Jayshree Shah
Jayshree Shah Aug 7, 2017

Shri Jirawala Parshvanath bhagvan

Shri Jirawala Parshvanath bhagvan

#जयजिनेंद्र

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🙋‍♀️🌹शुभ रात्रि वंदन 🌹🙏 *दो अनमोल हीरे* *एक सौदागर को बाज़ार में घूमते हुए एक उम्दा नस्ल का ऊंट दिखाई पड़ा!* *सौदागर और ऊंट बेचने वाले के बीच काफी लंबी सौदेबाजी हुई और आखिर में सौदागर ऊंट खरीद कर घर ले आया!* . *घर पहुंचने पर सौदागर ने अपने नौकर को ऊंट का कजावा ( काठी) निकालने के लिए बुलाया..!* . *कजावे के नीचे नौकर को एक छोटी सी मखमल की थैली मिली जिसे खोलने पर उसे कीमती हीरे जवाहरात भरे होने का पता चला..!* . *नौकर चिल्लाया,"मालिक आपने ऊंट खरीदा, लेकिन देखो, इसके साथ क्या मुफ्त में आया है!"* . *सौदागर भी हैरान था, उसने अपने नौकर के हाथों में हीरे देखे जो कि चमचमा रहे थे और सूरज की रोशनी में और भी टिम टिमा रहे थे!* . *सौदागर बोला: " मैंने ऊंट ख़रीदा है, न कि हीरे, मुझे उसे फौरन वापस करना चाहिए!"* . *नौकर मन में सोच रहा था कि मेरा मालिक कितना बेवकूफ है...!* . *बोला: "मालिक किसी को पता नहीं चलेगा!" पर, सौदागर ने एक न सुनी और वह फौरन बाज़ार पहुंचा और दुकानदार को मख़मली थैली वापिस दे दी!* . *ऊंट बेचने वाला बहुत ख़ुश था, बोला, "मैं भूल ही गया था कि अपने कीमती पत्थर मैंने कजावे के नीचे छुपा के रख दिए थे!* . *अब आप इनाम के तौर पर कोई भी एक हीरा चुन लीजिए!* . *"सौदागर बोला," मैंने ऊंट के लिए सही कीमत चुकाई है इसलिए मुझे किसी शुक्राने और ईनाम की जरूरत नहीं है!"* . *जितना सौदागर मना करता जा रहा था, ऊंट बेचने वाला उतना ही ज़ोर दे रहा था!* . *आख़िर में सौदागर ने मुस्कुराते हुए कहा: असलियत में जब मैंने थैली वापस लाने का फैसला किया तो मैंने पहले से ही दो सबसे कीमती हीरे इसमें से अपने पास रख लिए थे!* . *इस कबूलनामें के बाद ऊंट बेचने वाला भड़क गया उसने अपने हीरे जवाहरात गिनने के लिए थैली को फ़ौरन खाली कर लिया!* . *पर वह था बड़ी पशोपेश में बोला,"मेरे सारे हीरे तो यही है, तो सबसे कीमती दो कौन से थे जो आपने रख़ लिए?"* *सौदागर बोला:... " मेरी ईमानदारी और मेरी खुद्दारी."* *जिन जिन के पास यह 2 हीरे है वह दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति हैं।......* *संकलित*

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♦️♦️♦️ ♦️♦️♦️ शुभ प्रभात वंदन जी *👉🏿चिंता* 🏵️ 🔅🔅🔅🔅🔅🔅🔅🔅🔅🔅 *एक राजा की पुत्री के मन में वैराग्य की भावनाएं थीं। जब राजकुमारी विवाह योग्य हुई तो राजा को उसके विवाह के लिए योग्य वर नहीं मिल पा रहा था।* *राजा ने पुत्री की भावनाओं को समझते हुए बहुत सोच-विचार करके उसका विवाह एक गरीब संन्यासी से करवा दिया।* *राजा ने सोचा कि एक संन्यासी ही राजकुमारी की भावनाओं की कद्र कर सकता है।* *विवाह के बाद राजकुमारी खुशी-खुशी संन्यासी की कुटिया में रहने आ गई।* *कुटिया की सफाई करते समय राजकुमारी को एक बर्तन में दो सूखी रोटियां दिखाई दीं। उसने अपने संन्यासी पति से पूछा कि रोटियां यहां क्यों रखी हैं?* *संन्यासी ने जवाब दिया कि ये रोटियां कल के लिए रखी हैं, अगर कल खाना नहीं मिला तो हम एक-एक रोटी खा लेंगे।* *संन्यासी का ये जवाब सुनकर राजकुमारी हंस पड़ी। राजकुमारी ने कहा कि मेरे पिता ने मेरा विवाह आपके साथ इसलिए किया था, क्योंकि उन्हें ये लगता है कि आप भी मेरी ही तरह वैरागी हैं, आप तो सिर्फ भक्ति करते हैं और कल की चिंता करते हैं।* *सच्चा भक्त वही है जो कल की चिंता नहीं करता और भगवान पर पूरा भरोसा करता है।* *अगले दिन की चिंता तो जानवर भी नहीं करते हैं, हम तो इंसान हैं। अगर भगवान चाहेगा तो हमें खाना मिल जाएगा और नहीं मिलेगा तो रातभर आनंद से प्रार्थना करेंगे।* *ये बातें सुनकर संन्यासी की आंखें खुल गई। उसे समझ आ गया कि उसकी पत्नी ही असली संन्यासी है।* *उसने राजकुमारी से कहा कि आप तो राजा की बेटी हैं, राजमहल छोड़कर मेरी छोटी सी कुटिया में आई हैं, जबकि मैं तो पहले से ही एक फकीर हूं, फिर भी मुझे कल की चिंता सता रही थी। सिर्फ कहने से ही कोई संन्यासी नहीं होता, संन्यास को जीवन में उतारना पड़ता है। आपने मुझे वैराग्य का महत्व समझा दिया।* *शिक्षा:* *अगर हम भगवान की भक्ति करते हैं तो विश्वास भी होना चाहिए कि भगवान हर समय हमारे साथ है।* *उसको (भगवान्) हमारी चिंता हमसे ज्यादा रहती हैं।* *कभी आप बहुत परेशान हो, कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा हो।* *आप आँखे बंद कर के विश्वास के साथ पुकारे, सच मानिये थोड़ी देर में आप की समस्या का समाधान मिल जायेगा।*🙏 _हमेशा सकारात्मक सोच रखें घर में रहें सुरक्षित रहें लक्ष्मणरेखा का पालन करें 🙏🙏🙏 🌺♦🌺♦🌺♦🌺

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🌼क्षमा करना🌼 -संसार में कोई भी ऐसा व्यक्ति नहीं है, जिस में अपराध बोध न हो ,और जिसने कोई गलती न की हो । भगवान अपनी शरण में आने वाले हरेक व्यक्ति की रक्षा करता है । इसलिए भगवान के चित्र के सामने या मन में भगवान से शक्ति, और विल पावर बढ़ाने की कामना करें । -दूसरों के प्रति द्वेष, घृणा या स्वयं के प्रति ,अपराध बोध इस से हम स्वयं को ही हानि पहुंचाते हैं । -दूसरों से आहत हो कर हम स्वयं को अधिक अशांत करते हैं । -जब हम स्वयं अशांत होंगे तो अपने आस पास ,तथा विश्व में शांति स्थापन की बात कैसे कर सकते हैं ! -कुछ उंच पदों पर बैठी मनुष्यात्माएं बदले की भावना से काम करती हैं, वह आप की आवाज को दबा देगीं । आप ऐसों के प्रति भी कल्याण का भाव रखो । अपने सकारात्मक काम में लगे रहो । ऐसों को सरकार या भगवान समय आने पर सुधार देगा । वो तब तक मानसिक रूप से पीड़ित रहेगी चाहे उनकी कितनी ही आरतियाँ उतारी जा रही हों । याद रखो गॉड इज ट्रुथ । मन में निष्कपट भाव नहीं तो शांति नहीं आएगी चाहे कितने ही कोई आडम्बर रच ले । -ऐसी स्थिति से बचने के लिये आप अपने को पढ़ने में व्यस्त कर दो । -क्षमा करके भी प्राय व्यक्ति उन बातों को याद रखता है, जिस से मन अशांत रहता है । भूलना आसान नहीं है परंतु भूलने के सिवा कोई चारा नहीं है । -अन्याय करने वाले के सम्बंध में किसी से भी अप शब्द न कहें , उसके लिये अच्छा बोले । नहीं तो आप के अपशब्द उस तक पंहुचा दिये जायेंगे जिस से समस्या बढ़ जायेगी । -आप अच्छे काम करने में लगे रहो, उचित सहयोग देते रहो, ज़्यादा से ज्यादा ज्ञान अर्जित करने में लगे रहो, दोषी व्यक्ति को बदलने का यह सब से कारगार तरीका हैं। ओम शांति ➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖

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पागल बाबा वृंदावन में एक कथा प्रचलित है कि एक गरीब ब्राह्मण बांके बिहारी का परम भक्त था। एक बार उसने एक महाजन से कुछ रुपये उधार लिए। हर महीने उसे थोड़ा- थोड़ा करके वह चुकता करता था। जब अंतिम किस्त रह गई तब महाजन ने उसे अदालती नोटिस भिजवा दिया कि अभी तक उसने उधार चुकता नहीं किया है, इसलिए पूरी रकम मय व्याज वापस करे। ब्राह्मण परेशान हो गया। महाजन के पास जा कर उसने बहुत सफाई दी, अनुनय-विनय किया, लेकिन महाजन अपने दावे से टस से मस नहीं हुआ। मामला कोर्ट में पहुंचा।कोर्ट में भी ब्राह्मण ने जज से वही बात कही, मैंने सारा पैसा चुका दिया है। महाजन झूठ बोल रहा है। जज ने पूछा, कोई गवाह है जिसके सामने तुम महाजन को पैसा देते थे। कुछ सोच कर उसने कहा, हां, मेरी तरफ से गवाही बांके बिहारी देंगे। अदालत ने गवाह का पता पूछा तो ब्राह्मण ने बताया, बांके बिहारी, वल्द वासुदेव, बांके बिहारी मंदिर, वृंदावन। उक्त पते पर सम्मन जारी कर दिया गया। पुजारी ने सम्मन को मूर्ति के सामने रख कर कहा, भगवन, आप को गवाही देने कचहरी जाना है। गवाही के दिन सचमुच एक बूढ़ा आदमी जज के सामने खड़ा हो कर बता गया कि पैसे देते समय मैं साथ होता था और फलां- फलां तारीख को रकम वापस की गई थी। जज ने सेठ का बही- खाता देखा तो गवाही सच निकली। रकम दर्ज थी, नाम फर्जी डाला गया था।जज ने ब्राह्मण को निर्दोष करार दिया। लेकिन उसके मन में यह उथल पुथल मची रही कि आखिर वह गवाह था कौन। उसने ब्राह्मण से पूछा। ब्राह्मण ने बताया कि वह तो सर्वत्र रहता है, गरीबों की मदद के लिए अपने आप आता है। इस घटना ने जज को इतना उद्वेलित किया कि वह इस्तीफा देकर, घर-परिवार छोड़ कर फकीर बन गया। बहुत साल बाद वह वृंदावन लौट कर आया पागल बाबा के नाम से। आज भी वहां पागल बाबा का बनवाया हुआ बिहारी जी का एक मंदिर है।... 〰〰〰〰〰〰〰 बोल वृंदावन बिहारी लाल की जय l

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भगत के बस में है भगवान🙏 एक नगर में दो वृद्ध स्त्रियाँ बिल्कुल पास-पास रहा करती थीं। उन दोनों में बहुत घनिष्ठता थी। उन दोनोंं का ही संसार में कोई नहीं था इसलिए एक दूसरे का सदा साथ देतीं और अपने सुख-दुःख आपस में बाँट लेती थीं। एक स्त्री हिन्दू थी तथा दूसरी जैन धर्म को मानने वाली थी।💠 💠हिन्दू वृद्धा ने अपने घर में लड्डू गोपाल को विराजमान किया हुआ था। वह प्रतिदिन बड़े प्रेम से लड्डू गोपाल की सेवा करा करती थी। प्रतिदिन उनको स्नान कराना, धुले वस्त्र पहनाना, दूध व फल आदि भोग अर्पित करना उसका नियम था। वह स्त्री लड्डू गोपाल के भोजन का भी विशेष ध्यान रखती थी। सर्दी, गर्मी, बरसात हर मौसम का ध्यान उसको रहता था। वह जब भी कभी बाहर जाती लड्डू गोपाल के लिए कोई ना कोई खाने की वस्तु, नए वस्त्र खिलोने आदि अवश्य लाती थी। लड्डू गोपाल के प्रति उसके मन में आपार प्रेम और श्रद्धा का भाव था।💠 💠उधर जैन वृद्धा भी अपनी जैन परम्परा के अनुसार भगवान् के प्रति सेवा भाव में लगी रहती थी। उन दोनोंं स्त्रियों के मध्य परस्पर बहुत प्रेम भाव था। दोनोंं ही एक दूसरे के भक्ति भाव और धर्म की प्रति पूर्ण सम्मान की भावना रखती थी। जब किसी को कोई समस्या होती तो दूसरी उसका साथ देती, दोनोंं ही वृद्धाएँ स्वभाव से भी बहुत सरल और सज्जन थीं। भगवान की सेवा के* *अतिरिक्त उनका जो भी समय शेष होता था वह दोनोंं एक दूसरे के साथ ही व्यतीत करती थीं।💠 💠एक बार हिन्दू वृद्धा को एक माह के लिए तीर्थ यात्रा का अवसर प्राप्त हुआ उसने दूसरी स्त्री से भी साथ चलने का आग्रह किया किन्तु वृद्धावस्था के कारण अधिक ना चल पाने के कारण उस स्त्री ने अपनी विवशता प्रकट कर दी। हिन्दु वृद्धा ने कहा कोई बात नहीं मैं जहाँ भी जाऊँगी भगवान् से तुम्हारे लिए प्रार्थना करुँगी फिर वह बोली मैं तो एक माह के लिए चली जाऊँगी तब तक मेरे पीछे मेरे लड्डू गोपाल का ध्यान रखना। उस जैन वृद्धा ने सहर्ष ही उसका यह अनुरोध स्वीकार कर लिया। हिन्दू वृद्धा ने उस जैन वृद्धा को लड्डू गोपाल की सेवा के सभी नियम व आवश्यकताएँ बता दीं। उस जैन वृद्धा ने सहर्ष सब कुछ स्वीकार कर लिया।💠 💠कुछ दिन बाद वह हिन्दू वृद्धा तीर्थ यात्रा के लिए निकल गई। उसके जाने के बाद लड्डू गोपाल की सेवा का कार्य जैन वृद्धा ने अपने हाथ में लिया। वह बहुत उत्त्साहित थी कि उसको लड्डू गोपाल की सेवा का अवसर प्राप्त हुआ। उस दिन उसने बड़े प्रेम से लड्डू गोपाल की सेवा की। भोजन कराने से लेकर रात्रि में उनके शयन तक के सभी कार्य पूर्ण श्रद्धा के साथ वैसे ही पूर्ण किए जैसे उसको बताए गए थे। लड्डू गोपाल के शयन का प्रबन्ध करके वह भी अपने घर शयन के लिए चली गई।💠 💠अगले दिन प्रातः जब वह वृद्धा लड्डू गोपाल की सेवा के लिए हिन्दू स्त्री के घर पहुँची तो उसने सबसे पहले लड्डू गोपाल को स्नान कराने की तैयारी की। नियम के अनुरूप जब वह लड्डू गोपाल को स्नान कराने लगी तो उसने देखा की लड्डू गोपाल के पाँव पीछे की और मुड़े हुए हैं। उसने पहले कभी लड्डू गोपाल के पाँव नहीं देखे थे, जब भी उनको देखा वस्त्रों में ही देखा था। वह नहीं जानती थी कि लड्डू गोपाल के पाँव हैं ही ऐसे, घुटनों के बल बैठे हुए। लड्डू गोपाल के पाँव पीछे की ओर देख कर वह सोचने लगी अरे मेरे लड्डू गोपाल को यह क्या हो गया इसके तो पैर मुड़ गए है। उसने उस हिन्दू वृद्धा से सुन रखा था की लड्डू गोपाल जीवंत होते हैं। उसने मन में विचार किया कि मैं इनके पैरो की मालिश करुँगी हो सकता है इनके पाँव ठीक हो जायें। बस फिर क्या था भक्ति भाव में डूबी उस भोली भाली वृद्धा ने लड्डू गोपाल के पैरों की मालिश आरम्भ कर दी। उसके बाद वह नियम से प्रतिदिन पांच बार उनके पैरों की मालिश करने लगी। उस भोली वृद्धा की भक्ति और प्रेम देख कर ठाकुर जी का हृदय द्रवित हो उठा। भक्त वत्सल भगवान् अपनी करुणावश अपना प्रेम उस वृद्धा पर उड़ेल दिया।💠 💠एक दिन प्रातः उस जैन वृद्धा ने देखा की लड्डू गोपाल के पाँव ठीक हो गए हैं और वह सीधे खड़े हो गए हैं, यह देख कर वह बहुत प्रसन्न हुई और दूसरी स्त्री के आने की प्रतीक्षा करने लगी।💠 💠कुछ दिन पश्चात् दूसरी स्त्री वापस लौटी तो उसने घर आकर सबसे पहले अपने लड्डू गोपाल के दर्शन किये किन्तु जैसे ही वह लड्डू गोपाल के सम्मुख पहुँची तो देखा कि वह तो अपने पैरों पर सीधे खड़े हैं। यह देखकर वह अचंभित रह गई।💠 💠वह तुरन्त उस दूसरी स्त्री के पास गई और उसको सारी बात बताई और पूछा कि मेरे लड्डू गोपाल कहां गए?* 💠यह सुनकर उस जैन स्त्री ने सारी बात बता दी।💠 💠उसकी बात सुनकर वह वृद्ध स्त्री सन्न रह गई और उसको लेकर अपने घर गई। वहाँ जाकर उसने देखा तो लड्डू गोपाल मुस्करा रहे थे।💠 💠वह लड्डू गोपाल के चरणों में गिर पड़ी और बोली - हे गोपाल! आपकी लीला निराली है। मैंने इतने वर्षो तक आपकी सेवा की किन्तु आपको नहीं पहचान सकी तो वह उस जैन वृद्धा से बोली कि, तू धन्य है! तुझको नहीं मालूम कि हमारे लड्डू गोपाल के पाँव तो ऐसे ही हैं, पीछे की ओर किन्तु तेरी भक्ति और प्रेम ने तो लड्डू गोपाल के पाँव भी सीधे कर दिये।💠 💠उस दिन के बाद उन दोनोंं स्त्रियों के मध्य प्रेम भाव और अधिक बढ़ गया। दोनोंं मिलकर लड्डू गोपाल की सेवा करने लगीं। वह दोनोंं स्त्रियां जब तक जीवित रहीं तब तक लड्डू गोपाल की सेवा करती रहीं।💠 💠"जय जय श्री राधे कृष्ण जी "💠

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💠 बड़ी सुन्दर सत्य कथा 💠 किसी भक्त के श्रीमुख से..... एक बार मैं ट्रेन से आ रहा था, मेरी साथ वाली सीट पे एक वृद्ध औरत बैठी थी जो लगातार रो रही थी... मैंने बार-बार पूछा मईया क्या हुआ, मईया क्या हुआ? बड़ी मिन्नतों के बाद मईया ने एक लिफाफा मेरे हाथ मे रख दिया। मैंने लिफाफा खोल कर देखा उसमे चार पेड़े, 200 रूपये और इत्र से सनी एक कपड़े की कातर थी। मैंने मईया से पूछा, मईया ये क्या है? मईया बोली मैं वृंदावन बिहारी जी के मंदिर गई थी, मैंने गुल्लक में 200 रूपये डाले और दर्शन के लिऐ आगे बिहारी जी के पास चली गई। वहाँ गोस्वामी जी ने मेरे हाथ मे एक पेड़ा रख दिया, मेने गोस्वामी जी को कहा मुझे दो पेड़े दे दो पर गोस्वामी जी ने मना कर दिया। मैंने उससे गुस्से मे कहा मैंने 200 रूपये डाले है मुझे पेड़े भी दो चाहिए पर गोस्वामी जी नहीं माने। मैंने गुस्से मे वो एक पेड़ा भी उन्हे वापिस दे दिया और बिहारी जी को कोसते हुए बाहर आ कर बैठ गई। मैं जैसे ही बाहर आई तभी एक बालक मेरे पास आया और बोला मईया मेरा प्रसाद पकड़ लो मुझे जूते पहनने है। वो मुझे प्रसाद पकड़ा कर खुद जूते पहनने लगा और फिर हाथ धोने चला गया। लेकिन फिर वो वापस नही आया। मैं पागलो की तरह उसका इंतजार करती रही। काफी देर के बाद मैंने उस लिफाफे को खोल कर देखा। उसमें 200 रूपये, चार पेड़े और एक कागज़ पर लिख रखा था ( मईया अपने लाला से नाराज ना हुआ करो ) ये ही वो लिफाफा है! **🌷 भाव बिना बाज़ार में वस्तु मिले न मोल, तो भाव बिना "हरी" कैसे मिले, जो है अनमोल!! 🌷**देने के बदले लेना तो एक बीमारी है और जो कुछ देकर भी कुछ ना ले वही तो बांके बिहारी हैं🌷 प्रेम से बोलो राधे राधे. 🙏🙏🌹

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Rajendra Jain Jan 19, 2021

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