PDJOSHI
PDJOSHI Jun 6, 2018

SABKA PIYARA HE

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Sn Vyas May 10, 2020

ये निशान सूरजगढ़ से आता है इसलिए इसे *सूरजगढ़ निशान* कहा जाता है । सूरजगढ़ निशान मे इतनी शक्ति होती है की अगर कोई मृत प्राणी उस निशान के निचे आ जाए तोह उसमे भी प्राण आ जाए । यही वो निशान है जिससे खाटूश्यामजी मंदिर के ताले इस निशान के स्पर्श करने से खुल गए थे जिसके कारण तब से ये निशान खाटूश्याम जी मंदिर के शिखर पर लहराता है । फाल्गुन की बारस ( द्वादशी ) को खाटूश्याम जी मंदिर में दिन के करीब 11.15 बजे मंदिर के शिखर बंध पर ये निशान चढ़ाया जाता है । 368 वर्षो से भगतो के विश्वास एवं आस्था जुडी है इस निशान यात्रा से जो की सूरजगढ़ से खाटूश्यामजी आती है । पहले तो महाराज श्री आलू सिंह जी खुद कोसिया टिब्बे पे इस निशान की अगवानी स्वागत किया करते थे । ********************** *ज्यूँ ज्यूँ चाले पूर्वा बसंती* *तयु तयु यो लहरावै* *सूरजगढ़ निशान में* *माहरो श्याम धनी मुस्कावे*

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