Jayshree Shah
Jayshree Shah Aug 7, 2017

Shri Jirawala Parshvanath bhagvan

Shri Jirawala Parshvanath bhagvan

#जयजिनेंद्र

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💎 सच्चा हिरा 💎 राम राम जी 🙏🌹🙋 सायंकाल का समय था, सभी पक्षी अपने अपने घोंसले में जा रहे थे, तभी गांव की चार औरतें कुएं पर पानी भरने आईं और अपना अपना मटका भरकर बात करने लगीं, इस पर पहली औरत बोली अरे ! भगवान मेरे जैसा लड़का सबको दे, उसका कंठ इतना सुरीला है कि सब उसकी आवाज सुनकर मुग्ध हो जाते हैं। उसकी बात सुनकर दूसरी औरत बोली कि मेरा लड़का इतना बलवान है कि सब उसे आज के युग का भीम कहते हैं, तीसरी औरत कहाँ चुप रहने वाली थी वह बोली अरे ! मेरा लड़का एक बार जो पढ़ लेता है वह उसको उसी समय कंठस्थ हो जाता है। यह सब बात सुनकर चौथी औरत कुछ नहीं बोली तो इतने में दूसरी औरत ने कहा “बहन आपका भी तो एक लड़का है ना, आप उसके बारे में कुछ नहीं बोलना चाहती हो” इस पर उसने कहा मैं क्या कहूं वह ना तो बलवान है और ना ही अच्छा गाता है, हा मैंने अपने बेटे को कृष्ण भक्ति का पाठ और अच्छे संस्कार दिए हैं। यह सुनकर चारों स्त्रियों ने मटके उठाए और अपने गांव की ओर चल दी, तभी कानों में कुछ सुरीला सा स्वर सुनाई दिया, पहली स्त्री ने कहा “देखा ! मेरा पुत्र आ रहा है, वह कितना सुरीला गा रहा है, पर उसने अपनी माँ को नहीं देखा और उनके सामने से निकल गया, अब दूर जाने पर एक बलवान लड़का वहां से गुजरा उस पर दूसरी औरत ने कहा, “देखो ! मेरा बलिष्ट पुत्र आ रहा है , पर उसने भी अपनी मां को नहीं देखा और सामने से निकल गया, तभी दूर जाकर मंत्रों की ध्वनि उनके कानों में पड़ी। तभी तीसरी औरत ने कहा “देखो ! मेरा बुद्धिमान पुत्र आ रहा है , पर वह भी श्लोक कहते हुए वहां से उन दोनों कि भांति निकल गया, कुछ देर बाद वहां से एक और लड़का निकला वह उस चौथी स्त्री का पुत्र था, वह अपनी माता के पास आया और माता के सर पर से पानी का घड़ा ले लिया और गांव कि ओर निकल पड़ा, यह देख तीनों स्त्रियां चकित रह गईं, मानो उनको सांप सूंघ गया हो, वे तीनों उसको आश्चर्य से देखने लगी तभी वहां पर बैठी एक वृद्ध महिला ने कहा “देखो इसको कहते हैं। 💎"सच्चा हीरा”💎 सबसे पहला और सबसे बड़ा ज्ञान संस्कार का होता है जो किसी और से नहीं बल्कि स्वयं हमारे माता-पिता से प्राप्त होता है , फिर भले ही हमारे माता-पिता शिक्षित हों या ना हों यह ज्ञान उनके अलावा दुनिया का कोई भी व्यक्ति नहीं दे सकता है, संस्कारों की डोर को मजबूत बनाये रखिये....

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_*अक्षय तृतीया* (आखा तीज)_, [वैशाख ] उसका महत्व क्यों है और जानिए इस दिन कि कुछ महत्वपुर्ण जानकारियाँ: 🕉 ब्रह्माजी के पुत्र *अक्षय कुमार* का अवतरण। 🕉 *माँ अन्नपूर्णा* का जन्म।j 🕉 *चिरंजीवी महर्षी परशुराम* का जन्म हुआ था इसीलिए आज *परशुराम जन्मोत्सव* भी हैं। 🕉 *कुबेर* को खजाना मिला था। 🕉 *माँ गंगा* का धरती अवतरण हुआ था। 🕉 सूर्य भगवान ने पांडवों को *अक्षय पात्र* दिया। 🕉 महाभारत का *युद्ध समाप्त* हुआ था। 🕉 वेदव्यास जी ने *महाकाव्य महाभारत की रचना* गणेश जी के साथ शुरू किया था। 🕉 प्रथम तीर्थंकर *आदिनाथ ऋषभदेवजी भगवान* के 13 महीने का कठीन उपवास का *पारणा इक्षु (गन्ने) के रस से किया* था। 🕉 प्रसिद्ध तीर्थ स्थल *श्री बद्री नारायण धाम* का कपाट खोले जाते है। 🕉 बृंदावन के बाँके बिहारी मंदिर में *श्री कृष्ण चरण के दर्शन* होते है। 🕉 जगन्नाथ भगवान के सभी *रथों को बनाना प्रारम्भ* किया जाता है। 🕉 आदि शंकराचार्य ने *कनकधारा स्तोत्र* की रचना की थी। 🕉 *अक्षय* का मतलब है जिसका कभी क्षय (नाश) न हो!!! 🕉 *अक्षय तृतीया अपने आप में स्वयं सिद्ध मुहूर्त है कोई भी शुभ कार्य का प्रारम्भ किया जा सकता है....!!!* अक्षय रहे *सुख* आपका,😌 अक्षय रहे *धन* आपका,💰 अक्षय रहे *प्रेम* आपका,💕 अक्षय रहे *स्वास्थ* आपका,💪 अक्षय रहे *रिश्ता* हमारा 🌈 अक्षय तृतीया की आपको और आपके सम्पूर्ण परिवार को *हार्दिक शुभकामनाएं*

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*।। तीन बातें... आज की कहानी ।।* *बहुत समय पहले की बात है, सुदूर दक्षिण में किसी प्रतापी राजा का राज्य था. राजा के तीन पुत्र थे, एक दिन राजा के मन में आया कि पुत्रों को कुछ ऐसी शिक्षा दी जाये कि समय आने पर वो राज-काज सम्भाल सकें।* इसी विचार के साथ राजा ने सभी पुत्रों को दरबार में बुलाया और बोला, “पुत्रों, हमारे राज्य में नाशपाती का कोई वृक्ष नहीं है, मैं चाहता हूँ तुम सब चार-चार महीने के अंतराल पर इस वृक्ष की तलाश में जाओ और पता लगाओ कि वो कैसा होता है ?” राजा की आज्ञा पाकर तीनो पुत्र बारी-बारी से गए और वापस लौट आये। सभी पुत्रों के लौट आने पर राजा ने पुनः सभी को दरबार में बुलाया और उस पेड़ के बारे में बताने को कहा। पहला पुत्र बोला, “पिताजी वह पेड़ तो बिलकुल टेढ़ा–मेढ़ा, और सूखा हुआ था.” “नहीं-नहीं वो तो बिलकुल हरा–भरा था, लेकिन शायद उसमे कुछ कमी थी क्योंकि उस पर एक भी फल नहीं लगा था.” दुसरे पुत्र ने पहले को बीच में ही रोकते हुए कहा फिर तीसरा पुत्र बोला, “भैया, लगता है आप भी कोई गलत पेड़ देख आये क्योंकि मैंने सचमुच नाशपाती का पेड़ देखा, वो बहुत ही शानदार था और फलों से लदा पड़ा था” और तीनो पुत्र अपनी-अपनी बात को लेकर आपस में विवाद करने लगे। तभी राजा अपने सिंघासन से उठे और बोले, “पुत्रों, तुम्हे आपस में बहस करने की कोई आवश्यकता नहीं है, दरअसल तुम तीनो ही वृक्ष का सही वर्णन कर रहे हो... मैंने जानबूझ कर तुम्हे अलग-अलग मौसम में वृक्ष खोजने भेजा था और तुमने जो देखा वो उस मौसम के अनुसार था। मैं चाहता हूँ कि इस अनुभव के आधार पर तुम तीन बातों को गाँठ बाँध लो : पहली बात, किसी चीज के बारे में सही और पूर्ण जानकारी चाहिए तो तुम्हे उसे लम्बे समय तक देखना-परखना चाहिए. फिर चाहे वो कोई व्यवसाय, विषय, वस्तु हो या फिर कोई व्यक्ति ही क्यों न हो। दूसरी, हर मौसम एक सा नहीं होता, जिस प्रकार वृक्ष मौसम के अनुसार सूखता, हरा-भरा या फलों से लदा रहता है उसी प्रकार ब्यवसाय तथा मनुष्य के जीवन में भी उतार चढाव आते रहते हैं, अतः अगर तुम कभी भी बुरे दौर से गुजर रहे हो तो अपनी हिम्मत और धैर्य बनाये रखो, समय अवश्य बदलता है। *और तीसरी बात, अपनी बात को ही सही मान कर उस पर अड़े मत रहो, अपना दिमाग खोलो, और दूसरों के विचारों को भी जानो। यह संसार ज्ञान से भरा पड़ा है, चाह कर भी तुम अकेले सारा ज्ञान अर्जित नहीं कर सकते, इसलिए भ्रम की स्थिति में किसी ज्ञानी व्यक्ति से सलाह लेने में संकोच मत करो..!!* *🙏🏻🙏🏼🙏🙏🏾🙏🏽🙏🏿

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mansukh lal oswal May 14, 2021

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स्नेह के आँसू ======= गली से गुजरते हुए सब्जी वाले ने तीसरी मंजिल की घंटी का बटन दबाया। ऊपर से बालकनी का दरवाजा खोलकर बाहर आई महिला ने नीचे देखा। "बीबी जी ! सब्जी ले लो । बताओ क्या- क्या तोलना है। कई दिनों से आपने सब्जी नहीं खरीदी मुझसे, कोई और देकर जा रहा है?" सब्जी वाले ने चिल्लाकर कहा। "रुको भैया! मैं नीचे आती हूँ।" उसके बाद महिला घर से नीचे उतर कर आई और सब्जी वाले के पास आकर बोली - "भैया ! तुम हमारी घंटी मत बजाया करो। हमें सब्जी की जरूरत नहीं है।" "कैसी बात कर रही हैं बीबी जी ! सब्जी खाना तो सेहत के लिए बहुत जरूरी होता है। किसी और से लेती हो क्या सब्जी ?" सब्जीवाले ने कहा। "नहीं भैया! उनके पास अब कोई काम नहीं है। और किसी तरह से हम लोग अपने आप को जिंदा रखे हुए हैं। जब सब ठीक होने लग जाएगा, घर में कुछ पैसे आएंगे, तो तुमसे ही सब्जी लिया करूंगी। मैं किसी और से सब्जी नहीं खरीदती हूँ। तुम घंटी बजाते हो तो उन्हें बहुत बुरा लगता है, उन्हें अपनी मजबूरी पर गुस्सा आने लगता है। इसलिए भैया अब तुम हमारी घंटी मत बजाया करो।" महिला कहकर अपने घर में वापिस जाने लगी। "ओ बहन जी ! तनिक रुक जाओ। हम इतने बरस से तुमको सब्जी दे रहे हैं । जब तुम्हारे अच्छे दिन थे, तब तुमने हमसे खूब सब्जी और फल लिए थे। अब अगर थोड़ी-सी परेशानी आ गई है, तो क्या हम तुमको ऐसे ही छोड़ देंगे ? सब्जी वाले हैं, कोई नेता जी तो है नहीं कि वादा करके छोड़ दें। रुके रहो दो मिनिट।" और सब्जी वाले ने एक थैली के अंदर टमाटर , आलू, प्याज, घीया, कद्दू और करेले डालने के बाद धनिया और मिर्च भी उसमें डाल दिया । महिला हैरान थी। उसने तुरंत कहा – "भैया ! तुम मुझे उधार सब्जी दे रहे हो, कम से कम तोल तो लेते, और मुझे पैसे भी बता दो। मैं तुम्हारा हिसाब लिख लूंगी। जब सब ठीक हो जाएगा तो तुम्हें तुम्हारे पैसे वापस कर दूंगी।" महिला ने कहा। "वाह..... ये क्या बात हुई भला ? तोला तो इसलिए नहीं है कि कोई मामा अपने भांजी -भाँजे से पैसे नहीं लेता है। और बहिन ! मैं कोई अहसान भी नहीं कर रहा हूँ । ये सब तो यहीं से कमाया है, इसमें तुम्हारा हिस्सा भी है। गुड़िया के लिए ये आम रख रहा हूँ, और भाँजे के लिए मौसमी । बच्चों का खूब ख्याल रखना। ये बीमारी बहुत बुरी है। और आखिरी बात सुन लो .... घंटी तो मैं जब भी आऊँगा, जरूर बजाऊँगा।" और सब्जी वाले ने मुस्कुराते हुए दोनों थैलियाँ महिला के हाथ में थमा दीं। अब महिला की आँखें मजबूरी की जगह स्नेह के आंसुओं से भरी हुईं थीं।

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*सफेद नमक को नो, सेंधा नमक को यस, फायदे जानकर हैरान रह जाएंगे* 1. ब्लड प्रेशर- बीपी कम होने पर हम नींबू पानी और नमक का घोल पीते हैं। लेकिन यह साधा नमक आपके शरीर को सबसे अधिक नुकसान पहुंचा रहा है। इस जगह पर आप सेंधा नमक का इस्तेमाल कीजिए। इससे आपका बीपी कंट्रोल में रहेगा, हार्ट की समस्या नहीं होगी और कोलेस्ट्रॉल की समस्या भी नहीं बढ़ेगी। 2. स्ट्रेस लेवल- इसके सेवन से आपका स्ट्रेस लेवल कम होगा। इसमें मौजूद तत्व सेरोटोनिन और मेलाटोनिन केमिकल्स को बैलेंस करके रखता है। जो आपको खासकर डिप्रेशन जैसी समस्या से लड़ने में मदद करेंगे। 3. वजन- आज के वक्त में हर कोई मोटापे का शिकार हो रहा हैं। इसे कम करने के लिए तरह-तरह के हथकंडे भी अपनाएं जा रहे हैं। लेकिन अगर आप सफेद नमक की जगह सेंधा नमक का उपयोग करेंगे यह आपका वजन कम करने में कारगर होगा। इसमें मौजूद तत्व एक्स्ट्रा फैट को कम करने में मददगार होते हैं। 4. बीमारियों से छुटकारा- इसका सेवन अनिद्रा, अस्थमा, डायबिटिज, पथरी जैसी समस्या के लिए सबसे अधिक कारगर है। 5. साइनस- साइनस की बीमारी बच्चों को सबसे अधिक होती है। इसलिए सेंधा नमक का उपयोग करना चाहिए। इसके सेवन से सांस की बीमारी का खतरा भी टल जाता है। *ऐसे और भी कई आयुर्वेद में बताये गए एवं माने हुए सुप्रसिद् व रोजमर्रा जीवन में काम आने वाले कारगर नुस्ख़े पढ़ने और लाभ प्राप्त करने के लिए एप्प इंस्टॉल करे* 🙏

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*प्रारब्ध* एक व्यक्ति हमेशा ईश्वर के नाम का जाप किया करता था । धीरे धीरे वह काफी बुजुर्ग हो चला था इसीलिए एक कमरे मे ही पड़ा रहता था । जब भी उसे शौच; स्नान आदि के लिये जाना होता था; वह अपने बेटो को आवाज लगाता था और बेटे ले जाते थे । धीरे धीरे कुछ दिन बाद बेटे कई बार आवाज लगाने के बाद भी कभी कभी आते और देर रात तो नहीं भी आते थे।इस दौरान वे कभी-कभी गंदे बिस्तर पर ही रात बिता दिया करते थे अब और ज्यादा बुढ़ापा होने के कारण उन्हें कम दिखाई देने लगा था एक दिन रात को निवृत्त होने के लिये जैसे ही उन्होंने आवाज लगायी, तुरन्त एक लड़का आता है और बडे ही कोमल स्पर्श के साथ उनको निवृत्त करवा कर बिस्तर पर लेटा जाता है । अब ये रोज का नियम हो गया । एक रात उनको शक हो जाता है कि, पहले तो बेटों को रात में कई बार आवाज लगाने पर भी नही आते थे। लेकिन ये तो आवाज लगाते ही दूसरे क्षण आ जाता है और बडे कोमल स्पर्श से सब निवृत्त करवा देता है । एक रात वह व्यक्ति उसका हाथ पकड लेता है और पूछता है कि सच बता तू कौन है ? मेरे बेटे तो ऐसे नही हैं । अभी अंधेरे कमरे में एक अलौकिक उजाला हुआऔर उस लड़के रूपी ईश्वर ने अपना वास्तविक रूप दिखाया। वह व्यक्ति रोते हुये कहता है : हे प्रभु आप स्वयं मेरे निवृत्ती के कार्य कर रहे है । यदि मुझसे इतने प्रसन्न हो तो मुक्ति ही दे दो ना । प्रभु कहते है कि जो आप भुगत रहे है वो आपके प्रारब्ध है । आप मेरे सच्चे साधक है; हर समय मेरा नाम जप करते है इसलिये मै आपके प्रारब्ध भी आपकी सच्ची साधना के कारण स्वयं कटवा रहा हूँ । व्यक्ति कहता है कि क्या मेरे प्रारब्ध आपकी कृपा से भी बडे है; क्या आपकी कृपा, मेरे प्रारब्ध नही काट सकती है । प्रभु कहते है कि, मेरी कृपा सर्वोपरि है; ये अवश्य आपके प्रारब्ध काट सकती है; लेकिन फिर अगले जन्म मे आपको ये प्रारब्ध भुगतने फिर से आना होगा । यही कर्म नियम है । इसलिए आपके प्रारब्ध मैं स्वयं अपने हाथो से कटवा कर इस जन्म-मरण से आपको मुक्ति देना चाहता हूँ । ईश्वर कहते है: *प्रारब्ध तीन तरह* के होते है : *मन्द*, *तीव्र*, तथा *तीव्रतम* *मन्द प्रारब्ध* मेरा नाम जपने से कट जाते है । *तीव्र प्रारब्ध* किसी सच्चे संत का संग करके श्रद्धा और विश्वास से मेरा नाम जपने पर कट जाते है । पर *तीव्रतम प्रारब्ध* भुगतने ही पडते है। लेकिन जो हर समय श्रद्धा और विश्वास से मुझे जपते हैं; उनके प्रारब्ध मैं स्वयं साथ रहकर कटवाता हूँ और तीव्रता का अहसास नहीं होने देता हूँ । *प्रारब्ध पहले रचा, पीछे रचा शरीर ।* *तुलसी चिन्ता क्यों करे, भज ले श्री रघुबीर।।*

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!!अकेलेपन से एकांत की ओर !! ▪️ये आपके हाथ में है कि आप अकेलेपन में है या एकान्त में हैं। अकेलेपन को भरा जाता है और व्यर्थ कि वस्तुओं को निकालकर जो बचता है वो एकांत है। ▪️अकेलापन stress है अकेलापन depression है अकेलापन Injãity है अकेलापन अधूरापन है। साधु अकेला नहीं होता वो एकान्त में होता है। ▪️एक बात और आप सब अभी तक भीड़ में थे बहुत चीजे आस-पास थी पर उसके बाद भी आप अकेलेपन में थे और उसे फिल करना पड़ता था। ▪️उस अकेलेपन को भरने के लिये मैक़्जीन पढ़ने लगता है मूवीज़ देखने लगता है यू ट्यूब पर चला जाता होगा वो अपने अकेलेपन को भरने में लगा हुआ है। ▪️आप अकेलेपन में है या आप एकान्त में है इस बात का विचार कीजिए। अकेलापन डिप्रेशन है एकान्त डाशीजन है अकेलापन एक भय है एकान्त होना आनन्द है बहुत सी चीजे कही जा सकती है दोनों में बहुत अन्तर है - ▪️अकेलापन आपको बाहर की तरफ दौड़ाता है एकान्त आपको भीतर की तरफ दौड़ाता है। ▪️गुरुदेव कहते- एक ही कान्त हो जाना भी एकान्त है। एक कान्त ही एकान्त है। ▪️हम कई बार अकेलेपन को भी एकान्त समझ लेते हैं। भीड़ में होना आवश्यक नहीं है कि आप एकान्त में है। बहुत सारे लोग भीड़ में होते हुए भी एकान्त में नहीं होते। ▪️अभी तक आप अपने अकेलेपन को भरने के लिये श्रृष्टि खड़ा किया पर आज आपके पास अवकाश है इस परिस्थिति में आनन्द का अनुभव वो कर सकता है जो एकान्त के महत्व को जानता है। ▪️एकान्त का मतलव सहज रूप में समझाया जाय तो आपके जीवन में व्यर्थ वस्तुओं की निवृत्ति एकान्त है। ▪️अकेलेपन में व्यक्ति को ज्यादा बोलने और सुनने की इच्छा होती है पर एकान्त का सबसे पहला प्रमाण है कि वहाँ मौन आनन्द देने लगता है। ▪️एकान्त का स्वरूप मौन है। एकान्त और मौन एक ही स्थिति के दो आयाम है। एक ही वस्तु के दो प्रकार है एक ही स्वभाव की दो आकृतियाँ हैं। ▪️मौनी एकान्त को प्राप्त कर लेता है एकान्ती मौन को प्राप्त कर लेता है। ▪️वैकुण्ठाधिपति भगवान जब क्षीर सागर में आराम करते हैं तो वो अकेले में नहीं एकान्त में होते हैं। ▪️जिसने अपने जीवन में अकेलापन अनुभव किया है वो वनों से शहरों की तरफ भागा है और जिसने अपने जीवन में एकान्त का अनुभव किया वो शहरों से वनों कि तरफ भागने लगता है। ▪️एकान्त को भरने की जरूरत नही होती। जब घड़ा पूरा भर जाय अब उसमें कुछ भरने की गुंजाइश न हो जब कुछ कहने कि गुंजाइश न हो ये स्थिति एकान्त है। ▪️एक और बात आप अकेले पैदा होते हो और आप अकेले मरते हो तो अकेले होना प्रकृति है एकान्त परमेश्वर है। ▪️अकेले तो रहते हो पर सबसे बड़ी साधना ये है कि वो जन्म जो मृत्यु के लिए होती है इसके बीच में आप एकान्त को भर लो। ▪️इस समय जिसने एकान्त को भरा हुआ है न बन्धुओ! वो इसका आनन्द लेगा वो इस परिस्थिति में भी परमानन्द का अनुभव प्राप्त कर लेगा। ▪️अकेलापन भोग कि तरफ ले जाता है एकान्त योग कि तरफ ले जाता है। ▪️जब कोई नहीं होता तब आपको अकेला लगता है जब कोई आपका नहीं होता तब आपको अकेला लगता है जब आप किसी के नहीं होते तो शायद आपको अकेला लगता है। पर सबके होते हुए भी आप एकान्त का अनुभव कर सकते हैं। ▪️अकेलापन आपको क्रोधी बना सकता है एकान्त आपको प्रेमी बना सकता है एकान्त का ही आनन्द लेना ध्यान है। ▪️अगर आप कमरे में अकेले बैठे हो तब कोई आ जाए तो आपको सुख का अनुभव होता है पर अगर आप एकान्त में बैठे हो और उस समय कोई आ जाए तो आपको विघ्न का अनुभव होता है। ▪️एकान्त वास्तव में हमारा आत्यंतिक स्वभाव है। वो अन्तः स्वतः रूप से भरा हुआ है। ▪️अकेलेपन को घड़ीभर में भरा जा सकता है और घड़ी भर में खाली किया जा सकता है पर एकान्त धीरे-धीरे घटता है। ▪️अकेलेपन में उदासी पटकती है अकेलापन दूसरों की याद दिलाता है। एकान्त अपने से परिचय कराता है। ▪️एकान्त ही वो स्थान है जहाँ भगवान मिलते हैं। ▪️भजन वो वस्तु है जो एकान्त तक ले जाती है इसलिए भीड़ में भी ध्यान कर सकते हो भीड़ में भी सुमिरन कर सकते हो भीड़ में भी तुम जप कर सकते हो क्योंकि वो एकान्त तक ले जाता है। ▪️तुम अपने अकेलेपन को भरने के लिये जो साधन करते हो वो भीड़ में नहीं हो सकती। भजन खुद अकेला करता चला जाता है तो तुम मेले में भी अकेले और अकेले मे भी मेले में होते हो। ▪️हिमालय पर एकान्त मिल सकता है। वृन्दावन में बहुत सारे साधु अकेले है वास्तव में वो एकान्त में है। तुम धीरे-धीरे उस स्थिति का अनुभव करने लगते हो। ▪️एकान्त में आपको कहीं पहुंचना नहीं होता बस पाना होता है। ▪️अपने अकेलेपन को एकान्त से भर लीजिए। एक को कान्त बना लीजिए। अनेक का अन्त कर दीजिए। अनन्त कि ओर आइए। अनन्त कि आराधना में लग जाइए। यही उसकी सूक्ष्मतम् वेदना का स्वरूप है। ▪️जब व्यास गादी पर कोई वक्ता बैठता है तो वो अकेला नहीं होता वो एकान्त बैठता है। ▪️तुम कथा में पूरे परिवार के साथ आए या अकेले आए हो पर कथा तुम्हारे अन्तस्चेतना तक उतर सकती है जब तुम एकान्त में बैठ जाते हो। ▪️अकेले होकर एकान्त में या भीड़ में होकर एकान्त में। ये इसका सूक्ष्मतम् स्वरूप है। ▪️एकान्त वास मतलव सबसे दूर रहना नहीं एकान्त का मतलव अपने पास रहना है। ▪️मीरा अकेली नहीं चलती एकान्त में चलती हैं। ▪️गुरु शिष्य को अकेले नहीं छोड़ता एकान्त में छोड़ता है। जब शिष्य एकान्त अनुभव करता है तो वो अपनी साधना को अवकाश देता है। _*जीवेर स्वरूप होय नित्य कृष्ण दास*_ यही इसका सूक्ष्म से सूक्ष्मतम् स्वरूप है।

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