इक्कीस वर्ष तो क्या मेरा पूरा जीवन ही अर्पित है आपको। वेदधर्म मुनि एवं संदीपन काशी में रहने लगे । कुछ दिन बाद गुरु के पूरे शरीर में कोढ़ निकला और अंधत्व भी आ गया । शरीर कुरूप और स्वभाव चिड़चिड़ा हो गया । संदीपनी के मन में लेशमात्र भी क्षोभ नहीं हुआ । वह दिन रात गुरु जी की सेवा में तत्पर रहने लगा । गुरु को नहलाता, कपड़े धोता, भिक्षा माँगकर लाता और गुरुजी को भोजन कराता । गुरुजी डाँटते, तमाचा मार देते... किंतु संदीपनी की गुरुसेवा में तत्परता व गुरु के प्रति भक्तिभाव और प्रगाढ़ होता गया।* *गुरु निष्ठा देख काशी के अधिष्ठाता देव विश्वनाथ संदीपनी के समक्ष प्रकट होकर बोले- तेरी गुरुभक्ति देख कर हम प्रसन्न हैं । कुछ भी वर माँग लो । संदीपनी गुरु से आज्ञा लेने गया और बोला भगवान शिवजी वरदान देना चाहते हैं, आप आज्ञा दें तो आपका रोग एवं अंधेपन ठीक होने का वरदान मांग लूँ ? गुरुजी ने डाँटा,बोले- मैं अच्छा हो जाऊँ और मेरी सेवा से तेरी जान छूटे यही चाहता है तु ? अरे मूर्ख ! मेरा कर्म कभी-न-कभी तो मुझे भोगना ही पड़ेगा । संदीपनी ने भगवान शिवजी को वरदान के लिए मना कर दिया। शिवजी आश्चर्यचकित हो गये और गोलोकधाम पहुंच के श्रीकृष्ण से पूरा वृत्तान्त कहा। श्रीकृष्ण भी संदीपनी के पास वर देने आये। संदीपनी ने कहा- प्रभु! मुझे कुछ नहीं चाहिए। आप मुझे यही वर दें कि गुरुसेवा में मेरी अटल श्रद्धा बनी रहे।* *एक दिन गुरुजी ने संदीपनी को कहा कि- मेरा अंत समय आ गया है। सभी शिष्यों से मिलने की इच्छा है । संदीपनी ने सब शिष्यों को सन्देश भेज दिया। सारे शिष्य उनके दर्शन के लिए आये। गुरुजी ने सभी शिष्यों कुछ न कुछ दिया । किसी को पंचपात्र, किसी को आचमनी , किसी को आसन किसी को माला दे दी । जब संदीपनी का आये तो सभी वस्तुएं समाप्त हो चुकी थी । गुरुजी चुप हो गए,फिर बोले कि मैं तुम्हे क्या दूँ ? तुम्हारी गुरूभक्ति के समान मेरे पास देने के लिए कुछ भी नहीं है । मैं तुम्हें यह वर देता हूँ कि- त्रिलोकी नाथ का अवतार होने वाला है, वह तुम्हारे शिष्य बनेंगे । संदीपनी के लिए इससे बड़ी भेंट और क्या होती । उन्होंने गुरूजी की अंत समय तक सेवा की। जब श्रीकृष्ण अवतार हुआ तो गुरुजी के दिए उस वरदान को फलीभूत करने के लिए स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने दूर उज्जैन में स्थित संदीपनी ऋषि के आश्रम में भ्राता बलराम जी के साथ आए और संदीपनी ऋषि के शिष्य बने... ऐसी है गुरुभक्ति की शक्ति। इसिलिए गुरुभक्ति ही सार है... राधे राधे...संगृहीत कथा*🙏🚩

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Neetu Shukla May 10, 2020

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Raju begi Rk begi May 10, 2020

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Sunita Pawar May 10, 2020

♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️ *बनावटी मदर डे* ➖➖➖➖➖ 🔷 मदर्स डे का मतलब यह नहीं होता कि एक दिन माँ की सेवा कर ली, सेल्फी लेकर अपलोड कर दी और लाईक, कॉमेंट इकट्ठे करके लोगों में धाक जमा दी । 🔷 असली मातृ दिवस तो कभी होता ही नहीं है, वह तो सदैव रहता है । क्योंकि माँ का कर्ज तो हम कभी चुका ही नहीं सकते । इसके लिए कोई एक दिन तय करना माँ की ममता के लिए खिलवाड़ होगा । आज, सिर्फ आज जो लोग 'मदर्स डे' मना रहे हैं, शायद वे लोग बनावटी विदेशी परम्पराओं में अपनी संस्कृति को भूल गए हैं । 🔷 माँ की आँखों में खुशी है तो हर रोज मदर्स डे है और यदि आपकी वजह से माँ दुःखी है तो यह दिन सिर्फ एक 'दिखावा दिवस' है, इससे ज्यादा और कुछ नहीं । क्योंकि माँ को प्रेम करने वाले किसी 'मदर्स डे' के इंतज़ार के मोहताज नहीं होते । . . . .* ------------------------ ♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️

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Sanjay Singh May 10, 2020

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